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राधिका मर्डर केस, एक्सपर्ट्स ने जांच पर सवाल उठाए:बोले- पुलिस आरोपी के बयान में ही उलझी, कोर्ट में मुकर गया तो क्या करेंगे

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गुरुग्राम,एजेंसी। हरियाणा में गुरुग्राम के हाई प्रोफाइल टेनिस प्लेयर राधिका यादव मर्डर केस में आरोपी पिता के स्टेटमेंट पर टिकी पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े हाे रहे हैं। क्रिमिनल लॉयर, रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों और कानून के जानकारों का मानना है कि पुलिस को बाकी एंगल पर भी काम करना चाहिए।

इस केस के बारे में अधिकतर एक्सपर्ट ने सीधे तौर पर पुलिस की इन्वेस्टिगेशन को एकतरफा बताया और कहा कि पुलिस को दिए आरोपी के बयान कोर्ट में ज्यादा मायने नहीं रखते। वह कोर्ट में मुकर गया तो पुलिस क्या करेगी? कोर्ट सबूत और गवाहों के आधार पर डिसीजन लेता है।

इस तरह के फैमिली मर्डर केस में अगर एक ही थ्योरी पर पुलिस चैप्टर बंद कर देती है तो क्रिमिनल को फायदा मिलने की संभावना बढ़ जाती है। राधिका की हत्या ने न केवल सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर हलचल मचाई है, बल्कि कानूनी दृष्टिकोण से भी यह मामला जटिल और विवादास्पद बन सकता है।

बता दें कि 10 जुलाई को गुरुग्राम में टेनिस प्लेयर राधिका यादव की उसके पिता दीपक यादव ने 4 गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। पिता ने पुलिस को बताया कि वह बेटी की कमाई खाने के लोगों के तानों से परेशान था। बेटी ने उसकी एकेडमी बंद करने की बात नहीं मानी, इसलिए उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी के इसी बयान के बाद अपनी कार्रवाई को सीमित कर रखा है।

आरोपी दीपक यादव इस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। -फाइल फोटो

आरोपी दीपक यादव इस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। -फाइल फोटो

गुरुग्राम की टेनिस प्लेयर राधिका यादव, जिसका 10 जुलाई को पिता ने गोलियां मारकर कत्ल किया।- फाइल फोटो

गुरुग्राम की टेनिस प्लेयर राधिका यादव, जिसका 10 जुलाई को पिता ने गोलियां मारकर कत्ल किया।- फाइल फोटो

पुलिस की जांच पर कानून के जानकारों ने क्या-क्या सवाल उठाए…

सीनियर एडवोकेट बोले- आरोपी के बयान को आधार बनाना खतरनाक

इस मामले पर पुलिस की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय पाल का कहना है कि किसी भी मर्डर केस की जांच में आरोपी के बयान को प्राथमिक आधार बनाना खतरनाक है।

इस मामले में गहन और वैज्ञानिक जांच की जरूरत है, जिसमें फोरेंसिक सबूत, गवाहों के बयान और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण शामिल हो। केवल आरोपी के बयान पर निर्भर रहना कानूनी प्रक्रिया की गंभीर चूक है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के एक स्कूल के स्टूडेंट्स मर्डर केस में ऐसा हो चुका है, जब पुलिस ने एक ही थ्योरी पर काम करते हुए गलत व्यक्ति को पकड़ लिया था। अगर पुलिस की जांच में खामियां रहती हैं, तो यह बचाव पक्ष के लिए मजबूत आधार हो सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर क्राइम सीन से सबूत ठीक से एकत्र नहीं किए गए या चेन ऑफ कस्टडी में गड़बड़ी हुई, तो यह कोर्ट में साक्ष्यों की स्वीकार्यता को प्रभावित कर सकता है।

अजय पाल ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 24 इस मामले के बीच में आएगी। अगर अभियुक्त कहता है कि उसने हत्या नहीं की और ऐसा कोई बयान नहीं दिया, तो उसे फायदा पहुंच सकता है।

यानी यह घोड़े के आगे गाड़ी जोड़ने जैसा है, न कि घोड़े के पीछे गाड़ी जोड़ने जैसा। यह बेहद मुश्किल है कि एक प्रगतिशील और आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति ने लोगों के ताने सुनकर अपनी बेटी को मार दिया हो।

हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट ने कहा- मुझे जांच की निष्पक्षता पर संदेह

वहीं, हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट अजय चौधरी कहते हैं- राधिका मर्डर केस में पुलिस की प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता पर मुझे संदेह है। पुलिस अपनी प्रारंभिक जांच को ही अंतिम मान रही है। आरोपी दीपक यादव ने जो दावा किया कि वह गांववालों के तानों से तंग आ चुके थे। यह बात किसी के भी गले नहीं उतर रही।

एडवोकेट अजय चौधरी ने कहा- पुलिस ने काफी लोगों से पूछताछ की है, लेकिन जांच का दायरा मुख्य रूप से दीपक के बयान तक सीमित रहा है। क्या यह हत्या पारिवारिक विवाद, आर्थिक लेन-देन या किसी अन्य गहरे कारण से हुई? पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी संभावना छूटे नहीं।

रिटायर इंस्पेक्टर ने मृतक के दोस्तों और करीबियों से बात करने पर जोर दिया

राष्ट्रपति से अवॉर्ड पा चुके एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राधिका मर्डर केस में जब पुलिस के पास आरोपी, हथियार और वजह आ जाती है और केस फैमिली के अंदर का है तो अमूमन पुलिस अपनी जांच का दायरा सीमित कर देती है।

हालांकि, पुलिस के पास राधिका के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनके निजी संबंधों की जांच का ऑप्शन है। क्योंकि यह संभव है कि कुछ डिजिटल सबूत मिटाए गए हों।

उन्होंने कहा- क्या पुलिस ने क्राइम सीन को ठीक से सुरक्षित किया? क्या फोरेंसिक साक्ष्यों का सही विश्लेषण किया गया? इन सवालों के जवाब जरूरी हैं। अगर क्राइम सीन को तुरंत सुरक्षित नहीं किया गया, तो महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं।

मां के बयान, राधिका की बेस्ट फ्रेंड का दावा करने वाली लड़की, राधिका और दीपक के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति, आदि से पुलिस को बात करनी चाहिए।

टेनिस प्लेयर राधिका यादव की फाइल फोट

टेनिस प्लेयर राधिका यादव की फाइल फोट

क्रिमिनल लॉयर बोले- इकबालिया बयान आरोप साबित नहीं करता

केस को शुरू से फॉलो कर रहे गुरुग्राम के सीनियर क्रिमिनल लॉयर मनीष शांडिल्य का कहना है- मैं पहले दिन से इस मामले को देख रहा हूं। चार्जशीट दाखिल होने तक पुलिस हर एंगल से जांच कर सकती है और करनी भी चाहिए। क्योंकि यह पुलिस का अधिकार क्षेत्र है।

इकबालिया बयान किसी भी आरोप को साबित नहीं करता। जांच एजेंसी हर दृष्टिकोण से जांच कर सकती है, ताकि अदालत में जुर्म साबित करने में कोई संदेह न रह जाए।

उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह सामने नहीं आया है, जिसने आरोपी को गोली चलाते हुए देखा हो। जांच एजेंसी को इस केस को कड़ी से कड़ी जोड़कर अदालत में साबित करना होगा, जिसमें गन और बुलेट की रिकवरी, फिंगर प्रिंट्स, एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अहम पहलू होंगे।

इनके अलावा सीसीटीवी फुटेज और मृतक के मोबाइल भी खंगाले जाने चाहिए। कड़ी जोड़ना इसलिए भी जरूरी है कि कहीं इसमें किसी और की कोई भूमिका तो नहीं है।

मनीष शांडिल्य ने कहा कि राधिका की मां मंजू यादव की चुप्पी को कोर्ट में उनके खिलाफ नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह उनका संवैधानिक अधिकार है। लेकिन, यह जांच को और जटिल बनाता है, क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण गवाह हो सकती हैं।

दीपक यादव के दोस्त ने कहा- ताने सुनकर कोई गोली नहीं मार सकता

सेक्टर 57 रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के प्रेजिडेंट और दीपक यादव के दोस्त पवन यादव का कहना है कि वह दीपक को काफी समय से जानते हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि हत्या की जो वजह दीपक ने पुलिस को बताई है, वह सच है।

