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वन नेशन वन इलेक्शन प्रस्ताव कैबिनेट में मंजूर:नवंबर-दिसंबर में बिल आएगा; विधानसभा-लोकसभा चुनाव साथ होंगे, अगले 100 दिन में निकाय चुनाव
नई दिल्ली ,एजेंसी। देश में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव (वन नेशन वन इलेक्शन) करवाने के प्रस्ताव को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। बिल शीतकालीन सत्र यानी नवंबर-दिसंबर में संसद में पेश किया जाएगा।
कैबिनेट मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ‘पहले फेज में विधानसभा और लोकसभा चुनाव साथ होंगे। इसके बाद 100 दिन के भीतर दूसरे फेज में निकाय चुनाव साथ कराए जाएं।
17 सितंबर को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार इसी कार्यकाल में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू करेगी। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने कहा था कि बार-बार चुनाव देश की प्रगति में बाधा पैदा कर रहे हैं।
वन नेशन वन इलेक्शन पर विचार के लिए बनाई गई पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रिपोर्ट 18 हजार 626 पन्नों की है।
पैनल 2 सितंबर 2023 को बनाया गया था। यह रिपोर्ट स्टेकहोल्डर्स-एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 191 दिन की रिसर्च का नतीजा है। कमेटी ने सभी विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 तक करने का सुझाव दिया है।

