देश
केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है
नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा।
जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मिलने वाले किसी भी संरक्षण का दावा नहीं कर सकता है।

यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ लगाई गई चिंथदा की याचिका पर सुनाया गया। धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने चिंथदा आनंद ने याचिका लगाई थी कि उन्हें अक्काला रामिरेड्डी समेत कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका- आरक्षण का लाभ लेने धर्म बदलना, संविधान से धोखा
1985 के सूसाई बनाम भारत सरकार से जुड़े एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है, तो उसे एससी दर्जा प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय प्रमाण और समुदाय की स्वीकृति की जरूरत होगी। केवल लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के साथ धोखा करार दिया।
चिंथदा का आरोप था- उसे जातिसूचक गालियां दी गईं
यह मामला विशाखापट्टनम जिले के अनाकापल्ली का है, जहां मूल रूप से एससी (माला समुदाय) के चिंथदा ने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। कुछ दिन बाद गुंटूर जिले के कोथापलेम में रहने वाले अक्कला रामी रेड्डी नाम के शख्स पर चिंथदा ने आरोप लगाया कि अक्कला ने उसे जातिसूचक गालियां दी हैं।
चिंथदा ने SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद चिंथदा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
केस की जांच के दौरान पता चला था कि ईसाई धर्म अपनाने के कारण चिंथदा का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया था। चिंथदा एक चर्च में करीब 10 साल से पादरी के तौर पर काम कर रहा है।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने क्या कहा था…
- जब पीड़ित ने खुद कहा कि वह पिछले 10 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, तो पुलिस को आरोपियों पर एससी/एसटी अधिनियम नहीं लगाना चाहिए था।
- एससी/एसटी अधिनियम का उद्देश्य उन समूहों (अनुसूचित जातियों) से जुड़े लोगों की रक्षा करना है, न कि उन लोगों की जो दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो गए हैं।
- केवल इस आधार पर एससी/एसटी अधिनियम लागू करना कि उसका जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया गया है, वैध आधार नहीं हो सकता।
संविधान में क्या प्रावधान है
संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति समुदायों को एससी का दर्जा प्राप्त है। अगर कोई ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना लेता है तो उनका यह दर्जा समाप्त हो जाता है।
आंध्र प्रदेश विधानसभा ने भी मार्च 2023 में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि ईसाई धर्म अपना चुके दलितों को भी एससी दर्जा प्रदान किया जाए।
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सेंसेक्स 1372 अंक चढ़कर 74,068 पर बंद:निफ्टी में भी 400 अंकों की तेजी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
मुंबई,एजेंसी। शेयर बाजार में आज यानी 24 मार्च को तेजी रही। सेंसेक्स 1372 अंक (1.89%) की तेजी के साथ 74,068 पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 400 अंक (1.78%) की तेजी है, ये 22,912 पर पहुंच गया। आज बैंकिंग और ऑटो शेयर्स में सबसे ज्यादा खरीदारी रही।
बाजार में यह उछाल 1 बजे के आस-पास अल अरबिया की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए सहमत हो गए हैं। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

घरेलू शेयर बाजार में तेजी की एक वजह ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेत भी रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को 5 दिन के लिए अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है, जिसका असर भारतीय बाजार पर दिखा।

