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सऊदी अरब को परमाणु हथियार देगा पाकिस्तान:रक्षा मंत्री बोले- भारत से जंग हुई तो सऊदी साथ देगा, 2 दिन पहले हुई डिफेंस डील

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इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान अपने न्यूक्लियर हथियार सऊदी अरब के साथ शेयर करेगा। दोनों देशों के बीच बुधवार को एक रक्षा समझौता हुआ था, जिसके तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे दोनों पर हमला माना जाएगा।

आसिफ ने पाकिस्तानी न्यूज जियो टीवी को दिए साक्षात्कार में कहा, “हमारी परमाणु क्षमता पहले से अच्छी है। यह समझौता दोनों देशों को एक-दूसरे की रक्षा करने का वादा करता है। हमारे पास युद्ध के लिए ट्रेंड सेनाएं हैं। हमारे पास जो क्षमताएं हैं, वे इस समझौते के तहत निश्चित रूप से उपलब्ध होंगी।”

जब आसिफ से पूछा गया कि अगर भारत और पाकिस्तान में जंग होती है तो क्या सऊदी अरब इसमें पाकिस्तान की तरफ से शामिल होगा? इस पर ख्वाजा आसिफ ने कहा, “बिल्कुल, इसमें कोई शक की बात नहीं है।” हालांकि, उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया।

आसिफ बोले- हमले के लिए नहीं, रक्षा के लिए इस्तेमाल होगा

आसिफ ने कहा कि इस समझौते का इस्तेमाल किसी हमले के लिए नहीं, बल्कि रक्षा के लिए किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को आर्थिक मदद दी है। पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार हैं, जो भारत के 172 हथियारों के लगभग बराबर हैं।

आसिफ ने आगे कहा कि न तो सऊदी अरब ने किसी खास देश का नाम लिया और न ही हमने किसी का नाम लिया। यह बस एक अम्ब्रेला है जो दोनों को मिला है, जिसमें नियम है कि किसी एक पर भी हमला होता है तो दोनों मिलकर उसका जवाब देंगे। आसिफ ने यह भी कहा कि यह कोई ‘आक्रामक समझौता नहीं’, बल्कि ‘रक्षा व्यवस्था’ है।

विदेश मंत्री बोले- PAK दूसरे देशों के साथ भी ऐसी डिफेंस डील करेगा

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि सऊदी अरब के साथ हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते के बाद कई देशों ने पाकिस्तान के साथ ऐसे ही रणनीतिक रक्षा समझौते करने में रुचि दिखाई है।

लंदन में पत्रकारों से बात करते हुए डार ने कहा कि अभी जल्दी है कुछ कहना, लेकिन इस समझौते के बाद अन्य देशों ने भी इस तरह की व्यवस्था की इच्छा जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समझौते एक नियम के तहत ही तय होते हैं।

सऊदी अरब के साथ समझौते को अंतिम रूप देने में ही कई महीने लगे थे। डार ने समझौते को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया और कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों इससे संतुष्ट और खुश हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सऊदी अरब ने हमेशा मुश्किल वक्त में पाकिस्तान का साथ दिया है, खासकर हालिया अंतर्राष्ट्रीय और आर्थिक संकट के दौरान।

सऊदी-पाक डिफेंस कॉर्पोरेशन डेवलप करेंगे

बुधवार को हुए समझौते पर दोनों देशों ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा कि यह समझौता दोनों देशों की सुरक्षा बढ़ाने और विश्व में शांति स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच डिफेंस कॉर्पोरेशन भी डेवलप किया जाएगा। रॉयटर्स के मुताबिक इस समझौते के तहत मिलिट्री सहयोग किया जाएगा। इसमें जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल है।

17 सिंतबर को सऊदी अरब की राजधानी रियाद के यमामा पैलेस क्राउन प्रिंस और शहबाज शरीफ ने बैठक की थी।

17 सिंतबर को सऊदी अरब की राजधानी रियाद के यमामा पैलेस क्राउन प्रिंस और शहबाज शरीफ ने बैठक की थी।

समझौते के वक्त पाकिस्तानी सेना प्रमुख भी मौजूद थे

शहबाज शरीफ के साथ पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर, उप प्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब और हाई लेवल डेलिगेशन सऊदी पहुंचा था।

