Connect with us

कोरबा

जरहाजेल के भू विस्तपितों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जमीन वापसी के साथ पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की

Published

on

एसईसीएल ने जमीन अधिग्रहण किया लेकिन रोजगार और बसावट नहीं दिया

एसईसीएल भूमि अधिग्रहण और अवार्ड के प्रावधानों का उलंघन कर रही है

कोरबा/कुसमुंडा। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र एवं जिला प्रशासन द्वारा ग्राम जरहाजेल में अन्य ग्रामो´ की पुनर्वास के लिए बुलडोजर के सहारे ग्रामीणों में दहशत बनाकर पेड़ों की कटाई की जा रही है जबकि उक्त ग्राम की जमीन अर्जन के लिए वर्ष 1983 में पारित अवार्ड में स्पष्ट रूप से 20 वर्ष पश्चात मूल खातेदारों को जमीन वापसी करने की शर्त रखी गयी है ऐसी व्यवस्था के विपरीत जबरदस्ती किसानो के साथ अन्यायपूर्ण कार्यवाही हो रही है जरहाजेल के ग्रामीणों ने पूर्व में अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस करने के साथ पेड़ो के कटाई पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।

जरहाजेल के भू विस्थापित दामोदर श्याम,इंद्र प्रकाश और घासीराम कैवर्त ने कहा की उक्त भूमि को मध्यप्रदेश भू-राजस्व सहिता 1959 की धारा 247/1 के तहत भूमि का अधिग्रहण किया गया था और एस.ई.सी.एल. (तत्कालिन पश्चिमी कोयला प्रक्षेत्र ) कुसमुण्डा कालरी के प्रबंधक द्वारा तत्कालिन अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा म.प्र. को कोयला उत्खनन के लिए म.प्र. भू-राजस्व सहिता 1959 कि धारा 247/3/ के तहत अनुमति चाही गई थी जिसपर न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा म.प्र. राजस्व प्रकरण क्र.2/ अ-67/82-83 दिनांक 27/04/1983 को आदेश पारित कर पाँच बिंदुओ के शर्तों के आधार पर दखल करने का अधिकार दिया गया था । जो कि निम्नानुसार है –
माननीय न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा म.प्र. के द्वारा उल्लेखित शर्तों के अनुसार पारित आदेश 27/04/1983 के बाद 20 वर्षों के बाद उत्खनन् हुए क्षेत्र एवं आवास गृह, रेलवे लाईन सडक आदि निर्माण के लिए चाही गई जमीन को 60 वर्षो के बाद भू-स्वामियों को वापस करना होगा | संबंधित व्यक्ति को भूमि के वापसी तक भू-राजस्व शासन द्वारा निर्धारित आधार पर अदा करना होगा विस्थापित परिवारो को आवश्यक सुविधाए कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य शासन द्वारा समय-समय पर बनाए गये नियम व शर्तों के लिए कंपनी बंधन कारी होगा।
उन्होंने कहा कि इस आदेश पत्र में निहित शर्तो में अपने परियोजना अंतर्गत अन्य गाँवों को बसाहट दिए जाने का प्रावधान नहीं रखा गया था | उसके बावजूद इस क्षेत्र में पुनर्वास देने का प्रयास किया जा रहा है जो अनुचित है | जरहाजेल गांव में आज भी रोजगार एवं मुआवजा के कई प्रकरण लंबित है जमीन जाने के बाद विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं किसी भी विस्थापित को बसावट प्रदान नहीं किया गया है। जमीन अधिग्रहण के एवॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के नाम पर दर्जनों रोजगार को रोक कर रखा गया है जब एवॉर्ड कैसे हुआ एसईसीएल बता ही नहीं पा रहा है तो जमीन का उपयोग कैसे किसानों की जमीन का उपयोग एसईसीएल ने किया। यदि आवश्यक ही था तो आवार्ड में दिए गए प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार के नीति का पालन कर किसानो के पुन:अर्जन की कार्यवाही किया जाना था जिसका पालन नहीं किया जा रहा है|

