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विदेश

पाकिस्तान की अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक, 400 की मौत:250 घायल, तालिबान का आरोप- PAK ने नशा मुक्ति सेंटर पर बम गिराए

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काबुल,एजेंसी। पाकिस्तान ने सोमवार रात एक बार फिर अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की है। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिनमें एक हॉस्पिटल भी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसमें 400 लोगों की मौत हो गई, वहीं 250 से ज्यादा घायल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दारुलअमान, अरजान कीमत, खैरखाना और काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई जगहों पर धमाकों और गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं।

तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर बम गिराए।

तालिबान ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है और कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया है।

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि काबुल में किसी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया।

पाकिस्तानी हमले से जुड़ी तस्वीर…

राजधानी काबुल में PAK एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने कई हमले किए। (सोर्स- आमज न्यूज)

राजधानी काबुल में PAK एयरफोर्स के फाइटर जेट्स ने कई हमले किए। (सोर्स- आमज न्यूज)

पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद काबुल में एक 2000 बेड के हॉस्पिटल में आग लग गई।

पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद काबुल में एक 2000 बेड के हॉस्पिटल में आग लग गई।

अफगान रेस्क्यू टीम के मेंबर शवों को ढंकते हुए।

अफगान रेस्क्यू टीम के मेंबर शवों को ढंकते हुए।

हॉस्पिटल पर हमले के बाद शवों को स्ट्रेचर पर रखकर बाहर निकाला गया।

हॉस्पिटल पर हमले के बाद शवों को स्ट्रेचर पर रखकर बाहर निकाला गया।

अफगान सेना के जवान शव को कंबल में रखकर ले जाते हुए।

अफगान सेना के जवान शव को कंबल में रखकर ले जाते हुए।

अफगानिस्तान में घायल व्यक्ति को अस्पताल लेकर जाते हुए।

अफगानिस्तान में घायल व्यक्ति को अस्पताल लेकर जाते हुए।

पाकिस्तानी हमले में अफगानिस्तान में कई घर तबाह हो गए।

पाकिस्तानी हमले में अफगानिस्तान में कई घर तबाह हो गए।

अफगानिस्तान में सुबह तबाह हुए घरों को देखते रहवासी।

अफगानिस्तान में सुबह तबाह हुए घरों को देखते रहवासी।

हमले से 2000 बेड वाले हॉस्पिटल को भारी नुकसान

अफगानिस्तान सरकार के डिप्टी प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 9 बजे हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हॉस्पिटल 2000 बेड का है। इसे भारी नुकसान हुआ है।

मीडिया की टीमें जब वहां पहुंची तो अस्पताल के कुछ हिस्सों में तब भी आग लगी हुई थी। करीब 30 से ज्यादा शव स्ट्रेचर पर बाहर निकाले जा रहे थे। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि वहां बहुत ज्यादा मरीज थे, इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है।

अफगान क्रिकेटर राशिद खान ने UN से जांच की मांग की

अफगानिस्तान के क्रिकेटर राशिद खान ने पाकिस्तानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा काबुल में हाल ही में हुए हवाई हमलों से लोग दुखी हैं। इन हमलों में कई आम लोगों की जान चली गई। कुछ हमले घरों, स्कूलों और अस्पतालों के आसपास भी हुए।

आम लोगों के इलाकों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से युद्ध अपराध माना जाता है, चाहे वह जानबूझकर किया गया हो या गलती से। खासकर रमजान के पवित्र महीने के दौरान ऐसी घटना से लोगों में और ज्यादा दुख और गुस्सा है।

लोगों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और मानवाधिकार संगठनों से मांग की है कि इस मामले की पूरी जांच की जाए और जो भी जिम्मेदार हो उसे सजा दी जाए।

अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद की तस्वीर।

अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी हवाई हमले के बाद की तस्वीर।

भारत बोला- काबुल अस्पताल पर हमला जनसंहार है

भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अस्पताल पर हुए हमले को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है। भारत ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ और ‘जनसंहार’ करार दिया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह एक बेहद अमानवीय और अनैतिक हिंसक कृत्य है, जिसमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिकों की जान गई। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि जिस जगह को किसी भी हालत में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता, उसे निशाना बनाना पूरी तरह गलत है।