उन्होंने कहा- जो व्यक्ति अपनी बेटी से इतना प्यार करता हो और अपना सारा जीवन उसी के करियर के लिए लगा दे, वह केवल ताने सुनकर बेटी को 4 गोलियां नहीं मार सकता।

अब जानिए, मामले में पुलिस ने क्या किया…

आरोपी पिता ताने वाले बयान पर कायम

पुलिस के मुताबिक, राधिका की हत्या को लेकर इंस्टाग्राम रील से लेकर उसके वीडियो सॉन्ग जैसी कई थ्योरी भले ही चल रही हों, लेकिन पुलिस आरोपी पिता दीपक बेटी की कमाई खाने के ताने और टेनिस की ट्रेनिंग बंद न किए जाने से नाराजगी के बयान पर कायम है।

पिता ने पुलिस से कहा कि वह पिछले 15 दिन से काफी परेशान था। कहीं भी जाते हुए उसे लगता था कि अगर 2 आदमी भी बात करते दिखते हैं, तो वे उसके बारे में ही बात कर रहे हैं। इसी वजह से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। राधिका ने गांव वालों की बातों को नजरअंदाज करने के लिए कहा था, लेकिन यह बात वह समझ नहीं पाया।

पुलिस प्रवक्ता का दावा- जांच सही दिशा में हुई

इस मामले में पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार का कहना है कि पुलिस अपनी जांच को लेकर संतुष्ट है। रिमांड के दौरान एसएचओ और जांच से जुड़े अधिकारियों ने हर तरीके से पूछताछ कर ली।

उन्होंने कहा- आरोपी अपने बयान पर है। इसलिए दूसरे एंगल पर जांच करने का मतलब नहीं बनता। हां, अगर कोई शिकायत आती है या फिर कुछ नया तथ्य सामने आता है तो पुलिस जांच करेगी। फिलहाल, राधिका और आरोपी दीपक का मोबाइल जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस ने लोगों से पूछा- किसने ताने मारे

इस मामले में छानबीन के दौरान पुलिस ने प्रमुख लोगों को थाने में बुलाया। उनसे तानों के बारे में पूछा गया तो सभी ने कहा कि दीपक को किसी ने ताना नहीं मारा। वह आर्थिक रूप से संपन्न है, जिसकी मासिक आय 15-17 लाख रुपए थी। पुलिस निष्पक्ष जांच करे, क्योंकि उन्हें लगता है कि दीपक कुछ छिपा रहा है।

इस पर थाना प्रभारी विनोद ने कहा कि गांव वाले चाहें तो ताना मारने वाले व्यक्ति का नाम बता सकते हैं, या फिर किसी तरह की कोई कंप्लेंट दे सकते हैं। जब राधिका के पिता प्रारंभिक जांच में ही अपना जुर्म कबूल कर चुके हैं, तो किसी और एंगल पर जांच भटकाना सही नहीं है।

मां बोली- मुझे हत्या की वजह नहीं पता

पिता के ताने के दावे के बावजूद मां मंजू यादव ने पुलिस को कहा कि उसे नहीं पता कि पति ने बेटी की गोलियां मारकर हत्या क्यों की। मां ने यह भी कहा कि उनकी बेटी का चरित्र बिल्कुल ठीक था।

पति को बेटी से क्या नाराजगी थी, इसके बारे में भी उन्हें कुछ नहीं पता। जिस वक्त गोलियां मारी गईं, वह तबीयत खराब होने की वजह से अलग कमरे में लेटी हुई थीं। पुलिस भी मौके के हालात और अब तक की जांच के बाद मां को आरोपों के दायरे से बाहर रख रही है।

क्या बेस्ट फ्रेंड हिमांशिका से पूछताछ करेगी पुलिस?

इस सवाल के जवाब में सेक्टर 56 थाने के एसएचओ और जांच अधिकारी विनोद का कहना है कि अभी हिमांशिका को जांच में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन अगर हिमांशिका के पास इस मामले से संबंधित कोई साक्ष्य या सबूत हैं तो वह खुद पुलिस के सामने पेश करें। अगर उसके पास कोई सबूत है तो जल्द ही उसको जांच में शामिल करके पूछताछ की जाएगी।

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पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख ठगी का आरोप:नवीन जिंदल से पहचान बताकर काम में पार्टनर बनाने ठेकेदार को फंसाया, FIR के आदेश

