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पाकिस्तान के इंतजाम रह गए धरे: अमेरिका-ईरान वार्ता खटाई में ! इस्लामाबाद से बेरंग लौटे ईरान के विदेश मंत्री

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इस्लामाबाद,एजेंसी। ईरान के शीर्ष राजनयिक के पाकिस्तान से प्रस्थान करने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों के इस्लामाबाद नहीं पहुंचने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम वार्ता के प्रयास विफल हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अब गेंद ईरान के पाले में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यदि वे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें बस कॉल करने की जरूरत है!!!” ये वार्ता इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक वार्ता के बाद होने वाली थीं, जिसमें अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरान का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालीबाफ कर रहे थे।

हांलांकि ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है, ऐसे में अमेरिका पर कैसे विश्वास किया जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार शाम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से प्रस्थान कर गए। पाकिस्तान के दो अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को यह जानकारी दी। अराघची होर्मुज जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित देश ओमान गए हैं, जो पूर्व में शांति वार्ता में मध्यस्थ रह चुका है। ईरान की सराकरी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार अराघची ने कहा कि वह रविवार को पाकिस्तान लौटेंगे और फिर रूस के लिए रवाना होंगे।

दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान जाने से रोक दिया, जिसकी वजह से वे इस्लामाबाद नहीं पहुंच सके। अराघची ने पाकिस्तान में हुई बातचीत के बारे में सोशल मीडिया पर कहा, “हमने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचे पर अपना रुख साझा किया। अब यह देखना है कि क्या अमेरिका वास्तव में कूटनीति को लेकर गंभीर है।” 

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क्या पाकिस्तान रोक पाएगा ईरान-अमेरिका युद्ध? ट्रंप की सख्ती बाद गृह मंत्री नकवी पहुंचे तेहरान, डार की कतर नेताओं से बातचीत

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इस्लामाबाद/तेहरान,एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच ठप पड़ी वार्ता को दोबारा शुरू कराने के लिए पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की तेहरान यात्रा और विदेश मंत्री इशाक डार की कतर के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू करने और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर चर्चा हुई।

‘डॉन’ अखबार ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए प्रस्तावों को खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास और तेज कर दिए हैं। इस्लामाबाद की कोशिश है कि वार्ता पूरी तरह विफल न हो और दोनों पक्ष फिर से बातचीत की मेज पर लौटें। इसी बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कतर के राज्य मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल-खुलैफी से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, पश्चिम एशिया संकट और शांति बहाली के प्रयासों पर चर्चा की।बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए “संवाद और कूटनीतिक भागीदारी” की अहमियत पर जोर दिया। इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र और दुनिया में “शांति, स्थिरता और समृद्धि” के साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और ईरान-अमेरिका तनाव पर विचार-विमर्श किया। गौरतलब है कि अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच पहली वार्ता इस्लामाबाद में हुई थी। हालांकि बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद दोनों देशों के बीच प्रस्ताव और जवाबी प्रस्तावों का दौर जारी है।विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य संकट, तेल आपूर्ति में रुकावट और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए पाकिस्तान खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

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ईरान ने की पुष्टिः युद्ध रोकने के लिए अमेरिका से बातचीत जारी, पाकिस्तान के जरिए नए प्रस्ताव पर दोनों देशों ने भेजी टिप्पणियां

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तेहरान, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत अभी भी जारी है और इसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को तेहरान में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान दोनों ने तेहरान के हालिया प्रस्ताव पर अपनी-अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं। उन्होंने संकेत दिए कि बैकडोर डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध रोकने की कोशिशें जारी हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने रविवार रात ईरान का संशोधित शांति प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया। सूत्रों ने कहा कि “समय बहुत कम है” और दोनों पक्ष लगातार अपनी शर्तें बदल रहे हैं, जिससे समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

इस बीच ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के साथ संबंधों को लेकर भी सफाई दी। इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान की यूएई से कोई दुश्मनी नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया जब यूएई और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। यूएई अधिकारियों के अनुसार, अबू धाबी के पास एक परमाणु संयंत्र के नजदीक ड्रोन हमले के बाद आग लग गई थी, हालांकि संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम करती रहीं। वहीं सऊदी अरब ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने इराकी हवाई क्षेत्र से आए तीन ड्रोन मार गिराए।

ईरानी प्रवक्ता ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन को लेकर ओमान के साथ बातचीत चल रही है। इस जलमार्ग से दुनिया की बड़ी तेल आपूर्ति गुजरती है और यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बनी हुई है। ईरान ने साफ किया कि उसकी प्रमुख मांगों में विदेशी बैंकों में जमा ईरानी फंड जारी करना और अमेरिकी प्रतिबंध हटाना शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरे को रोका जा सके।

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ईरान की मस्जिदों में युद्ध की तैयारी ! AK-47 चलाना सीख रहे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी ले रहे ट्रेनिंग

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तेहरान, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान से कई चौंकाने वाले वीडियो सामने आए हैं, जिनमें आम नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती दिखाई दे रही है। इन वीडियो में छोटे बच्चों, युवाओं, लड़कियों और बुजुर्गों तक को AK-47 जैसी राइफल इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के कई शहरों की मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष “डिफेंस ट्रेनिंग सेशन” आयोजित किए जा रहे हैं। सरकारी टीवी चैनलों पर भी इन कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया, जहां इसे “देश की रक्षा के लिए जनता की तैयारी” बताया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लड़कियों को AK-47 को असेंबल और डिसअसेंबल करना सिखाया जा रहा है। वहीं बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक तेहरान की सड़कों पर हथियार चलाने की प्रैक्टिस करते नजर आ रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस अभियान को “जान फिदा बराए ईरान” नाम दिया है। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच लोगों को इस्लामी गणराज्य के समर्थन में एकजुट करना है।सरकारी दावों के मुताबिक, इस अभियान के लिए अब तक करीब 3.1 करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इससे पहले ईरानी टीवी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें स्टूडियो के अंदर एक एंकर को AK-47 चलाने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। वीडियो में सैन्य वर्दी पहने एक व्यक्ति बंदूक के इस्तेमाल का तरीका समझाता नजर आया था। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की लगातार चेतावनियों और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच ईरान नागरिक स्तर पर “राष्ट्रीय रक्षा तैयारी” का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

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