नई दिल्ली,एजेंसी। संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो गया। दोनों सदनों में SIR और वोट चोरी के आरोप के मुद्दे पर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही से पहले पीएम मोदी ने संसद के बाहर मीडिया से 10 मिनट बात की।
उन्होंने कहा, ‘विपक्ष हाल के चुनावों में पराजय की निराशा से बाहर निकले और सदन में मजबूत मुद्दे उठाए। अगर विपक्ष चाहे तो मैं उन्हें टिप्स देने के लिए तैयार हैं कि कैसे परफॉर्म किया जाए।’
PM ने कहा- यह सत्र पराजय की हताशा या विजय के अहंकार का मैदान नहीं बनना चाहिए। नई पीढ़ी के सदस्यों को अनुभव का लाभ मिलना चाहिए। यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए। यहां जोर नीति पर होना चाहिए, नारों पर नहीं।
PM ने इसके बाद राज्यसभा में नए सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया और उनके अभिवादन में स्पीच दी। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति का अभिवादन किया। खड़गे ने इस दौरान पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा- मुझे इस बात का दुख है कि सदन को पूर्व सभापति को फेयरवेल देने का मौका नहीं मिला। खड़गे की टिप्पणी पर भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पलटवार किया। नड्डा ने कहा- आपको बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र की हार ने काफी तकलीफ पहुंचाई है। आपको अपनी तकलीफ डॉक्टर को बताना चाहिए।
शीतकालीन सत्र के पहले दिन PM मोदी, लोकसभा में हंगामे की तस्वीरें…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, किरेन रिजिजू, राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और राज्य मंत्री एल. मुरगन के साथ मीडिया को संबोधित करने पहुंचे।
राज्यसभा में सभापति के तौर पर डॉ.सीपी राधाकृष्णन का आज पहला दिन था। इस मौके पर PM मोदी ने संबोधन के जरिए उनका स्वागत और अभिवादन किया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शीतकालीन सत्र के पहले दिन की कार्यवाही में शामिल हुए।
शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्षी सांसदों ने SIR के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया। सांसद अपनी-अपनी जगह पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।
किरेन रिजिजू ने ने कहा- सरकार SIR पर चर्चा के लिए तैयार,लेकिन समयसीमा न थोपें
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा को बताया कि सरकार SIR और चुनावी सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार है, और विपक्ष की बहस की मांग पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष से अपील कि वे इस पर कोई समयसीमा न थोपें। उन्होंने कहा, कल सर्वदलीय बैठक में या आज विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए किसी भी मुद्दे को कोई नजरअंदाज नहीं कर रहा है। यह सरकार के विचाराधीन है। यदि आप यह शर्त रखते हैं कि इसे आज ही उठाना होगा, तो यह कठिन हो जाता है, क्योंकि आपको थोड़ी गुंजाइश देनी चाहिए। SIR या चुनावी सुधार से जुड़ा मामला हो। आपने जो मांग रखी है उसे खारिज नहीं किया गया है। यह मत मानिए कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।
प्रियंका वाड्रा बोलीं- ASHA बहनें अपने हक के लिए लड़ रही
कांग्रेस सांसद प्रियंका वाड्रा ने X पोस्ट में लिखा- हमारी ASHA बहनें अपने हक के लिए लड़ रही हैं। उन्हें परमानेंट एम्पलॉई के तौर पर पहचान मिलना चाहिए। वे ग्रामीण हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ हैं। फ्रंटलाइन वर्कर हैं जो लाखों भारतीयों की सेवा करने के लिए हर मुश्किल का सामना करती हैं।
प्रियंका ने कहा कि उनके काम का दायरा बहुत बड़ा है और उनसे लंबे समय तक काम करने की उम्मीद की जाती है, इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी की सरकार उन्हें सही एम्पलॉई मानने से इनकार करती है।
उन्होंने कहा कि पार्लियामेंट में मेरे इस सवाल के जवाब में कि क्या केंद्र ASHA वर्कर्स को फॉर्मल एम्प्लॉई के तौर पर पहचान देने और उन्हें सोशल सिक्योरिटी देने का प्लान बना रहा है, सरकार ने बस यही दोहराया कि वे ‘वॉलंटियर’ हैं। यह बहुत बड़ा अन्याय है। ASHA वर्कर हफ्ते में 40 घंटे से ज्यादा समाज की सेवा करती हैं और उन्हें सिर्फ इतना मानदेय मिलता है जो मिनिमम वेज से बहुत कम है। भारत की महिलाएं इससे ज्यादा सम्मान की हकदार हैं। मैं सरकार से ASHA वर्कर्स को रेगुलर करने और उन्हें वह सम्मान और इज्जत दिलाने की गुजारिश करती हूं, जो उनका हक है।
AIADMK सांसद बोलीं- SIR पर चर्चा से सरकार बच रही
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के मुद्दे पर राज्यसभा से विपक्ष के वॉकआउट के बाद AIADMK सांसद कनिमोझी NVN सोमू ने सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
