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राहुल बोले- राजा की आत्मा EVM, ED-CBI में है:सिस्टम को समझता हूं, इसलिए मोदी मुझसे डरते हैं; उनकी छाती 56 इंच की नहीं

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मुंबई, एजेंसी।

कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के समापन पर मुंबई में हो रही सभा में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा- देश के युवा बेरोजगार हैं। सरकार उन्हें काम नहीं दे पा रही है।

शिवाजी पार्क में हो रही रैली में राहुल के अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अलावा, राजद, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (UBT), NCP (शरद गुट), आम आदमी पार्टी (AAP) सहित I.N.D.I.A ब्लॉक की अन्य पार्टियों के नेता मौजूद हैं। इस रैली को विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है।

इससे पहले राहुल गांधी ने मुंबई में मणि भवन से अगस्त क्रांति मैदान तक न्याय संकल्प पदयात्रा निकाली। इस पदयात्रा में उनके साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और एक्ट्रेस स्वरा भास्कर भी मौजूद रहीं।

राहुल बोले- जेटली ने कहा था कि लैंड एक्वीजिशन चुप रहिए, नहीं तो केस दर्ज कर देंगे 

जब चीन का माल यहां बिकता तो सिर्फ चीन का फायदा नहीं होता, हमारे उद्योगपतियों को भी फायदा होता है। पूरा सिस्टम कंट्रोल में है। जब पहले इनकी सरकार आई, अरुण जेटली मेरे पास आए और कहा कि राहुल, लैंड एक्वीजिशन पर मत बोलो। अगर बोलोगे तो तुम्हारे ऊपर केस लगाएंगे। मैंने कहा- केस लगाइए। ईडी वाले आए। ईडी के अफसर ने कहा- राहुल , आप किसी से नहीं डरते, आप नरेंद्र मोदी को हरा सकते हो। लेकिन मैं राहुल गांधी नहीं हूं, ये उद्धव ठाकरे नहीं हैं, यहां हिंदुस्तान की आवाज है। नरेंद्र मोदी जी मीटिंग देखिए, वहां सिर्फ एक व्यक्ति बोलता है। वहां गडकरी जी माला के बाहर हो जाते हैं।

राहुल ने कहा- आज हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा बेरोजगारी 

आप लोग जीएसटी देते हैं। उतनी ही अडाणी देता है। आप शर्ट पर 18% जीएसटी देते हो, अडाणी भी उतना ही देता है। फिर पैसा जाता कहां है। नरेंद्र मोदी जी काम आपके ध्यान को भटकाने का है। कभी कहेंगे- चीन की तरफ देखो, पाकिस्तान की तरफ देखो। कभी मोबाइल की लाइट ऑन करवा देंगे। कभी कहेंगे कि मेरा अपमान कर दिया। यात्रा में दुख-दर्द सब दिख जाता है। आज हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है।

राहुल बोले- सिस्टम को अंदर से देखा है, इसलिए मोदी मुझसे डरते हैं

इस देश को 90 अफसर चला रहे हैं। मैंने सिस्टम को अंदर से देखा है, इसलिए मोदी जी मुझसे डरते हैं। मुझसे कुछ नहीं छिप सकता। उन अफसरों में तीन पिछड़े हैं। 3 दलित हैं। पॉलिसी ये 90 लोग बनाते हैं। ये सच्ची शक्ति हिंदुस्तान को चला रही है। यहां किसी ने EVM की बात की। EVM के बिना नरेंद्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकता। हमने चुनाव आयोग से कहा कि विपक्षी पार्टी को ये मशीन दिखा दीजिए। ये कैसी चलती है, ये दिखा दीजिए। हमने कहा कि वोट मशीन में वोट नहीं है, कागज में है। वो कागज की गिनती नहीं करते।

राहुल बोले- 22 लोगों के पास उतना धन, जितना 70 करोड़ लोगों के पास है

चीन में एक शेनझेन है। धारावी, शेनझेन का मुकाबला कर सकते हैं, बस उनके लिए बैंक के दरवाजे तो खोलिए। यहां 22 लोगों के पास उतना ही धन है, जितना हिंदुस्तान के 70 करोड़ लोगों के पास है। भारत में इंटरनेशनल एयरपोर्ट खुलवाने के लिए साल लग जाते हैं। यहां शादी के लिए 10 दिन में इंटरनेशनल एयरपोर्ट खुल जाता है। खोलिए, मगर अन्य प्रदेशों में भी तो एयरपोर्ट खोलिए।

