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चांदी एक दिन में ₹4,168 महंगी हुई, ₹2.40 लाख पहुंची

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सोने के दाम में रू.1,422 की तेजी, रू.1.37 लाख पार हुआ

नई दिल्ली,एजेंसी। सोने-चांदी के दाम में आज (9 जनवरी) तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 1,422 रुपए बढ़कर 1,37,195 रुपए पहुंच गया है। कल यह 1,35,773 रुपए/10g पर था।

वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 4,168 रुपए बढ़कर 2,39,994 रुपए पर आ गई है। कल इसकी कीमत 2,35,826 रुपए किलो थी।

इससे पहले 29 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत 1,38,161 रुपए प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर थी। वहीं, चांदी की कीमत 7 जनवरी को 2,48,000 रुपए प्रति किलोग्राम पहुंच गई थी, जो इसके भाव का अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।

अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग क्यों होते हैं?

IBJA की सोने की कीमतों में 3% GST, मेकिंग चार्ज, ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होता। इसलिए शहरों के रेट्स इससे अलग होते हैं। इन रेट्स का इस्तेमाल RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के रेट तय करने के लिए करता है। कई बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने के लिए इसे इस्तेमाल करते हैं।

2025 में सोना 75% और चांदी 167% महंगी हुई

  • पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत 57,033 रुपए (75%) बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपए हो गया।
  • चांदी का भाव भी इस दौरान 1,44,403 रुपए (167%) बढ़ा। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो इस साल के आखिरी दिन 2,30,420 रुपए प्रति किलो हो गई।

गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण

  • डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।
  • जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।
  • रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं।

चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण

  • इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।
  • ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।
  • मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी।

आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि चांदी की डिमांड में अभी तेजी है जिसके आगे भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में चांदी इस साल 2.75 लाख तक जा सकती है। वहीं अगर सोने के बात करें तो इसकी डिमांड में भी तेजी बनी हुई। ऐसे में इस साल आखिर तक ये 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है।

सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।

असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

  • मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है।
  • आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी।
  • स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है।
  • क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है।

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‘चंपत राय बेदाग-निष्कलंक, उनका भोलापन मुसीबत बना’:उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की – महासचिव गोविंद देव गिरि

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अयोध्या, एजेंसी। ‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’

‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’

ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं।

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36,000km से तस्वीरें लेने वाला पहला भारतीय सैटेलाइट लॉन्च:पाकिस्तान-चीन पर लगातार नजर रखेगा, आपदा से पहले अलर्ट में मदद करेगा

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श्रीहरिकोटा, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात 2:55 बजे EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।

EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है। इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे।

EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा। इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी।

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य है। करीब आठ महीने बाद ISRO का यह पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे।

सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।

सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।

GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।

GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।

ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05

GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लॉन्च किया।

EOS-05 लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को 36000km पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्या फायदा है?

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी गति पृथ्वी के घूमने के साथ बनी रहती है।

वहीं, LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाता है, इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।

जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।

दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी

EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर यानी ऐसे कैमरे लगे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं।

इससे सामान्य तस्वीर के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है, यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है।

EOS-05 की खासियत बहुत छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की बार-बार तस्वीरें लेना है।

2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल

अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।

GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।

ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए

PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के ‘अन्वेषा’ उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में बेकाबू होने के कारण मिशन फेल हो गया।

PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।

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श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो प्लेन पोल से टकराया:पार्किंग में ले जाते वक्त हादसा, अगला हिस्सा टूटा, यात्री सुरक्षित

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श्रीनगर, एजेंसी। श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो का विमान 6E 225 (VT-NOG) पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। फ्लाइट शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। घटना करीब सुबह 9 बजे बे नंबर-6 पर विमान को पार्क करते समय हुई। विमान में सवार सभी 200 यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

घटना के बाद यात्रियों और क्रू को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से विमान से सुरक्षित उतारा गया। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य है और सभी फ्लाइट्स निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं।

विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम विमान को पार्किंग बे में सही जगह लाने और सुरक्षित तरीके से पार्क कराने में मदद करता है।

घटना से जुड़ी तस्वीरें…

खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।

खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।

विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।

विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।

पोल से विमान के टकराने की संभावित वजहें…

  • विमान का अलाइनमेंट थोड़ा बिगड़ना- पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से हट गया हो।
  • संकेत को सही तरह से फॉलो न कर पाना- VDGS के डिस्प्ले/लाइट के संकेत में भ्रम या मानवीय गलती।
  • पायलट की विजिबिलिटी कम होना- बारिश, धुंध, रात या किसी अन्य वजह से पोल/मार्किंग स्पष्ट न दिखना।
  • VDGS में तकनीकी खराबी- सिस्टम गलत दूरी या दिशा दिखा रहा हो।
  • विमान की गति या ब्रेकिंग में मामूली गड़बड़ी- पार्किंग में विमान को रोकते समय ब्रेक नहीं लग पाना।
  • VDGS विमान को पार्क करने में मदद करता है
  • विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगा होता है। यह पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए तय जगह पर रोकने में मदद करता है। डिस्प्ले के जरिए विमान की दिशा, सेंटरलाइन से उसकी स्थिति और रुकने की जगह के संकेत मिलते हैं।

आधुनिक VDGS विमान का प्रकार पहचानने के साथ यह भी बता सकता है कि पार्किंग पोजिशन तक कितनी दूरी बाकी है और विमान किस गति से आगे बढ़ रहा है। सेंसर विमान की स्थिति का पता लगाते हैं और उसी के आधार पर डिस्प्ले पर निर्देश दिए जाते हैं।

विमान के आगे का कवर रडार को सुरक्षित रखता है

विमान के सबसे आगे लगे बाहरी कवर को रेडोम कहते हैं। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार होता है, जो उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम का पता लगाने में मदद करता है। रेडोम रडार को सुरक्षित रखता है, लेकिन रेडियो तरंगों को आसानी से आने-जाने देता है।

विमान की नोज और उसके आसपास पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, टेम्परेचर सेंसर और एंटीना जैसे उपकरण भी लगे होते हैं। इनमें से कई विमान की बाहरी सतह पर होते हैं।

टक्कर में रेडोम या वेदर रडार के अलावा सेंसर भी डैमेज हो सकते हैं। इससे विमान की गति, ऊंचाई या हवा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए नोज पर टक्कर के बाद विमान को उड़ाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी होती है।

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