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कोरबा

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

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बालकोनगर। छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। धान यहां की मुख्य फसल है। टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के रिसर्च से पता चलता है कि खरीफ के मौसम में लगभग 85% कृषि भूमि का उपयोग धान उगाने के लिए किया जाता है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं। यहां सिंचाई की सुविधाएँ बहुत कम हैं इस वजह से ग्रामीण आय केवल एक ही फसल चक्र पर निर्भर करती है। इससे किसान मौसम में होने वाले बदलावों, बढ़ती लागत और अन्य फसलें उगाने के सीमित विकल्पों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूरे साल लगातार आय सुनिश्चित करने के लिए केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए ध्यान केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती के साथ-साथ आय के कई अन्य स्रोत निर्मित करने पर है।

यह वह बदलाव है जो वेदांता बालको के कामकाज वाले क्षेत्रों में हो रहा है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा ज़िले के 123 गाँवों में बालको के योगदान से अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह सिर्फ़ इन प्रयासों का स्तर ही नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका भी है। यहां खेती-बाड़ी, कौशल विकास, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढाँचा आदि ये सभी मिलकर ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को और ज़्यादा स्थिर बनाने का काम कर रहे हैं।

पारिवारिक आय की स्थिरता के वाहक के रूप में महिलाओं की भूमिका

इस बदलाव के केंद्र में वे महिलाएँ हैं जो अब अपने परिवारों में सहायक कमाने वाली की भूमिका से मुख्य कमाने वाली की भूमिका की ओर बढ़ रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है, जिनमें 6,000 से ज्यादा महिलाएँ शामिल हैं। इसके कारण इस क्षेत्र में समुदाय द्वारा संचालित सबसे मज़बूत स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्कों का निर्माण हुआ है।

‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों पर आधारित और वित्तीय साक्षरता, सही बचत और ऋण प्रणालियों जैसे प्रशिक्षणों से समर्थित ये स्वयं सहायता समूह साधारण बचत समूहों से विकसित होकर आजीविका के सशक्त नेटवर्क बन गए हैं। आज 600 से ज्यादा महिलाएँ छोटे व्यवसायों के माध्यम से कमाई कर रही हैं और छत्तीसगढ़ के 45 से ज्यादा गाँवों में 2,200 से ज्यादा महिलाएँ नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और आजीविका के अन्य कार्यों जैसी आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हैं। ये सभी मिलकर घरेलू आय को ज्यादा स्थिर बनाने, समुदायों को ज्यादा सशक्त बनाने तथा स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण वाहक बनने में सहायता कर रही हैं।

यह बदलाव क्लीनला जैसे छोटे व्यवसायों में देखा जा सकता है जहाँ आठ महिलाओं का एक समूह घर की सफ़ाई के उत्पाद बनाता है। सही ट्रेनिंग, उत्पादन में मदद और अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिलने से अब हर महिला हर महीने लगभग रू.6,000 कमाती है। इससे पता चलता है कि मिलकर काम करने से आय का एक स्थिर ज़रिया बनाने में कैसे मदद मिल सकती है।

व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका असर साफ़ दिखता है। कोरबा ज़िले की विजय लक्ष्मी सारथी ने निजी और आर्थिक मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत मिली ट्रेनिंग और मदद से उन्होंने घर से ही खाने का बिज़नेस शुरू किया और अब हर महीने रू.12,000 से रू.15,000 कमाती हैं। उनकी कहानी एक बड़े बदलाव को दिखाती है जहाँ महिलाएँ न सिर्फ़ परिवार की आमदनी में हाथ बँटा रही हैं बल्कि खुद भी कमाने वाली बन रही हैं और अपने परिवारों और समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद कर रही हैं।

कृषि के अलावा आय के दूसरे स्रोतों का सृजन

हालांकि खेती अभी भी बुनियादी आय का आधार बनी हुई है लेकिन आय के स्रोतों में विविधता लाने का सबसे बड़ा बदलाव खेती से बाहर के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए वेदांता स्किल स्कूल के ज़रिए तीन केंद्रों में अब तक कुल 15,000 से ज़्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से हर साल 1,000 से ज़्यादा युवाओं को इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से अलग-अलग ट्रेड में कुशल बनाया जाता है। यह प्रोग्राम ट्रेनिंग को सीधे रोज़गार से जोड़ता है और 11 राज्यों में फैली 70 से ज़्यादा संस्थाओं में प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक होती है।