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर ठेकेदार से फ्रॉड किया गया। अब कोर्ट ने उन पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पीड़ित दिनकर विश्वमित्र का कहना है कि, राजेश चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए उद्योगपति नवीन जिंदल से करीबी संबंध होने का दावा किया था। भरोसा दिलाने के लिए जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर भी दिखाया और ट्रांसपोर्ट के काम में पार्टनर बनाने की बात कही। बाद में पता चला कि पूरा दस्तावेज फर्जी था।

पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) कोर्ट ने मोहन नगर पुलिस को केस दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है। वर्तमान में राजेश चौहान बिजनेसमैन और क्रिकेट एकेडमी के संचालक हैं।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है।

दोस्त के जरिए हुई पहचान, करोड़ों के काम का दिया लालच

पीड़ित दिनकर विश्वमित्र ने कोर्ट में बताया कि, उसकी मुलाकात दोस्त सरोज कुमार के जरिए राजेश चौहान से हुई थी। बातचीत के दौरान राजेश ने कहा कि उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन और अन्य सामग्री के ट्रांसपोर्ट का बड़ा ठेका मिला है।

अगर वह ट्रक लगाकर इस काम में पार्टनर बनता है, तो उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा। भरोसा बढ़ाने के लिए आरोपी ने जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज भी दिखाए। इन्हें देखकर दिनकर ने साझेदारी के लिए हामी भर दी।

इंडिया टीम के लिए 35 वनडे खेल चुके हैं राजेश चौहान।

इंडिया टीम के लिए 35 वनडे खेल चुके हैं राजेश चौहान।

इकरारनामा हुआ, फिर अलग-अलग किस्तों में लिए 17.52 लाख रुपए

शिकायत के अनुसार, 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा हुआ। उसी दौरान दिनकर ने 2.51 लाख रुपए का पहला भुगतान किया। इसके बाद आरोपी के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो किस्तों में 15.01 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए।

इस तरह आरोपी ने कुल 17.52 लाख रुपए ले लिए। पीड़ित को भरोसा था कि जल्द ही ट्रांसपोर्ट का काम शुरू होगा, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी न तो काम मिला और न ही किसी तरह का फायदा।

भारत के लिए राजेश चौहान 21 टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

भारत के लिए राजेश चौहान 21 टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

जिंदल प्लांट पहुंचने पर खुला पूरा मामला

जब लंबे समय तक कोई काम शुरू नहीं हुआ तो दिनकर खुद ओडिशा स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड पहुंचा। वहां कंपनी अधिकारियों से जानकारी लेने पर उसे पता चला कि राजेश चौहान या उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ऐसा कोई ट्रांसपोर्ट ठेका कभी दिया ही नहीं गया था।

पीड़ित का आरोप है कि उसे जो वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज दिखाए गए थे, वे फर्जी थे। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।

पुलिस से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

पीड़ित ने मोहन नगर थाना और दुर्ग के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दी। उसका आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता सौरभ चौबे के माध्यम से न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत आवेदन लगाया।

कोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया बनता है मामला

इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान ने आवेदन के साथ पेश किए गए बैंक लेन-देन, इकरारनामा और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है और इसकी जांच जरूरी है।

इसके बाद कोर्ट ने मोहन नगर थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर विधि अनुसार जांच करने और अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है।

कौन हैं पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान?

राजेश चौहान भारत के पूर्व ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। उन्होंने 1993 से 1998 के बीच भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। 90 के दशक में वे अनिल कुंबले और वेंकटपति राजू के साथ भारत की स्पिन तिकड़ी का अहम हिस्सा रहे।

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छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ की वार्षिक आमसभा सम्पन्न 

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रायपुर। छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ की वार्षिक आमसभा दिनांक 05/07/2026 को  होटल लैंडमार्क, पंडरी, रायपुर  में संपन्न हुयी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर उत्तर के पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा ने की। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण,  रायपुर छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक प्रवेश जोशी , छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला, संघ के पूर्व मुख्य सलाहकार डा. मानिक चटर्जी, छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष किशोर जादवानी, उपाध्यक्ष अनिल पुसदकर, प्रदीप जोशी, गिरिराज बागड़ी, सचिव सार्थक शुक्ला, कोषाध्यक्ष सौरभ शुक्ला एवं पदाधिकारीगण, जिला संघों के अध्यक्ष एवं सचिव आदि उपस्थित थे।

