देश
अमेरिका से LPG, रूस से क्रूड लेकर भारत पहुंचा शिप:गैस-कच्चा तेल लेकर 5 जहाज भारत आ चुके, फारस की खाड़ी में सभी 22 जहाज सुरक्षित
बेंगलुरु,एजेंसी। अमेरिका के टेक्सास से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर एक कार्गो शिप रविवार को मेंगलुरु पोर्ट पर पहुंच गया है। वहीं रूस से एक जहाज क्रूड लेकर भारत आया। पिछले 7 दिनों में करीब पांच जहाज गैस-कच्चा तेल लेकर समुद्र के रास्ते भारत पहुंचे।
इससे पहले 18 मार्च को क्रूड ऑयल टैंकर ‘जग लाडकी’ गुजरात में अडाणी पोर्ट्स आया था। वहीं, दो अन्य LPG कैरियर MT शिवालिक और MT नंदा देवी करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर 16 और 17 मार्च को भारत आए थे। हालांकि, ये तीनों जहाज होर्मुज के रास्ते से होकर गुजरे थे।
फारस की खाड़ी में अभी भी करीब 22 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। हालांकि, वे सभी सुरक्षित हैं। फारस की खाड़ी में मौजूद होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के अहम शिपिंग रूट्स में शामिल है। यहां से दुनियाभर की करीब 20% ऑयल की सप्लाई होती है।
पिछले 3 जहाज कब-कब भारत पहुंचे…
18 मार्च: जग लाडकी टैंकर 81 हजार मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया

यह तस्वीर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जग लाडकी शिप की है।
भारतीय झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर ‘जग लाडकी’ गुजरात के मुंद्रा पोर्ट (अडानी पोर्ट्स) पर आया था। इस टैंकर में करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल था। यह तेल UAE से आया, जिसे फुजैराह पोर्ट पर लोड किया गया था।
17 मार्च: नंदा देवी जहाज 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत पहुंचा

नंदा देवी जहाज भी गुजरात के पोर्ट आया था।
शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक नंदा देवी नाम का जहाज भी करीब 46 हजार टन LPG लेकर भारत आया। जहाज गुजरात के वडीनार (जामनगर) बंदरगाह पर पहुंचा था।
16 मार्च: शिवालिक जहाज 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर गुजरात आया था

शिवालिक पहला जहाज था जो जंग के हालातों में भारत आया था।
जंग के बीच LPG कैरियर जहाज शिवालिक कतर से गैस लेकर भारत पहुंचा। यह जहाज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर आया था। शिवालिक जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो करीब 32.4 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर बताई जा रही है। यह जहाज 14 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर रवाना हुआ था। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच यह भारत पहुंचने वाला पहला LPG जहाज था।
LPG संकट- राज्यों को 23 मार्च से 20% ज्यादा गैस मिलेगी
केंद्र ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। 23 मार्च से राज्यों को अब पहले के मुकाबले 20% ज्यादा गैस दी जाएगी। इसके बाद राज्यों को मिलने वाली कुल सप्लाई संकट से पहले के स्तर (प्री-क्राइसिस लेवल) के 50% तक पहुंच जाएगी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। इसमें कहा गया कि सामुदायिक रसोई, रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों और इंडस्ट्रियल कैंटीन को प्राथमिकता दी जाए।
साथ ही प्रवासी मजदूरों को प्राथमिकता से 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, गैस की कालाबाजारी या गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाने को भी कहा गया है।
जहाज का भारत आना क्यों है बड़ी बात, जंग से होर्मुज रास्ता बंद
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला किया, जिसमें कई सैन्य और परमाणु ठिकाने निशाना बने। इस ऑपरेशन में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई मंत्री-अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया।
युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से आपूर्ति बाधित हुई। यहां से भारत का 80-85% LPG आयात होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है। देश की 60% से ज्यादा LPG बाहर से आती है।
इसी के कारण भारत में LPG किल्लत जैसे हालत बने, लेकिन भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में LPG और तेल की कोई कमी नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहे।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं।
देश
सोने की कीमतों में लगातार गिरावट, अभी और सस्ता हो सकता है, एक्सपर्ट्स ने बताए नए दाम
मुंबई, एजेंसी। सोने की कीमतों में हाल ही में गिरावट देखने को मिली है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह और नीचे जाकर 10 ग्राम के लिए 1.27 लाख रुपये तक जा सकती है। मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने पर दबाव डाल रहे हैं। निवेशक सावधानी बरतें, क्योंकि बढ़ती मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की आशंकाओं से कीमतों में और गिरावट संभव है।
सोने की कीमतों में और गिरावट
पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। अनुमान है कि 10 ग्राम सोना करीब 1.27 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत लगभग 1,51,910 रुपये के आसपास बनी हुई है। इस हिसाब से कीमतों में करीब 25 हजार रुपये तक की और कमी संभव मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों का असर सोने की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया है। शुरुआती दौर में भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोना करीब 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई और यह एमसीएक्स पर लगभग 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो निवेशक सोने की बजाय डॉलर आधारित निवेश को प्राथमिकता देंगे। इसका सीधा असर सोने की मांग और कीमत दोनों पर पड़ सकता है। डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इसके अलावा, जब सोने की कीमतें 1.50 लाख रुपये के ऊपर जाती हैं, तो कई निवेशक मुनाफा कमाने के लिए अपनी होल्डिंग बेच देते हैं। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ती है और कीमतों पर दबाव आता है। भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों में भी ऊंचे दामों के कारण मांग में कमी देखी जाती है, जो कीमतों को और नीचे ला सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने का रुख कमजोर बना हुआ है। अनुमान है कि निकट भविष्य में इसकी कीमत 1.40 लाख से 1.47 लाख रुपये के बीच रह सकती है। हालांकि यदि दबाव बना रहा तो यह गिरकर 1.35 लाख और फिर 1.27 लाख रुपये तक भी पहुंच सकता है।
देश
सोनम वांगचुक 6 महीने बाद लेह पहुंचे:हजारों लोगों ने स्वागत किया, बोले- उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे, NSA में जेल में बंद थे
लेह,एजेंसी। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को 6 महीने (करीब 170 दिन) बाद लेह पहुंचे। केंद्र ने 14 मार्च को वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। इसके बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा किया गया था।
लेह में उनके लिए स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें वांगचुक के सैकड़ों समर्थक पहुंचे। वांगचुक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा- जिस मकसद के लिए हम काम कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज उगेगा। हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