जरहाजेल के भू विस्थापितों ने अधिग्रहित जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई को तत्काल रोकने के साथ जमीन को मूल खातेदारो / परिवार के सदस्यों को सुपुर्दगी करना सुनिश्चित करने की मांग की है और कहा है ऐसा नहीं होने पर आगे उग्र आन्दोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

ज्ञापन सौंपने में प्रमुख रूप से दीपक साहू,फीरत,हरिशरण,राकेश,लक्ष्मण,वीरेंद्र, सुमेंद्र,बृहस्पति,दीनानाथ उपस्थित थे।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

अपना बैंक खाता एवं मोबाइल नंबर दूसरों को देना पड़ा भारी

Published

on

कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई

कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें

कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।

इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।

प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।

म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई

साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।

साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।

कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील

साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—

  • अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
  • अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
  • अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
  • किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
  • अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
  • किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।

कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा।

— जिला कोरबा पुलिस, छत्तीसगढ़

Continue Reading

कोरबा

SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध

Published

on

कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।

संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।

युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग

भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग

ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप

ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।

Continue Reading

कोरबा

भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए एसईसीएल ने गठित की उच्चस्तरीय समिति

Published

on

पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।

गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।

भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।

एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं।
कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।

एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।

Continue Reading
Advertisement

Trending

कुसमुंडा

जरहाजेल के भू विस्तपितों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जमीन वापसी के साथ पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग की

Published

on

एसईसीएल ने जमीन अधिग्रहण किया लेकिन रोजगार और बसावट नहीं दिया

एसईसीएल भूमि अधिग्रहण और अवार्ड के प्रावधानों का उलंघन कर रही है

कोरबा/कुसमुंडा। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र द्वारा ग्राम जरहाजेल तहसील दर्री में अन्य ग्रामो´ की पुनर्वास के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति मांगी गई है, जबकि उक्त ग्राम की जमीन अर्जन के लिए वर्ष 1983 में पारित अवार्ड में स्पष्ट रूप से 20 वर्ष पश्चात मूल खातेदारों को जमीन वापसी करने की शर्त रखी गयी है। ऐसी व्यवस्था के विपरीत जबरदस्ती किसानो के साथ अन्यायपूर्ण कार्यवाही हो रही है। जरहाजेल के ग्रामीणों ने पूर्व में अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस करने के साथ पेड़ो के कटाई के लिए मांगे गई अनुमति को रद्द करने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

जरहाजेल के भू विस्थापित दामोदर श्याम, इंद्रप्रकाश और घासीराम कैवर्त ने कहा की उक्त भूमि को मध्यप्रदेश भू-राजस्व सहिता 1959 की धारा 247/1 के तहत भूमि का अधिग्रहण किया गया था और एस.ई.सी.एल. (तत्कालिन पश्चिमी कोयला प्रक्षेत्र ) कुसमुण्डा कालरी के प्रबंधक द्वारा तत्कालिन अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा म.प्र. को कोयला उत्खनन के लिए म.प्र. भू-राजस्व सहिता 1959 कि धारा 247/3/ के तहत अनुमति चाही गई थी, जिसपर न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा म.प्र. राजस्व प्रकरण क्र.1 / अ-67/82-83 दिनांक 27/04/1983 को आदेश पारित कर पाँच बिंदुओ के शर्तों के आधार पर दखल करने का अधिकार दिया गया था । जो कि निम्नानुसार है –
न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा म.प्र. के द्वारा उल्लेखित शर्तों के अनुसार पारित आदेश 27/04/1983 के बाद 20 वर्षों के बाद उत्खनन् हुए क्षेत्र एवं आवास गृह, रेलवे लाईन सडक आदि निर्माण के लिए चाही गई जमीन को 60 वर्षो के बाद भू-स्वामियों को वापस करना होगा | संबंधित व्यक्ति को भूमि के वापसी तक भू-राजस्व शासन द्वारा निर्धारित आधार पर अदा करना होगा। विस्थापित परिवारो को आवश्यक सुविधाए कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य शासन द्वारा समय-समय पर बनाए गये नियम व शर्तों के लिए कंपनी बंधन कारी होगा।
उन्होंने कहा कि इस आदेश पत्र में निहित शर्तो में अपने परियोजना अंतर्गत अन्य गाँवों को बसाहट दिए जाने का प्रावधान नहीं रखा गया था | उसके बावजूद इस क्षेत्र में पुनर्वास देने का प्रयास किया जा रहा है, जो अनुचित है | उक्त गांव में आज भी रोजगार एवं मुआवजा के कई प्रकरण लंबित है, जमीन जाने के बाद विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं। किसी भी विस्थापित को बसावट प्रदान नहीं किया गया है। जमीन अधिग्रहण के एवॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के नाम पर दर्जनों रोजगार को रोक कर रखा गया है, जब एवॉर्ड कैसे हुआ एसईसीएल बता ही नहीं पा रहा है तो जमीन का उपयोग कैसे एसईसीएल ने किया। यदि आवश्यक ही था तो आवार्ड में दिए गए प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार के नीति का पालन कर किसानो के पुन:अर्जन की कार्यवाही किया जाना था जिसका पालन नहीं किया गया |

