देश
5 साल नहीं, अब सिर्फ 1 साल में मिलेगी ग्रेच्युटी, सरकार ने लेबर नियमों में किया बदलाव
मुंबई, एजेंसी। सरकार ने श्रम कानूनों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, जिसके लागू होने के बाद सिर्फ एक साल नौकरी करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। फिलहाल यह सुविधा केवल उन लोगों को मिलती है जो कम से कम 5 साल तक एक ही कंपनी में लगातार काम करते हैं लेकिन अब नए लेबर कानूनों के तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए यह समय घटाकर सिर्फ 1 साल कर दिया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने पुष्टि की कि नया प्रावधान जल्द लागू किया जाएगा और इससे प्राइवेट सेक्टर के कॉन्ट्रैक्ट व फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
क्या होती है ग्रैच्युटी?
ग्रेच्युटी कर्मचारियों को कंपनी में लंबे समय तक सेवा देने पर एक तरह से इनाम के रूप में दी जाती है। यह कानून 1972 से लागू है लेकिन इसका कैलकुलेशन फिलहाल 5 साल की सर्विस पर आधारित है। सरकार ने संकेत दिया है कि एक साल में ग्रेच्युटी देने की प्रक्रिया और नया तरीका भी जल्द बताया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि कानून में पहले से ही यह प्रावधान मौजूद है कि यदि किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान एक साल के भीतर मृत्यु हो जाती है या वह दिव्यांग हो जाता है, तो उसके परिवार को ग्रेच्युटी मिलती है।
ग्रेच्युटी उन्हीं संस्थानों में दी जाती है, जहां कम से कम 10 कर्मचारी काम करते हैं। सर्विस अवधि में ट्रेनिंग टाइम शामिल नहीं किया जाता। नए नियम लागू होने के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद भी वे इसके हकदार हो जाएंगे। हालांकि एक साल के आधार पर ग्रेच्युटी कैलकुलेशन का फॉर्मूला कैसा होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन अनुमान है कि मौजूदा फॉर्मूले में जरूरी बदलाव कर इसे लागू किया जाएगा।
कितनी मिलेगी ग्रैच्युटी?
वर्तमान फॉर्मूले के अनुसार ग्रेच्युटी अंतिम मासिक वेतन (बेसिक + डीए) को 15 से गुणा करने के बाद कुल सर्विस अवधि से गुणा करके और 26 से भाग देकर निकाली जाती है। जैसे किसी कर्मचारी की आखिरी सैलरी 1 लाख रुपये और सर्विस 5 साल है, तो उसकी ग्रेच्युटी करीब 2.88 लाख रुपये बनती है।
यद्यपि कानून में 5 साल की शर्त लिखी है, लेकिन व्यवहार में 4 साल 240 दिन (6 दिन काम वाली कंपनियों में) या 4 साल 190 दिन (5 दिन काम वाली कंपनियों में) काम करने वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी का अधिकार मिल जाता है। इससे कम सर्विस अवधि पर लाभ नहीं मिलता।
इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 में पहले ही तय हो चुका है कि फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी यदि एक साल या उससे अधिक काम करते हैं, तो उन्हें अनुपातिक ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए। अब सरकार इसी प्रावधान को नए श्रम कानून में पूरी तरह लागू करने जा रही है। उम्मीद है कि यह बदलाव जल्द सामने आएगा और इससे लाखों नौकरीपेशा लोगों को मजबूत आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
देश
Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
देश
Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
देश
स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।
-
Uncategorized9 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा3 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा3 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा3 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