यह तस्वीर मार्च 2024 की है। रिपोर्ट में 2029 में एकसाथ चुनाव का टारगेट रखा गया है। उसके आधार पर विधानसभाओं और नगरीय निकाय के चुनाव का मॉडल दिया गया है।
कोविंद पैनल के 5 सुझाव…
- सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक बढ़ाया जाए।
- हंग असेंबली (किसी को बहुमत नहीं), नो कॉन्फिडेंस मोशन होने पर बाकी 5 साल के कार्यकाल के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं।
- पहले फेज में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एकसाथ कराए जा सकते हैं, उसके बाद दूसरे फेज में 100 दिनों के भीतर लोकल बॉडी के इलेक्शन कराए जा सकते हैं।
- चुनाव आयोग लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से सिंगल वोटर लिस्ट और वोटर आई कार्ड तैयार करेगा।
- कोविंद पैनल ने एकसाथ चुनाव कराने के लिए उपकरणों, जनशक्ति और सुरक्षा बलों की एडवांस प्लानिंग की सिफारिश की है।
क्या बिल को कानून बनाने में कोई अड़चन आएगी
- कोविंद कमेटी ने 18 संवैधानिक बदलावों का सुझाव दिया है, इनमें से ज्यादातर में राज्यों की विधानसभाओं के सहमति की जरूरत नहीं है।
- कुछ संवैधानिक बदलावों के लिए बिलों को संसद में पास कराना जरूरी होगा।
- सिंगल इलेक्टोरल रोल और सिंगल वोटर आईडी कार्ड के लिए आधे से ज्यादा राज्यों की मंजूरी जरूरी होगी।
- संभव है कि कोविंद कमेटी की रिपोर्ट पर लॉ कमीशन भी अपनी रिपोर्ट पेश करे।
- सूत्रों का कहना है कि लॉ कमीशन 2029 में लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकायों और पंचायत चुनाव एकसाथ कराने का सुझाव दे।
- इसके अलावा लॉ कमीशन गठबंधन सरकार और हंग असेंबली जैसी स्थिति आने पर नियम की मांग करे।
अभी ऐसी है वन नेशन-वन इलेक्शन की संभावना एक देश-एक चुनाव लागू करने के लिए कई राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल घटेगा। जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के आखिर में हुए हैं, उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विधि आयोग के प्रस्ताव पर सभी दल सहमत हुए तो यह 2029 से ही लागू होगा। साथ ही इसके लिए दिसंबर 2026 तक 25 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराने होंगे।
पहला चरणः 6 राज्य, वोटिंगः नवंबर 2025 में
- बिहारः मौजूदा कार्यकाल पूरा होगा। बाद का साढ़े तीन साल ही रहेगा।
- असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी मौजूदा कार्यकाल 3 साल 7 महीने घटेगा। उसके बाद का कार्यकाल भी साढ़े 3 साल होगा।
दूसरा चरणः 11 राज्य, वोटिंगः दिसंबर 2026 में
- उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंडः मौजूदा कार्यकाल 3 से 5 महीने घटेगा। उसके बाद सवा दो साल रहेगा।
- गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल, मेघालय, नगालैंड, त्रिपुराः मौजूदा कार्यकाल 13 से 17 माह घटेगा। बाद का सवा दो साल रहेगा।
इन दो चरणों के बाद देश की सभी विधानसभाओं का कार्यकाल जून 2029 में समाप्त होगा। सूत्रों के अनुसार, कोविंद कमेटी विधि आयोग से एक और प्रस्ताव मांगेगी, जिसमें स्थानीय निकायों के चुनावों को भी शामिल करने की बात कही जाएगी।
वन नेशन वन इलेक्शन पर विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा… कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: ‘कांग्रेस पार्टी ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव का विरोध करती है। हमारा मानना है लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए जब भी जरूरत हो चुनाव होने चाहिए।’
केरल CM पी विजयन: ‘संघ परिवार भारत की चुनावी राजनीति को राष्ट्रपति प्रणाली की ओर ले जाने का गुप्त प्रयास कर रहा है। “एक राष्ट्र, एक चुनाव” का नारा भारतीय संसदीय लोकतंत्र की विविधतापूर्ण प्रकृति को खत्म करने के लिए गढ़ा गया है।’
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी: ‘आप अपनी सुविधा के आधार पर काम नहीं कर सकते। संविधान संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर काम करेगा। यह हमेशा से भाजपा और RSS की विचारधारा रही है। वे नहीं चाहते कि क्षेत्रीय दल अस्तित्व में रहें। हमने इसका विरोध किया है और भी करेंगे।’