जिस वक्त इस रक्षा समझौते पर साइन किए जा रहे थे, तब पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी वहां मौजूद थे।

एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि यह समझौता किसी खास देश या घटना के खिलाफ नहीं हुआ है, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चलने वाले गहरे सहयोग का आधिकारिक रूप है।

सऊदी प्रिंस सलमान के साथ शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर।

सऊदी प्रिंस सलमान के साथ शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले- भारत पर असर की जांच करेंगे

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था

यह समझौता दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संबंधों को औपचारिक रूप देता है। इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर क्या असर पड़ेगा, इसकी जांच की जाएगी। भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पाकिस्तान ने नाटो जैसी फोर्स बनाने का सुझाव दिया था

इजराइल ने 9 सितंबर को कतर की राजधानी दोहा में हमास चीफ खलील अल-हय्या को निशाना बनाकर हमला किया था। इस हमले में अल-हय्या बच तो गया था, लेकिन 6 अन्य लोगों की मौत हो गई थी।

इसके बाद 14 सितंबर को दोहा में मुस्लिम देशों के कई नेता इजराइल के खिलाफ एक खास बैठक के लिए इकट्ठा हुए थे। यहां पाकिस्तान ने सभी इस्लामी देशों को NATO जैसी जॉइंट फोर्स बनाने का सुझाव दिया था।

पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री मोहम्मद इशाक डार ने एक जॉइंट डिफेंस फोर्स बनाने की संभावना का जिक्र करते हुए कहा था कि न्यूक्लियर पावर पाकिस्तान इस्लामिक समुदाय (उम्माह) के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।

रविवार को इस्लामी देशों के नेताओं ने इजराइल के खिलाफ बंद कमरे में मीटिंग की।

रविवार को इस्लामी देशों के नेताओं ने इजराइल के खिलाफ बंद कमरे में मीटिंग की।

एक्सपर्ट बोले- यह समझौता औपचारिक ‘संधि’ नहीं है

अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका के राजदूत रह चुके जलमय खलीलजाद ने भी इस समझौते पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता हालांकि औपचारिक ‘संधि’ नहीं है, लेकिन इसकी गंभीरता को देखते हुए यह एक बड़ी रणनीतिक साझेदारी मानी जा रही है।

खलीलजाद ने आगे कहा कि क्या यह समझौता कतर में इजराइल हमले के जवाब में किया गया है? या ये लंबे समय से चली आ रही अफवाहों की पुष्टि करता है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान के एटमी हथियार प्रोग्राम का अघोषित सहयोगी रहा है।

खलीलजाद ने पूछा कि क्या इस समझौते में सीक्रेट क्लॉज हैं, अगर हां, तो वे क्या हैं? क्या ये समझौता बताता है कि सऊदी अरब अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार और ऐसे मिसाइल सिस्टम हैं जो पूरे मिडिल ईस्ट और इजराइल तक मार कर सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान ऐसे हथियार भी डेवलप कर रहा है जो अमेरिका तक पहुंच सकते हैं।

अमेरिका के साथ भी पाकिस्तान ने सऊदी जैसा रक्षा समझौता किया था

पाकिस्तान ने सऊदी जैसा रक्षा समझौता अमेरिका के भी साथ किया था। 1979 में ये समझौता टूट गया था। उससे पहले भारत पाकिस्तान के बीच 2 जंग हुईं लेकिन एक में भी अमेरिका ने उसकी सीधे मदद नहीं की।

पाकिस्तान-अमेरिका का पुराना रक्षा समझौता: 1950 में कोल्ड वॉर के दौरान, अमेरिका ने सोवियत संघ के विस्तार को रोकने के लिए दक्षिण एशिया में सहयोगियों की तलाश की। इस समय पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन को अपनाया।