वार्षिक आमसभा की बैठक में छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ की वार्षिक प्रतियोगिता के आयोजन एवं राज्य में टेबल टेनिस के प्रचार एवं विकास पर विस्तृत चर्चा हुयी। बैठक में वार्षिक प्रतियोगिता का कैलेण्डर निर्धारित किया गया जिसमें प्रथम राज्य रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता माह अगस्त में रायपुर, प्रथम मास्टर्स राज्य रैकिंग़ टेबल टेनिस प्रतियोगिता तथा द्वितीय राज्य रैकिंग़ टेबल टेनिस प्रतियोगिता माह सितंबर में क्रमशः रायपुर एवं राजनांदगांव, 24वीं स्टेग ग्लोबल छत्तीसगढ़ राज्य एवं अंतर जिला टेबल टेनिस प्रतियोगिता माह अक्टूबर में रायपुर, राज्य पैरा टेबल टेनिस प्रतियोगिता माह नवंबर में रायपुर, द्वितीय मास्टर्स राज्य रैकिंग़ टेबल टेनिस प्रतियोगिता माह नवंबर में रायपुर,  तृतीय मास्टर्स राज्य रैकिंग़ टेबल टेनिस प्रतियोगिता माह दिसंबर में रायपुर को आबंटित किया गया। 

इसके साथ ही पिछले वर्ष कोंडागांव में पहली बार आयोजित राज्य प्रतियोगिता के सफल आयोजन करने पर कोंडागांव जिला टेबल टेनिस संघ को “द्वितीय राज्य रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता” हेतु स्मृति चिन्ह दिया गया। छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ द्वारा  खेल एवं युवा कल्याण, रायपुर छत्तीसगढ़ के पर्यवेक्षक प्रवेश जोशी को ससम्मान मोमेंटो भेंट किया गया। 

मंच संचालन रायपुर महानगर टेबल टेनिस संघ सचिव शकील साजिद ने किया।  उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ टेबल टेनिस संघ के उपाध्यक्ष विनय बैसवाड़े ने दी। 

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भारतीय जीवन बीमा निगम की 58वीं मध्य क्षेत्रीय टेबल टेनिस एवं बैडमिंटन प्रतियोगिता संपन्न

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विनय बैसवाड़े, ऋचा पटवर्धन (टेबल टेनिस) तथा  शैलेश साहू,  पर्ली ठाकुर (बैडमिंटन) विजेता बने 

रायपुर। भारतीय जीवन बीमा निगम, रायपुर मंडल द्वारा दिनांक 04 से 05 जुलाई 2026 तक आयोजित “58वीं मध्य क्षेत्रीय टेबल टेनिस एवं बैडमिंटन प्रतियोगिता” सप्रे शाला टेबल टेनिस हाल एवं बैडमिंटन हाल, रायपुर में आज संपन्न हो गयी । उल्लेखनीय है कि विगत 2 दिनों से जारी इस प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में कार्यरत 8 मंडलों के 24 खिलाड़ियों ने शिरकत की थी। आज सुबह 10.00 बजे हुए प्रतियोगिता के रोमांचक मुकाबले का बीमा कर्मियों के साथ-साथ राजधानी की खेलप्रेमी जनता ने भी जमकर लुफ्त उठाया। प्रतियोगिता के फायनल राउंड में टेबल टेनिस के पुरुष वर्ग में रायपुर मंडल के  विनय बैसवाड़े एवं  महिला वर्ग में इंदौर मंडल की श्रीमती ऋचा पटवर्धन विजेता रहे तथा बैडमिंटन के पुरुष वर्ग में बिलासपुर मंडल के शैलेश साहू एवं महिला वर्ग में सुश्री पर्ली ठाकुर विजेता रहे ।