बसपा प्रमुख मायावती: ’एक देश, एक चुनाव’ की व्यवस्था के तहत देश में लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय का चुनाव एकसाथ कराने वाले प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट से आज दी गई मंजूरी का हम समर्थन करते हैं, लेकिन इसका उद्देश्य देश और जनहित में होना जरूरी है।’
AAP सांसद संदीप पाठक: ‘ये बीजेपी का एक और नया जुमला है क्योंकि कुछ समय पहले 4 राज्यों के चुनाव होने थे लेकिन इन्होंने सिर्फ दो राज्यों (हरियाणा और जम्मू-कश्मीर) का चुनाव कराया, झारखंड और महाराष्ट्र को छोड़ दिया। अगर ढाई साल में कोई सरकार गिर जाए तो क्या ढाई साल में राष्ट्रपति शासन लगेगा?’
RJD सांसद मनोज कुमार झा: ‘इस देश में वन नेशन वन इलेक्शन था, मोदी जी कोई नायाब हीरा नहीं ला रहे हैं। 1962 के बाद वह क्यों हटा क्योंकि एकल पार्टी का प्रभुत्व खत्म होने लगा। मैं पहले इसका मसौदा देखूंगा। मान लीजिए- चुनाव होते हैं, उत्तर प्रदेश में बनी हुई सरकार गिर जाती है तो फिर क्या होगा? क्या आप राष्ट्रपति शासन लगाएंगे?’
भाजपा और सहयोगी दलों ने क्या कहा…
गृह मंत्री अमित शाह: ‘भारत ऐतिहासिक चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रहा है। यह स्वच्छ और वित्तीय रूप से कुशल चुनावों के माध्यम से हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने और संसाधनों के अधिक उत्पादक आवंटन के माध्यम से आर्थिक विकास में तेजी लाने की मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।’
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव: ‘1961 से 1957 तक इलेक्शन एकसाथ कराए जाते थे। 1999 में लॉ कमीशन ने लोकसभा और विधानसभा इलेक्शन अलग-अलग करने की सिफारिश की थी। हमारी कंस्टल्टेशन प्रॉसेस के दौरान देशभर से 80 फीसदी लोगों ने वन नेशन वन इलेक्शन को पॉजिटिव रेस्पॉन्स दिया है। खासकर युवाओं ने सपोर्ट किया है।’
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन: ‘ये बदल रहे भारत की तस्वीर और बेहतर बनेगी। चुनाव के खर्च का जो भीमकाय आकार है उसको काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में लोग कतार में लगेंगे…समय पर सुरक्षाबलों की तैनाती होगी और बेहतर तरीके से होगी।’
कमेटी में 8 सदस्य, सितंबर 2023 में बनी थी पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अगुआई में 8 मेंबर की कमेटी पिछले साल 2 सितंबर को बनी थी। 23 सितंबर 2023 को दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी की पहली बैठक हुई थी। इसमें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत 8 मेंबर हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कमेटी के स्पेशल मेंबर बनाए गए हैं।
देश
TMC बोली- ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष बनाना अवैध:स्पीकर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे, अभिषेक बनर्जी पार्टी महासचिव बने रहेंगे
कोलकाता, एजेंसी। TMC में टूट के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पहली बार सीनियर नेताओं के साथ मीटिंग की। पार्टी ने विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के फैसले को अवैध बताया है।
TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि स्पीकर के फैसले के खिलाफ सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगें। बागी विधायकों को पहले अपने-अपने क्षेत्रों की जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए।
ममता बनर्जी के घर हुए मीटिंग में 8 विधायक और 6 सांसद पहुंचे। ममता के भतीजे अभीषेक बनर्जी पार्टी के महासचिव बने रहेंगे। वहीं, ममता बनर्जी अध्यक्ष बनी रहेंगी।
3 जून को TMC के 58 बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना था। विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपा था। स्पीकर ने उन्हें नेता विपक्ष के रूप में मान्यता दे दी।

