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छत्तीसगढ़

कथावाचक आशुतोष बोले- सतनामी होकर गायों को काट रहे:बिलासपुर में कहा- मूर्खों को सतनामी का मतलब नहीं पता, बवाल के बाद FIR, माफी मांगी

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बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भागवत कथा के दौरान कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज ने सतनामी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद सतनामी समाज में आक्रोश फैल गया।

वायरल वीडियो में आशुतोष चैतन्य कहते नजर आ रहे हैं ‘छत्तीसगढ़ के तखतपुर में कितनी गायें कट रही हैं, आपको पता है? जो पहले सनातनी थे, वो आज सतनामी हो गए। उन मूर्खों को यह समझ नहीं आता कि सतनामी का मतलब क्या होता है।

सत नाम केवल राम का है, और वे सतनामी होकर गायों को काट रहे हैं। यह सब आप सबके नाक के नीचे हो रहा है और आपको फर्क नहीं पड़ता। आप लोग अपने बच्चों को सही परवरिश नहीं दे पा रहे हैं।’

कथावाचक के इस बयान के बाद सतनामी समाज ने बड़ी संख्या में रैली निकाली और तखतपुर थाने का घेराव किया। समाज के लोगों ने कथावाचक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। बढ़ते विवाद के बाद पुलिस ने आशुतोष चैतन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अब कथावाचक ने वीडियो जारी कर अपने बयान पर खेद जताया है।

कथावाचक के विवादित बयान से बवाल मचा है, सतनामी समाज सड़कों पर है। कैसे बढ़ा विवाद और क्या बोले महाराज:-

बिलासपुर में भागवत कथा के दौरान कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज का आपत्तिजनक बयान

बिलासपुर में भागवत कथा के दौरान कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज का आपत्तिजनक बयान

कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज के खिलाफ बड़ी संख्या में सतनामी समाज के लोगों ने थाने का घेराव किया था।

कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज के खिलाफ बड़ी संख्या में सतनामी समाज के लोगों ने थाने का घेराव किया था।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, तखतपुर के टिकरी पारा में श्रीमद् भागवत कथा महापुराण चल रहा है। कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज हैं। वह कथा के दौरान सतनामी समाज को लेकर कई अपशब्द कहे। वीडियो को यूट्यूब चैनल पर अपलोड भी कर दिया गया।

सतनामी समाज में आक्रोश, तखतपुर थाने को घेरा

कथावाचक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सतनामी समाज में आक्रोश है। बुधवार को समाज के लोग बड़ी संख्या में तखतपुर थाने पहुंचे और घेराव कर दिया। इस दौरान समाज के लोगों ने कथावाचक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

समाज के लोगों का कहना है कि व्यासपीठ से की गई ऐसी टिप्पणी न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है, बल्कि समाज को आपस में बांटने का प्रयास भी है। कथावाचक को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। कथावाचक की गिरफ्तारी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

कथावाचक के बयान पर सतनामी समाज भड़क उठा है। भीड़ ने बड़ी संख्या में थाने का घेराव किया।

कथावाचक के बयान पर सतनामी समाज भड़क उठा है। भीड़ ने बड़ी संख्या में थाने का घेराव किया।

कार्यक्रम स्थल तखतपुर के टिकरी पारा में बढ़ाई गई सुरक्षा

वहीं तखतपुर में सतनामी समाज के विरोध के बाद कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज के कार्यक्रम स्थल तखतपुर के टिकरी पारा में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए पंडाल के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई है।

​​​​​​तखतपुर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज के खिलाफ कार्रवाई के आश्वासन के बाद समाज के लोग शांत हुए। तखतपुर में माहौल शांत है। समाज के लोगों ने कथावाचक के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है।

कथावाचक के पंडाल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात।

कथावाचक के पंडाल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात।

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छत्तीसगढ़

महासमुन्द : बारनावापारा अभयाण्य में “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन,200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज

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देश के 11 राज्यों के प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा,अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

महासमुन्द। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में 16 से 18 जनवरी 2026 तक “बर्ड सर्वे 2026” का आयोजन किया गया। सर्वे के दौरान पक्षियों की अच्छी विविधता देखने को मिली। अब तक प्राप्त डेटा के अनुसार इस सर्वे में लगभग 202 पक्षी प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

इस सर्वे में देश के 11 राज्यों महाराष्ट्र, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, केरल एवं कर्नाटक से आए 70 प्रतिभागियों, 12 वॉलंटियर्स, विशेषज्ञों एवं फोटोग्राफर्स सहित लगभग 100 लोगों की सहभागिता रही।यह बर्ड सर्वे केवल बारनवापारा अभ्यारण्य तक सीमित न होकर उसके आसपास से जुड़े कोठारी, सोनाखान एवं देवपुर परिक्षेत्रों में भी किया जा रहा है। सर्वे के दौरान प्रतिभागियों द्वारा संग्रहित पक्षी आंकड़े वैश्विक डाटाबेस का हिस्सा बनेंगे।अभयारण्य क्षेत्र में जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बर्डिंग कल्चर एवं इको पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होग़ा। सर्वे में प्रमुख विशेषज्ञों  में डॉ. हकीमुद्दीन एफ. सैफी, डॉ. जागेश्वर वर्मा,  मोहित साहू एवं सोनू अरोरा की सहभागिता रही।

