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अमेरिका ने वेनेजुएला का 65 अरब बैरल तेल कब्जाया:यह भारत की 40 साल की जरूरत के बराबर, ट्रम्प बोले- इतिहास की सबसे बड़ी डील

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वॉशिंगटन डीसी/काराकस, एजेंसी। अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर कंट्रोल हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। यह आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अमेरिका के पास खुद करीब 46 अरब बैरल तेल है।

भारत से तुलना करें तो देश हर साल करीब 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के 40 साल के ऑयल इम्पोर्ट के बराबर है।

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह काम वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ मिलकर किया जाएगा। इस साझेदारी से निकलने वाले तेल में अमेरिका को 55% हिस्सा मिलेगा। हालांकि, इस निजी कंपनी का नाम अभी नहीं बताया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है।

वेनेजुएला में 300 अरब बैरल तेल मौजूद

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। वहां 300 अरब बैरल से ज्यादा तेल मौजूद है। ट्रम्प जिस 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिकी कंट्रोल की बात कर रहे हैं, वह वेनेजुएला के कुल तेल भंडार का करीब पांचवां हिस्सा है।

वेनेजुएला के पास इतना बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद वहां उत्पादन काफी कम है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसका तेल उद्योग लंबे समय से मुश्किल में है।

वेनेजुएला के तट पर स्थित एक तेल रिफाइनरी में खड़े टैंकर।

वेनेजुएला के तट पर स्थित एक तेल रिफाइनरी में खड़े टैंकर।

अमेरिका के हिस्से में कितना तेल आएगा

इस डील में सबसे अहम बात अभी भी साफ नहीं है। अमेरिका को वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल का मालिकाना हक मिलेगा या सिर्फ उसके उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह समझना जरूरी है।

अभी उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अमेरिका को साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन का 55% हिस्सा मिलेगा। लेकिन इस काम में शामिल निजी कंपनी का नाम और समझौते की पूरी शर्तें अभी सामने नहीं आई हैं।

इसलिए 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का कंट्रोल होने का मतलब यह नहीं है कि पूरा तेल अमेरिका का हो गया है। असल में अमेरिका को कितना अधिकार मिलेगा, यह डील की पूरी शर्तें सामने आने के बाद ही साफ होगा।

100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश

राष्ट्रपति रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत वेनेजुएला के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इसमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश होने की बात कही गई है।

उनका कहना है कि इस पूरे काम से वेनेजुएला की सरकार को आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स मिल सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला अपने बड़े तेल भंडार का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहता है।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले रिश्ते

अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते जनवरी में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदल गए। डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों में बातचीत बढ़ी और वेनेजुएला का तेल इसका सबसे अहम मुद्दा बन गया।

इसके बाद वेनेजुएला ने तेल उद्योग के नियम बदले। नए नियमों से विदेशी कंपनियों को ज्यादा अधिकार मिले और अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल गया।

वेनेजुएला के पास सबसे ज्यादा तेल, फिर भी गरीब

वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। देश की सरकारी तेल कंपनी कमजोर हुई, तेल उद्योग में निवेश कम हुआ और उत्पादन लगातार गिरा। इसके अलावा अमेरिकी प्रतिबंधों ने भी तेल कारोबार को नुकसान पहुंचाया।

यानी जमीन के नीचे तेल बहुत है, लेकिन उसे निकालने, बेचने और उससे कमाई करने की क्षमता कमजोर हो गई। इसके साथ ही देश में कई साल तक महंगाई, आर्थिक कुप्रबंधन और राजनीतिक अस्थिरता रही। इसका सीधा असर आम लोगों की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा।

इस डील से OPEC को चुनौती

OPEC तेल उत्पादक देशों का समूह है। इसके सदस्य तेल का उत्पादन घटाकर या बढ़ाकर बाजार में सप्लाई को प्रभावित करते हैं। सप्लाई कम हो तो कीमत बढ़ सकती है और ज्यादा तेल आने पर कीमत घट सकती है।

