खेल
कबड्डी संघों की खींचतान में फंसे खिलाड़ी…निलंबन की चेतावनी:नेशनल कबड्डी ट्रायल पर छत्तीसगढ़ में विवाद, सचिव बोले- खिलाड़ी भाग रहे पैसों के पीछे
दुर्ग,एजेंसी। दिल्ली में होने जा रही 35वीं सब जूनियर बालक-बालिका राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता से पहले छत्तीसगढ़ में खेल संघों की खींचतान खुलकर सामने आई है। इसका खामियाजा अब सीधे खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल, राज्य में कबड्डी को लेकर दो संघों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक संघ खिलाड़ियों को ट्रायल देने की अनुमति दे रहा है।
वहीं दूसरा संघ खिलाड़ियों को धमकी दे रहा है कि यदि वे ट्रायल में शामिल हुए तो उन्हें सीधे निलंबित कर दिया जाएगा। ट्रॉयल में हिस्सा लेने से खिलाड़ियों को रोकने वाले सचिव का तर्क ये है कि खिलाड़ी अनुशासन में रहे इसलिए ऐसा आदेश जारी किया है। आजकल खिलाड़ी पैसे के लिए भागा दौड़ी कर रहे हैं। पैसे वाले टूर्नामेंट खेलते हैं, फेडरेशन में खेलना पसंद नहीं कर रहे हैं।

दिल्ली में 4 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दिल्ली में 4 से 8 अक्टूबर तक राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी। इसके लिए एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने बालिका टीम चयन के लिए 31 अगस्त को भिलाई के शासकीय स्कूल जोन-2, खुर्सीपार में ट्रॉयल का आयोजन रखा था। इसकी जानकारी संघ ने लेटरपैड से जारी की। लेकिन इसके बाद दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ जिला दुर्ग के सचिव ने बिना लेटरपैड के वॉट्सऐप पर मैसेज जारी किया।
इसमें उन्होंने खिलाड़ियों को धमकी दी। कहा कि अगर इस फेडरेशन में कोई भी खिलाड़ी/टीम भाग हिस्सा लेता है, तो उसे छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ और दुर्ग जिला कबड्डी संघ के किसी भी फेडरेशन गेम या किसी भी कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लेने नहीं दिया जाएगा। निलंबित किया जाएगा। इस मैसेज के बाद कई बालिका खिलाड़ी असमंजस में जिले के करीब 300 से ज्यादा खिलाड़ी ट्रॉयल देने नहीं पहुंचे।
अध्यक्ष-सचिव को भी मैसेज- खिलाड़ियों को हिस्सा लेने से रोकें
इसके बाद एक मैसेज सभी जिले के अध्यक्ष और सचिव को छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के महासचिव के नाम से वॉट्सऐप पर भेजा गया। जिसमें कहा गया कि, सभी अपने इकाई के पंजीकृत खिलाड़ियों को सूचना दे दें कि वे इस प्रतियोगिता में भाग लेते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के राज्य कबड्डी चैम्पियनशिप और उससे अनुमति प्राप्त प्रतियोगिता में हिस्सा लेने नहीं दिया जाएगा। उन्हें निलंबित किया जाएगा।
7 सितंबर को बालक वर्ग का ट्रॉयल, असमंजस में खिलाड़ी
बालिका वर्ग के ट्रॉयल में धमकी भरे मैसेज के बाद ज्यादातर खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया। अब 7 सितंबर रविवार को इसी नेशनल टूर्नामेंट के लिए बालक वर्ग का ट्रॉयल रखा गया है। ऐसे में खिलाड़ियों को इसका डर सता रहा है कि कहीं हम इस ट्रॉयल में हिस्सा लेंगे तो कहीं हमारा आगे खेल प्रभावित न हो।
2021 में भी निकाला था बेतुका आदेश
दरअसल, खेल संघ की लड़ाई लंबे समय से चल रही है। इसकी वजह से सबसे ज्यादा नुकसान खिलाड़ियों को हो रहा है। साल 2021 में भी दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ जिला दुर्ग के सचिव ने आदेश निकालकर शहरी खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
इतना ही एक क्लब की संबद्धता भी रद्द कर दी थी। इसके पीछे सचिव ने यह तर्क दिया था कि दुर्ग ग्रामीण से खिलाड़ी बहुत हैं, इसलिए क्लब की संबद्धता रद्द की जाती है। जबकि जानकारों का कहना है कि जिला संगठन में ग्रामीण और शहरी दोनों ही खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं।
खेल विभाग ने भी माना- सचिव ने किया पक्षपात, संघ को मान्यता भी नहीं
शहरी खिलाड़ियों को हिस्सा न देने के मामले की शिकायत खेल एवं युवा कल्याण विभाग दुर्ग में की गई थी। इसके बाद विभाग के सहायक संचालक विलियम लकड़ा ने जांच की थी। विभागीय जांच में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिला संघ होने की वजह से शहर के खिलाड़ी भी हिस्सा ले सकते हैं।
संघ के सचिव पीलाराम पारकर ने शहरी खिलाड़ियों को लेने से साफ मना किया, यह पूरी तरह पक्षपात है। साथ ही शासन स्तर से दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ को खेल एवं युवा कल्याण विभाग से मान्यता नहीं दिया गया। विभाग के सहायक संचालक ने संघ के सचिव खिलाफ कार्रवाई करने सचिव पद से हटाने की अनुशंसा की थी। लेकिन उसके बाद भी आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दोनों संघ के अलग-अलग दावे
एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों का कहना है कि, दिल्ली में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हमने जो लेटर भेजा है, वे लेटरपैड में हस्ताक्षर के साथ है। लेकिन दूसरे संघ के लोग बिना लेटरपैड के ऐसे ही मैसेज भेज रहे हैं।
इसका मतलब उन्हें कोई मान्यता नहीं है। अगर वे सही हैं तो नियमानुसार लेटरपैड से निर्देश जारी करें। जिससे उस निर्देश के खिलाफ कोई कोर्ट या फोरम में जाकर चैलेंज कर सके।
वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के पदाधिकारी का कहना है कि, वो पहले के पदाधिकारी थे तो उन्होंने पहले ऐसा क्यों नहीं किया कि खिलाड़ियों के लिए ओपन ट्रॉयल रखते। पहले वे अलग-अलग खिलाड़ियों को कॉल करके बुलाते थे।
इससे कई ग्रामीण खिलाड़ी छूट जाते थे। मैं जब सचिव बना तो मैंने ग्रामीण बच्चों को उठाने का काफी प्रयास किया है। आज यहां सब कुछ सही तरीके से चल रहा है। आज वे माहौल खराब कर रहे हैं और पॉलिटिक्स कर रहे हैं।
नेशनल स्तर पर खेलने का मौका आया, तो संघों ने रास्ता रोका- खिलाड़ी
ग्रामीण और छोटे कस्बों से आए कई खिलाड़ियों ने बताया कि, उन्होंने कठिन परिश्रम और आर्थिक तंगी झेलकर यहां तक सफर तय किया है। अब जब उनके सामने नेशनल स्तर पर खेलने का मौका आया, तो संघों की राजनीति ने रास्ता रोक दिया।
खिलाड़ियों का कहना है कि अगर सरकार और खेल विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो छत्तीसगढ़ के कई होनहार खिलाड़ी इस बार नेशनल टूर्नामेंट से वंचित रह जाएंगे।

एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश राव।
सभी खिलाड़ी आते तो बनती अच्छी टीम, डर की वजह से नहीं पहुंचे
एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश राव ने कहा कि, एकेएफआई ने दिल्ली में राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता के लिए छग की टीम का ट्रॉयल रखा था। इसमें राजनांदगांव, महासमुंद, दुर्ग, बिलासपुर के खिलाड़ी आए थे। दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ के सचिव पीला राम पारकर के मैसेज की वजह से कई खिलाड़ी नहीं आए।
अगर वे सभी खिलाड़ी आते तो प्रदेश की बहुत अच्छी कबड्डी टीम तैयार होती। खिलाड़ियों को हर जगह वे खेलने से रोक रहे हैं। हमारा कहना है कि आप खिलाड़ियों को क्यों रोक रहे हैं। अगर उन्हें आपत्ति है तो वे लिखित में लेटरपैड में आदेश जारी करें, ताकि हम उसे चैलेंज कर सकें। खिलाड़ियों को धमकी देकर रोकना गलत है।
कबड्डी के राष्ट्रीय अंपायर बोले- खिलाड़ियों के हित में बारे में नहीं सोच रहे लोग
इस मामले में कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर केशव सेठ ने कहा कि, अभी जो संघ ट्रॉयल ले रहा है। उसे सुप्रीम कोर्ट से मान्यता मिली है। उसी के आधार पर ट्रॉयल रखा गया है। लेकिन दूसरे गुट के लोग वॉट्सऐप पर मैसेज जारी कर खिलाड़ियों को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। वे खिलाड़ियों के हित के बारे में भी नहीं सोच रहे हैं।
जबकि पहले वे फर्जी खिलाड़ियों को खिलाते थे। हरियाणा समेत दूसरे प्रदेश क बच्चों को खिलाकर छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों की उपेक्षा की है। इन्हीं सब कारणों की वजह से प्रदेश में कबड्डी के दो गुट हो गए। जो सचिव बच्चों को धमका रहे हैं उन्हें खुद छग खेल एवं युवा कल्याण विभाग से मान्यता नहीं है।

कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर केशव सेठ।
अनुशासन में रहे खिलाड़ी इसलिए निकाला ऐसा आदेश
दुर्ग ग्रामीण कबड्डी संघ के सचिव पीला राम पारकर ने कहा कि, आपसी कुछ विवाद के बाद उन्होंने अलग फेडरेशन बनाया है। उनके फेडरेशन को भी मान्यता है। शुरू से बॉडी चली आ रही है उससे जुड़े हुए हैं। हमने ऐसा इसलिए कहा है कि खिलाड़ी अनुशासन में रहे। खिलाड़ी अलग-अलग फेडरेशन में खेलेंगे तो फेडरेशन की वैल्यू ही नहीं रह जाएगी। आज कल टूर्नामेंट पैसे वाले होने लगे हैं।
पैसे के चक्कर में खिलाड़ी भागा-दौड़ी कर रहे हैं। पैसे के चक्कर की वजह से खिलाड़ी फेडरेशन में खेलना पसंद नहीं कर रहे हैं। हमने ऐसा मैसेज इसलिए किया, ताकि खिलाड़ी एक ही जगह से खेलें। हमारे संघ ने भी यह क्लियर कर दिया है कि नई बॉडी में कोई भी खिलाड़ी हिस्सा न लें। दोनों फेडरेशन का केस चल रहा है। रही बात वॉट्सऐप पर मैसेज भेजने की तो मैं ऐसे ही सूचना जारी करता हूं, लेकिन रजिस्टर पर अलग से इंट्री करता हूं।

खेल
क्रिकेटर रिंकू सिंह ने पिता की अर्थी को कंधा दिया:टी-20 वर्ल्ड कप छोड़कर आए, बड़े भाई ने दी मुखाग्नि
अलीगढ़,एजेंसी। क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का शुक्रवार सुबह करीब 4.36 बजे निधन हो गया। वे 60 साल के थे। उन्हें फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर था। कुछ दिन पहले उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अलीगढ़ से ग्रेटर नोएडा के प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था।
वहां उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। पार्थिव शरीर को अलीगढ़ ले आया गया। रिंकू टी-20 वर्ल्ड कप छोड़कर चेन्नई से अलीगढ़ अपने घर पहुंचे। पिता की अर्थी को कंधा दिया। अंतिम यात्रा के बाद शंकर विहार स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे सोनू ने पिता को मुखाग्नि दी।
इससे पहले, पिता की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह मंगलवार को टीम इंडिया का साथ छोड़कर नोएडा पहुंचे थे। उन्हें टी-20 विश्वकप का प्रैक्टिस सेशन छोड़ना पड़ा था। 25 फरवरी को रिंकू चेन्नई लौट गए थे और टीम के साथ जुड़ गए थे।
हालांकि, 26 फरवरी को चेन्नई में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए सुपर-8 के मैच में वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे। वे सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर फील्डिंग कर रहे थे। क्रिकेटर विराट कोहली समेत तमाम क्रिकेटर्स और IPL टीमों ने रिंकू के पिता के निधन पर दुख जताया।
रिंकू की मंगेतर और मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज ने फोन पर दैनिक भास्कर से बात की। बताया- प्रिया कई दिनों से रिंकू के परिवार के साथ हैं। हम भी रात में गए थे। वापस आते वक्त रास्ते में निधन की सूचना मिली।

