छत्तीसगढ़
राहुल-गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस में पोस्टर पर बवाल:सह-प्रभारियों के चेहरे गायब, लेतफलांग, संपत कुमार और विजय ने हाईकमान से की शिकायत
रायपुर, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ दौरा खत्म होने के बाद अब पार्टी के भीतर पोस्टर राजनीति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अभनपुर में आयोजित कांग्रेस के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर और राहुल गांधी के स्वागत के लिए लगाए गए पोस्टरों से प्रदेश के सह-प्रभारियों के चेहरे गायब रहने पर नाराजगी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि, कांग्रेस के सह-प्रभारी जरिता लेतफलांग, संपत कुमार और विजय जांगिड़ ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और मामले की शिकायत पार्टी हाईकमान तक पहुंचाई गई है।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के सामने भी इस मुद्दे को उठाया गया है। सह-प्रभारियों का मानना है कि प्रदेश स्तर के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उनकी पूरी तरह अनदेखी की गई।

आज शहर में लगे पोस्टरो में सह-प्रभारियों के चेहरे गायब दिखे।
पोस्टरों में बड़े नेताओं के चेहरे गायब
रविवार को राहुल गांधी के दौरे के दौरान स्वागत के लिए लगे अधिकांश पोस्टरों में सिर्फ पीसीसी चीफ दीपक बैज और पूर्व महापौर एजाज ढेबर की तस्वीरें नजर आईं।
जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत समेत कई वरिष्ठ नेताओं के चेहरे पोस्टरों पर छोटे फोटो के रूप में नजर आए। पार्टी के भीतर इस बात की भी चर्चा है कि प्रशिक्षण शिविर की व्यवस्था और प्रचार-प्रसार में एजाज़ ढेबर की प्रमुख भूमिका रही, जिसके चलते पोस्टरों में उनकी मौजूदगी सबसे ज्यादा दिखाई दी।
प्रशिक्षण शिविर में पहुंचे थे राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी रविवार को एक दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे थे। वे अभनपुर में चल रहे कांग्रेस के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने करीब 40 मिनट तक प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की और बाद में जिला व शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ सीधा संवाद किया।
करीब चार घंटे के कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी रायपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। एयरपोर्ट जाते समय उन्होंने सड़क किनारे एक चाय की टपरी पर रुककर चाय पी। इस दौरान उन्होंने पीसीसी चीफ दीपक बैज को अपने हाथों से बिस्किट भी खिलाया। उनके साथ सचिन पायलट, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

अधिकांश पोस्टरों में पीसीसी चीफ दीपक बैज और पूर्व महापौर एजाज ढेबर की तस्वीरें नजर आईं।
अब पोस्टर बने नई सियासत का कारण
राहुल गांधी का दौरा खत्म होने के बाद संगठनात्मक प्रशिक्षण से ज्यादा चर्चा अब पोस्टरों की हो रही है। सह-प्रभारियों की नाराजगी और हाईकमान तक शिकायत पहुंचने के बाद यह मामला कांग्रेस के भीतर नई सियासी बहस का विषय बन गया है।
पार्टी के नेता भले ही इसे छोटा मुद्दा बता रहे हों, लेकिन अंदरखाने इसे संगठन के भीतर शक्ति प्रदर्शन और गुटीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़
अन्ना रेड्डी सट्टा ऐप का भंडाफोड़…3 गिरफ्तार:गरीबों के नाम पर खाते खुलवाए, रांची से चल रहा था खेल, 81 ATM और 62 पासबुक जब्त
दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन जुआ-सट्टा और अवैध पैसों के लेन-देन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 3 अंतर्राज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ऑनलाइन सट्टा ऐप अन्ना रेड्डी के माध्यम से यह पूरा नेटवर्क आरोपी चला रहे थे। मामला थाना खुर्सीपार क्षेत्र का है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 81 एटीएम कार्ड, 62 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक, 13 मोबाइल, 11 सिम कार्ड, एक लैपटॉप और हार्ड डिस्क जब्त किया है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब ढाई लाख रुपए बताई गई है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। बाद में उन खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम और दूसरे दस्तावेज अपने पास रख लेते थे।
इन्हीं खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टे से आने वाले पैसों को इधर-उधर करने और असली नेटवर्क छिपाने के लिए किया जाता था। आरोपी खुर्सीपार के मैदान में बिजली खंभे के नीचे बैठकर ही पूरा नेटवर्क चला रहे थे। पुलिस ने इसके बाद सभी आरोपी को गिरफ्तार किया है।

