देश
निस्वार्थ सेवा का पर्याय बना कमलादेवी जनसेवा संस्थान, पर्यावरण संरक्षण से लेकर मानव सेवा तक निभा रहा अग्रणी भूमिका
बिना किसी चंदे के समाजहित में संचालित हो रहे सेवा कार्य, पर्यावरण, सड़क सुरक्षा, शिक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में बना प्रेरणास्रोत
सुमन नेहरा
सीकर, राजस्थान। समाज सेवा को समर्पित कमलादेवी जनसेवा संस्थान (रजि.) आज राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में निस्वार्थ जनसेवा का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। 11 नवंबर 2020 को संस्थापक अध्यक्ष डॉ. एस. के. फगेड़िया ने अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती कमलादेवी की स्मृति में इस संस्थान की स्थापना की। संस्था राजस्थान सरकार के सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत होने के साथ-साथ भारत सरकार के नीति आयोग की दर्पण आईडी से भी मान्यता प्राप्त है।

संस्थान के अंतर्गत संचालित “कमूल – एक सहारा (KAMUL)” अभियान समाज के कमजोर, असहाय, मजबूर, उत्पीड़ित एवं लाचार वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहा है। संस्था प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में साधारण सभा आयोजित कर वर्षभर की सामाजिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करती है।

संस्थान द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकारी विद्यालयों एवं कार्यालयों में निःशुल्क पौधों का वितरण एवं पौधारोपण, भीषण गर्मी में पक्षियों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था, जरूरतमंदों को सर्दियों में कंबल वितरण, सड़क सुरक्षा अभियान के तहत वाहनों पर रेडियम स्टीकर लगाना तथा गोवंश की सुरक्षा के लिए रेडियम बेल्ट बांधने जैसे अनेक जनहितकारी कार्य नियमित रूप से किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त हाईवे पर अवैध कट बंद कराने, स्कूलों एवं कच्ची बस्तियों में बाल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा पर्यावरण संरक्षण एवं सड़क सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाकर संस्था समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश दे रही है। सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को पर्यावरण मित्र सम्मान, कम्मू राष्ट्र गौरव सम्मान एवं राष्ट्र रत्न कम्मू अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जाता है।
विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि संस्था अपने सभी सेवा कार्य पूर्णतः निःशुल्क एवं निस्वार्थ भाव से संचालित करती है। संस्था किसी भी व्यक्ति से चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं लेती, बल्कि इसके 15 सदस्य स्वयं अपने संसाधनों से सेवा कार्यों का संचालन करते हैं।

मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्थान को जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इनमें गांधी सेवा रत्न अवॉर्ड, राष्ट्र विभूति सम्मान, सरदार पटेल दिव्य रत्न अवॉर्ड, राष्ट्र गौरव सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, अम्बेडकर कीर्ति सम्मान, पर्यावरण मित्र सम्मान एवं मां भारती सेवा सम्मान प्रमुख हैं।
संस्थान के प्रमुख पदाधिकारी:
संस्थापक अध्यक्ष: डॉ. एस. के. फगेड़िया
सचिव: सुमन नेहरा
कोषाध्यक्ष: विकास फगेड़िया
मीडिया प्रभारी: शैतानाराम जाखड़
कमलादेवी जनसेवा संस्थान अपनी सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है तथा जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई मिसाल कायम कर रहा है।
देश
सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
क्यों सस्ता होगा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे
सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।
निवेशकों के लिए सलाह
का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।
देश
RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%
मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।
RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।
देश
देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर
नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।
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