कई परिवारों के लिए यह एक ढांचागत बदलाव को दर्शाता है जहाँ आय अब केवल ज़मीन या मौसमी चक्रों पर निर्भर नहीं रहती। इसके बजाय इसे औपचारिक रोज़गार से होने वाली स्थिर और साल भर की कमाई का सहारा मिलता है।

कोरबा के पोड़ीबहार के रहने वाले आर्यन दास महंत के लिए यह बदलाव उनकी ज़िंदगी बदलने वाला साबित हुआ है। रोज़ाना मज़दूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में ‘फ़ूड एंड बेवरेज सर्विस स्टीवर्ड’ कोर्स में दाखिला लिया। बातचीत करने और मेहमानों को संभालने के हुनर सीखने के बाद उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी मिल गई। अब वे ‘होटल श्री महाराजा’ में ‘ट्रेनी कैप्टन’ के तौर पर काम कर रहे हैं और सालाना लगभग रू.2 लाख कमा रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्किल ट्रेनिंग न सिर्फ़ लोगों को नौकरी दिलाने में मदद करती है बल्कि उनके करियर को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

इस प्रगति को उन शिक्षा कार्यक्रमों से भी समर्थन मिल रहा है जो ज़्यादा अवसर पैदा करते हैं। कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग सेंटर हर साल 300 से ज़्यादा छात्रों को सरकारी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करते हैं और अब तक 84 छात्रों का चयन भी हो चुका है। इसके साथ ही वेदांता लिमिटेड द्वारा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू किए गए 110 ‘नंद घर’ प्री-स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र बाला पेंटिंग्स और डिजिटल उपकरणों जैसे इंटरैक्टिव सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये केंद्र 7,000 से ज़्यादा माताओं और बच्चों तक पहुँच रहे हैं, जिससे शुरुआती शिक्षा और पोषण में सुधार हो रहा है। वहीं स्कूल सहायता कार्यक्रमों ने अब तक 4,000 से ज़्यादा छात्रों की मदद की है।

ये प्रयास शिक्षा से रोज़गार तक का एक स्पष्ट जरिया बनाते हैं जिससे लोगों को एक मज़बूत व्यवस्था के सहयोग से समय के साथ अलग-अलग तरीकों से कमाई करने में मदद मिलती है।

आजीविका को सहारा देने वाले इकोसिस्टम की मज़बूती

आय में स्थिर रूप से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लोगों को समय के साथ मज़बूत प्रणालियों के माध्यम से सहयोग देना महत्वपूर्ण है। वेदांता बालको इसी दृष्टिकोण का पालन करता है। यह न केवल रोज़गार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि उन परिस्थितियों को भी बेहतर बनाने पर ज़ोर देता है जो लोगों को अपने रोज़गार को बनाए रखने में मदद करती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बीमारियों की जल्दी पहचान और नियमित रूप से लोगों तक पहुँचने के प्रयास लोगों को अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए काम करना आसान बनाती है और उनकी कार्य-क्षमता में भी सुधार लाती है।

सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं जैसे सामुदायिक बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधारों से लोगों के लिए यात्रा करना और बाज़ारों, प्रशिक्षण तथा रोज़गार से जुड़ना आसान हो रहा है। ये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हैं बल्कि ऐसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो लोगों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आजीविका बनाने में मदद करते हैं।

इस इकोसिस्टम में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण अवसरों को आय से जोड़ने में मदद करते हैं। वेदांता बालको प्रारंभिक शिक्षा, कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाकर रोज़गार के स्पष्ट मार्ग तैयार करता है। कोचिंग कार्यक्रम इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो केंद्रों के माध्यम से 300 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 206 अन्य छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है जिससे ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियों को पाने में मदद मिल रही है।

