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राहुल बोले-रायबरेली में इंसान नहीं, संविधान की हत्या:भीड़तंत्र को सत्ता का संरक्षण, दलित युवक की पीटकर हत्या, मार खाते हुए राहुल का नाम लिया था

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रायबरेली,एजेंसी। रायबरेली में मॉब लिंचिंग को लेकर राहुल गांधी ने कहा- दलित युवक हरिओम वाल्मीकि की निर्मम हत्या केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि इंसानियत, संविधान और न्याय की हत्या है। देश में नफरत, हिंसा और भीड़ तंत्र को सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है।

राहुल ने मंगलवार को X पर लिखा- संविधान की जगह बुलडोजर ने ले ली है, इंसाफ की जगह डर ने, लेकिन यह देश संविधान से चलेगा, भीड़ की सनक से नहीं। भारत का भविष्य समानता और मानवता पर टिका है। मैं परिवार के साथ खड़ा हूं। उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

दरअसल, 2 अक्टूबर को हरिओम पासवान की हत्या हुई थी। शुरू में कहा गया था कि युवक ड्रोन चोर था। उसी दिन युवक को पीटने और उसकी लाश के वीडियो भी सामने आए थे। इसके बाद 4 अक्टूबर को एक और वीडियो सामने आया, जिसमें मार खाते हुए युवक राहुल गांधी का नाम लेता है। इस पर भीड़ में से एक शख्स कहता है, यहां सब ‘बाबा’ वाले हैं।

इस मामले में लापरवाही करने पर ऊंचाहार थाना अध्यक्ष संजय कुमार समेत 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रविवार रात राहुल ने परिवार से फोन पर बात की थी। कहा था- परेशान मत होइए, कांग्रेस परिवार आपके साथ है।

राहुल का X पर पोस्ट

खड़गे-राहुल का संयुक्त बयान, कहा- रायबरेली में जो हुआ, वह देश पर कलंक

यह फोटो 3 अक्टूबर की है। इसमें युवक का शव गांव से 20 मीटर दूर रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा था।

यह फोटो 3 अक्टूबर की है। इसमें युवक का शव गांव से 20 मीटर दूर रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा था।

इस मामले में राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ साझा लेटर भी लिखा है। जिसे दोनों नेताओं ने X पर शेयर किया। इसमें लिखा है, ‘रायबरेली में दलित युवक हरिओम वाल्मीकि की निर्मम और क्रूर हत्या की कांग्रेस पार्टी कड़ी से कड़ी निंदा करती है।

हमारे देश में एक संविधान है, जो हर इंसान को समानता के भाव से पहचानता है। एक कानून है, जो हर नागरिक की सुरक्षा, उसके अधिकार और उसकी अभिव्यक्ति को समान दर्जा देता है। जो रायबरेली में हुआ, वह इस देश के संविधान के प्रति घोर अपराध है। दलित समुदाय के प्रति अपराध है। इस देश और समाज पर कलंक है।’

रायबरेली मॉब लिंचिंग को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साझा लेटर लिखा है।

रायबरेली मॉब लिंचिंग को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने साझा लेटर लिखा है।

‘वंचित के खिलाफ सबसे अधिक हिंसा हो रही’

राहुल-खड़गे ने लिखा है, ‘देश में दलितों, अल्पसंख्यकों और गरीबों पर अपराध की संख्या हद से ज्यादा बढ़ चुकी है। यह हिंसा सबसे अधिक उन्हीं पर होती है, जो वंचित हैं, बहुजन हैं, जिनकी न पर्याप्त हिस्सेदारी है, न प्रतिनिधित्व। चाहे हाथरस और उन्नाव में महिलाओं के खिलाफ अपराध हों या रायबरेली में हरिओम की हत्या।