राहुल ने कहा- मणिपुर में सिविल वॉर का माहौल है

मणिपुर में इसी शक्ति ने सिविल वॉर का माहौल बना रखा है। मैंने सोचा कि यात्रा वहीं से शुरू होगी और धारावी में खत्म होगी। मुंबई टैलेंट का केंद्र है। यही शक्ति एकसाथ लोगों को बर्बाद करने में लगी है।

राहुल बोले- भाजपा नेताओं को डरा रही हैं, इसलिए लोग पार्टी छोड़ रहे हैं

किसी ने कहा कि राजा की आत्मा EVM, CBI, ED, इनकम टैक्स में है। इसी राज्य के एक वरिष्ठ नेता कांग्रेस छोड़ते हैं और मेरी मां से रोकर कहते हैं कि मुझे शर्म आ रही है कि इस शक्ति से लड़ने की हिम्मत नहीं है, मैं जेल नहीं जाना चाहता। ऐसे हजारों लोग डराए गए हैं। शिवसेना, NCP-SCP के लोग यूं ही चले गए? वे सब डरकर बीजेपी में गए हैं।

राहुल बोले- हम नरेंद्र मोदी से नहीं, बल्कि हम एक शक्ति से लड़ रहे हैं

पिछले साल हमने कन्याकुमारी से कश्मीर तक यात्रा की। यात्रा करनी पड़ी। अगर मैं आपसे 2004, 2010, 2014 में पूछता कि मुझे 4 हजार किमी कन्याकुमारी से कश्मीर चलना पड़ेगा, ऐसा सोच भी नहीं सकता था। ये यात्रा हमें क्यों करनी पड़ी? देश का कम्युनिकेशन सिस्टम, मीडिया या सोशल मीडिया, देश के हाथ में नहीं है। जनता के मुद्दे बेरोजगारी, हिंसा, नफरत, महंगाई, किसानों, अग्निवीर के मुद्दे आपको मीडिया में नहीं दिखेंगे।

हमको ये यात्रा इसलिए करनी पड़ी, क्योंकि कोई और चारा नहीं था। देश के ध्यान को पकड़ने के लिए की। सिर्फ राहुल गांधी नहीं चला, हिंदुस्तान का पूरा विपक्ष, कई नेता इस यात्रा में शामिल हुए। सोशल मीडिया में भी किसी ने कहा- सोशल मीडिया रास्ता है। लेकिन ये सच नहीं है।

काफी डिस्कशन होता है कि हम बीजेपी से लड़ रहे हैं। लोग सोचते हैं कि हम एक राजनीतिक दल के खिलाफ लड़ रहे हैं। देश भी ये सोचता है कि मंच पर बैठे नेता एक राजनीतिक पार्टी से लड़ रहे हैं। ये सच नहीं है। हिंदुस्तान के युवाओं के ये समझना होगा कि ये सब लोग एक व्यक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं? हम न बीजेपी और न ही एक व्यक्ति के खिलाफ लड़ रहे हैं। एक व्यक्ति को चेहरा बनाकर ऊपर कर रखा है। हिंदू धर्म में एक शब्द शक्ति होता है। हम शक्ति से लड़ रहे हैं।

शरद पवार- भाजपा से मुक्ति का नारा हम देते हैं

NCP-शरदचंद्र पवार के चीफ शरद पवार ने कहा कि महात्मा गांधी ने इसी शहर से अंग्रेजों के लिए भारत छोड़ो का नारा दिया था।आज हम भी भाजपा से मुक्ति का नारा देते हैं।

महबूबा मुफ्ती बोलीं- PM मोदी की लापरवाही से पुलवामा में जवान शहीद हुए  

पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने कहा कि PM मोदी ने कुछ काम नहीं किया, लेकिन जनता से पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट मांगे। उन शहीदों के नाम पर वोट मांगे, जिनकी जान PM की लापरवाही की वजह से चली गई। जनता ने फिर भी वोट दे दिया। इसके बावजूद PM मोदी ने 10 साल में न तो नौकरियां दीं और न ही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की।

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कोरबा

धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे:मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी, पंडाल में झूपने लगे महिलाएं-पुरुष