मोबाइल, लैपटॉप के साथ एटीएम कार्ड, पासबुक भी पुलिस ने किया जब्त।
लैपटॉप और मोबाइल से रखते थे रिकॉर्ड
पुलिस को 21 जून को सूचना मिली थी कि, आईटीआई खेल मैदान के पास कुछ युवक लैपटॉप और मोबाइल की मदद से ऑनलाइन जुआ-सट्टा चला रहे हैं। सूचना मिलने के बाद खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की टीम मौके पर पहुंची।
पूरा रिकॉर्ड इनके मोबाइल और लैपटॉप में था। गिरफ्तार आरोपियों में अजय मिश्रा (23), निवासी सेक्टर-1 भिलाई, दीपक कुमार (32), निवासी नालंदा बिहार और करण कुमार सिंह (26), निवासी खुर्सीपार भिलाई शामिल हैं। फिलहाल पुलिस जब्त किए गए मोबाइल, बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है।
पुलिस को देखकर भागने लगे आरोपी
एएसपी ग्रामीण मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि, पुलिस टीम जैसे ही मौके पर पहुंची वहां मौजूद तीनों युवकों ने भागने की कोशिश की। हालांकि घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया गया। तलाशी लेने पर उनके पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले।
पूछताछ में आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टा संचालन और अवैध लेन-देन में शामिल होने की बात कबूल की। जांच में सामने आया कि आरोपी “अन्ना रेड्डी” नाम के ऑनलाइन बेटिंग एप का इस्तेमाल कर सट्टा कारोबार चला रहे थे। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि आईपीएल सीजन के दौरान यह नेटवर्क झारखंड के रांची से ऑपरेट किया जा रहा था।

पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार।
ऐसे काम करता था म्युल अकाउंट नेटवर्क
पुलिस के अनुसार इस पूरे खेल में “म्यूल अकाउंट” का इस्तेमाल किया जाता था। इसमें ऐसे लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले जाते हैं जिनका लेन-देन से सीधा संबंध नहीं होता। आरोपी खाते खुलवाने के बाद सभी दस्तावेज अपने पास रख लेते थे और फिर उन्हीं खातों के जरिए ऑनलाइन सट्टे की रकम अलग-अलग जगह भेजते थे।
लेन-देन को छिपाने के लिए कई मोबाइल नंबर, बैंक खाते, सिम कार्ड और डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता था ताकि असली संचालकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
छत्तीसगढ़
जशपुर: महिला आयोग की सुनवाई में कई मामलों का हुआ निराकरण, छह वर्ष से साथ रह रही महिला से विवाह कराने के निर्देश
आयोग के हस्तक्षेप से पत्नी और बच्चों को मिलेगा 20 हजार रुपए मासिक भरण-पोषण
जशपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव ने आज जशपुर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में महिला उत्पीड़न एवं अन्य प्रकरणों की सुनवाई की। प्रदेशभर में आयोजित सुनवाई में 401 मामलों पर विचार किया गया, जिनमें जशपुर जिले के 10 प्रकरण शामिल रहे।

सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मामले में आयोग ने छह वर्षों से साथ रह रहे एक युगल के विवाह की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए। मामले में अनावेदक, जो वर्तमान में सेना में कार्यरत है, ने आवेदिका के साथ लंबे समय से सहजीवन में रहने और उनसे एक पुत्री होने की बात स्वीकार की। आयोग के समक्ष आवेदिका ने एफआईआर दर्ज कराने के बजाय विधिवत विवाह कराने की इच्छा जताई, जिस पर अनावेदक ने सहमति दी। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को दोनों पक्षों के विवाह की प्रक्रिया प्रारंभ कर दो माह के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही अनावेदक को प्रत्येक माह 10 हजार रुपए भरण-पोषण राशि जमा कराने का आदेश दिया गया।
एक अन्य प्रकरण में सीआरपीएफ में पदस्थ कर्मचारी द्वारा पत्नी और दो बच्चों के भरण-पोषण की उपेक्षा किए जाने की शिकायत पर आयोग ने हस्तक्षेप किया। सुनवाई के दौरान अनावेदक ने अपनी पत्नी एवं बच्चों के लिए प्रतिमाह 20 हजार रुपए भरण-पोषण राशि देने पर सहमति व्यक्त की। आयोग ने संरक्षण अधिकारी को नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भूमि विवाद से जुड़े एक मामले में आयोग ने दोनों पक्षों को तहसीलदार के समक्ष सीमांकन कराने और वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार भूमि का कब्जा सुनिश्चित करने की सलाह दी। सीएचसी फरसाबहार में पदस्थ एक स्टाफ नर्स की आवास संबंधी शिकायत पर आयोग ने संबंधित विभाग को आवंटित शासकीय आवास की तत्काल मरम्मत कराने तथा मरम्मत अवधि में नियमानुसार एचआरए प्रदान करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान कुछ मामलों में आपसी सहमति एवं सुलह के आधार पर प्रकरणों का निराकरण किया गया, जबकि न्यायालय में लंबित एक मामले को आयोग ने सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए बंद कर दिया। महिला आयोग ने सभी पक्षों को आपसी संवाद, कानूनी प्रावधानों के पालन एवं महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
छत्तीसगढ़
सूरजपुर : हाथी प्रभावित वनांचल में प्रधानमंत्री आवास योजना बनी सुरक्षा की ढाल
सूरजपुर के करमचन्द्र को मिला पक्का घर, हाथियों के भय और असुरक्षा से मिली राहत
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले अनेक परिवारों के लिए सुरक्षित आवास केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। विशेषकर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीणों को प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ वन्यजीवों के खतरे का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार बन रही है।

सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सिंघरा निवासी करमचन्द्र का परिवार वर्षों तक मिट्टी और खपरैल से बने जर्जर कच्चे मकान में रहता था। यह गांव हाथियों के नियमित आवागमन वाले क्षेत्र में स्थित है, जहां हर वर्ष हाथियों की गतिविधियों के कारण ग्रामीणों को भय और असुरक्षा के बीच जीवन यापन करना पड़ता है। कच्चे मकान की कमजोर दीवारें और छत परिवार की चिंता को और बढ़ा देती थीं।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्रता मिलने के बाद करमचन्द्र के जीवन में बदलाव की नई शुरुआत हुई। योजना के अंतर्गत प्राप्त शासकीय सहायता तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अभिसरण से उपलब्ध श्रम सहयोग ने आवास निर्माण को गति प्रदान की। स्थानीय पंचायत, जनपद पंचायत और प्रशासनिक अमले के समन्वित प्रयासों से निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से पूरा कराया गया।
हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के कारण निर्माण सामग्री को सुरक्षित रूप से निर्माण स्थल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित कर्मचारियों के सहयोग से सभी आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। हाथियों की मौसमी गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए आवास का निर्माण समय पर पूर्ण किया गया।
आज श्री करमचन्द्र का परिवार मजबूत पक्के मकान में सुरक्षित जीवन बिता रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के समन्वय से निर्मित शौचालय ने परिवार की सुविधाओं में वृद्धि की है और खुले में जाने की आवश्यकता समाप्त हुई है। इससे वन्यजीवों से संभावित जोखिम भी कम हुआ है।
करमचन्द्र बताते हैं कि पहले हाथियों के गांव के आसपास आने की सूचना मिलते ही पूरा परिवार भयभीत हो जाता था, लेकिन अब पक्के घर के कारण उन्हें सुरक्षा का विश्वास मिला है। उनके अनुसार यह आवास केवल एक भवन नहीं, बल्कि परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य और सम्मानजनक जीवन का आधार है।
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