कुछ समय पहले रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या हुई। मध्य प्रदेश में एक नेता द्वारा आदिवासी युवक पर पेशाब करने की अमानवीय घटना भी सामने आई। ओडिशा और मध्य प्रदेश में दलितों की निर्मम पिटाई हो या फिर हरियाणा के पहलू खान और उत्तर प्रदेश के अखलाक की हत्या। हर घटना हमारे समाज, प्रशासन और सत्ताधारी शक्तियों की बढ़ती हुई संवेदनहीनता का दर्पण है।’

यह तस्वीर 3 अक्टूबर की दोपहर को सामने आई थी। इसमें गांव वालों ने युवक को चोर समझकर पकड़ा और उससे मारपीट कर पूछताछ की थी।

यह तस्वीर 3 अक्टूबर की दोपहर को सामने आई थी। इसमें गांव वालों ने युवक को चोर समझकर पकड़ा और उससे मारपीट कर पूछताछ की थी।

‘2014 के बाद से मॉब लिंचिंग भयावह पहचान बन चुकी’

राहुल-खड़गे ने लिखा, ‘2014 के बाद से मॉब लिंचिंग, बुलडोजर अन्याय और भीड़तंत्र जैसी प्रवृत्तियां हमारे समय की भयावह पहचान बन चुकी हैं। हिंसा किसी भी सभ्य समाज की निशानी नहीं हो सकती है, इसलिए हरिओम के साथ जो हुआ, वह हमारी सामूहिक नैतिकता पर गहरा प्रश्न है।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों का भारत और महात्मा गांधी के ‘वैष्णव जन…’ का भारत सामाजिक न्याय, समानता और संवेदना का भारत है, जिसमें ऐसे अपराधों के लिए कोई स्थान नहीं। मानवता ही एकमात्र रास्ता है।’

यह फोटो 4 अक्टूबर को सामने आई थी। इसमें गांव वाले युवक की जांघों और प्राइवेट पार्ट पर लाठी और बेल्ट बरसाते दिख रहे थे।

यह फोटो 4 अक्टूबर को सामने आई थी। इसमें गांव वाले युवक की जांघों और प्राइवेट पार्ट पर लाठी और बेल्ट बरसाते दिख रहे थे।

‘अन्याय के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है’

उन्होंने लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी समाज के वंचित और कमजोर तबकों के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हम नागरिकों से आह्वान करते हैं कि वे इस अन्याय के खिलाफ एकजुट हों। यह लड़ाई तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक हर भारतीय के अधिकारों और जीवन की गरिमा को पूर्ण सुरक्षा नहीं मिल जाती है।’

यह तस्वीर 6 अक्टूबर को सामने आई थी। ग्रामीणों ने हरिओम को घेर लिया तो पुलिस वाले मौके पर पहुंचे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की थी।

यह तस्वीर 6 अक्टूबर को सामने आई थी। ग्रामीणों ने हरिओम को घेर लिया तो पुलिस वाले मौके पर पहुंचे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की थी।

क्या है मामला

रायबरेली के ऊंचाहार थाना क्षेत्र के ईश्वरदासपुर गांव में 2 अक्टूबर को एक युवक की लाश रेलवे ट्रैक के किनारे मिली थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक के शरीर पर पिटाई के निशान थे। सिर पर गहरी चोट, छाती पर बेल्ट के निशान और पूरे शरीर पर नीले-काले दाग थे।

पुलिस ने युवक का नाम हरिओम पुत्र गंगादीन (38) बताया था। वह फतेहपुर जिले के तरावती का पुरवा गांव का रहने वाला था। वह 1 अक्टूबर की रात करीब 1 बजे ऊंचाहार-डलमऊ मार्ग पर ईश्वरदासपुर की ओर जा रहा था। तभी 24-25 गांववालों ने उसे पकड़ लिया।

गांव वाले उससे पूछताछ करने लगे। हरिओम ने बताया कि वह पास के ही गांव में रहता है, लेकिन गांव वाले नहीं माने। इसके बाद उसे डंडे और बेल्ट से मारने-पीटने लगे। फिर उसे अधनंगा कर दिया। उसकी ही शर्ट से दोनों हाथ बांधे। उस पर डंडे-बेल्ट बरसाते रहे।