उक्त प्रतियोगिता के सम्बन्ध में प्रतियोगिता की आयोजन सचिव श्रीमती संध्या राज ने जानकारी दी कि पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय जीवन बीमा निगम, मध्य क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के प्रादेशिक प्रबंधक (पेंशन एवं समूह बीमा) एम.सी. कौशिक थे । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रादेशिक प्रबंधक (एच.आर.डी.) एम. कविराज थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय जीवन बीमा निगम रायपुर मंडल के विपणन प्रबंधक रविन्द्र कुमार पटेल ने किया। इस अवसर पर विशेष रूप से प्रतियोगिता के संयोजक प्रबंधक (कार्मिक) अमित कुमार श्रीवास्तव,चयन समिति के सदस्य प्रबंधक (दावा) नीलमणी द्विवेदी, मंडल खेल समन्वयन समिति, रायपुर के सदस्य प्रबंधक कार्यालय सेवा गिरीश सिन्हा,सेन्ट्रल जोन इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन के सह सचिव व्ही. एस. बघेल, स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड,सदस्य रायपुर के शशांक शेखर शर्मा, रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाईज यूनियन के महासचिव गजेंद्र पटेल, रायपुर डिवीजन प्रथम श्रेणी अधिकारी एसोसिएशन के सचिव आशीष शर्मा उपस्थित थे।               

दिनांक04 से 05 जुलाईतक चलने वाले इस प्रतियोगिता के आज अंतिम दिन खेले गये फायनल मैचों के परिणाम इस प्रकार है:- 
टेबल टेनिस : 
पुरुष वर्ग: फायनल —  विनय बैसवाड़े (रायपुर मंडल) ने केशव खंडेलवाल (रायपुर मंडल) को 4-0 से हराकर विजेता बने।  तृतीय स्थान पर हिमांशु रंगशाही (इंदौर मंडल)तथा चतुर्थ स्थान पर सुशांत श्रीवास्तव (सतना मंडल) रहे | 
महिला वर्ग: फायनल —   श्रीमती ऋचा पटवर्धन (इंदौर मंडल) ने  कु साक्षी धनविजय (रायपुर मंडल)को 4-0 से हराकर विजेता बनी । तृतीय स्थान परसुश्री कोनू पाल (भोपाल मंडल)तथा चतुर्थ स्थान परश्रीमती श्रीजी गुप्ता (शहडोल मंडल)रहे | 

बैडमिंटन: पुरुष वर्ग: फायनल —   शैलेश साहू (बिलासपुर मंडल) ने सुनील चंद्राकर (भोपाल मंडल) को 21-16, 21-18 से हराकर विजेता बने। तृतीय स्थान पर  जुग्गल संजीव पटेल (रायपुर मंडल)तथा चतुर्थ स्थान पर  अमित कुमार निगम (भोपाल मंडल)रहे |

महिला वर्ग: फायनल —    सुश्री पर्ली ठाकुर(भोपाल मंडल)ने  सुश्री विनीता एक्का (बिलासपुर मंडल)को 21-8 ,21-12 से हराकर विजेता बनी । तृतीय स्थान परश्रीमती पुष्पिका टिग्गा (शहडोल मंडल) तथा चतुर्थ स्थान परकु. जिशा टिग्गा (रायपुर मंडल) पर रही |टेबल टेनिस प्रतियोगिता के मुख्य निर्णायक अंतर्राष्ट्रीय अंपायर प्रवीण निरापुरे, सहायक मुख्य निर्णायक अंतर्राष्ट्रीय अंपायर सुश्री गीता पंडित तथा बैडमिंटन प्रतियोगिता के मुख्य निर्णायक रायपुर जिला बैडमिंटन संघ सचिव अनुराग दीक्षित, सहायक मुख्य निर्णायक हेमंत क्रिस्टोफर थे ।               

 इस अवसर पर मंडल प्रबंधक (पेंशन एवं समूह बीमा) प्रदीप केरकेट्टा,  प्रबंधक (आई टी) टी. श्रीहरी, पूर्व स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड सदस्य शिशिर गुप्ता, अंपायर एन.जे. राव, पूर्व अखिल भारतीय व्हालीबाल खिलाड़ी यशवंत शर्मा, श्रीमती संध्या भगत, श्रीमती उषा राव, विजय तिरपुडे, मंडल खेल समन्वयन समिति, रायपुर के सदस्य अगेशवर साहू, संजय सेनगुप्ता, दीपक जेम्स, मोहनलाल साहू, सुशांत सैनी एवं अन्य सदस्यगण, खिलाडीगण, तकनीकी समितिगण उपस्थित थे|  उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से  प्रतियोगिता की आयोजन सचिव  श्रीमती संध्या राज ने दी | 

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