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इंदौर में ट्रक ने 15 लोगों को कुचला, 3 मौतें:नो एंट्री में घुसा, एक किलोमीटर तक टक्कर मारता गया, ब्लास्ट के बाद जला
इंदौर,एजेंसी। इंदौर में सोमवार शाम बेकाबू ट्रक करीब एक किलोमीटर तक मौत बनकर दौड़ा। तेज रफ्तार ट्रक ने कई लोगों और वाहनों को कुचला, टक्कर मारी। शहर के एयरपोर्ट रोड पर इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
इनके नाम इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा के वरिष्ठ सहायक कैलाशचंद्र जोशी और वैशाली नगर निवासी रिटायर्ड प्रोफेसर लक्ष्मीकांत सोनी बताए गए हैं। वहीं, महेश खतवासे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक नंबर MP09 ZP 4069 ने करीब 15 लोगों को चपेट में लिया। हादसे के दौरान ट्रक में आग लग गई। पहले ये सूचना आई थी कि गुस्साए लोगों ने ट्रक में आग लगा दी। फिर पुष्टि हुई कि ट्रक की टक्कर के बाद उसमें एक बाइक फंस गई थी। ट्रक लगातार बाइक को रगड़ते हुए चल रहा था, जिससे उसमें ब्लास्ट हो गया और ट्रक में आग लग गई।
12 घायलों में से गीतांजलि अस्पताल में 6, वर्मा यूनियन अस्पताल में 2, बांठिया अस्पताल में 2, अरबिंदो अस्पताल में एक और भंडारी अस्पताल में एक व्यक्ति को भर्ती कराया गया है। 2 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
आग में लिपटे शख्स को ट्रक के नीचे से निकाला
हादसे के दौरान एक बाइक सवार ट्रक के नीचे फंस गया। बाइक के रगड़ने से चिंगारी निकली और दोनों गाड़ियों ने आग पकड़ ली। बाइक सवार के कपड़ों में भी आग लग गई। जलती हालत में उसे लोगों ने बाहर निकाला।
पोलो ग्राउंड जाना था, रास्ता भूला ड्राइवर
पुलिस के मुताबिक, ट्रक जैन ट्रांसपोर्ट का है। यह सांवेर रोड से गत्ते लेकर निकला था। ट्रक को पोलो ग्राउंड पहुंचना था, लेकिन ड्राइवर रास्ता भूलकर सुपर कॉरिडोर से एयरपोर्ट की तरफ आ गया।
शाम के समय शहर में ट्रकों की एंट्री बैन रहती है। ऐसे में ये ट्रक नो एंट्री में घुस गया। कालानी नगर में पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन ड्राइवर रफ्तार बढ़ाकर ट्रक को लेकर भागा।
गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव लेंगे जायजा
सीएम डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर दुख जताया। उन्होंने गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला को इंदौर जाने के निर्देश दिए हैं। रात 11 बजे से पहले शहर में भारी वाहनों के प्रवेश के कारणों की जांच कराने को भी कहा है।

गाड़ियों को टक्कर मारते ट्रक का वीडियो भी आमने आया है।

एक बाइक ट्रक के नीचे फंस गई। रगड़ से निकली चिंगारी से दोनों गाड़ियों ने आग पकड़ ली।

बाइक सवार ट्रक के नीचे फंस गया। जलती हालत में उसे लोगों ने बाहर निकाला।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा- ट्रक के ब्रेक फेल थे
प्रत्यक्षदर्शी सुभाष सोनी ने बताया कि ट्रक के ब्रेक फेल थे। ड्राइवर भी नशे में था। मेरे जीजा जी के दोनों पैर कटकर अलग हो गए।
प्रदीप देवलिया ने कहा कि तेज रफ्तार ट्रक विद्या पैलेस से गुजरते हुए लोगों को उड़ाता हुआ निकला। पहले उसने एक मैडम को उड़ाया और उसके बाद लाइन से कई लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ गया।
कलेक्टर पहुंचे अस्पताल, घायलों का हाल जाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर घायलों का हालचाल जानने और उनके इलाज की मॉनिटरिंग करने के लिए कलेक्टर शिवम वर्मा खुद अस्पताल पहुंचे। अरविंदो अस्पताल में भर्ती एक बच्ची को देख कलेक्टर भावुक हो गए। उन्होंने कहा- यह मेरी बेटी है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने सभी घायलों के इलाज के लिए डॉक्टरों से बात की। मौके पर मौजूद सभी परिजन को बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें सीधे निर्देश दिया है कि घायलों की हरसंभव मदद हो।
ट्रक ने सबसे पहले दो बाइक को टक्कर मारी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक ने सबसे पहले रामचन्द्र नगर चौराहे पर दो बाइक सवारों को टक्कर मारी। ये दोनों ही बाइक ट्रक में फंस गईं। इसके बावजूद ट्रक की रफ्तार तेज ही रही। ट्रक में फंसी बाइक घिसटती चली गई। लोगों ने ड्राइवर को आवाज देकर ट्रक रुकवाने की कोशिश भी की लेकिन वह नहीं रुका।
लोगों ने बताया कि बड़ा गणपति चौराहे से पहले ही ट्रक बेकाबू हो गया था। रामचंद्र नगर चौराहे से बड़ा गणपति की दूरी करीब एक किलोमीटर है। बताया गया है कि रामचन्द्र नगर चौराहे के दोनों तरफ पुलिस जवान चालानी कार्रवाई कर रहे थे।

हादसे में कई लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया।
शराब के नशे में था ट्रक ड्राइवर
इंदौर जोन-1 के डीसीपी कृष्णा लालचंदानी ने बताया कि ड्राइवर शराब के नशे में था। उसे पकड़ लिया गया है। ट्रक को जब्त कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ट्रक में बाइक फंस गई थी, जिसके घिसटने से चिंगारी निकली और आग लग गई है।
विधायक बोलीं- सिटी में ट्रक की एंट्री बड़ी चूक
विधायक मालिनी गौड़ और पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों से बात कर जानकारी ली। गौड़ गीतांजलि हॉस्पिटल भी गईं, जहां उन्होंने घायलों से बात की।
उन्होंने कहा- जिनकी मौत हुई है, उनके प्रति मैं संवेदना व्यक्त करती हूं। ट्रकों को सिटी में घुसने की अनुमति नहीं है। पता नहीं, कैसे यह अंदर आ गया। ऐसा आगे न हो, इसका पुलिस प्रशासन को ध्यान रखना होगा। ट्रक की एंट्री में चूक हुई है।
विधायक रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला भी घायलों से मिलने पहुंचे।
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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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