कोरबा
सेवानिवृत्त जिला खाद्य अधिकारी एवं अधिवक्ता कन्हैया लाल जायसवाल पंचतत्व में विलीन
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6 days agoon
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Divya Akashहजारों की संख्या में लोग अंतिम यात्रा में हुए शामिल, दी श्रद्धांजलि
कोरबा। आज अपरान्ह 3.30 बजे मोती सागर स्थित मुक्तिधाम में कोरबा के प्रतिष्ठित नागरिक, सेवानिवृत्त जिला खाद्य अधिकारी एवं अधिवक्ता कन्हैया लाल जायसवाल पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके ज्येष्ठ पुत्र जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष अजय जायसवाल ने उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से मुखाग्रि दी।
लालूराम कालोनी निवास से कन्हैया लाल जायसवाल की अंतिम यात्रा अपरान्ह 3.00 बजे निकली और 3.30 बजे मोती सागर पारा स्थित मुक्तिधाम पहुंची, जिसमें कोरबा सहित जिले के काफी लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। दूर-दराज से भी परिजन, स्वजन एवं शुभचिंतक कन्हैया लाल जायसवाल की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
अजय जायसवाल ने दी मुखाग्रि













जिला पंचायत कोरबा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं कन्हैया लाल जायसवाल के ज्येष्ठ पुत्र अजय जायसवाल ने अपने पिता की पंच भौतिक देह को मुखाग्रि दी। कन्हैया लाल जायसवाल की पंच भौतिक देह पंचभूत तत्व में विलीन हो गई। सभी पुत्रों की नेत्रों से अश्रु बह रहे थे।
सरल, सादगी और परोपकारी था कन्हैया लाल जायसवाल का पूरा जीवन

80 साल की उम्र में कन्हैया लाल जायसवाल का कल प्रात: 3.00 बजे ब्रह्म मुहूर्त में निधन हो गया। स्वर्गीय श्री जायसवाल का पूरा जीवन सरल, सादगी और परोपकार से परिपूर्ण था। उनका व्यक्तित्व काफी आकर्षक था और सभी के साथ समान व्यवहार रखते थे। छोटों को सीख भी देते थे और मेहनत तथा स्वयं पर विश्वास की सीख देते थे। वे संयुक्त परिवार को आज की आवश्यकता बताते हुए स्वयं अपने परिवार को बांधे रखा। उनके चारों पुत्र अजय जायसवाल, बजरंग, अमित व सुमित जासवाल अपने परिवारों के साथ संयुक्त रूप से रहते हैं और माता-पिता को जीवन की प्राथमिकता में रखते हैं। पिता के निधन के बाद सभी पुत्र और पुत्री आभा जायसवाल, डॉ. प्रतिभा जायसवाल असहाय सा महसूस कर रहे हैं।
ज्येष्ठ पुत्र अजय जायसवाल ने कहा-आज दिल और दिमाग बोझिल हो गया। परिवार का सबसे बड़ा पेड़ (पिता) आज ढेर हो गया। पिताश्री आज हम सबको छोड़कर देवलोक गमन कर गए। पिता का साया सदा के लिए उठ गया। पूरा परिवार आज टूट सा गया, लेकिन नियति के सामने हम सब असहाय हैं। भगवान उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे और फिर पुनर्जन्म में हमारे परिवार में ही लौट कर जन्म लें।
हजारों लोगों ने दी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि



अंतिम यात्रा में लोगों की भीड़ देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कन्हैया लाल जायसवाल का व्यक्तित्व कितना ऊंचा था। सादगी से परिपूर्ण जीवन जीने वाले कन्हैया लाल जायसवाल ने कभी भी अपने मन में अहं को हावी नहीं होने दिया और वे बिना परिचय एवं बिना जान-पहचान के लोगों से भी अपनों जैसा व्यवहार करते रहे। हजारों लोगों ने मोती सागर मुक्तिधाम में उन्हें नमन किया और श्रद्धांजलि दी। विजय जायसवाल ने कन्हैया लाल जायसवाल के व्यक्तित्व को कुछ शब्दों में उकेरा। उनकी अंतिम यात्रा में सभी धर्म के लोग शामिल हुए। वे जात-पात, धर्म के भेद-भाव से रहित सद्भाव का जीवन जीते रहे। वे कहा करते थे-मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। दिव्य आकाश परिवार की ओर से स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल जैसे महान व्यक्तित्व को कोटि-कोटि प्रणाम करता है और श्रद्धांजलि व्यक्त कर ईश्वर से प्रार्थना करता है कि स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल जायसवाल की आत्मा को सद्गति प्रदान करते हुए अपने श्रीचरणों में स्थान दे और परिवार को इस विकट परिस्थिति को सहने की क्षमता प्रदान करे।
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कोरबा
सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
Published
8 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
Published
8 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
कोरबा
सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत
Published
8 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashसुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

हृदयविदारक घटना – 25 वर्षीय युवती का सर कुचलकर हत्या,,,,दीपका…..देखे पूरी खबर
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