निर्भरता से विविधता तक

यह बदलाव अब इन क्षेत्रों में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ग्रामीण परिवार अब केवल आय के एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ अन्य काम और व्यवसाय भी कर रहे हैं।

वेदांता बालको इसी बदलते दृष्टिकोण का पालन करता है। कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय और शिक्षा कार्यक्रम मिलकर काम करते हैं ताकि ज्यादा स्थिर और नियमित आय के अवसर पैदा किए जा सकें। इसका उद्देश्य खेती की जगह लेना नहीं है बल्कि खेती के साथ आय के और अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। इससे ज्यादा संतुलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जहाँ आय ज्यादा स्थिर होती है, अचानक आने वाली समस्याओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं, और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।

यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ़ ज़्यादा आमदनी का नहीं बल्कि ऐसी आजीविका पैदा करने की बात है जो ज़्यादा सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।

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भू-विस्थापितों ने कटघोरा एसडीएम कार्यालय का घेराव किया:16 से अधिक गांव प्रभावित, भूमिहीनों को आवास न मिलने पर भड़के ग्रामीण, भ्रष्टाचार के आरोप लगाए

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कोरबा। कोरबा में एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के भूविस्थापित ग्रामीणों ने बुधवार को कटघोरा एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। 16 से अधिक गांवों के प्रभावित ग्रामीण भ्रष्टाचार और लंबित कार्यों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील कार्यालयों में रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास, वंश वृक्ष, फौती, ऑनलाइन रिकॉर्ड सुधार और राजस्व त्रुटि सुधार जैसे काम महीनों से अटके हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि दीपका, दर्री, कटघोरा तहसील और जिला पुनर्वास शाखा में काम कराने के लिए रिश्वत मांगी जाती है। रिश्वत नहीं देने पर उनके मामलों को लंबे समय तक लटका दिया जाता है।

एसईसीएल ने जटराज, पड़निया, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोडरी, चुरैल, आमगांव, खैरभावना, गेवरा, जरहाजेल, बरपाली, दुरपा, भैसमाखार, मनगांव, बरमपुर, दुल्लापुर, बरकुटा सहित 16 से अधिक गांवों की भूमि अधिग्रहित की है।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण उन्हें मजबूरी में घेराव करना पड़ा।

ग्रामीणों ने बताया कि एसईसीएल अधिग्रहित गांवों में सरकारी या निजी जमीन पर घर बनाकर रहने वाले भूमिहीन परिवारों को बसाहट का अधिकार नहीं दे रहा है।

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य भूमिहीन लोगों को घर देना है, लेकिन एसईसीएल की इस नीति के कारण कई परिवार बेघर होने की स्थिति में आ रहे हैं।

16 गांवों के भूविस्थापितों का प्रदर्शन

एसईसीएल द्वारा खोडरी, रिसदी और पड़निया में लगाए गए राजस्व शिविरों में सिर्फ आवेदन लिए गए और आगे की कार्रवाई के लिए उन्हें तहसील दीपका भेज दिया गया। ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान वहीं मौके पर ही किया जाए, ताकि भ्रष्टाचार से बचा जा सके।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने एसईसीएल के ड्रोन सर्वे पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि बिना उनकी सहमति के संपत्ति का मूल्यांकन किया जा रहा है और इससे मुआवजे की राशि कम कर दी जा रही है।

जटराज गांव में 2010 के अधिग्रहण पर विवाद

जटराज गांव में 2010 में भूमि अधिग्रहण के बाद ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों को ‘मसाहती’ मान लिया गया है, जबकि बाकी लोगों को नहीं माना जा रहा है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई है।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर धरने पर बैठ गए और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।

मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की।

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दीपका में भाजपा का दमदार शक्ति प्रदर्शन, ऋषिकांत सिदार के नामांकन में उमड़ी भीड़

