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कोरबा

माहौल ऐसा विकसित किया जाए कि महिलाएं सहजता से शिकायत कर सकें

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महिला आयोग की अध्यक्ष की उपस्थिति में कार्यस्थल पर लैंडिग उत्पीड़न अधिनियम अंतर्गत प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

कोरबा। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर की उपस्थिति में आज कलेक्टोरेट ऑडिटोरियम में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम विषय पर प्रशिक्षण एवं  मार्गदर्शन का आयोजन किया गया। प्रषिक्षण में आंतरिक शिकायत समिति के अध्यक्ष एवं एक सदस्य शामिल हुए।

अध्यक्ष ने समिति के सदस्यों को बताया कि कार्यालयों में गठित आंतरिक शिकायत समिति का दायित्व है कि वे कार्य स्थल पर महिलाओं को कार्य करने का सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करायें एवं शिकायत प्राप्त होने पर निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करते हुए दोषियों के विरूद्ध उचित कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने समिति को न्यायालय की तरह अधिकार प्राप्त होने की जानकारी देते हुए कहा कि आंतरिक शिकायत समिति एक मजबूत समिति है वह कानून के हिसाब से काम करती है। यह समिति पुरूषों को भी न्याय दे सकती है। समिति के पास महिलाओं की शिकायत तभी पहुंचेगी जब निष्पक्ष, पारदर्शी तथा सुरक्षित वातावरण में सहानुभूति के साथ सुनवाई होगी। समिति को जांच एवं कार्यवाही के दौरान कार्यालय प्रमुख से अनुमति लेने की आवश्यकता भी नहीं होती। जो निर्णय समिति की होती है उसका पालन करने की बाध्यता होती है। उन्होंने बताया कि आंतरिक शिकायत  समिति का प्रमुख उद्देष्य कार्य स्थल में कार्य संस्कृति को बेहतर बनाना और पीड़ित को न्याय दिलाना है। इस कार्य में समिति के पूरे सदस्य की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अध्यक्ष श्रीमती रहाटकार ने गैर सरकारी एवं असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं, घरेलू कर्मचारी, ईंट भट्टा, भवन निर्माण सहित अन्य कार्यों में संलग्न महिला कर्मचारियों के प्रति अपराध रोकने स्थानीय समिति का गठन करने और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने कहा।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जन सुनवाई के माध्यम से पीड़ित महिलाओं की समस्याओं को सुना और निराकरण के निर्देष दिये। इस दौरान महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित पार्षदगण उपस्थित थे।

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कोरबा

चलते ट्रक में कोरबा पहुंचा दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक:हवा में ग्लाइड करता है स्नेक, RCRS टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू, देखने जुटी भीड़

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कोरबा। कोरबा में एक दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। यह सांप धरमजयगढ़ इलाके से एक चलते ट्रक पर चढ़कर कोरबा पहुंच गया था। समय रहते लोगों की नजर उस पर पड़ गई, जिससे उसकी जान बच गई।

दरअसल, टीपी नगर के ट्रक स्टैंड में एक ट्रक के पीछे लोगों ने खूबसूरत और रंग-बिरंगा सांप देखा। ट्रक ड्राइवर अनिल निषाद ने बताया कि सांप का रंग और रूप आम सांपों से अलग था। पहचान नहीं होने पर उन्होंने तुरंत वन विभाग को सूचना दी।

वन विभाग ने RCRS (रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यूअर सोसाइटी) की हेल्पलाइन पर जानकारी दी। सूचना मिलते ही RCRS अध्यक्ष अविनाश यादव के साथ मनस, उमेश, सौम्य और अतुल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सांप की पहचान फ्लाइंग स्नेक के रूप में की। दुर्लभ प्रजाति होने के कारण उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई।

RCRS टीम ने कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय को इसकी जानकारी दी। उनके निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन्यजीव रेस्क्यू के नियमों का पालन करते हुए सांप को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

