देश
रुपया 89.79 तक गिरा, सबसे निचले स्तर पर:विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे, डॉलर की मजबूती से दबाव बढ़ा
मुंबई, एजेंसी। रुपया डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कारोबार के दौरान रुपया 34 पैसे गिरकर रू.89.79 के स्तर पर आ गया था। यह 2 हफ्ते पहले के ऑल-टाइम लो (89.66) को पार कर गया। 21 नवंबर को रुपया 98 पैसे गिरा था।
घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और लगातार विदेशी फंड्स की निकासी ने रुपए पर दबाव बनाया है। सुबह रुपया 89.45 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था। वहीं शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे की गिरावट के साथ 89.45 पर बंद हुआ था।
2025 में अब तक रुपया 4.77% कमजोर हुआ
रुपया 2025 में अब तक 4.77% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 89.79 के लेवल पर पहुंच गया है।
रुपए में गिरावट से इम्पोर्ट करना महंगा होगा
मान लीजिए कि जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी, तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 50 रुपए में 1 डॉलर मिल जाता था। अब 1 डॉलर के लिए छात्रों को 89.79 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इससे छात्रों के लिए फीस से लेकर रहना-खाना और अन्य चीजें महंगी हो जाएंगी।
रुपए में गिरावट का मतलब है कि भारत के लिए चीजों का इम्पोर्ट महंगा होना है। इसके अलावा विदेश में घूमना और पढ़ना भी महंगा हो गया है।
रुपया पर क्यों बढ़ा डॉलर का दबाव, क्या हैं वजहें
रुपए की यह गिरावट डॉलर की वैश्विक मजबूती से जुड़ी है। डॉलर इंडेक्स 0.04 फीसदी ऊपर 99.50 पर पहुंच गया। इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों में भी उछाल आया, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में 1.96% की बढ़ोतरी के साथ यह 63.60 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
इंपोर्टर्स की ओर से डॉलर की भारी मांग ने भी रुपए को नीचे धकेला। फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPIs) हाई वैल्यूएशन के चलते कंपनियों के स्टेक्स बेच रहे हैं, जिससे आउटफ्लो हो रहा है।
ऑयल बायिंग, गोल्ड बायिंग और कॉर्पोरेट्स व सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से री-पेमेंट्स ने भी दबाव बढ़ाया। ट्रेड टेंशंस के चलते US के साथ नेगोशिएशन में रुकावटें आ रही हैं। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से टैरिफ इंपोजिशन ने बातचीत को मुश्किल बनाया है।
हालांकि कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने कहा है कि 2025 के आखिर तक एक फ्रेमवर्क ट्रेड डील पर सेटलमेंट की उम्मीद है, जो इंडियन एक्सपोर्टर्स को टैरिफ बेनिफिट्स देगी।
बाजार पर दिखा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
रुपए में गिरावट का घरेलू इक्विटी मार्केट्स पर भी नेगेटिव असर पड़ा। आज सेंसेक्स 64 गिरकर 85,641.90 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 27 अंक गिरा, ये 26,175.75 के स्तर पर बंद हुआ।
वहीं शुक्रवार को FIIs ने इक्विटीज में 3,795.72 करोड़ रुपए की नेट सेलिंग की थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आउटफ्लो वैल्यूएशन प्रेशर और ग्लोबल क्यूज से जुड़ा है।
एक्सपर्ट्स ने कहा- आउटफ्लो ने चिंता बढ़ाई
- मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपया प्रेशर में है, क्योंकि FPIs की हैवी बायिंग से पैसा बाहर जा रहा है।
- हाई वैल्यूएशंस के चलते स्टेक्स सेल, ऑयल-गोल्ड बायिंग और री-पेमेंट्स से आउटफ्लोज हो रहे हैं।
- शॉर्ट टर्म में यह ट्रेंड कंटिन्यू रह सकता है, लेकिन ट्रेड डील पर प्रोग्रेस से राहत मिल सकती है।
करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?
डॉलर की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना, टूटना, कमजोर होना कहते हैं। अंग्रेजी में करेंसी डेप्रिसिएशन कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे वह इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन करता है। फॉरेन रिजर्व के घटने और बढ़ने का असर करेंसी की कीमत पर दिखता है।
अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर, अमेरिका के रुपए के भंडार के बराबर होगा तो रुपए की कीमत स्थिर रहेगी। हमारे पास डॉलर घटे तो रुपया कमजोर होगा, बढ़े तो रुपया मजबूत होगा। इसे फ्लोटिंग रेट सिस्टम कहते हैं।
देश
मोदी ने देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट का उद्घाटन किया:नोएडा में बोले- युद्ध के संकट से देश को एकजुट होकर लड़ना है
नोएडा,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यूपी के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्घाटन किया। यह अभी देश का सबसे बड़ा और एशिया का दूसरा सबसे बड़ा एयरपोर्ट है। 4 फेज पूरे होने पर एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हो जाएगा।
पीएम ने जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से इजराइल-अमेरिका और ईरान की जंग से उपजे संकट से एकजुट होकर लड़ने की अपील की। उन्होंने कहा- कल सभी राज्यों के सीएम से चर्चा हुई। देशवासियों से कहूंगा कि धैर्य और एकजुटता के साथ इस संकट का सामना करें। ये पूरी दुनिया को परेशान करने वाला संकट है।