कनिमोझी ने कहा- SIR मुद्दा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में उठाया गया था और मंत्री ने इसे चर्चा के लिए स्वीकार भी किया था, लेकिन सदन में आते ही सरकार ने समय देने की बात कहकर मुद्दे को टाल दिया।
उन्होंने कहा कि यह शीतकालीन सत्र बहुत छोटा है। कुल 15 कार्य दिवस, जिनमें से निजी सदस्यों के विधेयकों को छोड़कर केवल 12 दिन ही चर्चा के लिए बचते हैं।
उन्होंने कहा कि जब पहले से 13 बिल सूचीबद्ध हैं, तो SIR पर चर्चा के लिए समय कब मिलेगा? सरकार लगातार समय मांगकर इस मुद्दे से बच रही है।
राज्यसभा 2 दिसंबर की सुबह 11 बजे तक स्थगित
राज्यसभा की कार्यवाही 2 दिसंबर की सुबह 11 बजे तक स्थगित की गई है।
संसदीय समितियों को दो बिलों पर रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय मिला
लोकसभा ने सोमवार को दो संसदीय समितियों को दिवाला कानून और जन विश्वास प्रावधान संशोधन बिल पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए और समय दिया। सदन ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए संसदीय समिति को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन तक का समय दिया है।
यह बिल लोकसभा में पेश किए जाने के तुरंत बाद 12 अगस्त को समिति को भेज दिया गया था। यह बिल दिवाला कानून में संशोधन का प्रयास करता है, जिसमें कई संशोधनों का प्रस्ताव है, जिसमें वास्तविक व्यावसायिक विफलताओं, समूह और सीमा पार दिवालियेपन ढांचों को संबोधित करने के लिए एक अदालत के बाहर तंत्र शामिल है।
लोकसभा ने एक अन्य संसदीय समिति को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025 पर अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए शीतकालीन सत्र के दूसरे सप्ताह के अंतिम दिन तक का समय दिया। सरकार ने 18 अगस्त को यह बिल पेश किया था, जिसे बाद में संसदीय समिति को भेज दिया गया था।
इस बिल का मकसद जीवन को आसान बनाने और कारोबारी माहौल में सुधार लाने के लिए विभिन्न कानूनों के तहत छोटे अपराधों से संबंधित 288 प्रावधानों को अपराधमुक्त करना है। यह दूसरा जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल है। इससे पहले 2023 में, सरकार ने एक समान कानून पारित किया था।
सीतारमण ने तंबाकू-पान मसाला पर सेस लगाने वाले दो बिल पेश किए
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में अपनी बात रखी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दो अहम बिल पेश किया। दोनों बिल उन उत्पादों पर नई कर व्यवस्था से जुड़े हैं, जिन पर अभी जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस लगता है- जैसे सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला।
इसके जरिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक्ट, 1944 में संशोधन कर सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद एक्साइज ड्यूटी के जरिए राजस्व संग्रह जारी रखा जाएगा। इसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 नाम दिया गया है।
वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस विधेयक, 2025 भी पेश किया। नया सेस उन उत्पादों पर लगेगा जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा जोखिम माना जाता है। पान मसाला जैसे उत्पादों पर यह सेस लगाया जाएगा।
तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक उत्पादों पर अभी 28% जीएसटी लगता है। क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद, तंबाकू और संबंधित उत्पादों की बिक्री पर 40% GST और उत्पाद शुल्क लगेगा, जबकि पान मसाला पर 40% GST और स्वास्थ्य सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस भी लगेगा।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन बिल में सिगार/चुरूट/सिगरेट पर 5,000 रुपए से लेकर 1,000 स्टिक पर 11,000 रुपए तक उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इसमें कच्चा तंबाकू पर 60-70% और निकोटीन और सूंघने वाले उत्पादों पर 100% टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। अभी सिगरेट पर कीमत के अनुसार 5% क्षतिपूर्ति सेस और 1,000 स्टिक पर 2,076-3,668 रुपए का सेस लगता है।
लुधियाना/महाराष्ट्र,एजेंसी। महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारा माता साहिब कौर में एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया। बादल के हाथ में चोट लगी है। हमले के दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने हमले के आरोपी निहंग जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सुखबीर बादल परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। हमले के बाद उन्हें यशोसाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सुखबीर बादल पर 4 दिसंबर 2024 को भी हमला हुआ था। गोल्डन टेंपल में सेवादार की धार्मिक सजा भुगतने के दौरान उन पर फायरिंग की गई थी।
सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।
हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।
यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।
महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए।
इस हमले के दौरान बादल के सुरक्षाकर्मी संतोष हेगड़े ने भी हमलावर को रोकने का प्रयास किया, जिसमें वह भी घायल हुआ। हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज तथा चश्मदीद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।
हमलावर को सम्मानित करने का दावा
इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह को सम्मानित किया गया। हालांकि, वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।
अकाली दल के प्रवक्ता बोले- सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश
इस मामले में अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि सुखबीर बादल पूरी तरह स्वस्थ हैं। मामला महाराष्ट्र का है, इसलिए वहां की पुलिस जांच करेगी कि हमलावर कौन है?। उसने किसके कहने पर हमला किया?।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश हो सकती है।
अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा- हमलावर सच्चा सिख नहीं
इस बारे में सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु सभी की भलाई के लिए अरदास करने आते हैं। सच्चा सिख किसी ऐसे व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता, जो गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आया हो। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से गुरुद्वारों की मर्यादा को ठेस और पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंची है।
2024 में भी हुआ था हमला
गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।
एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ के बीच से धीरे-धीरे सुखबीर बादल की ओर बढ़ा। उसने अपनी जेब से 9mm की पिस्टल निकाली और सीधे बादल पर निशाना साधकर गोली चला दी।
सुखबीर सिंह बादल पर 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर जानलेवा फायरिंग की गई थी। इसमें वह बाल-बाल बच गए थे।
यह हमला उस समय हुआ था जब वह अकाल तख्त की ओर से सुनाई गई एक धार्मिक सजा (तनखैया) काट रहे थे।
सुखबीर बादल को सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने धार्मिक रूप से दोषी घोषित किया था। यह सजा अकाली दल सरकार के दौरान हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के प्रायश्चित के रूप में दी गई थी।
उस दिन उनकी सजा का दूसरा दिन था। पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह व्हीलचेयर पर बैठे थे। गले में पट्टी लटकी हुई थी, नीली पोशाक पहने थे और हाथ में भाला लेकर द्वार पर पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।
भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।
उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।
वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें
मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।
राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।
मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।
उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।
हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।
चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।
एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।
चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा
चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।
इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।
हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”
इस्तीफे की 4 बड़ी वजह
चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद
फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।
24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।
नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।
एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।
टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं
टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।
चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा
चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।
रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क
टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन
टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।
समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।