विदेश
पुतिन ने ट्रंप की तारीफ में पढ़े कसीदे, बोले- वह सच में यूक्रेन युद्ध खत्म करवाना चाहते
मॉस्को, एजेंसी। मॉस्को में शनिवार को आयोजित विक्ट्री डे परेड के बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने मीडिया से बातचीत में यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मौजूदा प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प “ईमानदारी” से इस संघर्ष को समाप्त करना चाहते हैं।
पुतिन ने कहा, “सबसे पहले यह मामला रूस और यूक्रेन से जुड़ा है। अगर कोई हमारी मदद करना चाहता है, तो यह अच्छी बात है। हम देख सकते हैं कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी राष्ट्रपति सच्चे मन से इस संघर्ष का समाधान चाहते हैं।” उन्होंने अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की अपनी अन्य प्राथमिकताएं भी हैं, लेकिन इसके बावजूद वह शांति बहाली की कोशिश कर रहा है।

रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों, खासकर NATO और यूरोपीय ताकतों पर यूक्रेन युद्ध भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “ग्लोबलिस्ट पश्चिमी ताकतों” ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। पुतिन ने आरोप लगाया कि पश्चिम ने यूक्रेन को NATO और यूरोपीय संघ में शामिल करने के वादों के जरिए रूस के खिलाफ खड़ा किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने बार-बार रूस को अपनी मंशा को लेकर गुमराह किया। पुतिन ने दावा किया कि 2022 में इस्तांबुल में रूस और यूक्रेन के बीच एक समझौता लगभग तैयार हो गया था, लेकिन पश्चिमी दबाव के कारण कीव पीछे हट गया। उन्होंने विशेष रूप से United Kingdom और France का नाम लेते हुए कहा कि इन देशों ने यूक्रेन को समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए उकसाया।
पुतिन ने दावा किया कि पश्चिमी देशों को उम्मीद थी कि कुछ महीनों में रूस को कमजोर कर उसकी “स्टेटहुड” खत्म कर दी जाएगी, लेकिन वे इसमें असफल रहे। उन्होंने कहा कि अब यह संघर्ष ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां पश्चिम खुद फंस गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में यूरोप में ऐसी राजनीतिक ताकतें फिर उभरेंगी जो रूस के साथ बेहतर संबंध चाहेंगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब शुक्रवार को Donald Trump ने रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा था कि यह अस्थायी युद्धविराम रूस के Victory Day समारोहों के दौरान लागू रहेगा और दोनों पक्षों ने इस पर सहमति जताई है। यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद शुरू हुआ था और अब यह पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
खेल
20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय
ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।

नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी।

हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था।
इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है।

वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है।
आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
विदेश
ईरान-अमेरिका के बीच मिसाइल हमलों का कम्पीटीशनः IRGC बोला- दुश्मन के कई ठिकाने उड़ाए
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। ईरान की सैन्य शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Tasnim News Agency के माध्यम से बयान जारी कर कहा कि उसने “क्षेत्र में दुश्मन के ठिकानों” को निशाना बनाया और उन पर “एयरोस्पेस मिसाइलों” से हमला किया। हालांकि अमेरिकी सेना के United States Central Command (CENTCOM )ने पूरी तरह अलग तस्वीर पेश की।

CENTCOM के अनुसार:
- ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में 7 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
- इनमें से 6 मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया।
- सातवीं मिसाइल अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विफल हो गई।
- किसी अमेरिकी सैनिक या सैन्य अड्डे को नुकसान नहीं पहुंचा।
अमेरिकी सेना का कहना है कि मिसाइल हमले से कुछ घंटे पहले उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे चार ईरानी “वन-वे अटैक ड्रोन” (कामिकाज़े ड्रोन) मार गिराए थे। अमेरिका का दावा है कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा थे। इसके बाद अमेरिकी बलों ने ईरान के Qeshm Island और गोरुक क्षेत्र के तटीय रडार ठिकानों पर जवाबी हमले किए। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई आगे के समुद्री हमलों को रोकने के लिए की गई।
ईरान का अलग दावा
IRGC ने दावा किया कि उसके हमले अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद “दुश्मन अड्डों” के खिलाफ थे। कुछ ईरानी दावों में यह भी कहा गया कि बहरीन में अमेरिकी नौसेना के United States Fifth Fleet मुख्यालय को निशाना बनाया गया। लेकिन CENTCOM ने इन दावों को “झूठा” बताते हुए कहा कि अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय को कोई नुकसान नहीं हुआ। कुवैत में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए और कई मिसाइलों/ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। बहरीन में भी हवाई हमले के सायरन बजाए गए और संयुक्त अमेरिकी-बहरीनी वायु रक्षा प्रणालियों ने मिसाइलों को रोक लिया।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और परमाणु वार्ताएं पहले से तनाव में हैं। Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा को लेकर टकराव जारी है। लेबनान में Hezbollah और इजराइल के बीच तनाव बना हुआ है। इस मामले में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। IRGC का कहना है कि उसने दुश्मन ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया, जबकि अमेरिकी सेना का दावा है कि सभी मिसाइल हमले विफल कर दिए गए और कोई महत्वपूर्ण नुकसान नहीं हुआ। स्वतंत्र रूप से दोनों पक्षों के दावों की पूरी पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
बिज़नस
US Stock Market Crash: निवेशकों के डूब $2 ट्रिलियन, अमेरिकी शेयर बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
वाशिंगठन, एजेंसी। शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखनो को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। घंटे भर में निवेशकों के 2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 190 लाख करोड़ रुपए) डूब गए। वॉल स्ट्रीटी पर यह साल 2026 की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रहा है।
वॉल स्ट्रीट के तीनों ही बड़े इंडेक्स शुक्रवार के कारोबार में गिरावट पर बंद हुए। टेक्नोलॉजी के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल 1 फीसदी गिरावट पर बंद हुआ तो एसएंडपी 500 पर भी 2.4 फीसदी की गिरावट दिखी। इसके अलावा नैसडैक कम्पोजिट में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Nvidia, Alphabet और Meta Platforms समेत कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।

गिरावट की वजह
बाजार में आई इस गिरावट की वजह अमेरिकी जॉब मार्केट के आंकड़े रहे। शुक्रवार को आए जॉब मार्केट के आंकड़े अनुमान से भी ज्यादा मजबूत रहे। इससे निवेशकों में यह संदेश गया कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में फिलहाल कटौती नहीं करने वाला और रेट ऊंचा ही बना रहेगा।
मई महीने में अमेरिकी कंपनियों ने 1.72 लाख नई नौकरियां जोड़ीं, जबकि एनालिस्ट्स का अनुमान केवल 80 हजार नौकरियों का था। उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों ने संकेत दिया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है।
इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में भी तेज उछाल देखने को मिला। 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.16 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 15 महीनों का उच्चतम स्तर है।
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