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Amazon की Recommended USB ड्राइव्स पर सवाल, फर्जी स्टोरेज क्षमता की शिकायतों से उपभोक्ता चिंतित
नई दिल्ली, एजेंसी। एमेज़ॉन के अमरीका और जापान प्लेटफॉर्म पर ‘रिकमैंडेड’ के रूप में दिखाई जा रही कुछ यूएसबी ड्राइव्स की वास्तविक स्टोरेज क्षमता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। निक्केई एशिया की एक जांच में दावा किया गया है कि इन उत्पादों में से कई के खिलाफ उपभोक्ताओं ने फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई स्टोरेज क्षमता की शिकायतें दर्ज कराई हैं। रिपोर्ट ने ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उपभोक्ताओं के भरोसे और उत्पादों की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी है।

निक्केई एशिया ने एमेज़ॉन के अमरीकी और जापानी प्लेटफॉर्म पर ‘रिकमैंडेड’ के तौर पर दिखाई देने वाली 200 यूएसबी ड्राइव लिस्टिंग की समीक्षा की। जांच में पाया गया कि अमरीका की करीब 40 प्रतिशत लिस्टिंग और जापान की लगभग 10 प्रतिशत लिस्टिंग पर कई उपभोक्ताओं ने स्टोरेज क्षमता वास्तविक से कम होने की शिकायत की थी। कुल मिलाकर लगभग हर 5वीं लिस्टिंग पर इस प्रकार की आपत्तियां दर्ज मिलीं।
परीक्षण में दावे से कम निकली स्टोरेज
रिपोर्ट के अनुसार निक्केई ने चीन के विभिन्न ब्रांडों की 5 कम कीमत वाली यूएसबी ड्राइव्स खरीदकर उनकी क्षमता का परीक्षण किया। परीक्षण में सभी ड्राइव्स की उपयोग योग्य स्टोरेज विज्ञापित क्षमता से कम पाई गई। इससे संकेत मिलता है कि समस्या केवल किसी एक विक्रेता या ब्रांड तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि कम कीमत वाले कुछ उत्पादों में यह व्यापक रूप से मौजूद हो सकती है।
डाटा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार फर्जी क्षमता वाली फ्लैश ड्राइव्स में कंट्रोलर सॉफ्टवेयर के जरिए स्टोरेज क्षमता वास्तविक से अधिक दिखाई जाती है। शुरुरूआत में फाइलें सामान्य रूप से कॉपी होती हैं, लेकिन वास्तविक मेमोरी भर जाने के बाद नई फाइलें पुरानी फाइलों को ओवरराइट कर सकती हैं या डाटा बिना किसी चेतावनी के खराब हो सकता है। ऐसे में फोटो, वीडियो, कार्यालयी दस्तावेज या बैकअप सुरक्षित रखने वाले उपयोगकर्त्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एमेज़ॉन ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
एमेज़ॉन ने निक्केई एशिया को बताया कि वह रिपोर्ट में उठाए गए दावों की समीक्षा कर रहा है और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां उचित कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को केवल कम कीमत या ‘रिकमैंडेड’ टैग पर भरोसा करने के बजाय विश्वसनीय ब्रांडों का चयन करना चाहिए, ग्राहक समीक्षाओं को ध्यान से पढ़ना चाहिए और महत्वपूर्ण डेटा का हमेशा अलग माध्यम पर बैकअप रखना चाहिए।
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सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
क्यों सस्ता होगा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे
सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।
निवेशकों के लिए सलाह
का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।
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RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%
मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।
RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।
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देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर
नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।
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