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उप्र मंत्रिमंडल विस्तार: पश्चिमी यूपी के दिग्गज जाट नेता भूपेंद्र चौधरी ने फिर ली मंत्री पद की शपथ
लखनऊ, एजेंसी। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के रविवार को हुए दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘जन भवन’ में आयोजित समारोह में चौधरी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले मुरादाबाद के रहने वाले भूपेंद्र चौधरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट नेताओं में गिना जाता है। चौधरी इससे पहले वर्ष 2017 से 2019 तक पंचायती राज राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और बाद में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा में लंबे समय तक सक्रिय रहे चौधरी ने वर्ष 1999 में संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
चौधरी वर्ष 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य बने थे और वर्तमान में भी वह उच्च सदन के सदस्य हैं। वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था। बाद में वर्ष 2019 में उन्हें इसी विभाग का कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया।

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CIL की अप्रैल में कोयला नीलामी मात्रा मार्च के मुकाबले 6% घटकर 3.05 करोड़ टन
नई दिल्ली, एजेंसी। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अप्रैल में ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से 3.05 करोड़ टन (एमटी) कोयला पेश किया। यह मार्च में पेश 3.25 करोड़ टन के मुकाबले छह प्रतिशत कम है। यह गिरावट पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में आई है। इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ी हैं और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बिजली संयंत्रों को कोयले का इस्तेमाल बढ़ाना पड़ा है। सीआईएल के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में पेश कुल कोयले में से महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने 94 लाख टन की नीलामी की। इसके बाद साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने 56 लाख टन, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने 46 लाख टन, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने 44 लाख टन और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने 30 लाख टन की नीलामी की।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने कोयले की पेशकश ‘सिंगल विंडो मोड एग्नॉस्टिक’ (एसडब्ल्यूएमए) नीलामी के माध्यम से की। यह 2022 में शुरू किया गया एकीकृत और सरल ई-नीलामी मंच है। कोल इंडिया की देश के घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। कोयला मंत्रालय के अधीन महारत्न सार्वजनिक उपक्रम सीआईएल बिजली संयंत्रों, स्पंज आयरन निर्माताओं और अन्य उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नियमित ई-नीलामी आयोजित करती है।
कंपनी ने पहले यह भी कहा था कि अब बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों के खरीदार सीधे उसकी ऑनलाइन कोयला नीलामी में भाग ले सकते हैं जिससे बिचौलियों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इस कदम से अतिरिक्त कोयला संसाधनों का बेहतर उपयोग, पारदर्शिता में वृद्धि एवं वैश्विक बाजार में एकीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सीआईएल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में उसका उत्पादन 1.7 प्रतिशत घटकर 76.81 करोड़ टन रहा जो 2024-25 में 78.11 करोड़ टन था। वहीं, मार्च महीने में उत्पादन 8.58 करोड़ टन से घटकर 8.45 करोड़ टन रह गया।
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ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा तय करेंगे भविष्य की वैश्विक ताकत: अडानी
नई दिल्ली, एजेंसी। उद्योगपति गौतम अडानी ने भारत से कृत्रिम मेधा (AI) क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का आह्वान करते हुए कहा है कि आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल अवसंरचना ही वैश्विक शक्ति संतुलन तय करेंगे। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक बिजनेस समिट 2026 को संबोधित करते हुए Adani Group के चेयरमैन ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अब डेटा, सेमीकंडक्टर तथा क्लाउड तकनीक रणनीतिक हथियार बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि आज वैश्वीकरण का पुराना मॉडल कमजोर पड़ रहा है और दुनिया प्रतिस्पर्धी गुटों में बंटती जा रही है। ऐसे माहौल में भारत को एआई को केवल सॉफ्टवेयर तकनीक नहीं बल्कि ऊर्जा, डेटा सेंटर, चिप निर्माण, नेटवर्क, कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा विकास से जुड़ी संपूर्ण रणनीतिक अवसंरचना के रूप में देखना होगा। अडानी ने जोर देते हुए कहा कि भारत को अपने “बौद्धिक भविष्य” के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर देश में ही विकसित, संचालित और नियंत्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी एआई और ऊर्जा अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने का बड़ा अवसर है। विनिर्माण, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल सेवाओं में बढ़ती घरेलू मांग भारत को इस दिशा में बढ़त देती है। अडानी के मुताबिक भारत 500 गीगावाट स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है लेकिन भविष्य की एआई अर्थव्यवस्था के लिए और बड़े निवेश की जरूरत होगी।