हाइड्रोलिक मशीन के पास छिपा था सांप

सांप ट्रक के पीछे लगी हाइड्रोलिक मशीन के पास बैठा था। वहां से उसे निकालना काफी मुश्किल था, क्योंकि वह मशीन के अंदर जा सकता था। अगर ऐसा होता तो उसे ढूंढना मुश्किल हो जाता। मशीन चालू होने पर सांप के दबने या घायल होने का भी खतरा था। टीम ने सावधानी से रेस्क्यू कर उसे बाहर निकाला।

ट्रक ड्राइवर अनिल निषाद ने बताया कि ट्रक धरमजयगढ़, छाल और घरघोड़ा होते हुए सामान लेकर कोरबा आया था। आशंका है कि रास्ते में किसी पेड़ से सांप ट्रक पर चढ़ गया होगा और चलते ट्रक के साथ ही कोरबा पहुंच गया।

उड़ता नहीं, हवा में ग्लाइड करता है फ्लाइंग स्नेक

फ्लाइंग स्नेक वास्तव में उड़ता नहीं है, बल्कि पेड़ों के बीच हवा में ग्लाइड करता है। यह ज्यादातर पेड़ों पर रहता है। एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाने के लिए यह ऊंचाई से छलांग लगाता है और अपने शरीर को चपटा व चौड़ा कर लेता है। इसके बाद शरीर को लहराते हुए हवा में अपनी दिशा तय करता है।

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NTPC कोरबा की 7 यूनिट 36 घंटे से बंद:बे-ब्रेकर टेस्टिंग के दौरान खराबी, छत्तीसगढ़ समेत सात राज्यों में संकट, ब्लैकआउट की जांच जारी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े बिजली उत्पादक एनटीपीसी कोरबा संयंत्र में एक ब्रेकडाउन हो गया है। पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (PGCIL) द्वारा बे-ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान आई इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण एनटीपीसी कोरबा की सभी सातों इकाइयां एक साथ बंद हो गईं थीं।

हालांकि, शनिवार को एनटीपीसी कोरबा की जनसंपर्क अधिकारी उषा घोष ने बताया कि तीन इकाइयों को दोबारा चालू कर दिया गया है। इनमें 500-500 मेगावाट की दो और 200 मेगावाट की एक इकाई शामिल है। बाकी चार इकाइयों को भी सुरक्षा और तय प्रक्रिया के तहत क्रमवार चालू करने का काम जारी है।

इस ब्रेकडाउन के कारण एनटीपीसी कोरबा का 2600 मेगावाट बिजली उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। एनटीपीसी कोरबा की कुल क्षमता 2600 मेगावाट है, जिसमें 200 मेगावाट की तीन और 500 मेगावाट की चार इकाइयां शामिल हैं। सभी सातों इकाइयों के एक साथ बंद होने से संयंत्र में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई।

ब्रेकर टेस्टिंग के दौरान इलेक्ट्रिकल फॉल्ट

जानकारी के मुताबिक, PGCIL की टीम PGCIL बे में ब्रेकर की जांच और टेस्टिंग कर रही थी। इसी दौरान अचानक इलेक्ट्रिकल फाल्ट हुआ, जिसका असर सीधे एनटीपीसी की सभी यूनिटों पर पड़ा। फाल्ट इतना बड़ा था कि सभी यूनिटें एक के बाद एक बंद होती चली गईं। बताया गया कि फाल्ट के बाद पूरे प्लांट में अंधेरा छा गया और सहायक व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुईं।

छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में असर

इस घटना का असर छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्यों की बिजली सप्लाई पर भी पड़ा है। एनटीपीसी कोरबा से छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा सहित कई राज्यों को बिजली सप्लाई की जाती है। उत्पादन ठप होने से ग्रिड पर भी दबाव बढ़ गया है।

जमनीपाली टाउनशिप में बिजली गुल

जमनीपाली स्थित एनटीपीसी टाउनशिप में भी डेढ़ घंटे तक बिजली गुल रही। बाद में डीजी सेट और वैकल्पिक व्यवस्था से टाउनशिप की सप्लाई बहाल की गई। देर रात तक स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से टाउनशिप में अंधेरा पसरा रहा। शनिवार सुबह तक भी यूनिटें शुरू नहीं हो सकी थीं।