ऋतब्रत बनर्जी बोले- आगे बहुत कुछ हो सकता है
इधर, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि TMC के 20 से 23 सांसद बागी खेमे और BJP के संपर्क में हैं। हालांकि, इसपर ऋतब्रत बनर्जी ने शुक्रवार को कहा, “मैं पिछले सात दिनों से किसी सांसद के संपर्क में नहीं हूं। इसलिए यह नहीं कह सकता कि सांसद क्या करेंगे।
3 जून को 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता चुना था
3 जून को 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। ये विधायक अभिषेक बनर्जी से नाराज हैं। पार्टी में विवाद उस समय शुरू हुआ, जब नेता विपक्ष चुनने के प्रस्ताव पर फर्जी साइन का आरोप लगाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था।
TMC के विधानसभा में कुल 80 विधायक है। वहीं, संसद में कुल 41 सांसद हैं। इनमें 28 लोकसभा और 13 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं।
ममता ने पार्टी कमेटियां भंग कर दी थीं
पार्टी के भीतर बगावत के बीच ममता बनर्जी ने 3 जून को ही राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया था।
फर्जी साइन की शिकायत करने पर निकाले गए थे 2 विधायक
ममता बनर्जी ने TMC से 2 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया था। दोनों ने स्पीकर से शिकायत की थी कि पार्टी ने शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव में उनके उनके फर्जी साइन किए थे। साहा और बनर्जी का आरोप है कि यह शिकायत करने पर ही दोनों TMC से निकाले गए।
बीते 10 साल में देश के 4 बड़े राज्यों में पांच दलों में टूट हुई
- महाराष्ट में शिवसेना और NCP: 2022 में एकनाथ शिंदे ने बगावत की। चुनाव आयोग से ‘शिवसेना’ नाम और ‘तीर-कमान’ पाकर वे तब मुख्यमंत्री भी बने। लेकिन आज उप मुख्यमंत्री हैं। जबकि उद्धव ठाकरे विपक्ष में हैं। इसी तरह, 2023 में अजीत पवार ने चाचा शरद पवार से बगावत की। वे असली ‘एनसीपी’ और ‘घड़ी’ चिह्न के साथ उप मुख्यमंत्री रहे। अजीत अब नहीं हैं।
- उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी: 2016-17 में ‘चाचा-भतीजा’ की जंग में अखिलेश यादव ने पार्टी और ‘साइकिल’ सिंबल पर पूर्ण नियंत्रण पाया। शिवपाल यादव अलग पार्टी बनाने के बाद अब वापस सपा में लौट आए हैं।
- बिहार में एलजेपी: 2021 में रामविलास पासवान के निधन बाद चाचा पशुपति पारस ने चिराग को हटाया। चिराग ने जमीन पर ताकत दिखाई, आज मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं, पारस गुट हाशिए पर है।
- तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक: 2017 में जयललिता के बाद ई. पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम भिड़े। पलानीस्वामी कानूनी जंग जीतकर पार्टी के निर्विवाद प्रमुख बने, जबकि ओपीएस निष्कासित हैं।
देश
तमिलनाडु में भाजपा छोड़ते ही अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाई:अगला चुनाव लड़ने का ऐलान, कहा- मतभेद थे, आलाकमान ने चुनाव तक रुकने को कहा था
चेन्नई, एजेंसी। तमिलनाडु BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने शुक्रवार को नई पार्टी बनाने का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो मैसेज में अन्नामलाई ने कहा कि आज हम एक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। हमारी राजनीतिक पार्टी तमिलनाडु में 2031 में अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
मेरे लिए यह तय करना बहुत मुश्किल था कि मैं बीजेपी का सदस्य रहूं या तमिल लोगों से जुड़ा रहूं। मैंने 4 दिसंबर 2025 को पार्टी को बताया कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं। पार्टी ने मुझसे कहा कि पहले चुनाव हो जाने दें, फिर जाएं।

