छत्तीसगढ़
शिक्षकों ने सड़क सुधारने थामा फावड़ा, भूपेश बोले-विष्णुदेव फेल:सूरजपुर-बलरामपुर को जोड़ने वाली सड़क में एक किलोमीटर वनमार्ग कच्चा, गड्ढों के कारण चलना मुश्किल
अंबिकापुर,एजेंसी। बलरामपुर और सूरजपुर जिले को जोड़ने वाली सड़क में एक किलोमीटर के वनमार्ग में गड्ढों को भरने शिक्षकों ने फावड़ा थामा। स्वयं सड़क सुधारी और मार्ग को चलने लायक बनाया। श्रमदान करते शिक्षकों वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। शिक्षकों के सड़क सुधारते वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर पोस्ट कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा- विष्णुदेव फेल। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने लिखा है- गुरुजन अब शिक्षा दिलाएंगे या सड़क बनाएंगे?
दरअसल, सूरजपुर जिले के खड़गवां कला से बलरामपुर जिले के खोखनिया के बीच बिलद्वार जंगल में एक किलोमीटर सड़क कच्ची है। खड़गवां कला से लेकर बिलद्वार जंगल तक PMGSSY की सड़क करीब 12 वर्ष पूर्व बनी थी। बिलद्वार जंगल के दूसरे छोर से धंधापुर तक की पक्की सड़क भी पीएमजीएसवाई द्वारा बनाई गई थी।
यह सड़क पूरी तरह से टूट गई तो PMGSY द्वारा एक वर्ष पूर्व फिर से डामरीकरण का कार्य कराया गया, लेकिन फिर से एक किलोमीटर में कोई कार्य नहीं हुआ। मामूली मरम्मत ही की गई। बिलद्वार जंगल बलरामपुर वन परिक्षेत्र में आता है। वनमार्ग होने के कारण एक किलोमीटर सड़क पक्की नहीं हो सकी।

शिक्षकों ने गड्ढे भरकर चलने लायक बनाई सड़क
गड्ढों से परेशान शिक्षकों ने स्वयं उठाया फावड़ा
खड़गवां से खोखनिया होते हुए बलरामपुर जिले के दर्जनभर गांवों को जोड़ने वाली इस सड़क में रोज सैकड़ों वाहनों का आना-जाना होता है। बारिश में सड़क में गड्ढे ही गड्ढे हो गए थे। जब गड्ढों को भरने के लिए पहल नहीं की गई तो शनिवार को हायर सेकेंडरी स्कूल खोखनिया के शिक्षकों ने स्वयं फावड़ा थामा। ये शिक्षक धंधापुर से अंबिकापुर तक रोज आना-जाना करते हैं।
शनिवार को स्कूल से लौटने के दौरान शिक्षकों ने स्वयं सड़क पर श्रमदान कर गड्ढों को भरा और सड़क को चलने लायक बनाया। शिक्षक घर से फावड़ा लेकर गए थे। शिक्षकों द्वारा किए गए श्रमदान का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।
भूपेश ने लिखा-विष्णुदेव फेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फेसबुक पर पोस्ट कर कहा “विष्णुदेव फेल! भाजपा का कथित सुशासन देखिए३”। बघेल ने लिखा कि प्रदेश की जनता सरकार से इतनी निराश हो चुकी है कि अपनी समस्याओं का समाधान अब खुद करने मजबूर है।

टीएस ने लिखा- गुरुजन सड़क बनाएंगे?
प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने भी फेसबुक पर वायरल वीडियो पोस्ट कर कहा कि गुरुजन अब शिक्षा दिलाएंगे या सड़क बनाएंगे?
स्थानीय लोगों की बार-बार की मांग के बावजूद प्रशासन और विभाग ने कुछ नहीं किया। क्या यही है सरकार का विकास मॉडल- जहाँ बच्चों का भविष्य संवारने वाले गुरुजनों को ही सड़कें भी सँवारनी पड़ें?