बयान में पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि वह इस हमले को सैन्य कार्रवाई के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।

भारत ने कहा,

पाकिस्तान का यह घिनौना हमला अफगानिस्तान की संप्रभुता पर खुला हमला है और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। यह पाकिस्तान के लापरवाह व्यवहार के पुराने पैटर्न को दिखाता है, जिसमें वह अपनी आंतरिक नाकामियों को छिपाने के लिए अपनी सीमाओं के बाहर हिंसक कदम उठाता रहा है।

भारत ने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बयान में यह भी कहा गया है कि भारत इस मुश्किल वक्त में अफगानिस्तान के साथ खड़ा है।

PAK ने रविवार रात भी अफगानिस्तान में हमले किए

पाकिस्तान ने रविवार रातभर भी कंधार प्रांत में एयर स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था। पाकिस्तान ने यह कार्रवाई ऑपरेशन ‘गजब-लिल-हक’ के तहत की। इसके जवाब में अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के सैन्य कैंप पर हमला किया।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, हमले में उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी तालिबान (TTP) जैसे संगठन सीमा पार हमलों की तैयारी के लिए करते थे।

पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया है कि शुक्रवार रात अफगानिस्तान की ओर से ड्रोन हमला किया गया था, जिसका मलबा गिरने से क्वेटा में दो बच्चों समेत कुछ नागरिक घायल हो गए।

1 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर

पिछले कुछ हफ्तों में अफगान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं।

पाकिस्तान सीमा के पास विस्थापित अफगान लोग शनिवार को बॉर्डर पार करने की कोशिश करते हुए।

पाकिस्तान सीमा के पास विस्थापित अफगान लोग शनिवार को बॉर्डर पार करने की कोशिश करते हुए।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात

पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी।

पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया।

अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।

पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।

पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?

2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था।

TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है।

TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं।

2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।

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पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी:सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड, लगातार 1413 दिन से सत्ता में

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नई दिल्ली/रोम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है।

मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है।

उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी अहम रही है। मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई।

प्रधानमंत्री ने मेलोनी को आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबा कार्यकाल

जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने शुक्रवार को लगातार 1413 दिन सत्ता में रहकर इटली में नया रिकॉर्ड बनाया। 1946 में इटली गणराज्य बनने के बाद यह किसी एक कैबिनेट का सबसे लंबा लगातार कार्यकाल है।

मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार का रिकॉर्ड तोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी कैबिनेट 2001 से 2005 तक 1412 दिन सत्ता में रही थी।

मेलोनी 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। वे दक्षिणपंथी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की प्रमुख भी हैं।

मेलोनी ने भी मोदी को दी थी बधाई

जून 2026 में जब नरेंद्र मोदी ने 4399 दिन लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहकर जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था, तब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी उन्हें बधाई दी थी।

मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “बधाई हो नरेंद्र मोदी। आज आप भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।”

मेलोनी ने बधाई देते हुए पीएम मोदी के साथ की यह तस्वीर भी पोस्ट की थी।

मेलोनी ने बधाई देते हुए पीएम मोदी के साथ की यह तस्वीर भी पोस्ट की थी।

मेलोनी की पार्टी आज मनाएगी जश्न

मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) ने सरकार के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न में शुक्रवार शाम दक्षिणी शहर बारी में बड़ी रैली आयोजित की है। इसमें मेलोनी भी भाषण देंगी।

रैली में हजारों समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है। करीब 80 बसों से समर्थकों को बारी लाया जा रहा है, जबकि कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है।

मेलोनी ने सरकार के लंबे कार्यकाल को बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने को ही अपनी उपलब्धि बना लिया है। यह रैली 2027 के चुनाव से पहले चुनावी ताकत दिखाने के कार्यक्रम के तौर पर भी देखी जा रही है।

इटली में सरकारें औसतन 13 महीने ही चलती हैं

इटली में पिछले कई दशकों से सरकारों के बार-बार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। 80 साल पहले गणराज्य बनने के बाद से देश में 68 सरकारें बन चुकी हैं।

इन सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने रहा है। ऐसे में मेलोनी की तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाली गठबंधन सरकार का करीब 4 साल तक टिकना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

इटली में सरकारें जल्दी क्यों गिरती हैं?