आज सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 29 में तेजी और सिर्फ एक शेयर में गिरावट रही।
मीडिया, ऑटो और प्राइवेट बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी
| इंडेक्स | करंट लेवल | % बदलाव |
| निफ्टी मीडिया | 1,297 | 3.45 |
| निफ्टी प्राइवेट बैंक | 25,046 | 2.49 |
| निफ्टी ऑटो | 24,515 | 2.43 |
| निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज | 26,742 | 2.10 |
| निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स | 33,582 | 1.93 |
| निफ्टी मेटल | 11,059 | 1.80 |
| निफ्टी IT | 29,649 | 1.72 |
| निफ्टी रियल्टी | 674 | 1.59 |
| निफ्टी PSU बैंक (सरकारी बैंक) | 8,358 | 1.53 |
| निफ्टी ऑयल एंड गैस | 10,879 | 1.31 |
| निफ्टी FMCG | 46,408 | 1.25 |
| निफ्टी हेल्थकेयर | 14,230 | 1.07 |
| निफ्टी फार्मा | 22,240 | 0.85 |
अब ग्लोबल मार्केट, क्रूड ऑयल और रुपए का हाल जानें…
1. एशियाई बाजार में भी तेजी
- जापान का निक्केई इंडेक्स 1.43% चढ़कर 52,252 के स्तर पर बंद हुआ।
- साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2.74% चढ़कर 5,553 पर बंद हुआ।
- हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 2.79% चढ़कर 25,063 पर पहुंच गया है।
- चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 1.78% चढ़कर 3,881 पर बंद हुआ।
2. अमेरिकी बाजार में 23 मार्च को तेजी रही
- डाउ जोन्स 631 अंक (1.38%) चढ़कर 46,208 के स्तर पर बंद हुआ।
- टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.38% चढ़कर 21,946 पर बंद हुआ।
- S&P 500 इंडेक्स 74 अंक (1.15%) चढ़कर 6,581 पर बंद हुआ।
3. क्रूड की कीमतें 4% बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल हुईं
अमेरिका और इजराइल की ईरान के साथ जारी जंग में 5 दिन के पॉजे के बीच आज कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड आज 4% बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। वहीं इंडियन बास्केट की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई हैं।
कल जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर किसी भी सैन्य हमले को फिलहाल पांच दिनों के लिए टालने की बात कही थी तो कच्चा तेल 113 डॉलर से घटर 100 डॉलर के भी नीचे आ गया था। हालांकि आज फिर इसमें तेजी है।
4. डॉलर के मुकाबले रुपया 34 पैसे मजबूत होकर 93.64 पर आया
भारतीय रुपए की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। डॉलर के मुकाबले रुपया 34 पैसे चढ़कर 93.64 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 93.98 के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में डॉलर की कमजोरी का असर रुपए पर दिख रहा है।
सेंसेक्स कल 1837 अंक गिरकर 72,696 पर बंद हुआ था
शेयर बाजार में आज यानी 23 मार्च को बड़ी गिरावट रही। सेंसेक्स 1837 अंक (2.46%) की गिरावट के साथ 72,696 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 602 अंक (2.60%) की गिरावट रही, ये 22,513 पर बंद हुआ। बैंकिंग, ऑटो, मेटल और FMCG शेयर्स में ज्यादा गिरावट रही।
देश
2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी
नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं।
इसके जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। इससे लोकसभा में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। इनमें महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी।

गृहमंत्री अमित शाह ने इस पर सहमति बनाने के लिए सोमवार को एनडीए और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते पेश किए जा सकते हैं।
दरअसल, 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है।
अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने की बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे प्रोसेस तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा।

19 सितंबर 2023: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश किया था। सरकार ने इसे नारी शक्ति वंदन विधेयक कहा था।
इस सत्र में 2 बिल लाए जाएंगे, एससी और एसटी कोटा होगा
दो बिल: एक बिल के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा। इसे पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। इसी वजह से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है।
आरक्षण: प्रस्ताव के मुताबिक 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे।
कांग्रेस से चर्चा बाकी: गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों इसके लिए कई नेताओं से बैठकें की हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी बातचीत हुई है, जबकि कांग्रेस से चर्चा बाकी है। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते संसद में पेश किए जा सकते हैं।
महिला आरक्षण बिल कानून नहीं बना: महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा में यह बिल लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसकी लागू होने की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए तय करेगी और जरूरत पड़ने पर संसद इसमें संशोधन कर सकती है।
महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ेंगी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
1931 में पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा था
- 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। तब प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया।
- 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया। इसके कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया।
- 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की गई थी।
- 1988: महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perpective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी।
- 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है।
देश
सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था, जिनकी सर्विस खत्म हुई, उन्हें भी पेंशन मिलेगी
नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अफसरों को पूरी पेंशन देने का आदेश दिया। जिन मामलों में महिला अफसर परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिलने के कारण पहले ही सेवा छोड़ चुकी थीं, उन्हें एकमुश्त राहत देते हुए 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन और अन्य लाभ देने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा- सशस्त्र बलों के भीतर मौजूद सिस्टमिक भेदभाद के कारण महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन से वंचित किया गया। महिलाओं को परमानेंट कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।

