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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में जिला पंचायत सदस्य के 17 पदों पर आरक्षण:4 पद अनारक्षित,5 अनारक्षित महिला, 2-SC, 2-SC महिला, 2-SCST, 1 OBC महिला के लिए आरक्षित

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बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। कलेक्ट्रेट में बुधवार को जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में लॉटरी के जरिए आरक्षण किया गया। इस बार जिला पंचायत के 17 पदों पर 4 अनारक्षित मुक्त, 5 अनारक्षित महिला, 2 SC, 2 SC महिला, 2 SCST, 1 OBC महिला, 1 SCST के लिए आरक्षित किया है। जिला पंचायत में इस बार 9 महिला सदस्य रहेंगी।

सबसे पहले जिला पंचायत सदस्यों के आरक्षण की कार्रवाई शुरू की गई। जिसमें 17 पदों के लिए आरक्षण की घोषणा की गई। जिसके बाद जनपद पंचायतों के आरक्षण की घोषणा की गई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में जिला स्तर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्यों के आरक्षण की कार्रवाई अपर कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी सहित SDM पीयूष तिवारी, उप संचालक पंचायत शिवानी सिंह और जिला अंकेक्षक एके धिरही ने आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की।

त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के लिए लाटरी के जरिए हुआ आरक्षण।

त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के लिए लाटरी के जरिए हुआ आरक्षण।

जनपद सदस्य और ग्राम पंचायतों का भी हुआ आरक्षण

जिले के 486 ग्राम पंचायतों के साथ ही 4 जनपद पंचायत के तहत 25-25 सदस्यों के भी आरक्षण की कार्रवाई की गई। बता दें कि जिला पंचायत के 17 सदस्यों के चुनाव इन सभी का चुनाव एक साथ होगा। इस तरह जिले में पंचायतराज संस्थाओं के तहत 7336 पदों के चुनाव होंगे।

जिला पंचायत में महिलाओं के लिए 9 पद आरक्षित

जिला पंचायत में 17 सदस्यों में इस बार 9 महिलाओं को सदस्य बनने का मौका मिलेगा। इसमें जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 1 ओबीसी महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 2 अजा मुक्त, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 3 अनारक्षित महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 4 अनारक्षित महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 5 अनारक्षित मुक्त।

जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 6 अनारक्षित महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 7 अनारक्षित मुक्त, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 8 अनारक्षित मुक्त, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 9 अनारक्षित महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 10 अनारक्षित मुक्त, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 11 अजा महिला।

जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 12 अजा मुक्त, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 13 अजा महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 14 अनारक्षित महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 15 अजजा मुक्त, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 16 अजजा महिला, जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक- 17 अजजा महिला के लिए आरक्षित रहेगा।

जनपद अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की स्थिति

बिल्हा जनपद अध्यक्ष: अनारक्षित (मुक्त)

तखतपुर जनपद अध्यक्ष: अनुसूचित जाति (महिला)

मस्तूरी जनपद अध्यक्ष: अनुसूचित जनजाति (महिला)

कोटा जनपद अध्यक्ष: अनारक्षित (महिला)

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कोरबा

अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर जिला खनिज जाँच दल की बड़ी कार्यवाही

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कुल 9 वाहन एवं 700 घनमीटर रेत जप्त

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश एवं उप संचालक खनिज प्रशासन प्रमोद नायक के मार्गदर्शन में जिला खनिज जाँच अमला द्वारा आज अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध संयुक्त कार्यवाही की गई। कार्रवाई के दौरान कुल 9 वाहनों को जप्त किया गया, जिनमें 2 ट्रक, 4 हाइवा, 1 जेसीबी, 1 चैन माउंट मशीन एवं 1 टिप्पर शामिल है।


साथ ही दो अलग-अलग स्थानों में अवैध रेत भंडारण पाए जाने पर लगभग 700 घनमीटर रेत जप्त करते हुए खनिज नियमों के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
आज की कार्यवाही में मिट्टी, रेत एवं कोयला खनिज से संबंधित अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए आवश्यक दंडात्मक प्रक्रिया प्रचलन में लाई गई है।
जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर सख्त निगरानी रखी जा रही है तथा भविष्य में भी ऐसी कार्यवाहियाँ निरंतर जारी रहेंगी।