जरहाजेल के भू विस्थापितों ने कहा की अधिग्रहित जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई के लिए मांगे गए अनुमति रद्द करने और जमीन को मूल खातेदारो / परिवार के सदस्यों को सुपुर्दगी करना सुनिश्चित करने की मांग की है और कहा है ऐसा नहीं होने पर आन्दोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

ज्ञापन सौंपने में प्रमुख रूप से संतोष,बजरंग सोनी,मोहन, फीरत,पुरषोत्तम,हरिशरण,विशेश्वर,शिव नारायण,दीनानाथ,डुमन, दुलचंद,रेशम,गंगा प्रसाद,टकेश्वर,कमलेश,केदार कश्यप,लक्ष्मण,वीरेंद्र,राकेश, के साथ बड़ी संख्या में ग्राम जरहाजेल के भू विस्थापित उपस्थित थे।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कुसमुंडा

SECL कुसमुंडा में कोयला मजदूर पंचायत (HMS) की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, लिये गए कई बड़े फैसले, मजदूर हित सर्वोपरि

Published

on

​कोरबा/कुसमुंडा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र में 29 जुलाई को कोयला मजदूर पंचायत (HMS) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक बैठक संपन्न हुई। यह बैठक हिन्द खदान मजदूर फेडरेशन के अध्यक्ष व कोयला मजदूर पंचायत (केंद्रीय) के अध्यक्ष रेशम लाल यादव एवं केंद्रीय महामंत्री विनय कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित की गई ।

​बैठक में संगठन की मजबूती और मजदूर हितों को लेकर कई बड़े फैसले लिए गए जिसने क्षेत्र की श्रमिक राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है ।

भेदभाव और परिवारवाद के खिलाफ नाराजगी, सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने छोड़ी सभा

​इस बैठक के दौरान कुसमुंडा क्षेत्र में कोयला मजदूर सभा (HMS) को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब संगठन के क्रियाकलापों आंतरिक भेदभाव वित्तीय अनियमितताओं और हावी हो चुके परिवारवाद से असंतुष्ट होकर सैकड़ों पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से कोयला मजदूर सभा का परित्याग कर दिया इन सभी साथियों ने पूरी निष्ठा के साथ कोयला मजदूर पंचायत (HMS) की सदस्यता ग्रहण की।

​केंद्रीय अध्यक्ष रेशम लाल यादव एवं महामंत्री विनय कुमार सिंह ने संगठन में शामिल हुए सभी साथियों का फूल-माला पहनाकर ससम्मान स्वागत किया और उन्हें पार्टी की मुख्यधारा में शामिल किया ।