सर्वे के आकर्षण बने प्रमुख प्रजातियां-इस सर्वे में विशेष रूप से कुछ प्रजातियाँ प्रतिभागियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहीं, जिनमें बार-हेडेड गूज उल्लेखनीय रही, जो प्रायः मध्य एशिया के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रजनन करती है तथा सर्दियों में भारत सहित दक्षिण एशिया के जलाशयों और खेतों में देखी जाती है। इसी प्रकार आर्द्र घासभूमि, धान के खेतों, दलदली क्षेत्रों एवं नदी किनारे पाए जाने वाले ग्रे-हेडेड लैपविंग, शिकारी पक्षी प्रजाति पेरेग्रिन फाल्कन, ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश, यूरेशियन स्पैरोहॉक,वन पारिस्थितिकी में बीज प्रसार के लिए महत्वपूर्ण माना जाने वाला ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन का अवलोकन भी आकर्षण का केंद्र बना।

बर्ड सर्वे के सबंध में वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील  ने बताया कि बारनवापारा सेंट्रल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ मिश्रित एवं साल वनों के साथ विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक परिदृश्य मौजूद हैं। इस सर्वे से प्राप्त डेटा आगे चलकर अभयारण्य में आवश्यक प्रबंधन कार्ययोजनाओं की पहचान में सहायक होगा, खासतौर पर उन पक्षी प्रजातियों के संरक्षण कार्य में जिनकी संख्या में गिरावट देखी जा रही है।

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छत्तीसगढ़

वीबी-जी राम जी योजना से करमरी में आत्मनिर्भरता को मिली नई दिशा

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डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा

मोहला-मानपुर-अम्बागढ़। आदिवासी बहुल एवं कृषि आधारित आजीविका वाले मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले की ग्राम पंचायत करमरी में वीबी-जी राम जी (विकसित भारत ग्राम गारंटी) योजना के अंतर्गत आज जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और विकासोन्मुख नारों के साथ योजना का स्वागत किया। ग्रामीणों द्वारा मानव श्रृंखला बनाकर “आत्मनिर्भर गांव-विकसित भारत” का संदेश भी दिया गया। 

कार्यक्रम के अंतर्गत कन्वर्जेंस आधारित आजीविका डबरी जैसे कृषि, मछली तालाब निर्माण कार्यों का अवलोकन किया गया। ये कार्य कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, सीआरईडीए एवं वन विभाग के आपसी समन्वय से तैयार कार्य योजना के अनुसार संचालित किए जा रहे हैं। इन आजीविका डबरियों से मछली पालन, सिंचाई सुविधा, दलहन-तिलहन की खेती तथा उद्यानिकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे आदिवासी एवं सीमांत किसानों को स्थायी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नम्रता सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने वीबी-जी राम जी योजना के उद्देश्यों, स्थानीय रोजगार सृजन और कन्वर्जेंस मॉडल की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर सक्रिय सहभागिता, पारदर्शिता और सामुदायिक स्वामित्व के बिना किसी भी योजना की सफलता संभव नहीं है, और  वीबी-जीराम जी इन मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान हितग्राही विनोद कुमार एवं दलपत साई मेहरू राम को मछली जाल का वितरण किया गया। इससे मछली पालन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीणों में स्वरोजगार के प्रति उत्साह बढ़ेगा। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से वे मछली पालन के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती भी करेंगे, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी।ग्रामीणों ने वीबी-जीराम जी योजना को आदिवासी बहुल, कृषि-आधारित जिले के लिए सर्वांगीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। गांव आत्मनिर्भर होंगे, तभी भारत विकसित बनेगा के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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खेल

केंद्रीय खेल मंत्री से मिले ओलिंपिक संघ के सचिव सिसोदिया:40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ में किए जाने का किया आग्रह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विक्रम सिंह सिसोदिया ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।

बैठक में डॉ. सिसोदिया ने छत्तीसगढ़ में चल रही खेल गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की। सिसोदिया ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो छत्तीसगढ़ ओलिंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, लगातार खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रयासरत हैं।

महासचिव ने केंद्रीय खेल मंत्री से आग्रह किया कि मेघालय में प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों के बाद 40वें राष्ट्रीय खेलों का आयोजन फरवरी 2028 में छत्तीसगढ़ को सौंपा जाए। इससे राज्य के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने के साथ-साथ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मंच मिलेगा।

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