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में 583 लोगों की ‘घर वापसी’ हुई। इनमें एक मुस्लिम परिवार भी शामिल है, जिन्होंने सनातन धर्म अपनाया है। वहीं, दरबार में महिलाएं और पुरुष झूमते नजर आए।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण कराने वालों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि, जब तक जिएंगे, हिंदुओं को न कटने देंगे, न बंटने देंगे और न मिटने देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि लालच में आकर जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर दूसरा मजहब अपनाया था, उनमें से सैकड़ों लोग अब ‘घर वापसी’ कर रहे हैं।

धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे।

धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे।

मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी।

मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी।

दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का इलाज किया गया।

दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का इलाज किया गया।

कथा के चौथे दिन लगा दिव्य दरबार

दरअसल, कोरबा के ढपढप में 5 दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन किया गया है। आज चौथे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दिव्य दरबार में जनसैलाब उमड़ पड़ा। चौथे दिन 2 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे।

दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का विशेष इलाज किया गया। पर्चा लिखकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे। कुछ लोग जमीन पर लोटते और झूमते हुए दिखाई दिए।

जरूरतमंदों को दो रुपए – धीरेंद्र शास्त्री

दरबार के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक गरीब बुजुर्ग की मदद के लिए यजमानों और जनप्रतिनिधियों से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, लोग नाचने वाली स्त्रियों पर तो पैसे लुटाते हैं, लेकिन जरूरतमंदों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए।

मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे।

मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे।

धीरेंद्र शास्त्री ने बुजुर्ग की आर्थिक मदद की

बुजुर्ग ने धीरेंद्र शास्त्री को बताया कि, वो पाली मुनगाडीह का रहने वाला है। अपने घर से पैदल सुबह निकला था। इस दरबार में शामिल हो गया। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिस पर धीरेंद्र शास्त्री ने तत्काल 50 हजार दिए।

वहीं, सामने बैठे वीआईपी लोगों को आर्थिक मदद करने को कहा। जिसके बाद कुल 1 लाख 20 हजार रुपए बुजुर्ग को दिए गए। इसके बाद उन्होंने अपने टीम के वाहन से सुरक्षित घर तक छोड़ने को कहा।

धीरेंद्र शास्त्री बोले- हालेलुया वालों की ठठरी मारी जाएगी

इससे पहले कोरबा में ही बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण पर कहा था कि, यहां आसपास हालेलुया वाले भी रहते हैं, उनकी भी ठठरी मारी जाएगी। अब यह खेल नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी घर वापसी कराई जाएगी। इसके अलावा उन्होंने खुद को छत्तीसगढ़ का भांचा बताया।

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देश

देश में प्रति उपयोगकर्ता मासिक मोबाइल डेटा खपत 31GB से अधिक: रिपोर्ट

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक मोबाइल डेटा की खपत वर्ष 2025 में 31जीबी के आंकड़े को पार कर गई है जबकि वर्ष 2024 में यह खपत 27.5 जीबी थी। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी नोकिया के वार्षिक मोबाइल ब्रॉडबैंड सूचकांक (एमबीइटी) के 13वें संस्करण में कहा गया है कि वर्ष 2025 में अखिल भारतीय स्तर पर 5जी नेटवर्क पर डेटा का कुल मासिक उपयोग एक साल पहले की तुलना में 70 प्रतिशत बढ़कर 12.9 एक्साबाइट (ईबी) तक पहुंच गया है। इसके साथ ही, देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक में 5जी की हिस्सेदारी अब लगभग 47 प्रतिशत हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत में हुई यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में 18 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर को दर्शाती है। यह बढ़ोत्तरी उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड के तीव्र विस्तार और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित अनुप्रयोगों, उच्च गुणवत्ता वाले 4के वीडियो देखने और क्लाउड गेमिंग जैसी अधिक डेटा खपत वाली सेवाओं की बढ़ती मांग का परिणाम है। भारत में कुल डेटा उपयोग वर्ष 2025 में 27 एक्साबाइट प्रति माह को पार कर गया है। एक एक्साबाइट का मतलब एक अरब जीबी से थोड़ा अधिक होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी उपभोक्ता आधार वाला देश बन गया है। 

साथ ही, 5जी डेटा खपत और ‘फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस’ उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में भी भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) प्रौद्योगिकी की मदद से घरों या कार्यालयों में केबल के बगैर उच्च गति का इंटरनेट मुहैया कराया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 5जी डेटा में एफडब्ल्यूए की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत को पार कर गई है और इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या में पिछले साल की तुलना में दोगुनी वृद्धि देखी गई है। 