रिंकू सिंह ने पिता की अर्थी को कंधा दिया।

अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

रिंकू के बड़े भाई सोनू ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
रिंकू के पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे
क्रिकेटर रिंकू का बचपन काफी कठिनाई भरा रहा है। मां वीना देवी घर संभालती हैं। रिंकू 5 भाई और एक बहन में चौथे नंबर हैं। बड़े भाई सोनू, मुकुल और शीलू हैं। बहन नेहा और भाई जीतू, रिंकू से छोटे हैं। मूल रूप से बुलंदशहर के दान गढ़ के रहने वाले हैं।
KKR को दिए एक इंटरव्यू में रिंकू ने अपनी जिंदगी के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था-
परिवार में 5 भाई हैं। पापा सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। हम पांचों भाइयों से भी काम करवाते। हम बाइक पर 2-2 सिलेंडर रखकर होटलों और घरों में डिलीवर करने जाते थे। मैच खेलने के लिए पैसे लगते थे। घरवालों से मांगो तो कहते कि पढ़ाई करो। पापा खेलने के लिए मना करते थे, मम्मी सपोर्ट करती थीं।
KKR और RCB ने दुख जताया, लिखा- कठिन समय में हम रिंकू के साथ
IPL की टीमें कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने रिंकू के पिता के निधन पर दुख जताया। ‘X’ पर पोस्ट किया- रिंकू सिंह और उनके परिवार के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। इस कठिन समय में हम उनके साथ हैं।
राजीव शुक्ला बोले- कठिन घड़ी में मेरी संवेदनाएं रिंकू के साथ

BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने X पर लिखा- क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं रिंकू और परिवार के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
कोरबा
स्व.मेहता की पत्रकारिता आज भी समाज के लिए उदाहरण: सांसद महंत
बालको, कलेक्टर11, अधिवक्ता11 और शिक्षा विभाग की टीम ने सेमीफाइनल में बनाई जगह
कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब द्वारा घंटाघर मैदान में आयोजित स्व. केशवलाल मेहता क्रिकेट स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता 2026 में बतौर मुख्य अतिथि सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने उपस्थित होकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।

सांसद श्रीमती महंत ने कहा कि प्रेस क्लब कोरबा द्वारा स्व. केशवलाल मेहता की स्मृति में 22वें वर्ष क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इतने लंबे वर्षों तक कोई किसी को याद करे यह बहुत बड़ी बात है। वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मेहता की तरह बाबूजी स्वर्गीय बिसाहू दास महंत आज भी सबके दिलों में है। स्वर्गीय मेहता स्वतंत्र लेखनी के धनी थे। उनकी पत्रकारिता आज भी समाज के लिए उदाहरण है। उन्होंने समाज के लिए अच्छा किया है, इसलिए उन्हें आज भी याद किया जा रहा है। श्रीमती महंत ने कहा कि खेल में हारना जीतना तो लगा रहता है। खेल हमें एकता और प्रेम सिखाती है। खिलाड़ी सोचे कि अभी नहीं जीते तो अगली बार जीत जाएंगे। कभी खुद को कमजोर नहीं समझना चाहिए। जीवन में हर तरह की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़नी चाहिए।

श्रीमती महंत ने कहा कि स्व. केशवलाल मेहता क्रिकेट प्रतियोगिता में रनरअप की ट्रॉफी बाबूजी स्व. बिसाहू दास महंत की स्मृति में प्रदान करने की घोषणा डॉ. महंत ने की है। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीता है वह अमर हो जाता है। ठीक इसी तरह की जिंदगी वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मेहता और हमारे बाबूजी ने जी है। प्रतियोगिता में पहला मुकाबला एनटीपीसी और बालको के बीच खेला गया। एनटीपीसी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट होकर 85 रन बनाए। बालको ने लक्ष्य का पीछा 7.1ओवर चार विकेट खोकर हासिल कर लिया। बालको की टीम ने 6 विकेट से मुकाबला जीतकर से फाइनल में जगह बना ली। बालको के मंजय सिंह प्लेयर ऑफ द मैच रहे। दूसरा मुकाबला अधिवक्ता 11 और कमिश्नर 11 के बीच खेला गया। अधिवक्ता 11 ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 5 विकेट खोकर 134 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी कमिश्नर 11 की टीम 4 विकेट खोकर 121 रन ही बना सकी। इस तरह अधिवक्ता 11 ने 13 रन से मुकाबला जीत कर सेमीफाइनल में अपना स्थान पक्का किया।अधिवक्ता 11 के भोला सोनी मैन ऑफ द मैच रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश परसाई, कांग्रेस नेत्री उषा तिवारी, ग्रामीण जिला अध्यक्ष मनोज चौहान सहित वरिष्ठ पत्रकार गेंद लाल शुक्ला, कमलेश यादव, विजय क्षेत्रपाल, नरेंद्र मेहता, सुरेंद्र गुप्ता मंचस्थ रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट रूप से स्वर्गीय मेहता की पुत्री मुंबई निवासी इंदु सिंघवी, दामाद पंकज विशिष्ट भी शामिल हुए। इस अवसर पर प्रेस क्लब पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, सहित पत्रकार बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
सोमवार को होगी खिताबी भिड़ंत