वेनेजुएला भी OPEC का सदस्य है। अगर वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ा और बाजार में ज्यादा तेल आया, तो तेल की कीमतों पर गिरावट का दबाव बन सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डील के तुरंत बाद पेट्रोल-डीजल सस्ता हो जाएगा।

वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने में समय लगेगा। इसके अलावा ईरान युद्ध, OPEC के फैसले, दुनिया में तेल की मांग और दूसरे देशों का उत्पादन भी कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

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देश

Nepal Floods Tragedy: त्रिशूली नदी में बहकर आए Bank Locker से पैसे लूटने वाले 29 गिरफ्तार, 58 लाख बरामद

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नई दिल्ली/काठमांडू, एजेंसी। बाढ़ के पानी में बहकर आया एक बैंक लॉकर त्रिशूली नदी के किनारे मिला, जिसके बाद उसके अंदर रखे कैश को लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। पुलिस ने इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनसे 92 लाख नेपाली रुपये से ज़्यादा की रकम बरामद की है; यह रकम भारतीय मुद्रा में लगभग 58 लाख रुपये के बराबर है।

नेपाल में आई भयानक बाढ़ में 600 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 320 भारतीय हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी आगे के खतरों को लेकर भी सतर्क हैं। इस तबाही के बीच, धाडिंग में एक अजीब घटना ने सबका ध्यान खींचा है। बाढ़ के पानी में बहकर आया एक बैंक लॉकर त्रिशूली नदी के किनारे मिला, जिसके बाद उसके अंदर रखे कैश को लेने के लिए लोगों में होड़ मच गई। पुलिस ने इस मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनसे 92 लाख नेपाली रुपये से ज़्यादा की रकम बरामद की है; यह रकम भारतीय मुद्रा में लगभग 58 लाख रुपये के बराबर है।

बाढ़ में बह गया बैंक लॉकर

यह घटना तब हुई जब बाढ़ का पानी रसुवा से एक बैंक लॉकर बहा ले गया। यह लॉकर बहते हुए धाडिंग ज़िले की गल्छी रूरल म्युनिसिपैलिटी-4 में बेलखुखोला के पास त्रिशूली नदी के किनारे जा पहुँचा। जब लॉकर मिला, तो लोगों ने उसमें से कैश निकालना शुरू कर दिया, जिससे पैसे के लिए होड़ मच गई। पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में 29 लोगों को गिरफ़्तार किया। गिरफ़्तार किए गए लोगों से कुल 92,68,505 नेपाली रुपये (भारतीय मुद्रा में लगभग 58 लाख रुपये) बरामद किए गए।

गिरफ़्तार किए गए 29 लोगों में पवन पौडे, बीर बहादुर राणा मगर, बिनोद गिरी, नवराज भेटुवाल, पूर्ण लाल श्रेष्ठ, विष्णुमणि अधिकारी, कृष्णा मगर, शिव बहादुर राणा मगर, युवराज अधिकारी, सुशांत श्रेष्ठ, सुचिमबहादुर राणा मगर, सबिन श्रेष्ठ, प्रेम बहादुर राणा मगर और अनिल भेटुवाल शामिल थे। पुलिस बरामद पैसे के स्रोत और इसमें किसी और के शामिल होने की संभावना की जांच कर रही है।

बाढ़ के बाद नेपाल पर अभी भी खतरा बना हुआ है

भयानक बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडरा रहा खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन ने नेपाल को चेतावनी दी है कि ल्हेंडे नदी प्रणाली के ऊपरी इलाकों में बनी एक झील के किनारे कभी भी टूट सकते हैं। चीन ने पानी का रंग बदलने पर भी चिंता जताई है और इसे खतरे का संभावित संकेत बताया है। नदी के बहाव की दिशा में नीचे की ओर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, जबकि अधिकारी स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब नेपाल बाढ़ के व्यापक असर से जूझ रहा है और लापता लोगों की तलाश का काम भी जारी है।