इटली की राजनीति में लंबे समय से कई पार्टियों का दबदबा रहा है। चुनाव के बाद अक्सर किसी एक पार्टी को इतनी सीटें नहीं मिलतीं कि वह अकेले सरकार बना सके। ऐसे में सरकार बनाने के लिए अलग-अलग पार्टियों को गठबंधन करना पड़ता है।

समस्या तब शुरू होती है, जब गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद बढ़ जाते हैं। गठबंधन की एक छोटी पार्टी भी समर्थन वापस ले ले, तो सरकार बहुमत खो सकती है। इसके बाद प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ सकता है या नई सरकार बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। इटली में सरकार को संसद के दोनों सदनों- चैंबर ऑफ डेप्युटीज और सीनेट का समर्थन बनाए रखना जरूरी है।

मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी

पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की थी। यह टॉफी भारत में 1983 से बिक रही है। इसे पारले कंपनी बनाती है।

पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की थी। यह टॉफी भारत में 1983 से बिक रही है। इसे पारले कंपनी बनाती है।

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया था।

मेलोनी ने बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और मोदी को गिफ्ट के लिए धन्यवाद दिया था। मोदी और मेलोनी की साथ की तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi काफी लोकप्रिय हुई थी।

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देश

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं।

गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा।

फ्रांस में 17 जून 2026 को G7 समिट में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की आखिरी बार मुलाकात हुई थी।

फ्रांस में 17 जून 2026 को G7 समिट में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की आखिरी बार मुलाकात हुई थी।

G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव

सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है।

हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं।

अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं।

गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया।

ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं।

गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं।

240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य

गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है।

उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है।

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नेपाल बाढ़-9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर:आवाज सुनकर रेस्क्यू टीम ने बचाया, 40 के अब भी फंसे होने की आशंका

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काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है।

बाढ़ के बाद सुरंग में 42 कर्मचारी और मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। दो लोगों के जिंदा मिलने के बाद बचाव अभियान में उम्मीद बढ़ी है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग में दाखिल हुईं और तलाशी अभियान तेज किया।

बाढ़ से अब तक 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है।

सुरंग में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…

चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान

नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है।

प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।

पति को जिंदा देख पत्नी बोली- दूसरी जिंदगी मिल गई

कबीर महर्जन 25 अगस्त की सुबह त्रिशूली-3A में मेंटेनेंस के काम के लिए गए थे। रेस्क्यू के बाद उनकी पत्नी ने कहा कि ऐसा लगा जैसे उनके पति को दूसरी जिंदगी मिल गई हो।

26 अगस्त को आई बाढ़ की घटना के बाद उनका फोन बंद हो गया। उस सुबह करीब 7:30 बजे पत्नी हीरा शोभा से कबीर की आखिरी बार बात हुई थी।

कई दिन तक कोई खबर नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती गई थी। अब कबीर के रेस्क्यू के बाद उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।

संजय साह बोले – सबकी जान बचाना मेरी जिम्मेदारी थी

नेपाल में आई भीषण आपदा के 9 दिन बाद सुरंग से दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाला गया है। इनमें 30 साल के मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं।

आपदा के समय उन्होंने सुरंग से भागने के बजाय पहले अपने साथियों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि, सबकी जान बचाना उनकी जिम्मेदारी थी।

संजय साह अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन में काम करते थे। उन्होंने बताया कि हादसे के समय वह सुरंग के कंट्रोल रूम में थे। आमतौर पर वहां 4 से 6 लोग रहते थे, लेकिन उस दिन करीब 40-45 लोग मौजूद हो सकते थे।

उन्होंने बताया कि अंधेरे में उम्मीद बनाए रखने के लिए वह मंत्रों का जाप करते रहे।संजय ने यह भी कहा कि कुछ लोग सुरंग के अंदर और गहराई में फंसे हो सकते हैं।

बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज घोषित

नेपाल सरकार ने बाढ़ से प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत पैकेज घोषित किया है। बाढ़ में नष्ट वाहन, मशीनरी और उपकरण बिना कस्टम ड्यूटी के दोबारा आयात किए जा सकेंगे, जबकि प्रभावित लोगों के लोन की किस्तें आगे बढ़ाई या दोबारा तय की जाएंगी।