पूरा मामला SSC के तहत नियुक्त महिला अफसरों की याचिकाओं से जुड़ा था, जिन्होंने PC देने की मांग की थी। SSC के तहत नियुक्त अफसर का कार्यकाल 10 साल का होता है, जिसे 4 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद योग्यता के आधार पर परमानेंट कमीशन दिया जाता है।
परमानेंट कमीशन नहीं मिलने पर उन्हें सेवा छोड़नी होती है। इसके खिलाफ महिला अफसरों ने पहले आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (AFT) का रुख किया था और PC से वंचित किए जाने को चुनौती दी थी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कई याचिकाओं को एक साथ सुना।
महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से 3 राहत…
- जिन SSC अफसरों को 2020–21 में नंबर 5 सेलेक्शन बोर्ड या AFT (ट्रिब्यूनल) के फैसले के आधार पर पहले ही स्थायी कमीशन (PC) मिल चुका है, उनका स्टेटस नहीं बदला जाएगा।
- जो महिला SSC अफसर (अपीलकर्ता) इस केस के दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें मान लिया जाएगा कि उन्होंने 20 साल की जरूरी सेवा पूरी कर ली है। उन्हें पेंशन और उससे जुड़े सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा।
- वर्तमान में जो महिला अफसर सेवा में हैं, उन्हें 60% कटऑफ पूरा करने पर परमानेंट कमीशन मिलेगा। बशर्ते उन्हें जरूरी मंजूरी मिली हो।
यह आदेश उन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में हैं, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार का मौका मिलता रहा है।
सीजेआई नेआर्मी, नेवी और एयर फोर्स के लिए कहा
आर्मी: क्या ACR यानी परफॉर्मेंस रिपोर्ट सही तरीके से बनी? हमने पाया है कि ACR इस सोच के साथ लिखे गए कि महिलाओं को आगे मौका नहीं मिलेगा। इससे महिला अफसरों की मेरिट पर असर पड़ा, पुरुष अधिकारियों से पीछे रहीं। महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। यह उनके करियर के खिलाफ गया। आर्टिकल 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ के लिए आदेश दे रहे हैं।
नेवी: ACR में यहां भी पूर्वाग्रह मिला। लेकिन ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ सही और गैर-भेदभावपूर्ण है। अधिकारियों को मूल्यांकन का पूरा मापदंड नहीं बताया गया, यह बड़ी कमी।
एयर फोर्स: न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड जल्दबाजी में लागू किए गए। 2007 बैच को 2020-21 में आंका गया, यह प्रक्रिया ठीक नहीं। प्रक्रिया में खामियां होने के बावजूद कोर्ट ने पुनर्नियुक्ति का आदेश दिया।
कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा…
सीनियर एडवोकेट वी. मोहना ने कहा कि सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने का मामले में यह बड़ा कदम है। सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा इस फैसले के लिए कोर्ट का धन्यवाद है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले पर हम भी आभारी हैं।
23 साल पहले कोर्ट पहुंचा था यह मामला
23 साल पहले 2003 में इस मामले में महिला वकील बबीता पुनिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके बाद 9 महिला अफसरों ने 2009 तक हाईकोर्ट में इसी मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया और महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने कहा था कि यह साफ किया जाता है कि जो महिला अफसर रिटायरमेंट की उम्र तक नहीं पहुंचीं हैं, उन सभी को स्थाई कमीशन दिया जाए। साथ ही उन्हें प्रमोशन जैसे लाभ भी दिए जाएं। हम महिलाओं पर कोई एहसान नहीं कर रहे, हम उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिला रहे हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
केंद्र ने नीति बनाई, लेकिन मार्च 2019 का क्लॉज जोड़ दिया
हाईकोर्ट के फैसले के 9 साल बाद सरकार ने फरवरी 2019 में सेना के 10 विभागों में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने की नीति बनाई, लेकिन यह कह दिया कि मार्च 2019 के बाद से सर्विस में आने वाली महिला अफसरों को ही इसका फायदा मिलेगा।
इस तरह वे महिलाएं स्थाई कमीशन पाने से वंचित रह गईं, जिन्होंने इस मसले पर लंबे अरसे तक कानूनी लड़ाई लड़ी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि पुरुष सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं होंगे।
सेनाओं में महिला अफसरों की अभी क्या स्थिति है
1. थलसेना : महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, जज एडवोकेट जनरल, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक-मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही एंट्री पा सकती हैं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे- इन्फैंट्री, आर्मर्ड, तोपखाने और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में काम करने का मौका नहीं दिया जाता। हालांकि, मेडिकल कोर और नर्सिंग सर्विसेस में ये नियम लागू नहीं होते। इनमें महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलता है। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद तक भी पहुंची हैं।
2. वायुसेना और नौसेना : यहां महिला अफसरों को स्थाई कमीशन का विकल्प है। वायुसेना में महिलाएं कॉम्बैट रोल, जैसे- फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी में शामिल हो सकती हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं वायुसेना में ही हेलिकॉप्टर से लेकर फाइटर जेट तक उड़ा सकती हैं। नौसेना में भी महिलाएं लॉजिस्टिक्स, कानून, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और नेवल इंस्पेक्टर कैडर में सेवाएं दे सकती हैं।
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