देश
वन नेशन-वन इलेक्शन JPC के लिए प्रियंका का नाम:कांग्रेस ने 3 और सांसदों को नॉमिनेट किया; लोकसभा में कल हुआ था बिल का विरोध
नई दिल्ली,एजेंसी। एक देश, एक चुनाव के लिए संसद में मंगलवार को पेश हुए 129 वें संविधान (संशोधन) बिल की समीक्षा के लिए बनने वाली जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) में कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हो सकती हैं।
कांग्रेस ने JPC के लिए चार सांसदों के नाम नॉमिनेट किए हैं। इनमें प्रियंका के अलावा मनीष तिवारी, रणदीप सिंह सुरजेवाला और सुखदेव भगत सिंह शामिल हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने साकेत गोखले और कल्याण बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया है।
बीते दिन बिल पेश किए जाने पर विपक्ष के विरोध को देखते हुए अमित शाह ने सदन में कहा कि बिल जब कैबिनेट में आया था, तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजना चाहिए। कानून मंत्री ऐसा प्रस्ताव कर सकते हैं।
वोटिंग के बाद एक देश-एक चुनाव के लिए बिल दोबारा पेश हुआ
कानून मंत्री मेघवाल ने 17 दिसंबर को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव को लेकर संविधान संशोधन बिल रखा था। विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। इसके बाद बिल पेश करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई गई। कुछ सांसदों की आपत्ति के बाद वोट संशोधित करने के लिए पर्ची से दोबारा मतदान हुआ।
इस वोटिंग में बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। इसके बाद कानून मंत्री ने बिल दोबारा सदन में रखा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा बिल पेश होते समय लोकसभा में अनुपस्थित रहे 20 सांसदों को नोटिस भेजेगी। पार्टी ने सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया था।
एक देश-एक चुनाव क्या है…
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे।
आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
एक देश-एक चुनाव के लिए बनाई गई समिति ने मार्च में राष्ट्रपति को सौंपी थी रिपोर्ट
एक देश-एक चुनाव पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने करीब 191 दिनों में स्टेकहोल्डर्स और एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 14 मार्च, 2024 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी।
एक देश-एक चुनाव को लागू करने के लिए संविधान संशोधन के जरिए संविधान में 1 नया अनुच्छेद जोड़ने और 3 अनुच्छेदों में संशोधन करने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार इस मुद्दे पर आम सहमति बनाना चाहती है, लिहाजा बिल को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) को भेजे जाने की संभावना है।
देश
राहुल गांधी का बड़ा बयान- देश में 10 सालों में 152 पेपर लीक हुए हैं
नई दिल्ली, एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद मार्ग और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आरोप लगाया है कि देश की शिक्षा व्यवस्था न केवल भ्रष्ट हो चुकी है, बल्कि यह सामान्य परिवारों की पहुंच से भी बाहर होती जा रही है।

राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखीं ये 3 प्रमुख मांगें
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को परीक्षा घोटालों और प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
- प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करने वाले सुरक्षाकर्मियों व अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ और उन पर हुए अत्याचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद सामने आकर छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
10 वर्षों में 152 पेपर हुए लीक लेकिन एक भी सजा नहीं
कांग्रेस नेता ने आंकड़े जारी करते हुए कहा कि बीते 10 सालों में 152 पेपर लीक हुए हैं। लेकिन इनमें पाए गए दोषियों को सजा नहीं हुई है। राहुल गांधी के अनुसार, इन घोटालों से देश के लगभग 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवारवाले इससे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि जहाँ सरकार का कुल शिक्षा बजट करीब ₹1.4 लाख करोड़ है, वहीं अकेले NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी में देश के परिवार लगभग ₹1.32 लाख करोड़ खर्च कर देते हैं। इसके बावजूद अंत में उन्हें पेपर रद्द होने या लीक होने की खबर मिलती है।
मुझे अपनी चिंता नहीं: प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गाँधी
राहुल गांधी ने बताया की बीते दिन संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा जब उन्हें हिरासत में लिया गया और उनके साथ धक्का- मुक्की की घटना हुई तो मेरे मुंह से खून निकल रहा था। लेकिन मुझे अपनी कोई परवाह नहीं है। मेरे साथ चाहे पांच गुना बुरा व्यवहार हो, ध्यान छात्रों के मुख्य मुद्दे से नहीं भटकना चाहिए।” इसी के साथ उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें 1000% जायज हैं और कांग्रेस पार्टी उनके हक की लड़ाई में अंत तक साथ खड़ी रहेगी।
देश
ईरान-अमेरिका तनाव का असर, एयर इंडिया ने ‘तेल अवीव-दिल्ली’ उड़ानें सितंबर के अंत तक रोकी
नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में फिर से बढ़े तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच एअर इंडिया ने बुधवार को कहा कि उसने ‘तेल अवीव-दिल्ली’ वायुमार्ग पर अपनी उड़ानों का निलंबन सितंबर के अंत तक के लिए बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया में मौजूदा सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर एअर इंडिया पिछले कई महीनों से इस मार्ग पर उड़ान सेवाओं का निलंबन लगातार बढ़ाती आ रही है। अमेरिका और ईरान द्वारा सैन्य गतिविधियां तेज किए जाने के बाद पिछले 10 दिनों में उत्पन्न हुई नई सुरक्षा चिंताओं के बीच यह घोषणा की गई है। इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने ईरान में पुलों, जल विलवणीकरण संयंत्रों और बिजली सुविधाओं को निशाना बनाया है, जबकि तेहरान ने इसके जवाब में पूरे पश्चिम एशियाई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं।