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देश

नेपाल में तबाही : ग्लेशियर का 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर गिरा था अब तक 633 मौतें, 2500 लापता

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काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक बाढ़ आई थी। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया।

वीडियो में नेपाल की सीमा के पास बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर दिखाई दे रहे हैं। अचानक ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों का करीब 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरता नजर आता है।

हिमस्खलन के बाद धूल और मलबा पूरे इलाके में फैल जाता है। वीडियो में नीचे की ओर बहता पानी और मलबा भी दिखाई दे रहा है।

ग्रुप जब नीचे उतरा तो रास्ते बंद मिले। इसके बाद उन्हें पता चला कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद इलाके में आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

ग्लेशियर टूटने के तुरंत बाद का वीडियो

320 भारतीय अभी भी लापता

नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय भी शामिल हैं। वहीं, करीब 400 भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं।

तबाह घरों से अपना बचा हुआ सामान खोज रहे लोग

बाढ़ से बचाए गए लोगों की सूची में अपने परिजनों के नाम खोजते लोग

नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग खुद रेस्क्यू ऑपरेशन में उतरे

नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरंग बाढ़ प्रभावित इलाके में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में खुद शामिल हुए। उन्होंने सुरंग के अंदर पहुंचकर बचाव टीमों के साथ काम किया और फंसे लोगों को बाहर निकालने के अभियान में मदद की।

बिजली का तार पकड़े लटके रहे तब बची जान

त्रिशूली बाजार में मिठाई की दुकान पर काम कर रहे रामबचन साह बुधवार को अचानक आई बाढ़ में बह गए थे। उन्होंने बताया कि बिजली का तार पकड़कर करीब आधे घंटे तक लटके रहने के बाद उनकी जान बच सकी।

साह सुरक्षित हैं, लेकिन दुकान में मौजूद संगीता, उनका बेटा राहुल और कर्मचारी बिनोद भगत अब भी लापता हैं। उनकी कीचड़ से लथपथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

नेपाल में बाढ़ के बाद तबाही का मंजर

एक बुजुर्ग बस्ती के बीच से गुजरता हुआ। बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन घरों की दीवारों और गलियों में फंसा मलबा तबाही की भयावह तस्वीर दिखा रहा है।

एक बुजुर्ग बस्ती के बीच से गुजरता हुआ। बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन घरों की दीवारों और गलियों में फंसा मलबा तबाही की भयावह तस्वीर दिखा रहा है।

बाढ़ के बाद उजड़ी बस्ती का एरियल व्यू। लोगों के घर कीचड़ से ढ़के हुए दिखाई दिए।

बाढ़ के बाद उजड़ी बस्ती का एरियल व्यू। लोगों के घर कीचड़ से ढ़के हुए दिखाई दिए।

बेत्रावती में बाढ़ के बाद तबाही का मंजर। बाढ़ ने घरों, सड़कों और आसपास के इलाकों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

बेत्रावती में बाढ़ के बाद तबाही का मंजर। बाढ़ ने घरों, सड़कों और आसपास के इलाकों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

त्रिशूली में बाढ़ के कीचड़ और मलबे से घिरी एक क्षतिग्रस्त इमारत।

त्रिशूली में बाढ़ के कीचड़ और मलबे से घिरी एक क्षतिग्रस्त इमारत।

एक क्षतिग्रस्त इमारत जो कीचड़ और मलबे के बीच है। पानी के सैलाब ने यहां सब कुछ तबाह कर दिया।

एक क्षतिग्रस्त इमारत जो कीचड़ और मलबे के बीच है। पानी के सैलाब ने यहां सब कुछ तबाह कर दिया।