अन्नामलाई ने 2 जून को भाजपा से इस्तीफा दिया था। लेटर शुक्रवार को सामने आया। उन्होंने इस्तीफे की वजह बताते हुए लिखा कि पिछले 18 महीनों से आलाकमान के साथ उनके मतभेद चल रहे हैं। अब उनके विचार एक जैसे नहीं रहे। इधर, तमिलनाडु बीजेपी के उपाध्यक्ष के नागराजन ने भी पार्टी से पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
अन्नामलाई कर्नाटक कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। नौकरी छोड़कर 2020 में भाजपा से जुड़े। पार्टी ने पहले उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष और फिर अध्यक्ष बनाया। अन्नामलाई के रहते हुए बीजेपी ने 2021 और 2026 विधानसभा चुनाव लड़ा। दोनों ही चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 2% से ज्यादा नहीं बढ़ सका।

के अन्नामलाई ने 2 जून को इस्तीफा देने के बाद दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
1. मोदी से प्रभावित होकर भाजपा में आया था
पीएम मोदी जी के नेतृत्व से प्रेरित होकर मैं 6 साल पहले भाजपा में शामिल हुआ था। मेरा मकसद तमिलनाडु में बदलाव लाना और राज्य में राजनीति के तौर-तरीकों को बेहतर बनाना था।
2. बदलाव की लहरें उठीं, लेकिन टिकी नहीं
मैं बीजेपी नेतृत्व का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझ जैसे युवा और अनुभवहीन व्यक्ति पर भरोसा करके बड़ी जिम्मेदारियां और नेतृत्व के पद सौंपे। राज्य की जनता कई दशकों से चली आ रही आम राजनीतिक चर्चाओं से ऊब चुकी थी और बदलाव चाहती थी। पिछले दशक में कई बार बदलाव की लहरें उठीं, लेकिन वे टिक नहीं पाईं।
3. भाजपा की टॉप लीडरशिप के साथ मतभेद
पिछले 18 महीनों में टॉप लीडरशिप के साथ कुछ मतभेद रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति को आगे बढ़ाने के तरीके को लेकर उनके और पार्टी नेतृत्व के विचार अब मेल नहीं खाते।
भाजपा को कितना नुकसान, 3 संभावनाएं…
- राज्य में युवाओं की पकड़ कमजोर होना: अन्नामलाई ने खुद को युवा, आक्रामक और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में स्थापित किया। सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है। युवाओं में भाजपा की पकड़ कमजोर हो सकती है।
- तमिलनाडु में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा खोना: पिछले 4-5 साल में अन्नामलाई ही राज्य में भाजपा का मुख्य चेहरा रहे। उनके बाद वैसी लोकप्रियता वाला दूसरा नेता फिलहाल नहीं दिख रहा है।
- DMK विरोधी वोटों का बिखराव: अन्नामलाई DMK के सबसे मुखर आलोचक रहे हैं। उनके हटने से विपक्षी राजनीति में भाजपा की धार कुछ कमजोर पड़ सकती है।
लेकिन नुकसान सीमित भी रह सकता है, 2 वजह…
- भाजपा का वोट पूरी तरह अन्नामलाई पर निर्भर नहीं: तमिलनाडु में भाजपा का एक हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आधार पर वोट करता है।
- NDA गठबंधन सहारा दे सकता है: AIADMK जैसे सहयोगी दल साथ रहे तो भाजपा का संगठनात्मक नुकसान कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।
अन्नामलाई ने 2020 में भाजपा जॉइन की, 6 साल बाद इस्तीफा
अन्नामलाई ने 25 अगस्त 2020 को BJP जॉइन की थी। उस समय वे कर्नाटक कैडर के पूर्व IPS अधिकारी थे। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद तमिलनाडु BJP का उपाध्यक्ष बनाया गया था।
2021 को उन्हें तमिलनाडु BJP का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अप्रैल 2025 तक इस पद पर रहे। तमिलनाडु में BJP के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया।
एन मन्न, एन मक्कल (मेरी धरती, मेरे लोग) यात्रा निकाली, जिसके जरिए राज्यभर में जनसंपर्क किया। 2021 विधानसभा चुनाव में अरवाकुरिची सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
DMK सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लगातार उठाया। 2024 लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
तमिलनाडु में BJP को सिर्फ 1 सीट मिली
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में BJP सिर्फ 1 सीट जीत पाई, जबकि एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीटें मिलीं। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है।
देश
मोदी बोले- जनता कांग्रेस से नाराज, इसीलिए कर्नाटक CM बदला:जिन्होंने देश को दूसरों पर निर्भर रखा, वो आत्मनिर्भर भारत का मजाक उड़ा रहे
सूरत, एजेंसी। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस कांग्रेस 12 सालों से अराजकता और अनिश्चितता फैला रही है। कर्नाटक की जनता भी कांग्रेस की नकारात्मकता के नाराज है। इसलिए कर्नाटक में सीएम बदलना पड़ा।
मोदी बोले-
दूसरों पर निर्भर रहने वाले देश विकसित नहीं होते है। आज देश में कुछ निराशावादी लोग हैं, जिन्होंने देश को दूसरों पर निर्भर रखा। आज वो आत्मनिर्भर भारत का मजाक उड़ा रहे हैं।
पीएम ने शुक्रवार को गुजरात के सूरत में ये बातें कही। उन्होंने वहां से रू.18 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया।

मोदी ने सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी 18,800 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