वांगचुक ने कहा कि 170 दिनों के बाद इन पहाड़ों में आकर और लोगों से मिलकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। हमें उम्मीद है कि सभी तरफ से ऐसा ही माहौल बनेगा और मैं पूरे देश के उन लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा, जिन्होंने इस संघर्ष में हमारा साथ दिया। मैं लोगों से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।
वांगचुक के स्वागत की तस्वीरें…

सोनम वांगचुक के स्वागत के लिए हजारों लोग फूल और सफेद पटका लेकर पहुंचे।

महिला समर्थक ने सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी को गले लगाया।

सोनम वांगचुक 170 दिन बाद लेह पहुंचे।

सोनम वांगचुक के बड़े-बड़े बैनर लगाए गए।
हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था
वांगचुक ने जेल के समय को कठिन अनुभव बताते हुए कहा कि हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था। वहीं, इस दौरान मेरी पत्नी गीतांजली को कानूनी लड़ाई में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
दरअसल, केंद्र ने 14 मार्च को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। पिछले साल लद्दाख में उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई थी।
दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे।
NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।
14 मार्च: सोनम वांगचुक जेल से रिहा
केंद्र ने 14 मार्च को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। सरकार ने कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।
इसके बाद सुबह करीब 10 बजे सोनम की पत्नी गीतांजलि जोधपुर जेल पहुंचीं। कागजी कार्रवाई पूरी की गई। दोपहर करीब सवा एक बजे वांगचुक पत्नी के साथ एक निजी गाड़ी से जेल से निकले थे।
सरकार बोली- बातचीत का माहौल बनाने लिए फैसला लिया
सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई (17 मार्च) के दो दिन पहले लिया। कोर्ट सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था।
- केंद्र सरकार ने कहा कि यह फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया है।
- लद्दाख में विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।
- हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों का असर छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था।
- क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए हाई-पावर्ड कमेटी के जरिए बातचीत जारी रहेगी।
दो दिन पहले वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था
लद्दाख के लिए ईमानदार संवाद आवश्यक है। मैंने एक्टिविज्म से दूरी नहीं बनाई है। लद्दाख के प्रति मेरी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही है। इसका उद्देश्य लद्दाख के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी भविष्य है।
4 फरवरी को केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें लद्दाख के दो प्रमुख संगठन लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेट्स अलायंस शामिल हुए। इनके नेताओं ने वांगचुक की रिहाई की मांग दोहराई थी।
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे सोनम
सोनम को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।
आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी। 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।
वांगचुक ने जन्म लद्दाख में हुआ, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की
वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी।
9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया।
शिक्षा में सुधार के लिए SECMOL बनाया
इंजीनियरिंग के बाद वांगचुक ने साल 1988 में अपने भाई और पांच साथियों के साथ मिलकर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी SECMOL की शुरुआत की। इसका उद्देश्य लद्दाख के सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाना है। इसके लिए लद्दाख के सासपोल में मौजूद सरकारी हाई स्कूल में स्कूल सुधार के प्रयोग किए गए।