​मजदूर हित सर्वोपरि, एसईसीएल के सभी क्षेत्रों में होगा दौरा

​बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष एवं महामंत्री ने संगठन के उद्देश्यों और विचारों को विस्तार से साझा किया उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारे संगठन के लिए मजदूर हित सर्वोपरि है श्रमिकों के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा ​इसके साथ ही बैठक में यह बड़ा निर्णय लिया गया कि कोयला मजदूर पंचायत की क्षेत्रीय कमेटियों द्वारा जल्द ही एसईसीएल (SECL) के सभी क्षेत्रों का सघन दौरा किया जाएगा और नई कमेटियों का गठन कर संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाया जाएगा ।

इन्होंने ली सदस्यता (प्रमुख नाम):-

​कोयला मजदूर पंचायत की नीति और नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कुसमुंडा क्षेत्र से मिलन पाण्डेय मनोज सिंह राजदेव सिंह सुशील साहू सरफराज अहमद संतान सोभन दास साहू अभिलाष मिश्रा राजू राजभर विजय गुप्ता जनार्दन यादव उत्तम दास विजय साहू जीवनलाल साहू किरण कुमार विनोद यादव अभिजीत भारद्वाज, दिनेश कुमार भूपेंद्र यादव कमल यादव जयप्रकाश यादव श्रवण कुमार योगेश राजेंद्र सहित सैकड़ों श्रमिक साथियों ने संगठन का दामन थामा ।

​नए शामिल हुए सदस्यों ने संकल्प लेते हुए कहा कि वे सभी कोयला मजदूर पंचायत में कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे और संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे ।

​बैठक में ये रहे उपस्थित:-

​इस महत्वपूर्ण बैठक में गेवरा दीपका एवं कुसमुंडा क्षेत्र के कोयला मजदूर पंचायत के वरिष्ठ पदाधिकारी संजय सिंह जुगनू खान गजेंद्र सिंह तंवर तरुण राहा अनिरुद्ध सिंह एस. डी. मानिकपुरी एस. सी. मंसूरी उड्डयन रविन्द्र स्वर्णकार बसंत कुमार राजन कुमार सोनू राम आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे ।

Continue Reading

कुसमुंडा

SECL कुसमुंडा खदान में डंपर पलटा, कर्मचारी की मौत:आक्रोशित कर्मचारियों ने हड़ताल की, मैनेजर हटाने और परिजन को अनुकंपा नियुक्ति की मांग

Published

on

कोरबा/कुसमुंडा । कोरबा जिले की SECL की कुसमुंडा खदान में एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात मिट्टी अनलोड करते समय 60 टन क्षमता का डंपर अनियंत्रित होकर करीब 150 फीट गहरी खाई में गिर गया।

हादसे में डंपर चालक और विभागीय कर्मचारी सत्यनारायण (38) की मौत हो गई। घटना के बाद खदानकर्मियों में भारी आक्रोश है और उन्होंने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है।

मिट्टी अनलोड करते समय हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, सत्यनारायण शनिवार रात करीब 1 बजे कुसमुंडा खदान के खोदरी फेस में डंपर से मिट्टी अनलोड कर रहे थे। इसी दौरान वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा।

हादसे की सूचना मिलते ही खदान प्रबंधन की एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक कर्मचारी की मौत हो चुकी थी। मृतक कुसमुंडा स्थित पंप हाउस कॉलोनी के SECL क्वार्टर जी-25 में परिवार के साथ रहते थे। उनके परिवार में पत्नी और चार छोटे बच्चे हैं।

कर्मचारियों ने काम बंद कर शुरू की हड़ताल

घटना से नाराज कर्मचारियों ने रविवार सुबह खोदरी फेस में काम बंद कर दिया और हड़ताल पर बैठ गए। कर्मचारियों का आरोप है कि खदान प्रबंधन और मैनेजर कैलाशचंद बल लगातार काम का दबाव बनाते हैं, लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा और समस्याओं पर ध्यान नहीं देते।