नोकिया इंडिया की नामित कंट्री मैनेजर विभा मेहरा ने कहा, “नेटवर्क उपयोग के नए तरीकों और स्मार्ट सेवाओं के अनुरूप बदलने के समय नोकिया दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर एक ऐसा भविष्य-उन्मुख और उच्च प्रदर्शन वाला बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका विस्तार आसानी से किया जा सके।” इस रिपोर्ट के मुताबिक, महानगरों में 5जी का उपयोग सबसे अधिक है, जहां कुल मोबाइल डेटा खपत में 5जी की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत है। पिछले साल सक्रिय 4जी उपकरणों की संख्या 89.2 करोड़ तक पहुंच गई, जिनमें से 38.3 करोड़ से अधिक उपकरण पहले से ही 5जी-सक्षम हैं। 

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NBFC के वित्तपोषण के लिए वाणिज्यिक पत्र बना हुआ है प्रमुख जरिया: इंडिया रेटिंग्स

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मुंबई, एजेंसी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) वित्तपोषण के लिए मार्च महीने में वाणिज्यिक पत्र जारी करने के मामले में आगे रही हैं जबकि कंपनियों ने अल्पकालिक कर्ज लागत में वृद्धि के कारण सतर्कता बरती है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है। ‘कमर्शियल पेपर’ यानी वाणिज्यिक पत्र एक बिना गारंटी वाले, अल्पकालिक कर्ज जुटाने का साधन हैं। कंपनियां अल्पकालिक देनदारियों के वित्तपोषण के लिए इसके जरिये पैसा जुटाती हैं। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि उधार लेने के प्रतिरूप में यह अंतर बना रहेगा। 

इसका कारण एनबीएफसी विशेष रूप से वित्त वर्ष के अंत में अपनी वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक पत्र बाजार का सक्रियता से उपयोग करना जारी रखेंगी जबकि कंपनियां उच्च वित्तपोषण लागत और पर्याप्त आंतरिक नकदी के कारण चयनात्मक रुख अपनाएंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आमतौर पर एनबीएफसी के लिए वित्तपोषण के लिहाज से मार्च का महीना महत्वपूर्ण समय होता है और प्रतिफल में वृद्धि के बावजूद उनकी मांग मजबूत बनी हुई है। इस रुख को दर्शाते हुए, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा जारी किए गए वाणिज्यिक पत्र (सीपी) मार्च, 2026 में बढ़कर 70,300 करोड़ रुपए का हो गया, जो फरवरी, 2026 में 45,500 करोड़ रुपए का था। इसके विपरीत, कंपनियों का वाणिज्यिक पत्र के जरिये वित्तपोषण जुटाने में इसी अवधि में भारी गिरावट आई और यह घटकर 26,600 करोड़ रुपए रहा जो एक महीने पहले 40,700 करोड़ रुपए था। 

रेटिंग एजेंसी ने कहा, ”वर्तमान स्थिति से संकेत मिलता है कि एनबीएफसी तिमाही के अंत के दायित्वों को पूरा करने के लिए अल्पकालिक बाजारों का सहारा लेना जारी रखेंगी, जबकि लागत संबंधी चिंताओं और आंतरिक नकदी के कारण कंपनियां सतर्क रुख अपना सकती हैं।” इस बीच, बैंकों द्वारा जारी जमा प्रमाणपत्र (सीडी) आने वाले महीनों में अधिक संतुलित रहने की संभावना है। इसका कारण जमा की स्थिति स्थिर हो रही है और नए वित्त वर्ष की शुरुआत में कर्ज की मांग आमतौर पर हल्का रहता है। 

रिपोर्ट के अनुसार, 24 मार्च, 2026 तक, लगभग दो लाख करोड़ रुपए के जमा प्रमाणपत्र जारी किये गए थे। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हिस्सा 1.32 लाख करोड़ रुपए था, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने 67,800 करोड़ रुपए के जमा प्रमाणपत्र जारी किये थे। मासिक आधार पर यह राशि लगभग अपरिवर्तित रही। इंडिया रेटिंग्स के अनुसार, जमा प्रमाणत्र जारी करने में आई यह नरमी बैंकों में अल्पकालिक वित्तपोषण दबाव में कुछ कमी का संकेत देती है और नकदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार के साथ कर्ज लेने की गति में और कमी आने की संभावना है। 

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