  • म्यूचुअल डिफेंस असिस्टेंस एग्रीमेंट (MDAA), 19 मई 1954: यह पाकिस्तान और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय समझौता था। इसमें म्यूचुअल डिफेंस के नियम थे, यानी दोनों देश एक-दूसरे को सैन्य सहायता (हथियार, प्रशिक्षण, उपकरण) देंगे। अमेरिका ने पाकिस्तान को सामूहिक सुरक्षा प्रयासों (जैसे सामान्य जंग में) में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें पाकिस्तान के रिसोर्स, सैनिक और रणनीतिक सुविधाएं शामिल थीं। यह समझौता अमेरिका के म्यूचुअल डिफेंस असिस्टेंस एक्ट (1949) पर बेस्ड था, जो यूरोप और एशिया में सहयोगियों को सैन्य सहायता देता था।
  • SEATO (1954) और CENTO (1955): MDAA के बाद पाकिस्तान ने साउथ ईस्ट एशिया ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (SEATO) और बगदाद पैक्ट (बाद में CENTO) में शामिल होकर इसे मजबूत किया। इन संगठनों के अनुच्छेदों में किसी एक पर हमले में सामूहिक प्रतिक्रिया का प्रावधान था, यानी एक सदस्य पर आक्रमण को सभी पर आक्रमण माना जाएगा (नाटो जैसा)। अमेरिका ने इनके तहत पाकिस्तान को 7 हजार करोड़ से ज्यादा की सैन्य सहायता दी, जिसमें हथियार और प्रशिक्षण शामिल थे।
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अमेरिकी रियल एस्टेट कंपनी Opendoor का भारत से एग्जिट, 250 कर्मचारियों होंगे प्रभावित

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मुंबई, एजेंसी। अमेरिका की डिजिटल रियल एस्टेट कंपनी ओपनडोर (Opendoor) भारत में अपना कामकाज बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी के इस फैसले से भारतीय दफ्तरों में काम करने वाला करीब 250 कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी। कंपनी के सीईओ काज नेजैटियन ने अपने सोशल मीडिया पर और कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन स्ट्रेटेजी के तहत ऑपरेशनल रोल्स को अमेरिका में अपने ग्राहकों के करीब ले जा रही है।

कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कंपनी ने कहा, ”कंपनी बीते कुछ महीनों से अपने ऑपरेशनल रोल्स को वापस अमेरिका में शिफ्ट कर रही थी। इस नए कदम से ये प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और ओपनडोर का भारत में कामकाज बंद हो जाएगा।” नेजैटियन ने कर्मचारियों को भेजे गए इस ईमेल को भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।

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AI और तकनीकी बदलाव बने वजह

कंपनी का कहना है कि ओपनडोर के अधिकांश ग्राहक अमेरिका में हैं इसलिए ग्राहक सहायता और परिचालन गतिविधियों को वहीं से संचालित करना अधिक प्रभावी रहेगा। कंपनी ने पहले कई मैनुअल वर्कफ्लो को मैनेज करने के लिए भारत में एक बड़ी टीम बनाई थी लेकिन टेक्नोलॉजी में सुधार और AI-इनेबल्ड टीमें आने से इन कामों को विदेश में रखने की जरूरत कम हो गई है।

सीईओ ने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की

काज नेजैटियन ने अपने नोट में लिखा, ”आज हमने भारत में अपने सहयोगियों को अलविदा कहना शुरू कर दिया, क्योंकि हम भारत में अपना कामकाज बंद कर रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये फैसला भारत में काम करने वाली टीम के परफॉर्मेंस से जुड़ा नहीं था। उन्होंने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की और उन्हें टैलेंटेड प्रोफेशनल बताया, जो दूसरी कंपनियों के लिए भी बहुत काम के साबित होंगे।

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अमेरिका में मोदी की धूम: PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल की अमेरिकी नेताओं ने की जमकर तारीफ

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वॉशिंगटन, एजेंसी।  भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने के मील के पत्थर को हासिल करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी सांसदों, बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों ने तारीफ़ की है। उन्होंने भारत की वैश्विक स्थिति को बदलने और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने का श्रेय मोदी के नेतृत्व को दिया।
अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने बधाई देने की शुरुआत की और मोदी को पद पर 4,399 दिन पूरे करने पर बधाई दी।

कॉर्निन ने कहा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने आगे कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने तक, PM मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। अमेरिका-भारत साझेदारी पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हुई है।”