इसके बाद, SECMOL ने ‘ऑपरेशन न्यू होप’ की शुरुआत की। इसके तहत सरकारी स्कूलों में एजुकेशन रिफॉर्म और लोकलाइज्ड टेक्स्टबुक्स, टीचर्स की ट्रेनिंग और गांव-स्तरीय शिक्षा समितियों के गठन की पहल शुरू की गई। फिर इसे शिक्षा विभाग और गांव की जनता के सहयोग से आगे बढ़ाया गया।
जून 1993 से वांगचुक ने प्रिंट मैगजीन ‘लद्दाख्स मेलोंग’ की शुरुआत की। अगस्त 2005 तक लद्दाख की एकमात्र प्रिंट मैगजीन के एडिटर के रूप में काम किया। साल 2004 में हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया।
देश
मोदी सबसे ज्यादा दिन सरकार प्रमुख रहने वाले राजनेता:CM-PM मिलाकर बतौर हेड ऑफ गवर्नमेंट 8931 दिन पूरे, पवन कुमार चामलिंग को पीछे छोड़ा
नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर सरकार के प्रमुख के रूप में 8,931 दिन पूरे करने के साथ ही PM मोदी ने चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग को पीछे छोड़ दिया है।
PM मोदी इससे पहले गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रह चुके हैं, और वे ऐसे प्रधानमंत्री भी हैं जिनके पास मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने का सबसे लंबा अनुभव है।
गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री, पहली शपथ की तस्वीरें…

मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को शपथ ली थी।

मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार 26 मई 2014 को शपथ ली थी।
मोदी 4 बार गुजरात के मुख्यमंत्री, 3 बार प्रधानमंत्री बने
17 सितंबर को जन्मे नरेंद्र मोदी 6 साल की उम्र में ही कांग्रेस की ओर से महागुजरात आंदोलन का हिस्सा बने। फिर 8 साल की उम्र में RSS से जुड़ गए थे। 7 अक्टूबर 2001 को 51 साल की उम्र में बिना विधायक बने ही मोदी गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे 2002 में, 2007 में और फिर 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए।
अपने राजनीतिक सफर के 24 सालों में से पीएम मोदी 14 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। पिछले 11 साल से वे देश के प्रधानमंत्री हैं। यह उनका तीसरा कार्यकाल है।
2025 में मोदी ने बतौर पीएम इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ा, लेकिन नेहरू से अब भी पीछे
नरेंद्र मोदी भारत के लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले दूसरे PM भी हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 4077 दिनों (24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977) का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। 22 मार्च 2026 तक बतौर प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी 4318 पूरे कर चुके हैं।

हालांकि सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम है। वे 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक यानी लगातार कुल 6126 दिन तक इस पद पर रहे। PM मोदी नेहरू के रिकॉर्ड से 1812 दिन पीछे हैं। रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 2029 के बाद भी PM रहना पड़ेगा।
अब जानिए चामलिंग के बारे में…
भारत के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड सिक्किम के पूर्व CM पवन कुमार चामलिंग के नाम है। उनका कार्यकाल 12 दिसंबर 1994 से 26 मई 2019 तक रहा। यानी वे लगभग 24 साल 165 दिन CM रहे। उन्होंने CM ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ा था। ज्योति बसु 23 साल CM रहे थे। उन्होंने लगातार 5 बार चुनाव जीते और बिना ब्रेक इतने लंबे समय तक सत्ता में रहे।

चामलिंग ने मुख्यमंत्री रहते हुए सिक्किम को भारत का पहला 100% ऑर्गेनिक राज्य बनाया। राज्य में लंबे समय तक राजनीतिक स्थिरता बनाए रखी। शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए काम किया।
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