कोरबा। उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बीमा दावा खारिज करने के मामले में 16.50 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को यह राशि परिवादी को अदा करने का निर्देश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, कोरबा के रहने वाले युवक का 45 महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पत्नी और बेटे की मौत से पिता सदमे में था। हादसे के दो साल बाद पिता ने बीमा दावा आवेदन किया। लेकिन कंपनी ने देरी का हवाला देकर खारिज कर दिया था।
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला 3 फरवरी 2022 का है। कोरबा के एनटीपीसी साडा कॉलोनी, जमनीपाली निवासी जयेश रोहन बेन अपने साथी के साथ बुलेट (CG-12-AP-8777) से महाराजा चौक, दुर्ग से बोरसी रोड की ओर जा रहे थे। तभी सामने से आ रही एक अन्य बाइक (CG-24-J-4140) ने तेज और लापरवाही से टक्कर मार दी।
इस हादसे में जयेश गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। मृतक की बाइक यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से Compulsory Personal Accident (Owner-Driver) बीमा पॉलिसी के तहत बीमित थी। यह पॉलिसी 7 अक्टूबर 2021 से 6 सितंबर 2022 तक वैध थी।
पिता ने दो साल बाद किया बीमा दावा आवेदन
मृतक के पिता को इस पॉलिसी में नॉमिनी के रूप में दर्ज किया गया था। पिता ने हादसे के करीब दो साल बाद यानी 6 फरवरी 2024 को 15 लाख के CPA क्लेम के लिए बीमा कंपनी में आवेदन किया। कंपनी ने एक जांच अधिकारी नियुक्त कर पूरे मामले की जांच कराई।
जांच में हादसा और बीमा शर्तें पाई गईं सही
जांच में पुष्टि हुई कि हादसा वास्तविक था, बीमा पॉलिसी हादसे के समय वैध थी और मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था। बीमा की सभी शर्तों का पालन भी हुआ था। इन सभी तथ्यों के बावजूद कंपनी ने 18 मार्च 2025 को दावा खारिज कर दिया।
कंपनी ने देरी का हवाला देकर किया दावा खारिज
कंपनी ने दावा खारिज करने का कारण सूचना देने में 2 साल की देरी को बताया। उपभोक्ता आयोग ने इस मामले पर विचार करते हुए माना कि परिवादी ने बीमा कंपनी को देर से सूचना दी थी, लेकिन यह देरी उचित कारणों से हुई थी।
दोहरे सदमे से टूटे पिता, देर से कर पाए दावा
मृतक के पिता ने आयोग को बताया कि बेटे की मौत से छह माह पहले पत्नी का भी मौत हो गई थी। इस दोहरे सदमे के कारण वे मानसिक रूप से टूट गए थे और लंबे समय तक अवसादग्रस्त रहे। ऐसे मे अब आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को कुल 16.50 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है।
बीमा कंपनी को 16.50 लाख भुगतान का आदेश
इसमें 15 लाख रुपए बीमा दावा राशि के लिए, 50 हजार आर्थिक क्षति के लिए, 50 हजार मानसिक क्षति के लिए और 50 हजार वाद व्यय व अन्य खर्चों के लिए शामिल हैं।
कोरबा। एसईसीएल मानिकपुर खदान से प्रभावित भिलाईखुर्द के भ-ूविस्थापितों को बड़ी राहत मिली है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल पर 300 प्रभावितों को मुआवजा देने का रास्ता साफ हो गया है। हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा देने एसईसीएल प्रबंधन ने सहमति दी है।
एसईसीएल विश्राम गृह कोरबा में शुक्रवार को नगर विधायक व उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता मेंभिलाईखुर्द के भूविस्थापितों, एसईसीएल के अधिकारियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। जिसमें देवांगन ने एसईसीएल के अधिकारियों को दो टूक कहा कि 50 वर्ष पूर्व खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था।
तब ज़मीन का मुआवजा दिया जा चुका था, लेकिन इतने वर्षों बाद आज ज़मीन खाली करवाई जा रही है। भू-विस्थापितों को मकानों और शिफ्टिंग का उचित मुआवजा दिए किसी भी तरह से जमीन खाली करवाना गलत है। उद्योग मंत्री ने बैठक में भू विस्थापितों की मांग को मजबूती से रखते हुए कहा की इतने वर्षों में एक-एक जमीन धारक के एक से अधिक परिवार हो चुके हैं, आज की स्थिति में सिर्फ एक ज़मीन धारक के बजाए एक-एक परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।