कांग्रेस सरकार में भी नहीं बनी पक्की सड़क
बिलद्वार गुफा का जंगल वनविभाग बलरामपुर के अंतर्गत आता है। बिलद्वार गुफा को पूर्व में वनविभाग ने पर्यटन स्थल बनाने के लिए कई कोशिशें की और लाखों रुपये खर्च भी किए। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में वनविभाग द्वारा करीब चार वर्ष वनमार्ग में वनविभाग ने WBM का कार्य कराया था। इसके अलावे कुछ कार्य बाद में भी कराए गए।
हालांकि यह सड़क तब भी पक्की नहीं बन सकी। यह सड़क करीब 50 हजार लोगों को अंबिकापुर-प्रतापपुर मुख्य मार्ग से जोड़ती है।
PMGSY की सड़कें भी हो रही बर्बाद
नेशनल हाईवे 343 अंबिकापुर-रामानुजगंज मार्ग के पूरी तरह से जर्जर हो जाने के कारण क्रशर संचालकों के साथ ही रेत परिवहन में PMGSY की सड़कों का उपयोग किया जा रहा है। इसमें यह सड़क भी शामिल है। इसके कारण PMGSY की सड़कों में बारिश में गड्ढे बन जा रहे हैं। इससे सड़कों की हालत चिंताजनक हो जा रही है।

छत्तीसगढ़
तकनीकी नवाचार की उड़ान “लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का सफल आयोजन
एचडी शेफर मेमोरियल फाउंडेशन एवं कोडक्राफ्ट के संयुक्त तत्त्वावधान में प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न
AI, पायथन और वेब डिज़ाइन का क्रियाशील प्रशिक्षण; 13 से 68 वर्ष तक के प्रतिभागियों ने सीखी आधुनिक तकनीक की बारीकियाँ
सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर। एच० डी० शेफर मेमोरियल फाउंडेशन एवं कोडक्राफ्ट सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय “लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” का आज विधिवत एवं सफलतापूर्वक समापन हुआ। सीओसीएमआई कैम्पस, ककुदंड, बिलासपुर में 11 मई से 27 मई 2026 तक आयोजित इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यालयी छात्र-छात्राओं से लेकर कार्यरत पेशेवरों एवं सेवानिवृत्त व्यक्तियों तक — 13 वर्ष से 68 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI टूल्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, पायथन प्रोग्रामिंग, वेबसाइट डिज़ाइनिंग, उद्यमिता कौशल, एक्सेल तथा व्यक्तित्व विकास का व्यावहारिक एवं हस्तप्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विशेष बात यह रही कि प्रशिक्षण हेतु किसी पूर्व तकनीकी ज्ञान की अनिवार्यता नहीं रखी गई, जिससे तकनीक के क्षेत्र में नए प्रतिभागियों को भी सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला।
प्रतिभागियों ने तैयार किए नवाचारपूर्ण प्रोजेक्ट
प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रतिभागियों ने अपनी व्यक्तिगत पोर्टफोलियो वेबसाइट्स, AI आधारित प्रोफेशनल हेडशॉट्स, पोस्टर एवं निमंत्रण-पत्र डिज़ाइन, पायथन आधारित BMI कैलकुलेटर तथा विभिन्न मिनी प्रोजेक्ट्स तैयार किए।
विशेष रूप से 15 वर्षीय बेनहुर एवं 17 वर्षीय एंजेल लहरे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से दो संपूर्ण कम्प्यूटर गेम्स विकसित कर अपनी तकनीकी प्रतिभा का प्रभावशाली परिचय दिया।
“तकनीक साधन है, साध्य नहीं” — संजय विल्सन
समापन समारोह की अध्यक्षता एच० डी० शेफर मेमोरियल फाउंडेशन के निदेशक संजय विल्सन ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तभी सार्थक है जब उसे मानवीय विवेक, नैतिकता और कौशल के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीक का उपयोग समाजहित एवं आत्मविकास के लिए करने की प्रेरणा दी।
समारोह में आकांक्षा नाथानियल, एंजेल लहरे, बेनहुर, डेफनी, मेर्लिन, राजेश मकबूल एवं विस्मय सहित सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर आलोक विल्सन, विनय जेम्स एवं के० एम० के० पॉल की गरिमामयी उपस्थिति रही।
प्रशिक्षकों एवं आयोजकों का सराहनीय योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रशिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। सॉफ्टवेयर इंजीनियर अप्रतिम सैमुएल एवं डेटा साइंटिस्ट कपिल वर्मा ने प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकी अवधारणाओं एवं व्यावहारिक प्रयोगों से परिचित कराया।
इस सम्पूर्ण आयोजन के सफल संयोजन का श्रेय रेव० निखिल पॉल को जाता है, जिनके समर्पण, कुशल प्रबंधन एवं सतत प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
तकनीकी शिक्षा को जनसामान्य तक पहुँचाने की पहल
“लॉन्चपैड प्रोग्राम 2.0” इस तथ्य का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया कि तकनीकी शिक्षा केवल इंजीनियरिंग अथवा विज्ञान के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज का प्रत्येक वर्ग एवं प्रत्येक आयु का व्यक्ति आधुनिक तकनीक सीखकर आत्मनिर्भरता एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कोरबा
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से पर्यावरण प्रदूषण रोकना है – सीईओ
जिला पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर हुई कार्यशाला
कोरबा। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2026 को अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उक्त बातें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दिनेश कुमार नाग ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 संबंधी कार्यशाला में कही।