इजराइल में एअर इंडिया के परिचालन की व्यवस्था देखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सुरक्षा चिंताओं के कारण उड़ानों का निलंबन सितंबर के अंत तक बढ़ा दिया गया है। क्षेत्र में जारी तनाव को देखते हुए कई अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियां भी प्रतीक्षा और निगरानी की नीति अपना रही हैं। अमेरिका-ईरान संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जिसके बाद एअर इंडिया ने पहले अप्रैल में इस मार्ग पर उड़ानों का निलंबन मई के अंत तक करने की घोषणा की थी। बाद में इसे जुलाई के अंत तक बढ़ाया गया और अब इसे सितंबर के अंत तक बढ़ा दिया गया है। एअर इंडिया की उड़ानें निलंबित रहने से इजराइल में रह रहे 40,000 से अधिक भारतीयों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो निजी या पेशेवर कारणों से भारत जाना चाहते हैं या क्षेत्र में जारी अनिश्चितता के बीच यहां से बाहर निकलना चाहते हैं।
खेल
पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख ठगी का आरोप:नवीन जिंदल से पहचान बताकर काम में पार्टनर बनाने ठेकेदार को फंसाया, FIR के आदेश
दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर ठेकेदार से फ्रॉड किया गया। अब कोर्ट ने उन पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पीड़ित दिनकर विश्वमित्र का कहना है कि, राजेश चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए उद्योगपति नवीन जिंदल से करीबी संबंध होने का दावा किया था। भरोसा दिलाने के लिए जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर भी दिखाया और ट्रांसपोर्ट के काम में पार्टनर बनाने की बात कही। बाद में पता चला कि पूरा दस्तावेज फर्जी था।
पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) कोर्ट ने मोहन नगर पुलिस को केस दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है। वर्तमान में राजेश चौहान बिजनेसमैन और क्रिकेट एकेडमी के संचालक हैं।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है।
दोस्त के जरिए हुई पहचान, करोड़ों के काम का दिया लालच
पीड़ित दिनकर विश्वमित्र ने कोर्ट में बताया कि, उसकी मुलाकात दोस्त सरोज कुमार के जरिए राजेश चौहान से हुई थी। बातचीत के दौरान राजेश ने कहा कि उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन और अन्य सामग्री के ट्रांसपोर्ट का बड़ा ठेका मिला है।
अगर वह ट्रक लगाकर इस काम में पार्टनर बनता है, तो उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा। भरोसा बढ़ाने के लिए आरोपी ने जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज भी दिखाए। इन्हें देखकर दिनकर ने साझेदारी के लिए हामी भर दी।

इंडिया टीम के लिए 35 वनडे खेल चुके हैं राजेश चौहान।
इकरारनामा हुआ, फिर अलग-अलग किस्तों में लिए 17.52 लाख रुपए
शिकायत के अनुसार, 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा हुआ। उसी दौरान दिनकर ने 2.51 लाख रुपए का पहला भुगतान किया। इसके बाद आरोपी के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो किस्तों में 15.01 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए।
इस तरह आरोपी ने कुल 17.52 लाख रुपए ले लिए। पीड़ित को भरोसा था कि जल्द ही ट्रांसपोर्ट का काम शुरू होगा, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी न तो काम मिला और न ही किसी तरह का फायदा।

भारत के लिए राजेश चौहान 21 टेस्ट मैच खेल चुके हैं।
जिंदल प्लांट पहुंचने पर खुला पूरा मामला
जब लंबे समय तक कोई काम शुरू नहीं हुआ तो दिनकर खुद ओडिशा स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड पहुंचा। वहां कंपनी अधिकारियों से जानकारी लेने पर उसे पता चला कि राजेश चौहान या उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ऐसा कोई ट्रांसपोर्ट ठेका कभी दिया ही नहीं गया था।
पीड़ित का आरोप है कि उसे जो वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज दिखाए गए थे, वे फर्जी थे। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
पुलिस से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
पीड़ित ने मोहन नगर थाना और दुर्ग के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दी। उसका आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता सौरभ चौबे के माध्यम से न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत आवेदन लगाया।
कोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया बनता है मामला
इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान ने आवेदन के साथ पेश किए गए बैंक लेन-देन, इकरारनामा और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है और इसकी जांच जरूरी है।
इसके बाद कोर्ट ने मोहन नगर थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर विधि अनुसार जांच करने और अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है।
कौन हैं पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान?
राजेश चौहान भारत के पूर्व ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। उन्होंने 1993 से 1998 के बीच भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। 90 के दशक में वे अनिल कुंबले और वेंकटपति राजू के साथ भारत की स्पिन तिकड़ी का अहम हिस्सा रहे।
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