अडानी ने कहा कि एआई केवल तकनीक नहीं बल्कि “ऊर्जा, डेटा, चिप, नेटवर्क और शासन” का संगम है। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि एआई बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर देगा। उनके अनुसार एआई उत्पादकता बढ़ाने, छोटे कारोबारों को मजबूत करने और नए रोजगार पैदा करने का बड़ा माध्यम बन सकता है।
उन्होंने डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तकनीकी क्रांति ने लाखों भारतीयों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा और Flipkart, Paytm, Swiggy और PhonePe जैसी कंपनियों को उभरने का मौका दिया। उनका मानना है कि एआई इससे भी बड़े स्तर पर बदलाव ला सकता है।
अडानी ने बताया कि समूह गुजरात के खावड़ा में दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-साइट नवीकरणीय ऊर्जा पार्क पर काम कर रहा है, जिसका 35 प्रतिशत हिस्सा चालू हो चुका है। समूह ने ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना में कुल 100 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही डेटा सेंटर कारोबार में भी 100 अरब डॉलर निवेश की योजना है, जिसमें Google, Microsoft और Uber जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी शामिल है।
अपने संबोधन के अंत में अडानी ने कहा कि एआई की असली सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि उसने कितनी नौकरियां खत्म कीं, बल्कि इससे कि उसने कितने भारतीयों को नई ताकत और अवसर दिए।
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पीएम मोदी की एक अपील से 3 लाख करोड़ के गोल्ड कारोबार पर संकट, सर्राफा बाजार में बढ़ी चिंता
मुंबई, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने देश के ज्वेलरी कारोबार में हलचल बढ़ा दी है। हैदराबाद में रविवार को आयोजित एक रैली में पीएम मोदी ने नागरिकों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपनी रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से कहा कि वे अगले एक साल तक शादी या अन्य समारोहों के लिए सोना खरीदने से बचें। पीएम की इस अपील के बाद सर्राफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि भारत में शादियों के दौरान सोने की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है।

भारत में हर साल लगभग 40 से 50 लाख शादियां होती हैं और शादी के गहनों का कारोबार अरबों रुपए का माना जाता है। आमतौर पर एक शादी में 50 से 100 ग्राम तक सोने के आभूषण खरीदे जाते हैं। यही वजह है कि देश में होने वाली कुल सोने की बिक्री का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा वेडिंग सीजन में होता है। उद्योग से जुड़े संगठनों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में केवल वेडिंग ज्वेलरी सेगमेंट में ही 2 से 3 लाख करोड़ रुपए तक का कारोबार हो सकता है। ऐसे में पीएम मोदी की अपील से ज्वेलर्स को बिक्री में भारी गिरावट की आशंका सताने लगी है।
ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट
इसका असर शेयर बाजार में भी तुरंत दिखाई दिया। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। Titan Company, Senco Gold और अन्य गोल्ड स्टॉक्स में 10 प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। कारोबारियों का कहना है कि अगर लोग सोने की खरीद टालते हैं तो पूरे उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है।
90% सोना विदेशों से आयात
सरकार की चिंता मुख्य रूप से बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर है। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक सोना विदेशों से आयात करता है और इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश कर रही है। हाल ही में देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी लगातार घटा है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। हर साल देश में 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन केवल 1 से 2 टन के आसपास है। लगातार बढ़ती कीमतों के बावजूद शादी के मौसम में सोने की मांग मजबूत बनी रहती है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि लोग पीएम मोदी की अपील को कितना गंभीरता से लेते हैं और इसका ज्वेलरी कारोबार पर कितना असर पड़ता है।
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