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कोरबा

कोरबा में नशे में धुत स्कूल पहुंचा प्रिंसिपल

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घर वापस लौटे बच्चे, परिजनों ने लगाई क्लास, मानसिक प्रताडऩा का लग चुका है आरोप

कोरबा/ सोशल मीडिया। कोरबा के पसान इलाके के कर्री हाई स्कूल का प्रिंसिपल शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचा। उसकी हरकतों से परेशान होकर स्कूल के बच्चे घर वापस लौट गए। इसकी सूचना परिजनों को दी गई। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रिंसिपल को जमकर खरी खोटी सुनाई। प्रिंसिपल अनिल कुमार का नशे में धुत होने का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रिंसिपल नशे की हालत में दिखाई दे रहा है। वह अपनी गलती भी मान रहा है। इसकी सूचना पर गांव के सरपंच रोहणी बाई भी मौके पर पहुंची और शराबी प्रिंसिपल की हरकतों के बारे में जानकारी ली।

बार-बार शराब पीकर स्कूल आता है प्रिंसिपल

बताया जा रहा है कि प्रिंसिपल की इस हरकत से शिक्षक और बच्चे काफी परेशान हैं। इससे पहले प्रिंसिपल पसान क्षेत्र की लेंगा गांव में पदस्थ था। वहां भी शराब पीकर स्कूल में आता था। बार-बार मना करने के बावजूद भी वह नशे की हालत में स्कूल पहुंचा था, जिससे स्कूल प्रबंधन परेशान था। मानसिक रूप से परेशान होकर कई स्कूल शिक्षकों ने प्रिंसिपल की अपना ट्रांसफर करा लिया था।

शिकायत के बाद कर्री हाई स्कूल में किया गया पदस्थ

ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से की थी। शिकायत के बाद प्रिंसिपल अनिल कुमार को पसान के कर्री हाई स्कूल में पदस्थ किया गया। जहां प्रिंसिपल की हरकतें वैसे के वैसी है। एक बार फिर से शराब के नशे में स्कूल पहुंच गया। इस दौरान अन्य शिक्षकों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन वह अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ।

बच्चों पर पड़ रहा असर

ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पहले भी प्रिंसिपल की इस तरह की करतूत सामने आ चुकी है और कलेक्टर से भी शिकायत की जा चुकी है। गांव के सरपंच रोहणी ने बताया कि ऐसे शिक्षक पर कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों के परिजनों ने कहा कि अगर स्कूल का प्रिंसिपल अगर इस तरह का कार्य करेंगे तो बच्चों पर इसका कैसा असर होगा।

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कोरबा

अब संपूर्ण न्यूरो केयर एक ही छत के नीचे, NKH में शुरू हुई एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी

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कोरबा। जिले के प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल न्यू कोरबा हॉस्पिटल में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में अस्पताल के न्यूरो केयर विभाग को और मजबूत करते हुए अब न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-साइकेट्री और न्यूरो फिजियोथैरेपी की संपूर्ण सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।
अस्पताल में न्यूरोसर्जन डॉ. शिवानी द्वारा अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव (दूरबीन) तकनीक से स्पाइन सर्जरी की सुविधा भी शुरू की गई है। इस तकनीक के माध्यम से बिना बड़े चीरे के रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया जा रहा है, जिससे मरीज को कम दर्द होता है और सर्जरी के बाद कुछ ही दिनों में मरीज को डिस्चार्ज भी कर दिया जाता है। अस्पताल में 24 घंटे आपातकालीन सेवा भी उपलब्ध है, जहां देर रात गंभीर मरीज आने पर भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तत्काल उपचार शुरू कर देती है।
अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने बताया कि न्यूरो संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए अब कोरबा के मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं है। एनकेएच में ही उच्चस्तरीय उपचार मिलने से मरीजों और उनके परिजनों के समय, खर्च और परेशानी तीनों में कमी आ रही है।

कोरबा में पहली बार एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी

न्यू कोरबा हॉस्पिटल (NKH) में पहली बार एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। इस आधुनिक तकनीक में दूरबीन की सहायता से रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन किया जाता है, जिससे मरीज को कम दर्द, कम समय में रिकवरी और जल्दी सामान्य जीवन में लौटने का लाभ मिलता है।

आयुष्मान सहित सभी बीमा सुविधाएं उपलब्ध

अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के अलावा सभी प्रमुख निजी हेल्थ कार्ड और बीमा योजनाएं भी स्वीकार की जाती हैं, जिससे मरीजों को आर्थिक राहत मिलती है।

न्यूरो-साइकेट्रिक रोगों का उपचार प्रांरभ

अहमदाबाद की अनुभवी मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी वर्मा द्वारा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का आधुनिक और प्रभावी इलाज संभव हो रहा है। जिलों के मरीजों के लिए भी काफी लाभकारी साबित हो रही है।

न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-साइकेट्रिक और फिजियोथैरेपी में अंतर