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कोरबा/दीपका। कटघोरा विधानसभा अंतर्गत दीपका नगर पालिका वार्ड क्रमांक 15 के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ऋषिकांत सिदार के नामांकन रैली में भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। नामांकन रैली में कार्यकर्ताओं, समर्थकों एवं स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरे दीपका क्षेत्र में भाजपा का उत्साह और जनसमर्थन साफ दिखाई दिया। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति ने चुनावी माहौल को और भी ऊर्जावान बना दिया। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, रायपुर संभाग सह प्रभारी डॉ. राजीव सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता ज्योतिनंद दुबे, नगर पालिका दीपका अध्यक्ष राजेंद्र राजपूत, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज शर्मा एवं मंडल अध्यक्ष राजू प्रजापति सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

नामांकन कार्यक्रम के दौरान भाजपाइयों ने कहा कि दीपका क्षेत्र में जनता का भाजपा के प्रति अटूट विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। कार्यकर्ताओं का समर्पण, संगठन की मजबूती एवं विकास के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने विश्वास जताया कि जनता विकास, सुशासन और राष्ट्रहित की राजनीति को समर्थन देते हुए भाजपा प्रत्याशी ऋषिकांत सिदार को ऐतिहासिक विजय दिलाएगी। पूरे कार्यक्रम के दौरान भाजपा समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला तथा “भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद” के नारों से माहौल गूंज उठा।

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महंगाई से त्रस्त जनता की आवाज बनी कांग्रेस, बालकोनगर में धरना-प्रदर्शन

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कोरबा/बालकोनगर। बालकोनगर के परसाभाठा बाजार चौक पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों एवं लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन एवं जनजागरण अभियान चलाया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित रहे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर एवं तख्तियां लेकर “केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन एवं जनजागरण” के नारे लगाए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुओं सहित सोना-चांदी के दामों में लगातार हो रही वृद्धि से आम जनता, मध्यम वर्ग एवं गरीब परिवारों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान-इजराइल युद्ध शुरू होने के बाद से ही वैश्विक स्तर पर ईंधन संकट की आशंका स्पष्ट थी, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार देशहित में कोई ठोस रणनीति बनाने में विफल रही, जिसका खामियाजा आज देश की जनता भुगत रही है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “महंगाई” का प्रतीकात्मक जनाजा निकालकर परसाभाठा चौक में विरोध दर्ज कराया। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण आम आदमी की कमर टूट चुकी है तथा गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी कठिन होता जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार 17 मई से 20 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में महंगाई के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच पहुंचकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।

धरना-प्रदर्शन में जयसिंह अग्रवाल के साथ कोरबा जिला कांग्रेस अद्ध्यक्ष (शहर) मुकेश कुमार राठौर, जिला कांग्रेस अद्ध्यक्ष (ग्रामीण) मनोज चौहान, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, पूर्व जिलाध्यक्ष नत्थूलाल यादव, युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज, बालको नगर ब्लाक अद्ध्यक्ष ए.डी.जोशी, राजेंद्र तिवारी, पालुराम साहू, बसंत चंद्रा, पूर्व ब्लाक अद्ध्यक्ष दुष्यंत शर्मा, पार्षद कृपाराम साहू, बद्रीकिरण, नारायण लाल कुर्रे, रवि सिंह चंदेल, मंडल अध्यक्ष, देवीदयाल सोनी, रोपा तिर्की, बुधेश्वर चौहान, पंचराम आदित्य, महेंद्र थवाईत, मुन्ना खान, श्रीकांत मांझी, पुष्पा पात्रे, मुश्लिम खान, शमसुद्दीन, देवकीनंदन सिंह, कन्हैया राठोर, कुंजबिहारी साहू, आर.के.नामदेव, गणेश खूंटे, दीपक कुमार टंडन, प्रमोद दिगसकर, माजिद कुरैशी, साहिदा खान, गायत्री चंद्रा, शायद खान, गायत्री कर्ष, राजेश श्रीवास, आकाश प्रजापति, विवेक श्रीवास, प्रह्लाद बंजारे, मिनिकेतन गवेल, बाबिल मिरी, अजीत वर्मन, कारन पटेल, साहिल खान, हरवेन्द्र सिंह सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कांग्रेसजनों ने केंद्र सरकार से पेट्रोल-डीजल एवं रसोई गैस की कीमतों में तत्काल राहत देने तथा आम जनता को महंगाई से राहत पहुंचाने की मांग की।

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