देवांगन ने कहा की देश की ऊर्जा के लिए कोयला अतिमहत्वपूर्ण हैं, लेकिन भू- विस्थापितों को साथ में लेकर खदानों का विस्तार करना होगा। एसईसीएल के अधिकारियों ने बैठक में ही सभी परिवारों का मुआवजा देने की मंजूरी दी। भू-विस्थापित के प्रति परिवार को 6.78 लाख देने की घोषणा की गई। पिछले 8 वर्ष से बिना मुआवजा दिए प्रबंधन बस्ती खाली कराने पर आमदा था। मंत्री के दबाव के बाद एसईसीएल बैकफुट पर आए। इस निर्णय का ग्राम भिलाईखुर्द के सभी भू विस्थापितों ने स्वागत करते हुए अपनी सहमति देते हुए मंत्री देवांगन का आभार जताया।
एसईसीएल मानिकपुर खदान से 52 लाख 50 हजार टन कोयला उत्पादन किया गया था। कोरबा एरिया का यह सबसे बड़ा ओपन माइंस है। लगातार 11 साल से लक्ष्य हासिल कर रहा है। इस साल कोरबा एरिया में 83 लाख 60 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
कोरबा। कोरबा के मानिकपुर चौकी क्षेत्र अंतर्गत मुड़ापार स्थित लिटिल स्टेप स्कूल के पास एक ऑटो गैरेज में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चलती कार में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। गैरेज में मौजूद मिस्त्री ने तत्काल पानी डालकर और केबल वायर काटकर आग पर काबू पा लिया।
जानकारी के अनुसार, एक युवक लाल रंग की कार लेकर गैरेज पहुंचा था। गाड़ी रोकते ही वह तुरंत बाहर निकला और मिस्त्री को आवाज लगाई। मिस्त्री के मौके पर पहुंचते ही कार में अचानक आग की लपटें उठने लगीं, जो देखते ही देखते बढ़ने लगी।
शॉर्ट सर्किट के बाद लगी आग
कार चालक युवक ने बताया कि वह किसी काम से निकला था, तभी उसे गाड़ी से हल्का धुआं आता महसूस हुआ। वह किसी तरह कार को गैरेज तक लाया।
जैसे ही उसने बोनट खोला, धुआं तेजी से निकलने लगा और उसने तुरंत मिस्त्री को बुलाया। बताया जा रहा है कि चूहे ने कार के केबल काट दिए थे, जिसके कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई।
समय रहते आग में पाया काबू
समय रहते आग पर काबू पा लिए जाने से एक बड़ी घटना टल गई। यह क्षेत्र आबादी वाला है और पास में ही बच्चों का स्कूल भी है। आगजनी के समय लोगों की आवाजाही भी थी।
घटना की सूचना मानिकपुर चौकी पुलिस और दमकल विभाग को देने की तैयारी थी, लेकिन आग पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया गया।
कोरबा। कोरबा में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) के कथित दुरुपयोग के मामले में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील को स्मरण पत्र जारी किया है। यह कार्रवाई भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर की शिकायत के बाद की गई है।
शिकायत में बालको से संबंधित सड़क निर्माण के लिए डीएमएफ फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप है। दरअसल, ननकी राम कंवर ने शिकायत की थी कि दर्री ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाटा बालको तक की सड़क के लिए तत्कालीन कलेक्टर अजीत बसंत ने बालको को निजी फायदे के लिए डीएमएफ फंड से लगभग 26 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।
ननकी राम के अनुसार, यह सड़क बालको की है और इसका निर्माण-मरम्मत बालको के सीएसआर फंड से होना चाहिए था। इस मामले में केंद्र सरकार ने पहले भी मुख्य सचिव विकास शील को पत्र जारी किया था। पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कलेक्टर को भारत सरकार में शिकायत होने की जानकारी मिलते ही, उन्होंने अपने ट्रांसफर से पहले ही लोक निर्माण विभाग को आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी थी।
मुख्य सचिव से जवाब मांगा
इस जानकारी के बाद ननकी राम कंवर ने केंद्र सरकार को फिर पत्र लिखकर अवगत कराया। केंद्र सरकार ने उनके पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन विकास शील को पत्र लिखा है। इसमें केंद्र ने नाराजगी जाहिर करते हुए पत्र में लिखे गए तथ्यों के संबंध में जवाब मांगा है और आवेदक को भी अवगत कराने को कहा है।
कलेक्टर ने पुल मरम्मत कार्यों का निरीक्षण किया
इसी बीच कलेक्टर दुदावत ने डीएमएफ के तहत बनने वाले दर्री डेम मार्ग (ध्यानचंद चौक से बालको के बजरंग चौक तक) का निरीक्षण किया। उन्होंने आवश्यक मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही बेलगिरी-ढेंगुरनाला पुल के मरम्मत कार्य के लिए भी शीघ्र निविदा प्रक्रिया शुरू कर समयबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।