मुख्यमंत्री साय ने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए विकास के स्पष्ट मंत्र
विकसित भारत जी राम जी योजना, लखपति दीदी, पीएम आवास और पीएम सूर्यघर योजना को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, यही सुशासन की कसौटी – मुख्यमंत्री साय
रायपुर। ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। यदि ग्राम पंचायतें सशक्त हों, गांव आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सहभागी बने, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक रूप ले सकेगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित एसआईआरडी परिसर, निमोरा में आयोजित प्रदेश के सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्राम पंचायतें जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव बनाने का सबसे प्रभावी मंच हैं। अधिकारियों को संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासकीय योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव का प्रत्येक नागरिक स्वयं विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां जनभागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रभावी योजना के माध्यम से आदर्श विकास मॉडल विकसित किए जा सकें।
विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 1 जुलाई से लागू विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए। इसके माध्यम से जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बने प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग ही स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने तथा वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
10.40 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब लक्ष्य करोड़पति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर बड़ी संख्या में करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्व-सहायता समूहों, कौशल विकास, आजीविका गतिविधियों और नई औद्योगिक नीति से उत्पन्न अवसरों से जोड़ा जाए।
बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचे विकास की रोशनी
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों तक कभी पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, आवास, राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
पीएम आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित सभी योजनाओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पंचायत स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को सौर पंप तथा अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल अपने सीमित उत्तरदायित्व का निर्वहन मात्र न होकर के समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, उससे प्रेरणा लेकर प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को समाज निर्माण का अवसर मानना चाहिए।
एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है
मुख्यमंत्री श्री साय ने पद्मश्री पोपटराव पवार के हिवड़े बाजार मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक व्यक्ति भी संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 1999 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब युवा सांसदों के मार्गदर्शन के लिए पोपटराव पवार को आमंत्रित किया गया था। उस समय एक युवा सरपंच के रूप में उन्होंने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की जो कहानी सुनाई थी, वही आज पूरे देश के लिए आदर्श ग्राम विकास का मॉडल बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में नानाजी देशमुख द्वारा विकसित ग्राम विकास मॉडल तथा ओडिशा में डॉ. अच्युत सामंत द्वारा शिक्षा के माध्यम से किए गए सामाजिक परिवर्तन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का अपना मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
हिवड़े बाजार मॉडल ने दिखाया जनभागीदारी की ताकत
कार्यशाला में पद्मश्री पोपटराव पवार ने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1989 में गांव जल संकट, पलायन, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। जनसहभागिता, अनुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से गांव का व्यापक विकास किया गया। आज गांव में पलायन समाप्त हो चुका है, बीपीएल परिवार नहीं हैं, प्रतिदिन लगभग पांच हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग नौ लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, संचालक श्रीमती प्रियंका ऋषि महोबिया, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत सिन्हा, प्रदेश के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को मिशन मोड में करें पूरा – मुख्यमंत्री साय
मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूर्ण करने के निर्देश, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर
जल जीवन मिशन की जिलेवार नियमित समीक्षा करें कलेक्टर, बाधाओं का तत्काल करें समाधान
पूर्ण हो चुके कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश
कोरिया, धमतरी और राजनांदगांव सहित अन्य जिलों के बेहतर प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
रायपुर 10 सितंबर 2026। जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।
जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों।
हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं। उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।
पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब
मुख्यमंत्री श्री साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए।
हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो।
बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।
वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
कांग्रेस बोली-छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेच रही बीजेपी…:हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर सवाल,जयराम रमेश-विकास उपाध्याय ने सरकार को घेरा
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर हसदेव के जंगल और खनिज संसाधन निजी कंपनियों को सौंपने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने नीलामी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- ‘छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेची जा रही हैं।’ कांग्रेस नेता ने वीडियो जारी कर सरकार से इस फैसले पर जवाब मांगा है।
कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड विजेता बनी है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, यह कंपनी मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
विधानसभा ने नई खदानों के खिलाफ पारित किया था प्रस्ताव
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव-अरण्य में किसी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस का दावा है कि 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई कर दिया था। इसके बावजूद अब तारा ब्लॉक की दोबारा नीलामी की गई है। इसका नाम बदलकर तारा (रिवाइज्ड) किया गया है।
कांग्रेस पूर्व विधायक विकास उपाध्याय।
विकास उपाध्याय का बीजेपी सरकार पर हमला
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि लगातार छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बेचने का काम बीजेपी पार्टी कर रही है। फिर से 9 ब्लॉको का आवंटन कर दिया गया और टेंडर प्रक्रिया चालू कर दी गई।
बीजेपी सरकार को छत्तीसगढ़ के लोगों से कोई लेना देना नहीं है। कौड़ियों के दाम पर जमीन को बेचा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी पूर्व में भी विरोध किया। स्थानीय आदिवासी लगातार विरोध कर रहे है। इसके बाद भी कीमती खदानों को भारतीय जनता पार्टी को चंदा देने वालों को मामूली कीमत में दिया जा रहा है।
तारा कोल ब्लॉम में 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है।
5 हजार एकड़ में ब्लॉक, 4 हजार एकड़ से ज्यादा जंगल
तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक खनन शुरू होने पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई का खतरा है। उनका कहना है कि इसका असर जंगल पर निर्भर आदिवासी समुदाय और उनकी रोजमर्रा की आजीविका पर पड़ेगा।
लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन पर सवाल
कांग्रेस ने लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन को लेकर भी चिंता जताई है। नेताओं का कहना है कि इससे हाथियों की आवाजाही का रास्ता प्रभावित हो सकता है। साथ ही दूसरी वन्य प्रजातियों के सामने भी खतरा बढ़ सकता है।
हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए स्थानीय आदिवासी समुदाय करीब 15 वर्षों से ग्राम सभा प्रस्ताव, धरना, जन अभियान और विरोध मार्च के जरिए आवाज उठाता रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्राकृतिक जंगल काटकर कहीं और पौधे लगाने से पुराने जंगल की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की भरपाई नहीं की जा सकती।