अक्सर दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारियों में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-साइकेट्रिक और फिजियोथैरेपी को एक ही समझ लिया जाता है, जबकि ये चारों अलग-अलग चिकित्सा विशेषज्ञताएँ हैं और प्रत्येक की भूमिका अलग होती है।
न्यूरोलॉजी दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी बीमारियों का बिना ऑपरेशन इलाज करने वाली चिकित्सा शाखा है। न्यूरोलॉजिस्ट रोग की पहचान कर दवाओं के माध्यम से उपचार करते हैं। सरल शब्दों में, नसों की बीमारी का दवा से इलाज न्यूरोलॉजी में किया जाता है। न्यूरोसर्जरी उन रोगों का इलाज करती है, जिनमें सर्जरी की आवश्यकता होती है। न्यूरोसर्जन दिमाग और रीढ़ की हड्डी की सर्जरी करते हैं। ब्रेन ट्यूमर, सिर की गंभीर चोट, ब्रेन ब्लीड, स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस, स्ट्रोक में खून का थक्का निकालना, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, हाइड्रोसेफेलस और एन्यूरिज्म जैसी जटिल समस्याओं का सर्जिकल उपचार इसी विभाग में किया जाता है। न्यूरो-साइकेट्रिक उस क्षेत्र में काम करते हैं जहाँ ऐसी मानसिक बीमारियां जिनका कारण मस्तिष्क की शारीरिक खराबी (brain disease) हो, जैसे व्यवहार में अचानक बदलाव, डिमेंशिया के साथ व्यवहारिक लक्षण, मिर्गी के साथ मनोविकृति (psychosis), या स्ट्रोक के बाद अवसाद (depression) को ठीक करता है। फिजियोथैरेपी बीमारी या सर्जरी के बाद मरीज को दोबारा सामान्य जीवन में लौटाने में मदद करती है। फिजियोथैरेपिस्ट व्यायाम और विशेष थेरेपी के माध्यम से ताकत, संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता बढ़ाते हैं। न्यूरोसर्जरी के बाद तथा मांसपेशियों की कमजोरी के मामलों में फिजियोथैरेपी बेहद जरूरी होती है। सरल भाषा में कहें तो न्यूरोलॉजिस्ट दवा से इलाज करते हैं, न्यूरोसर्जन सर्जरी करते हैं, न्यूरो-साइकेट्रिक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करती है और फिजियोथैरेपिस्ट मरीज को फिर से सामान्य चलने-फिरने लायक बनाते हैं।

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कोरबा

एस.ई.सी.एल. (SECL) द्वारा वादाखिलाफी से नाराज भू-विस्थापित फिर आंदोलन को मजबूर, 18 मार्च से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान

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कोरबा/गेवरा। एस.ई.सी.एल. (SECL) गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरईबोध और प्रभावित ग्राम तहसील दीपका जिला कोरबा के भू-विस्थापित ग्रामीणों ने एक बार फिर से प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। प्रबंधन द्वारा बसाहट मुआवजा और वैकल्पिक रोजगार के वादे पूरे न करने से नाराज होकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने 18 मार्च 2026 से गेवरा क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा की है ।

टूटे वादों की दास्तां

विगत माह ग्रामीण अपनी जायज मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे। दिनांक 08/03/2026 को एस.ई.सी.एल. प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था कि 3 लोगों को वैकल्पिक रोजगार तुरंत दिया जाएगा और बाकी लोगों का बी-फॉर्म भी उसी तारीख से भराने की प्रक्रिया शुरू की जाएंगी। इस ठोस लिखित आश्वासन पर विश्वास करते हुए ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था ।

ताज़ा घटनाक्रम और नाराज़गी

प्रेस बयान में प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने उन्हें झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया है, पिछले 2-3 महीनों से लगातार रोजगार के लिए टालमटोल किया जा रहा है। वादा किए गए किसी भी बिंदु पर अमल नहीं हुआ है ।

प्रबंधन की इस वादाखिलाफी और तानाशाही रवैये से त्रस्त होकर ग्राम नरईबोध और प्रभावित क्षेत्र के समस्त पीड़ित भू-विस्थापित परिवार एक बार फिर से आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं ।

प्रमुख मांगें:-
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी निम्नलिखित मांगों का स्थायी निराकरण नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा:-

  1. प्रभावित क्षेत्र के सभी पात्र भू-विस्थापितों को तत्काल स्थायी रोजगार प्रदान किया जाए ।
  2. उचित बसाहट और मुआवजा राशि का वितरण अविलंब किया जाए ।
  3. वैकल्पिक रोजगार की रुकी हुई प्रक्रिया को तुरंत बहाल किया जाए ।

अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा

यदि दिनांक 17 मार्च 2026 तक उपरोक्त समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो 18 मार्च 2026 से ग्राम नरईबोध और प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण एस.ई.सी.एल. गेवरा क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह एक शांतिपूर्ण आंदोलन होगा, लेकिन अपनी मांगों को लेकर वे अडिग हैं ।

प्रबंधन की जिम्मेदारी

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा है कि यदि इस आंदोलन के दौरान किसी भी ग्रामीण को कोई क्षति पहुँचती है, या क्षेत्र में अशांति पैदा होती है, तो इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी एस.ई.सी.एल. प्रबंधन की होगी। प्रशासन को भी इस विषय में सूचित कर दिया गया है ।

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कोरबा

कोरबा जिले के प्रगतिशील मत्स्य कृषकों का अध्ययन भ्रमण सफल, कलेक्टर से की मुलाकात

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कोरबा। मछली पालन विभाग द्वारा कोरबा जिले के प्रगतिशील मत्स्य कृषकों को राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा गया था। हितग्राही किसान भुवनेश्वर तथा कौशल्या गंगा में स्थित प्रशिक्षण केंद्रों में पहुँचे, जहाँ उन्होंने उन्नत एवं वैज्ञानिक मछली पालन तकनीकों की जानकारी हासिल की।

भ्रमण से लौटने के बाद आज कृषकों ने कलेक्टर कुणाल दुदावत से मुलाकात की। कलेक्टर ने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई विधियों पर चर्चा की और कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर न केवल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, बल्कि आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने किसानों को प्राप्त ज्ञान के आधार पर प्रभावी कार्य-योजना बनाकर जिले में मछली पालन को और अधिक प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए तथा उन्हें शुभकामनाएँ भी दीं।
इस अवसर पर मत्स्य विभाग के सहायक संचालक क्रांति कुमार बघेल भी उपस्थित रहे।

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