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कोरबा

जनपद पंचायत कोरबा में आनलाईन जन्म-मृत्यु पंजीयन हेतु प्रशिक्षण का आयोजन 16 फरवरी को

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कोरबा। आरजीआई पोर्टल से आनलाईन जन्म-मृत्यु पंजीयन हेतु 16 फरवरी को जनपद पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में प्रातः 11 बजे से अपरांह 01 बजे तक तथा दोपहर 02 बजे से 04 बजे तक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। प्रशिक्षण जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय के अधिकारियों द्वारा दिया जायेगा।
जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी ने बताया कि जिला चिकित्सालय कोरबा, शहरी प्राथमिक केन्द्र ढोढ़ीपारा, एसईसीएल कोरबा (मुड़ापार), सीएसईबी पूर्व, ईएसआईसी अस्पताल कोरबा, समस्त सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र विकासखंड कोरबा के लिए प्रशिक्षण का आयोजन प्रातः 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक किया जायेगा। इसी तरह नगर पालिका कोरबा एवं जनपद पंचायत पोंड़ीउपरोड़ा अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायत सचिवों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन दोपहर 02 बजे से 04 बजे तक किया जायेगा।

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कोरबा

जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों में आयुर्वेदिक पंचकर्म से नई उम्मीद

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कोरबा। आयुष विभाग अंतर्गत स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर, सह संस्था सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राष्ट्रीय संधिवात कार्यक्रम के अंतर्गत संधिवात, अस्थिगतवात, वातरक्त, अवबाहुक जैसे जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों का आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति द्वारा प्रभावी उपचार किया जा रहा है। आधुनिक जीवनशैली, खान-पान की अनियमितता और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण कम आयु में भी अस्थि-संधिगतवात रोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र में पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से जनकल्याणकारी पहल संचालित की जा रही है।
इस प्रयास का मूल उद्देश्य आमजन को आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की सुरक्षित और प्रभावी भूमिका से अवगत कराना है। अस्थि-संधिगतवात रोगों की प्रारंभिक जांच के माध्यम से इनकी समय पर पहचान सुनिश्चित की जा रही है तथा पंचकर्म चिकित्सा के क्षेत्र में आयुष प्रणाली की क्षमता को जनसामान्य के समक्ष दृढ़ता से स्थापित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का स्वरूप
स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में रोगियों की विस्तृत जांच, परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत स्नेहन, स्वेदन, कटिबस्ती, जानूबस्ती, मात्रावस्ति, नस्य, विरेचन और शिरोधारा जैसी पारंपरिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अनेक जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों का सफल उपचार किया गया। उपचार प्रक्रियाओं में रोगियों को राहत, सहजता और दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हुए।
पंचकर्म चिकित्सा अंतर्गत विगत वर्ष कुल 5399 पंचकर्म प्रक्रियाओं का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों में पंचकर्म उपरांत शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, पुनरावृत्ति में कमी और उच्च संतुष्टि देखने को मिली। क्षेत्र में आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा के प्रति जनविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लोग इसका लाभ लेने के लिए अधिक संख्या में केंद्र पहुंच रहे हैं। उपचार से लाभ हासिल करने वाली
शुकवारा बाई, उम्र 52 वर्ष ने बताया कि वह दोनों घुटनों में अत्यधिक दर्द से पीड़ित थीं और चिकित्सकों द्वारा उन्हें ऑपरेशन की सलाह तक दे दी गई थी। स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत अभ्यंग, नाड़ी स्वेदन और जानूबस्ती की प्रक्रियाएं लीं। लगभग एक माह के उपचार के बाद उन्हें आशातीत राहत मिली। घुटनों के दर्द में भारी कमी आई, चलने-फिरने में सहजता बढ़ी और उन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह गई। आज वे सामान्य जीवनशैली के साथ अपनी दैनिक गतिविधियों को आरामपूर्वक पूरा कर पा रही हैं और पंचकर्म चिकित्सा को अपने लिए जीवनदायी मानती हैं।

स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा जीर्ण और कष्टसाध्य रोगों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। इस चिकित्सा पद्धति ने अनेक रोगियों को राहत प्रदान की है और कई मामलों में शल्य क्रिया की आवश्यकता भी समाप्त कर दी है। इस पहल से न केवल स्वास्थ्य लाभ बढ़ा है, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है।

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