बीमा कंपनियों को तेजी से क्लेम निपटाने और शुरुआती आकलन के आधार पर 50% तक रकम एडवांस देने को कहा गया है।

बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग की करीब 15 बस्तियां तबाह हुई हैं, इसलिए सरकार लोगों को बाढ़ के खतरे वाले इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर बसाने की तैयारी कर रही है।

शुरुआती आकलन में करीब 16 लाख लोग प्रभावित और 8,317 घर तबाह हुए हैं। रेस्क्यू किए गए करीब 3,948 लोग अस्थायी केंद्रों में रह रहे हैं। रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम भत्ता मिलेगा और ड्यूटी में मौत होने पर परिवार को 10 लाख नेपाली रुपए की मदद दी जाएगी।

नेपाल आपदा से जुड़ी तस्वीरें…

बाढ़ में अपनों को खोने वाले परिजन, शव नहीं मिलने के कारण काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार के दौरान रोते-बिलखते नजर आए

बाढ़ में अपनों को खोने वाले परिजन, शव नहीं मिलने के कारण काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार के दौरान रोते-बिलखते नजर आए

बाढ़ में 43 वर्षीय दिनेश अच्छामे की मौत हो गई। शव बरामद नहीं होने के बाद काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार की रस्म के दौरान परिजनों ने उनका पुतला लेकर अंतिम विदाई दी।

बाढ़ में 43 वर्षीय दिनेश अच्छामे की मौत हो गई। शव बरामद नहीं होने के बाद काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार की रस्म के दौरान परिजनों ने उनका पुतला लेकर अंतिम विदाई दी।

नेपाल के रसुवा में अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और शवों को निकालने में बचावकर्मियों की टीम जुटी है।

नेपाल के रसुवा में अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और शवों को निकालने में बचावकर्मियों की टीम जुटी है।

भारतीय अधिकारियों ने काठमांडू के एयरपोर्ट पर नेपाली आधिकारियों को मदद सौंपी।

भारतीय अधिकारियों ने काठमांडू के एयरपोर्ट पर नेपाली आधिकारियों को मदद सौंपी।

नेपाल में बाढ़ के कारण फंसे 56 यात्रियों की मुंबई वापसी। गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे यात्री।

नेपाल में बाढ़ के कारण फंसे 56 यात्रियों की मुंबई वापसी। गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे यात्री।

नेपाल बाढ़ में 600 बच्चे लापता, तलाश जारी

नेपाल के रसुवा और नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं। रसुवा में करीब 280, जबकि नुवाकोट में 300-350 बच्चों के लापता होने की जानकारी है। अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चे लापता बताए गए हैं।

प्रशासन और स्कूलों से बच्चों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सटीक संख्या जुटाने में दिक्कत आ रही है। कुछ बच्चों का पता चल चुका है, लेकिन अलग-अलग स्कूलों से नए लापता बच्चों की जानकारी भी सामने आ रही है। बाढ़ में दोनों जिलों के 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हैं।

एनवीडिया ने नेपाल बाढ़ राहत के लिए 1 करोड़ डॉलर दिए

अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 1.5 अरब नेपाली रुपए) की सहायता दी है।

वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग को मदद के लिए धन्यवाद दिया।

वागले के मुताबिक, इस सहायता के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हो चुके हैं।

UN में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे नेपाल PM

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा उठा सकते हैं।

रसुवा में विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

शाह ने पहले महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इसके बाद कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।

भारत की नई खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण

भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों से आई 21.5 टन सहायता में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।

26 अगस्त से भारत भेज रहा राहत सामग्री

भारत ने बाढ़ के बाद 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इसमें 10 टन सामग्री थी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।

इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण और DNA विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल थी।

2 सितंबर को भारत ने पांचवां विमान भेजा, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां थीं।

बाढ़ की वजहों की जांच में जुटे विशेषज्ञ

भोटेकोशी आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञ अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारणों की जांच कर रहे हैं।

इस बीच नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। राहत और सहायता के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सीधे धनराशि जमा करने की व्यवस्था भी की गई है।

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