अधमरा करने के बाद लोग उसे गांव के बाहर नहर किनारे ले गए। एक खंभे में बांधकर पीटा। फिर उसे रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया था।

अधमरा करने के बाद लोग उसे गांव के बाहर नहर किनारे ले गए। एक खंभे में बांधकर पीटा। फिर उसे रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया था।

अधमरा करने के बाद रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया था

अधमरा करने के बाद लोग उसे गांव के बाहर नहर किनारे ले गए थे। एक खंभे में बांधकर पीटा। युवक बार-बार कहता रहा कि मैं चोर नहीं हूं, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। पिटाई के बाद युवक को अधमरी हालत में रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया था।

हरिओम की पत्नी पिंकी के मुताबिक, पति मानसिक रूप से कमजोर था। रायबरेली में मुझसे मिलने आ रहा था। पिंकी, ऊंचाहार में NTPC परिसर में पंजाब नेशनल बैंक में सफाई कर्मचारी है। गेट नंबर-2 के सामने पिंकी का मायका है। इस समय वो मायके में रह रही थी।

मृतक हरिओम की पत्नी पिंकी ने बताया- जैसे मेरे पति की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या की गई है, वैसे ही उन हत्यारों को भी सजा मिलनी चाहिए।

मृतक हरिओम की पत्नी पिंकी ने बताया- जैसे मेरे पति की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या की गई है, वैसे ही उन हत्यारों को भी सजा मिलनी चाहिए।

अब तक 4 वीडियो सामने आए

चौथा वीडियो- 6 अक्टूबर को सामने आया। इससे पता चलता है कि पुलिस चाहती तो युवक की जान बच सकती थी। युवक को ड्रोन चोर समझकर भीड़ ने घेर रखा था। सूचना पाकर PRV पहुंची। जीप में बैठे-बैठे एक पुलिसकर्मी ने कहा- जाने दो, जहां जाना चाहता है। फिर वहां से पुलिस निकल गई। इसके बाद उग्र भीड़ ने युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

पहला वीडियो- 3 अक्टूबर की सुबह सामने आया। इसमें साढ़े 6-7 बजे के बीच रेलवे ट्रैक के किनारे खून से लथपथ हालत में एक युवक का शव दिख रहा है।

दूसरा वीडियो- 3 अक्टूबर को दोपहर में 2 बजे सामने आया था। इसमें कुछ लोग लाठी-डंडे से एक युवक को चोर-चोर कहकर पीट रहे थे।

तीसरा वीडियो- 4 अक्टूबर (शनिवार) को सामने आया। इसमें युवक को पीटने वाले ग्रामीणों ने उसका नाम-पता पूछा। इस पर उसने चिल्ला कर कहा- राहुल गांधी। इसके बाद पीट रही भीड़ में से एक युवक ने कहा- यहां सब बाबा वाले आदमी हैं।

पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय इससे पहले मृतक के परिजनों से मिलने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष फतेहपुर में उनके घर पहुंचे थे। अजय राय ने कहा था- युवक को बेरहमी से मारा गया। यह जंगलराज की सरकार है जो योगी बाबा की चल रही है। मार भी रहे हैं और कह रहे हैं कि हम बाबा वाले हैं।

उन्होंने कहा था- राहुल जी का हर एक कार्यकर्ता, हर एक बब्बर शेर, पूरी कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। हमारे नेता ने भी पीड़ित परिवार से बात की है। हम उन्हें न्याय दिलाएंगे। जो लोग खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं और लोगों को मार रहे हैं, वे किसी भी तरह बख्शे नहीं जाएंगे।

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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई

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कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।

खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।

 पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”

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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला

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भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”

बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा ​​के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।

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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत

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कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा 
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे। 

ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा 
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।

इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान 
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।

तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया। 

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