स्वर्गीय केशवालाल मेहता क्रिकेट प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों का निर्णय हो चुका है। जिनके बीच आज शाम फाइनल में पहुंचने भिड़ंत होगी। पहले सेमीफाइनल मैच कलेक्टर 11 बनाम बालको 11 और दूसरा सेमीफाइनल शिक्षा विभाग बनाम अधिवक्ता 11 की टीम के बीच खेला जाएगा। सोमवार को प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला खेला जाएगा।
खेल
भारत ने विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स का खिताब जीता:फाइनल में बांग्लादेश को 46 रन से हराया, तेजल हसबनिस का नाबाद अर्धशतक
बैंकॉक,एजेंसी। इंडिया-ए ने विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026 का खिताब जीत लिया है। टीम ने रविवार को बैंकॉक में खेले गए फाइनल मुकाबले में बांग्लादेश को 46 रन से हराया।
भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया था। टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 134 रन बनाए। जवाब में बांग्लादेश की टीम 19.1 ओवर में 88 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारत के लिए तेजल हसबनीस ने नाबाद अर्धशतकीय पारी खेली। उन्होंने 34 बॉल पर नाबाद 51 रन बनाए। इसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

तेजल हसबनीस ने 34 बॉल पर नाबाद 51 रन बनाए।
भारत लगातार दूसरी बार चैंपियन बना
भारत लगातार दूसरी बार विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स टूर्नामेंट जीता है। इससे पहले टीम इंडिया ने 2023 में बांग्लादेश को हराकर खिताब अपने नाम किया था।
इस टूर्नामेंट का पहला एडिशन हॉन्गकॉन्ग में खेला गया था। फाइनल में भारत ने 20 ओवर में सात विकेट पर 127 रन बनाए थे। जवाब में बांग्लादेश की टीम 19.2 ओवर में सिर्फ 96 रन ही बना सकी।
राधा-हेजल के बीच 5वें विकेट के लिए 69 रन की पार्टनरशिप
भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। टीम ने 44 के स्कोर पर 4 विकेट गंवा दिए थे। वृंदा दिनेश 19, नंदीनी कश्यप और अनुष्का शर्मा 8-8, और मिनू मणी 0 पर आउट हो गईं।
4 विकेट गंवाकर संकट में फंसी भारतीय टीम को तेजल हसबनीस और कप्तान राधा यादव ने संभाला। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 69 रन की साझेदारी की।
टीम का स्कोर जब 113 रन था, उस समय राधा यादव के रूप में पांचवां विकेट गिरा। राधा ने 30 गेंदों पर 1 छक्का और 3 चौकों की मदद से 36 रन बनाए।
तेजल हसबनीस ने 34 गेंद पर 2 छक्कों और 3 चौकों की मदद से नाबाद 51 रन बनाकर आउट हुईं। इन दोनों की बदौलत भारतीय टीम ने 7 विकेट के नुकसान पर 134 रन बनाए थे।
बांग्लादेश की तरफ से कप्तान फाहिमा खातून ने 4 विकेट लिए। फरजाना एसमिन और फातिमा जहान सोनिया को 1-1 विकेट मिला।
प्रेमा रावत ने 3 विकेट लिए
135 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम 19.1 ओवर में 88 रन पर ऑलआउट हो गई। बांग्लादेश की तरफ से विकेटकीपर शमिमा सुल्ताना ने 20, सरमिन सुल्ताना ने 18, और कप्तान फहिमा खातुन ने 14 रन बनाए।
टीम की 7 बल्लेबाज दहाई का भी आंकडा नहीं छू सकीं। भारत की तरफ से प्रेमा रावत ने 3, सोनिया मेंधिया और तनुजा कंवर ने 2-2, जबकि सायमा ठाकोर और मिनू मणी ने 1-1 विकेट लिए।
दोनों टीमों की प्लेइंग-11
इंडिया-ए विमेंस: नंदिनी कश्यप, वृंदा दिनेश, तेजल हसबनिस, अनुश्का शर्मा, राधा यादव (कप्तान), ममता माडिवाला (विकेटकीपर), मिन्नू मणि, तनुजा कंवर, सोनिया मेंधिया, प्रेमा रावत, साइमा ठाकोर।
बांग्लादेश-ए विमेंस: इशमा तंजीम, शमीमा सुल्ताना (विकेटकीपर), सरमिन सुल्ताना, फहीमा खातून (कप्तान), लता मंडल, फरजाना इस्मिन, शोरीफा खातून, सादिया अख्तर, फातिमा जहां सोनिया, संजिदा अख्तर मेघला, फरिहा त्रिसना।
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