ब्लैकआउट के बाद NTPC कोरबा की तीन यूनिटें फिर शुरू

इस संबंध में शनिवार को एनटीपीसी कोरबा की जनसंपर्क अधिकारी उषा घोष से बात की गई। उन्होंने बताया कि कल हुए ब्लैकआउट के बाद एनटीपीसी कोरबा की तीन बिजली उत्पादन इकाइयों को दोबारा चालू कर दिया गया है। इनमें 500 मेगावाट की दो और 200 मेगावाट की एक इकाई शामिल है।

वहीं, बाकी चार इकाइयों को चालू करने का काम भी जारी है। इन्हें सुरक्षा और तय प्रक्रिया के अनुसार एक-एक करके शुरू किया जा रहा है। ब्लैकआउट की वजह क्या रही, इसकी भी जांच की जा रही है।

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कांग्रेसियों ने पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ.राधाकृष्णन का जन्मदिन सुभाष चौक निहारिका में शिक्षक दिवस के रूप मेंमनाया

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कोरबा। देश के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ.राधाकृष्णन का स्मरण शिक्षक दिवस के रूप में जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा शहर द्वारा सुभाष चौक निहारिका में मनाया गया। इस अवसर पर डॉ. राधाकृष्णन के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके योगदान को भारत के लिये अविस्मरणीय निरूपित किया गया।

शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि डॉ राधाकृष्णन ने अकादमिक शिक्षा ग्रहण करने के साथ सामाजिक जीवन के कई वर्ष एक शिक्षक के तौर पर बिताये और असंख्य छात्रों को विद्या दान दिया। उन्होंने इस दौरान आदर्श शिक्षक के रूप में उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके अलावा डॉ. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति के पद पर कार्य करते हुए देश को बेहतर नेतृत्व प्रदान किया।
पूर्व अध्‍यक्ष नत्‍थु लाल यादव ने डॉ. राधाकृष्णन के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सर्वपल्ली जी के योगदान को सरकार ने पूरी गंभीरता से लेते हुए उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना स्वीकार किया। यह परंपरा अब भी भारतवर्ष में जारी है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर ने कहा कि हमारे देश में शिक्षकों का दर्जा सबसे ऊंचा है। गुरु-शिष्य की महान परंपरा का दर्शन कराने का माध्यम शिक्षक दिवस बना हुआ है। शिक्षक पहले भी छात्रों के लिये सम्मानित थे और आज भी उनके प्रति सभी लोगों के मन में यही भावना कायम है।
ग्रामीण अध्‍यक्ष मनोज चौहान ने कहा कि गुरूकुल की परंपरा आज विद्यालयों के तौर पर बनी हुई है। गुरूजनों का महत्व यथावत बने हुए हैं। व्यक्ति की सफलता की पीछे सबसे बड़ी भूमिका गुरूजनों की होती है जो उन्हें विभिन्न तरीकों से मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और लक्ष्य तक पहुँचाने में सहायता करते हैं इसलिए गुरू के ऋण से कभी भी मुक्त नहीं हुआ जा सकता। कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष नारायण कुर्रे, ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. राधाकृष्णन, गौतम बुद्ध की तरह हृदय में अपार करुणा रखते थे।

इस मौके पर कुसुम द्विवेदी, सपना चौहान, अर्चना उपाध्‍याय, रवि चंदेल, शशि अग्रवाल, अमृता निषाद, गिरधारी बरेठ, गजानंद साहु, संतोष राठौर, देवीदयाल सोनी, एफ डी मानिकपुरी, महेन्‍द्र थवाईत(गुड्डु) हिमांशु सिंह, सुभद्रा सिंह, रामगोपाल यादव, पालुराम साहु, सनीष कुमार, दुष्‍यंत शर्मा, संतोष यादव, समारू बरेठ, जवाहर निर्मलकर, डॉ.डीआर नेताम, कृपाराम साह आदि ने डॉ. राधाकृष्णन की जीवनी पर प्रकाश डाला।

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