सीईओ श्री नाग ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह नियम 01 अप्रैल 2026 से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे कचरे का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित निपटान हो सके। इसके लिए ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न होने वाले कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हेतु जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री नाग ने कहा कि स्वच्छता अभियान की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाएं तथा कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल एवं पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करें, ताकि विभिन्न प्रकार के कचरे का पृथक-पृथक निपटान किया जा सके।
कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के श्री दीप सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, महत्वपूर्ण विशेषताओं एवं मुख्य प्रावधानों की जानकारी पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से दी गई।
कार्यक्रम में लेखा अधिकारी श्री राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती इंदिरा भगत, श्रीमती अमिता साहू, जनपद पंचायतों के सीईओ, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अधिकारी-कर्मचारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।
कोरबा
अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु अशोक मोदी सहित 13 पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल इंदौर रवाना
कोरबा। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ संगठन के प्रांतीय चेयरमैन अशोक मोदी, प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल, बाबूलाल अग्रवाल, जयदेव सिंघल, महेन्द्र सक्सेरिया, आशीष सक्सेरिया एवं डाॅ. अनिता मोहनलाल सहित अन्य पदाधिकारी आज इंदौर के लिए रवाना हो गए।

विदित हो कि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक 30 एवं 31 मई 2026 को इंदौर में आयोजित है। इस अधिवेशन में संगठन के देशभर के प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारीगण एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सम्मिलित होंगे।
अधिवेशन में उपस्थित पदाधिकारीगणों के द्वारा राष्ट्रहित एवं समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की जायेगी। साथ ही समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक समरसता एवं राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे एवं संगठन की सदस्यता को बढ़ाने एवं इसको 1 करोड तक पहुॅचाने का लक्ष्य रखा जायेगा जिस पर कार्य करने पर भी विचार किया जायेगा।
उक्त कार्यक्रम राष्ट्रीय चेयरमैन प्रदीप मित्तल के सानिध्य में तथा नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण मित्तल की अध्यक्षता में संपन्न होगा।
अशोक मोदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन के कार्यक्रम सराहनीय रहे हैं तथा सामाजिक सेवा, धार्मिक सेवा, व्यापार एवं उद्योग में छत्तीसगढ़ अग्रवाल समाज की बड़ी भूमिका रही है और राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में जो ठोस निर्णय लिए जाएंगे, उसे छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाएगा।
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