प्रधानमंत्री ने कहा-
देश के राजनीतिक दलों से कहना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।
एयरपोर्ट के पहले फेज का काम पूरा हो गया है। इसमें करीब 3300 एकड़ जमीन पर टर्मिनल और रनवे बनाए गए हैं। यह टर्मिनल हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 11 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
एयरपोर्ट के उद्घाटन की तस्वीरें…

पीएम ने नोएडा के एयरपोर्ट का मॉडल देखा। अफसरों से इसकी डिटेल के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

मोदी ने नोएडा एयरपोर्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान सीएम योगी साथ रहे।

मंच पर पीएम मोदी ने सीएम योगी के साथ लंबी बातचीत की।
मोदी के भाषण की 3 बड़ी बातें
1. ‘पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से दुनिया के सामने संकट खड़ा हुआ’
पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है। इसके चलते कई देशों में संकट पैदा हो गया है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों से मंगाता है। इसलिए सरकार हर वह कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों और किसानों पर बोझ न पड़े। 140 करोड़ देशवासी इस मुसीबत का एकजुट होकर सामना करें।
2. ‘नोएडा को पहले अंधविश्वास की वजह से अपने हाल पर छोड़ दिया गया था’
नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे। जब यहां सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया। तब पुराने मुख्यमंत्री (अखिलेश) इतने डरे हुए थे कि वे कार्यक्रम में आए ही नहीं। मुझे भी डराने की कोशिश की गई, कहा गया- नोएडा मत जाइए। अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हैं।
3. ‘सपा ने पश्चिमी यूपी को लूट का एटीएम बना दिया था’
सपा ने पश्चिमी यूपी को लूट का एटीएम बना दिया था। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरू के 2-3 सालों में उन्होंने जेवर एयरपोर्ट का काम नहीं होने दिया, लेकिन जैसे ही यहां भाजपा सरकार बनी तो जेवर एयरपोर्ट की नींव पड़ी, निर्माण हुआ और अब शुरू भी हो गया।
नोएडा एयरपोर्ट की तस्वीरें देखिए-

यह तस्वीर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की है। इससे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा। ये IGI एयरपोर्ट से करीब 72 किमी दूर है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है।

एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एंट्री के बाद 20 मिनट से कम समय में बोर्डिंग संभव है। तस्वीर एयरपोर्ट के चेक-इन एरिया की है।
एयरपोर्ट 2040 तक पूरा बनकर तैयार होगा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है। नोएडा एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े अफसरों ने बताया- एयरपोर्ट से फ्लाइट मई से शुरू हो सकती है।
एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एंट्री के बाद 20 मिनट से कम समय में बोर्डिंग संभव है। एशिया की सबसे बड़े एयरपोर्ट की बात करें तो अभी चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसका एरिया 47 स्क्वायर किमी है।

देश
रूस 4 महीने तक पेट्रोल नहीं बेचेगा:1 अप्रैल से बैन शुरू, भारत पर कम, चीन-तुर्किये और ब्राजील पर ज्यादा असर
मॉस्को,एजेंसी। रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर रोक का फैसला किया है। उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय से इस प्रस्ताव को तैयार करने को कहा। रूस के मुताबिक यह कदम घरेलू सप्लाई बनाए रखने और कीमतें नियंत्रित रखने के लिए है।
नोवाक ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे इजराइल-ईरान जंग की वजह से ग्लोबल तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्शन बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है।

रूस रोजाना 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात करता है। निर्यात रोकने से चीन, तुर्किये, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देशों पर असर पड़ सकते हैं। ये देश रूसी तेल उत्पादों के बड़े खरीदार हैं। भारत पर असर कम होगा क्योंकि वह पेट्रोल नहीं, कच्चा तेल खरीदता है।

रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने शुक्रवार को देश में पेट्रोल और दूसरे तेल उत्पादों की उपलब्धता और कीमतों की स्थिति की समीक्षा की।
रूस के फैसले का भारत पर कितना असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत सीधेतौर पर पेट्रोल जैसे तैयार ईंधन पर ज्यादा निर्भर नहीं है, बल्कि कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) पर निर्भर है। क्रूड ऑयल को ही रिफाइन कर पेट्रोल और डीजल बनाए जाते हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 80% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 20% रूस से आता है।
भारत बहुत कम मात्रा में पेट्रोल या अन्य तैयार ईंधन आयात करता है। इसके बजाय देश अपने बड़े रिफाइनरी नेटवर्क के जरिए कच्चे तेल को खुद प्रोसेस करता है। यही वजह है कि रूस के पेट्रोल निर्यात पर लगी रोक का भारत पर सीधा असर पड़ने की संभावना बहुत कम है।
भारत रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करता है। यह न सिर्फ अपनी घरेलू जरूरत पूरी करता है, बल्कि तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि रूस के फैसले से अगर वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। पहले से ही जंग के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।
पहले भी पेट्रोल एक्सपोर्ट पर रोक लगाई गई थी
मॉस्को में शुक्रवार को पेट्रोल एक्सपोर्ट के बैन को लेकर बैठक हुई थी। इसमें खासतौर पर यह जोर दिया गया कि राष्ट्रपति पुतिन ईंधन कीमतें नियंत्रित रखना चाहते हैं।
मंत्री नोवाक ने बैठक में कहा कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। तेल कंपनियों ने कहा कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और रिफाइनरियां पूरी या उससे अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं, जिससे जरूरत पूरी हो रही है।
रूस पहले भी कीमत नियंत्रण और घरेलू सप्लाई के लिए पेट्रोल-डीजल निर्यात पर रोक लगा चुका है। पिछले साल भी ऐसा हुआ था, जब यूक्रेन हमलों से रिफाइनरियां प्रभावित हुई थीं।
इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, रूस ने पिछले साल करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल एक्सपोर्ट किया था, यानी हर दिन लगभग 1.17 लाख बैरल के बराबर है।
एक दिन पहले ही नोवाक ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो रूस फिर से तेल निर्यात पर रोक लगा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रूस का यूराल्स तेल और दूसरे तेल उत्पाद इन दिनों ब्रेंट क्रूड के बराबर या उससे भी महंगे दाम पर बिक रहे हैं।

क्रूड से 15 डॉलर तक महंगा मिल रहा रूसी तेल
इधर, इजराइल-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे निपटने के लिए भारतीय रिफाइनर्स ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने का फैसला किया है। अप्रैल महीने की डिलीवरी के लिए भारत ने रूस से लगभग 60 मिलियन यानी 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है।
जो रूसी तेल कभी भारत को भारी डिस्काउंट पर मिलता था, अब उसके लिए प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सौदे ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम (अतिरिक्त कीमत) पर बुक किए गए हैं। सप्लाई की कमी और मांग ज्यादा होने की वजह से कीमतों में यह उछाल देखा जा रहा है।
दरअसल, भारत की इस खरीदारी के पीछे अमेरिका की दी गई छूट का बड़ा हाथ है। अमेरिका ने भारत को उन रूसी तेल कार्गो को लेने की अनुमति दी है, जो 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। बाद में इस छूट का दायरा बढ़ाकर 12 मार्च कर दिया गया।
देश
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस विधायकों में हाथापाई:राहुल को पप्पू कहा, खामेनेई की तस्वीर लहराई, CM बोले- ईरान पर युद्ध थोपा
श्रीनगर,एजेंसी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को लेकर प्रदर्शन हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता खामेनेई की तस्वीर लेकर सदन के अंदर पहुंचे और समर्थन में नारेबाजी की। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओ ने खामेनेई के पोस्टर भी लहराए।
इस बीच, सदन में कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच धक्का-मुक्की का भी वीडियो सामने आया। हालांकि, ये विवाद भाजपा नेताओं के राहुल पर कमेंट को लेकर था। कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रहे थे।

जवाब में भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने कहा, ‘राहुल गांधी पप्पू हैं।’ इसके बाद दोनों नेताओं में हाथापाई होने लगी। वहीं, ईरान युद्द पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा- ईरान पर यह युद्ध थोपा गया। मानवता की हत्या हुई है।

पीएम मोदी और राहुल गांधी पर कमेंट को लेकर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हाथापाई हुई।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की तस्वीर लेकर विरोध प्रदर्शन करता नेशनल कॉन्फ्रेंस का विधायक।
नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक बोले- हम ईरान के साथ खड़े हैं
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने कहा, हम ईरान के साथ खड़े हैं। हमारी पार्टी और जम्मू-कश्मीर की सरकार उनके साथ खड़ी है। जैसे CM उमर अब्दुल्ला ने पिछली बार सिविल सोसाइटी में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा की थी। वैसे ही, आज हम सब यहां खड़े हैं।
हम समझते हैं कि जिस तरह से खामेनेई को मारा गया, किसी भी देश को दूसरे देश पर हमला करने का कोई हक नहीं है। मुझे लगता है कि देश की टॉप लीडरशिप को इसकी निंदा करनी चाहिए। हम ईरान के लोगों का सपोर्ट कर रहे हैं।
कश्मीर में ईरान के लिए रू.18 करोड़ चंदा जुटाया गया
कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में करोड़ों रुपए का चंदा जुटाया गया है। इससे देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक करीब रू.18 करोड़ का चंदा जुटाया गया है। इनमें से 85% राशि शिया समुदाय ने दान की है। कश्मीर का बड़गाम शिया बहुल इलाका है। यहां से करीब रू.9.5 करोड़ जुटाए गए हैं।
यह फंडरेजिंग अभियान जकात और सदका के जरिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है।


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