पीएम मोदी के स्पीच की बड़ी बातें…
- बीते सालों में दुनिया ने कई बड़ी महामारियों का सामना किया है। पहले कोरोना और फिर अब दुनिया में तेल, पेट्रोल और गैस की सप्लाई में दिक्कत आ रही है। मुझे गर्व है कि भारत आज 140 करोड़ देशवासियों की मदद से इस चुनौती का सामना कर रहा है।
- 12 साल पहले देश में सोलर एनर्जी का प्रोर्डक्शन न के बराबर था, लेकिन आज हम दुनिया के टॉप 5 देशों में से एक हैं। हमने इथेनॉल ब्लेंडिंग की। गैस की पाइपलाइन बनाई, ताकि देश में एनर्जी की कोई भी समस्या सामने नहीं आए।
- गुजरात निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के लिए सभी का अभिवादन। भाजपा की विजय की यात्रा चलती ही जा रही है। दुनिया के लोकतांत्रिक समाज में कम ही देखने को मिलता है कि किसी पार्टी को इतने समय तक जनता का समर्थन मिलता है।
- हमारी सरकार देश के विकास के लिए काम कर रही है। इसलिए देश की जनता भाजपा को बार-बार वोट दे रही है। पिछले दिनों जब मैं 5 देशों की यात्रा पर था, वहा भी हर कोई बंगाल-बंगाल कर रहा था।
मोदी ने L&T कॉप्लेक्स में टैंक और ड्रोन देखे
पीएम ने सूरत में लार्सन एंड टुब्रो के आर्म्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स भी पहुंचे। उन्होंने यहां मेड इन इंडिया टैंक, ड्रोन के सामने खड़े होकर उसकी जानकारी ली।
L&T कॉप्लेक्स भारत का अत्याधुनिक रक्षा निर्माण केंद्र है। यहां सेना के लिए बख्तरबंद वाहन, तोप से जुड़े सिस्टम और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म बनाए, असेंबल (जोड़े) और परीक्षण किए जाते हैं।

पीएम मोदी ने लार्सन एंड टुब्रो के आर्म्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स विजिट किया।

लार्सन एंड टुब्रो के अधिकारियों ने पीएम मोदी को कंपनी की वर्किंग समझाई।

पीएम मोदी ने लार्सन एंड टुब्रो के बनाए और असेंबल किए उपकरण देखे।

L&T सेना के लिए बख्तरबंद वाहन, तोप से जुड़े सिस्टम और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म बनाए, असेंबल (जोड़े) और टेस्टिंग करती है।

गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी कई अधिकारियों-कर्मचारियों और आम लोगों के साथ 5.5 किलोमीटर साइकिल चलाकर सूरत के इंडोर स्टेडियम पहुंचे।

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के दो पैकेजों का भी उद्घाटन किया गया।
पीएम ने दमन में रू.3000 के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया

मोदी ने दमन में नमो मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया।
सूरत में कार्यक्रम पूरा करने के बाद, प्रधानमंत्री दमन के लिए रवाना हो गए हैं, जहां उन्होंने 3000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
दमन एयरपोर्ट का भी उद्घाटन किया जाएगा। इसके साथ ही दमन से मोदी लक्षद्वीप के लिए 885 करोड़ रुपए की बंदरगाह और टूरिज्म परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे।
सूरत में पीएम हाईवे के अलावा बड़े और छोटे पुल, रेलवे पुल, फ्लाईओवर और 70 अंडरपास का उद्घाटन किया। 4,732 करोड़ रुपए वाली NHAI की चार परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।
इनमें NH-56 के धामासिया से बिटाडा तक चार लेन निर्माण (पैकेज-4), नसरपोर से मलोथा तक चार लेन निर्माण (पैकेज-6), रिलायंस के पास छह लेन वाहन अंडरपास और NH-53 के सूरत-हजीरा सेक्शन पर कावास में VUP-कम-फ्लाईओवर शामिल हैं।

पीएम मोदी आज दमन एयरपोर्ट का भी उद्घाटन करेंगे। इस एयरपोर्ट का लाभ गुजरात के दक्षिणी हिस्सों, खासकर वापी शहर को भी मिलेगा।
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