नेपाल की हाइड्रोपावर इंडस्ट्री पर बाढ़ का खतरा

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने देश की हाइड्रोपावर इंडस्ट्री पर बड़ा असर डाला है। भोटेकोशी और त्रिशूली घाटियों में बाढ़ से 14 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। इनमें 6 निर्माणाधीन प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक, बाढ़ के बाद 431 MW बिजली उत्पादन क्षमता बंद हो गई। यह देश की कुल उत्पादन क्षमता का 12% से ज्यादा है। निर्माणाधीन प्रोजेक्टों को भी जोड़ने पर प्रभावित क्षमता करीब दोगुनी हो जाती है।

बाढ़ ने प्रोजेक्ट की सुरक्षा पर सवाल उठाए

हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन, हिमस्खलन और ग्लेशियल झील फटने जैसी घटनाओं का खतरा रहता है। जलवायु परिवर्तन के साथ इन जोखिमों के बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

बाढ़ के बाद अब सवाल उठ रहा है कि नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट कहां बनाए जाएं और उन्हें ऐसे प्राकृतिक खतरों से बचाने के लिए किस तरह डिजाइन किया जाए। विशेषज्ञ छोटे प्रोजेक्टों की मजबूती और बड़े जलाशयों की जरूरत पर भी चर्चा कर रहे हैं।

नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए पुरी बीच पर खास संदेश

ओडिशा के पुरी बीच पर रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने नेपाल बाढ़ के पीड़ितों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने नेपाली झंडे और प्रे फॉर नेपाल’ संदेश के साथ रेत की कलाकृति बनाकर प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना की।

बाढ़ के बाद नेपाल की सड़कों पर कीचड़ और मलबा

एक सुरक्षाकर्मी धादिंग में बाढ़ के बाद सड़क पर जमा कीचड़ और मलबा हटाता हुआ।

एक सुरक्षाकर्मी धादिंग में बाढ़ के बाद सड़क पर जमा कीचड़ और मलबा हटाता हुआ।

सड़क पर जमा कीचड़ और मलबे में फंसे एक ऑटो-रिक्शा को निकालने की कोशिश करते पुलिसकर्मी।

सड़क पर जमा कीचड़ और मलबे में फंसे एक ऑटो-रिक्शा को निकालने की कोशिश करते पुलिसकर्मी।

एक महिला बाढ़ प्रभावित इलाके में गैस सिलेंडर के पास बैठकर फोन पर बात करती हुई।

एक महिला बाढ़ प्रभावित इलाके में गैस सिलेंडर के पास बैठकर फोन पर बात करती हुई।

एक महिला बाढ़ के बाद मलबे और कीचड़ से घिरे इलाके में खड़ी हुई।

एक महिला बाढ़ के बाद मलबे और कीचड़ से घिरे इलाके में खड़ी हुई।

त्रिशूली सुरंग में फंसे लोगों को बचाने पहुंची भारतीय टीम

नेपाल के रसुवा जिले में त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में लोगों के फंसे होने की आशंका है। उन्हें बचाने के लिए भारत की एक टीम भी त्रिशूली पहुंच गई है।

भारतीय टीम पहले हेलिकॉप्टर से चिलिमे और लांगटांग इलाके का हवाई सर्वे करेगी। इसके बाद हालात के मुताबिक आगे का बचाव अभियान चलाया जाएगा।

सुरंग में फंसे लोगों की तलाश के लिए दो दिन से रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। शनिवार सुबह से सुरंग का रास्ता खोलने के लिए मलबा और मिट्टी हटाने का काम तेज कर दिया गया है।

ग्लेशियर टूटने के तुरंत बाद का वीडियो आया

इसमें धूल और मलबा तेजी से घाटी की ओर जाता हुआ दिखाई दे रहा है।

इसमें धूल और मलबा तेजी से घाटी की ओर जाता हुआ दिखाई दे रहा है।

तिब्बत के पास नेपाल में हिमस्खलन का खौफनाक मंजर कैमरे में कैद हुआ। टूर गाइड और हाइकर्स के एक ग्रुप ने बुधवार सुबह तिब्बत में एक ऑब्जर्वेशन डेक से इस घटना को देखा। यहां से नेपाल की सीमा के पार बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर दिखाई देते हैं।