इंडियन अमेरिकन CEO काउंसिल के सह-संस्थापक और टेक्सास इकोनॉमिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन अरुण अग्रवाल ने कहा कि यह मील का पत्थर पिछले बारह वर्षों में भारत में आए बदलाव पर विचार करने का मौका देता है। अग्रवाल ने इस मौके पर लिखे एक लेख में कहा, “2026 का भारत 2014 का भारत नहीं है।” उन्होंने कहा कि “इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में वैश्विक मंच पर ज़्यादा मज़बूती से खड़ा है, ज़्यादा मुखर है और ज़्यादा ध्यान आकर्षित करता है।” भारत को अब केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि तेज़ी से उन संभावनाओं को हकीकत में बदलने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “कई दशकों तक, भारत को अक्सर भारी क्षमता वाले देश के रूप में वर्णित किया जाता था। आज, इसे तेज़ी से उस क्षमता को साकार करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि पिछले बारह वर्षों को संभवतः उस दौर के रूप में याद किया जाएगा जिसने “भारत के उत्थान को गति दी और भारत क्या हासिल कर सकता है, इस बारे में वैश्विक धारणा को बदल दिया।” पालो ऑल्टो नेटवर्क्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकेश अरोड़ा ने भी मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। अरोड़ा ने लिखा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने तक, पीएम मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। हम अमेरिका-भारत की लगातार जारी रहने वाली साझेदारी की उम्मीद करते हैं।”

अमेरिकी गायिका और भारत की समर्थक मैरी मिलबेन ने इस मौके को “एक महान देश की यात्रा में एक ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “आज, मैं अपने दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने पर दिल से बधाई देती हूं।” “आपकी मज़बूत लीडरशिप, 140 करोड़ भारतीयों की तरक्की, एकता और उम्मीदों के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता, और साथ ही एक मज़बूत भारत के लिए आपकी पक्की सोच ने बदलाव के एक दौर को आकार देने में मदद की है।” मिलबेन ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने में मोदी की भूमिका की भी तारीफ़ की।

उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने में आपकी लीडरशिप का सम्मान करती हूं। आपने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल देखे हैं-कुछ के साथ आपके बहुत अच्छे संबंध रहे और दूसरों के प्रति आपने बहुत शालीनता दिखाई-फिर भी आप स्पष्ट कूटनीति अपनाने में कभी नहीं डगमगाए, जिससे भारतीय लोगों के हितों और हमारे दोनों देशों की भलाई को बढ़ावा मिला।”

इस उपलब्धि को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब, भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता के तौर पर, आपने पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और मातृभूमि की शान बढ़ाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है।” 

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मॉरीशस की मोदी के 12 साल के रिकॉर्ड पर की बड़ी टिप्पणीः ‘सलाम…आप ग्लोबल साउथ की सबसे बुलंद आवाज’

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के लगातार 12 वर्ष पूरे कर देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में मॉरीशस के विदेश मंत्री Dhananjay Ramful ने उनकी इस उपलब्धि को भारतीय जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है।

‘भारत को बदलने वाले नेता हैं मोदी’
एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रामफुल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मोदी को यह सम्मान इसलिए मिला है क्योंकि भारत की जनता ने लगातार उन पर भरोसा जताया है। रामफुल के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी केवल भारत के नेता नहीं बल्कि एक वैश्विक नेता हैं, जिन्होंने देश के विकास और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मॉरीशस के विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम शुरू किए, जिनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों में समावेशी विकास की स्पष्ट झलक दिखाई देती है और यही उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है।

‘ग्लोबल साउथ की आवाज बने मोदी’
रामफुल ने प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक दक्षिण (Global South) का मजबूत प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा विकासशील देशों की चिंताओं और समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से भारत की G20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विकासशील देशों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।  रामफुल ने कहा कि मॉरीशस को G20 की बैठकों में आमंत्रित करना और African Union को G20 का स्थायी सदस्य बनाने में भारत की भूमिका इस बात का प्रमाण है कि मोदी केवल वादे नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारते भी हैं।

भारत-मॉरीशस संबंधों को नई मजबूती
विदेश मंत्री ने भारत और Mauritius के बीच मजबूत होते संबंधों का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने 2015 में मॉरीशस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए SAGAR (Security and Growth for All in the Region) मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को नई दिशा दी। रामफुल ने कहा कि भारत मॉरीशस का एक भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है। हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री Navin Ramgoolam की भारत यात्रा के दौरान नई वित्तीय सहायता की घोषणा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मदद से मॉरीशस में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुई हैं, जिनमें मेट्रो एक्सप्रेस और आधुनिक ईएनटी अस्पताल जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ती भारत की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास और कूटनीतिक प्रभाव के दौर के रूप में देखा जा रहा है। मॉरीशस के विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भी इसी बात को रेखांकित करती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है।

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