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छत्तीसगढ़

SI अभ्यर्थी ने रायपुर की सड़कों पर लगाई झाड़ू:कहा- जब तक रिजल्ट घोषित नहीं होगा, तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगे

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2018 के अभ्यर्थी रिजल्ट जारी करने की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से रायपुर में प्रदर्शन कर रहे हैं। नवा रायपुर तूता में 33 अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर हैं। बुधवार को अभ्यर्थियों ने शहर की अलग-अलग सड़कों पर झाड़ू लगाकर रिजल्ट जारी करने की मांग की।

इस दौरान तेलीबांधा से सिटी कोतवाली और जय स्तंभ चौक की सड़कों पर झाड़ू लगाते नजर आए। अभ्यर्थियों ने बताया कि, गृहमंत्री ने 10 से 15 दिनों में रिजल्ट जारी करने का आश्वसान दिया था जो समय भी पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक रिजल्ट नहीं निकाला जा रहा है। जिस कारण वे आंदोलन के लिए अगल-अगल तरह के प्रदर्शन कर रहे हैं।

झाड़ू लगाकर किया प्रदर्शन।

झाड़ू लगाकर किया प्रदर्शन।

मांग पूरी होने तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगे

शुरुआती दिनों में 3 कैंडिडेट आमरण अनशन पर बैठे थे। मंगलवार से 30 और लोग अमरण अनशन पर बैठ गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि, जब तक रिजल्ट नहीं निकलेगा, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इससे पहले भूख हड़ताल पर बैठे 2 कैंडिडेट की तबीयत खराब होने पर उन्हें पुलिस ने इलाज के लिए जबरदस्ती उठाकर अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया था।

SI कैंडिडेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के पर ब्लड डोनेट किया।

SI कैंडिडेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के पर ब्लड डोनेट किया।

55 लोगों ने किया ब्लड डोनेट

वहीं, मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिन पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नेताजी सुभाष स्टेडियम के पास जमा हुए जिनमें से 55 अभ्यर्थियों ने ब्लड डोनेट कर शासन से रिजल्ट जारी करने की मांग की थी। अभ्यर्थियों में जल्द परिणाम जारी नहीं करने पर परिवार के साथ उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

हाईकोर्ट की समय सीमा पूरी, पर रिजल्ट नहीं किया जारी

कैंडिडेट का कहना है कि, भर्ती प्रकिया पिछले 6 साल से चली आ रही है। हाईकोर्ट ने भी 90 दिन के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरा करने का आदेश दिया था। 9 सितंबर को 90 दिन पूरे हो गए हैं। अभी तक रिजल्ट जारी नहीं किया गया है।

कैंडिडेट ने बताया कि, हाईकोर्ट में सिंगल और डबल बेंच दोनों ने भर्ती रद्द करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इससे पहले सभी परीक्षार्थियों ने गृहमंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने 15 दिन में रिजल्ट जारी करने का आश्वासन दिया था।

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छत्तीसगढ़

सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता

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जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें

सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई। 

महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।

 डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

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जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण

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जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने  सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।

राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर  कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।

मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

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जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री  डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं। 

 इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार  सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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