उनका कहना है कि खदान में सुरक्षा उपकरण और इंतजाम नाकाफी हैं, और मैनेजर का व्यवहार भी कर्मचारियों के प्रति ठीक नहीं है। सुरक्षा इंतजामों और कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी की जाती है।

मैनेजर को हटाने और अनुकंपा नियुक्ति की मांग

हड़ताली कर्मचारियों ने खदान प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए मैनेजर कैलाशचंद बल को तत्काल हटाने की मांग की है। साथ ही मृतक कर्मचारी के परिवार के एक सदस्य को सात दिन के भीतर अनुकंपा नियुक्ति और उचित मुआवजा देने की मांग भी रखी है।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने पर कुसमुंडा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक पंचनामा कार्रवाई की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Continue Reading

कुसमुंडा

अधिकारों की लड़ाई होगी तेज, RCWF के आह्वान पर 12 जून को कुसमुंडा में जुटेगा ठेका मजदूर और भूविस्थापितों का महासैलाब

Published

on

महासभा को सफल बनाने के लिए आयोजकों ने बैठक कर तैयार की रणनीति, सौंपी गई जिम्मेदारियां

कोरबा/कुसमुंडा। कोयला खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में ठेका मजदूरों व भूविस्थापितों के अधिकारों के दमन सुरक्षा में अनदेखी और उनके वाजिब हक को दबाने की कोशिशों के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का शंखनाद होने जा रहा है। राष्ट्रीय कालरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर आगामी 12 जून 2026 दिन शुक्रवार को दोपहर 3:00 बजे से कुसमुंडा के महतारी अंगना मैदान पर एक विशाल ठेका मजदूर और भूविस्थापित महासभा का आयोजन किया जा रहा है ।

इस महासभा को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए आयोजकों द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें क्षेत्र के सभी जिम्मेदार साथियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ।

शोषण के खिलाफ एक मंच पर आएंगे श्रमिक और भूविस्थापित

बैठक के दौरान आयोजकों ने तीखे शब्दों में कहा कि कोयला खदानों सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े ठेका मजदूरों और भूविस्थापितों का प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है, उनके अधिकारों सुरक्षा व्यवस्था और वाजिब हक को बेरहमी से कुचला जा रहा है। इस महासभा का मुख्य उद्देश्य सभी ठेका मजदूरों और भूविस्थापितों को एक मजबूत मंच पर लाना है, ताकि प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ उनके हक व अधिकार की लड़ाई को और तेज व निर्णायक बनाया जा सके ।

तैयारियों को लेकर सौंपी गई जिम्मेदारियां, बैठक में रहे मौजूद

महासभा की सफलता के लिए रणनीति बनाने हेतु आयोजित इस बैठक में क्षेत्र के प्रबुद्ध और जिम्मेदार नागरिकों व श्रमिक नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में प्रमुख रूप से कैलाश साहू, विनोद सारथी, अशोक पटेल, विष्णु प्रसाद, गोविंदा सारथी, राजेन्द्र पटेल, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, कान्हा, प्रकाश जायसवाल, राजू पटेल, नरेश महंत, हेमंत नामदेव, प्रमोद चंद्रा, उदय पटेल, सुरेश पटेल, रामकुमार चन्द्रा, रामकुमार, आनंद यादव, गणेश दास, विजय महंत, अनिल कंवर, देवनाथ नामदेव, बोधन चौहान, अशोक देवांगन, जितेन्द्र साहू, कान्हा, अहीर, तेरस लाल, लखन लाल सहित बड़ी संख्या में अन्य साथी उपस्थित थे ।

आयोजकों की अपील

आयोजक समिति ने कुसमुंडा और आसपास के सभी ठेका श्रमिकों भूविस्थापितों और प्रभावित नागरिकों से अपील की है कि वे 12 जून को दोपहर 3:00 बजे अधिक से अधिक संख्या में कुसमुंडा महतारी अंगना पहुंचकर अपनी एकजुटता का परिचय दें और अपने अधिकारों की इस आवाज को बुलंद करें ।

Continue Reading

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677