हाइकर्स के वीडियो में हिमस्खलन से पहले और बाद का अंतर साफ दिखाई देता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों का कितना बड़ा हिस्सा नीचे घाटी में गिरा।

ग्रुप जब नीचे उतरा, तब उन्हें रास्ते बंद मिले। इसके बाद उन्हें हिमस्खलन और उसके बाद आई बाढ़ से हुई तबाही की जानकारी मिली।

चीन में बाढ़ की तस्वीरें और वीडियो क्यों नहीं दिख रहे?

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई बाढ़ की तस्वीरें और वीडियो पूरी दुनिया में तेजी से फैल गए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ग्यिरोंग पोर्ट के वीडियो की हुई। यह नेपाल और तिब्बत के बीच एक अहम सीमा चौकी है। वीडियो में दिख रहा है कि बाढ़ का तेज पानी सब कुछ बहाता हुआ आगे बढ़ रहा है और लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं।

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के सोशल मीडिया पर यह वीडियो नहीं दिख रहा है।

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के सोशल मीडिया पर यह वीडियो नहीं दिख रहा है।

ये वीडियो CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुए थे। सोशल मीडिया के जरिए ये दुनिया के कई देशों में पहुंच गए। लेकिन चीन में लोगों को ये वीडियो आसानी से देखने को नहीं मिले। चीन के सरकारी टीवी समाचार में भी अब तक इस घटना की सिर्फ एक तस्वीर दिखाई गई है।

चीन के इंटरनेट पर बाढ़ के वीडियो ढूंढना मुश्किल है। यहां तक कि इस बाढ़ में हुई मौतों और लापता लोगों के बारे में सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट भी आसानी से नहीं मिल रही हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन में इंटरनेट पर सरकार का कड़ा नियंत्रण और सेंसरशिप है। कौन-सी जानकारी लोगों तक पहुंचेगी और कौन-सी नहीं, इस पर सरकार का काफी नियंत्रण रहता है।

नेपाल ने भारत की मदद के लिए आभार जताया

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए भारत के समर्थन के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से दिखाई गई चिंता, सहयोग और एकजुटता के लिए नेपाल सरकार और जनता की ओर से वह दिल से धन्यवाद।

काठमांडू के मुर्दाघर में अपनों को तलाशते लोग

UN बोला- नेपाल में हजारों परिवारों को खाने और साफ पानी की जरूरत

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद हालात अब भी गंभीर हैं। UN के मुताबिक, हजारों परिवारों को भोजन और पीने के साफ पानी की जरूरत है।

राहत-बचाव के लिए कई देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मदद बढ़ाई है। यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका ने नेपाल को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

वैज्ञानिक बोले- कभी भी टूट सकता है दूसरी झील का बांध

वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल ने CNN से कहा कि नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाके के ऊपर बनी दूसरी झील का पानी अस्थिर है। बांध टूटा तो नीचे के इलाकों में फिर बड़ी बाढ़ आ सकती है।

पहली झील का बांध शुक्रवार को टूट चुका है। अगर दूसरी झील भी टूटी तो उसका पानी पहली झील में पहुंचकर दोनों का पानी एक साथ नीचे ला सकता है। कार्गेल ने रेस्क्यू टीमों को ऊंचे इलाकों में तैयार रहने की सलाह दी है।

दोनों झीलें नेपाल-चीन सीमा के पास हैं, जहां बुधवार को भीषण बाढ़ आई थी।

बाढ़ से नेपाल में 80 पुल और 40 किमी सड़कें टूटीं

बाढ़ ने नेपाल की नई सरकार की आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। देश की अर्थव्यवस्था विदेशी मदद, विदेशों में काम कर रहे नेपाली लोगों के भेजे पैसे और चीन-भारत के सामान पर निर्भर है।

राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के मुताबिक, बाढ़ से 80 पुल और करीब 40 किमी सड़कें खराब हुई हैं। प्रभावित इलाका चीन सीमा के पास है। ये सड़कें और पुल चीन से सामान लाने-भेजने के लिए जरूरी हैं। चीन नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

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देश

नेपाल से 21 तमिल तीर्थयात्री दिल्ली पहुंचे:तिब्बत में फिर झील फटी, नेपाल में गांव खाली कराए, बाढ़ में 552 की मौत

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काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बाढ़ से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री शुक्रवार को काठमांडू से दिल्ली पहुंच गए। इन्हें नेपाली सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाके से रेस्क्यू किया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में उनसे मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी।

इधर, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फटने के बाद नेपाल में भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे बसे गांव खाली कराए जा रहे हैं। नेपाली सेना ने लोगों और सुरक्षाकर्मियों को नदी किनारे से हटकर सुरक्षित जगह जाने को कहा है।

चीन ने तिब्बत में लेवल-4 अलर्ट जारी किया है और दोबारा बाढ़ के खतरे को देखते हुए राहत-बचाव अभियान रोक दिया है।

नेपाल और तिब्बत में बाढ़-भूस्खलन से अब तक 552 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।

चीन के CCTV मीडिया ने यह फुटेज जारी किया है। इसमें झील से पानी ओवरफ्लो होते दिख रहा है।

चीन के CCTV मीडिया ने यह फुटेज जारी किया है। इसमें झील से पानी ओवरफ्लो होते दिख रहा है।

ग्लेशियल झील का बांध टूटने के बाद नुवाकोट जिल में लोग सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं।

ग्लेशियल झील का बांध टूटने के बाद नुवाकोट जिल में लोग सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं।

नेपाल में

  • 547 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 977 लोग अब भी लापता हैं।
  • लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं।

तिब्बत में

  • 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 558 लोग अब भी लापता हैं।
  • लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

नेपाल में बाढ़ से जुड़ीं तस्वीरें

नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद मलबे और कीचड़ की नदी में तब्दील हुई खूबसूरत हरी-भरी घाटी।

नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद मलबे और कीचड़ की नदी में तब्दील हुई खूबसूरत हरी-भरी घाटी।

बाढ़ के पानी और मलबे में एक घर पूरी तरफ से घिर गया। उसके दोनों तरफ से पानी बह रहा है।

बाढ़ के पानी और मलबे में एक घर पूरी तरफ से घिर गया। उसके दोनों तरफ से पानी बह रहा है।

काठमांडु के त्रिभुवन हॉस्पिटल में मुर्दाघर के बाहर मृतकों की पहचान के लिए लगाई गई तस्वीरों को देखते हुए परिजन।

काठमांडु के त्रिभुवन हॉस्पिटल में मुर्दाघर के बाहर मृतकों की पहचान के लिए लगाई गई तस्वीरों को देखते हुए परिजन।

नेपाली सेना ने रसुवा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

नेपाली सेना ने रसुवा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में नेपाल-चीन सीमा का रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट। बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद पोस्ट पूरी तरह तबाह नजर आया। क्रेडिट: वैंटोर/हैंडआउट

बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में नेपाल-चीन सीमा का रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट। बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद पोस्ट पूरी तरह तबाह नजर आया।

नेपाल में रेस्क्यू का प्लान: हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट, गांव खाली कराए

नेपाल सरकार के मुताबिक, रेस्क्यू और राहत अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 नेपाली सेना और 1,845 आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं। सरकार के अनुसार, अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

नेपाली सेना के रेस्क्यू का 3-लेयर प्लान…

एयरलिफ्ट: हेलिकॉप्टरों के जरिए ऊंचे पहाड़ों और टनल में फंसे लोगों को निकालना।

इवैक्यूएशन: तटीय और निचले गांवों को खाली कराकर लोगों को सुरक्षित कैंपों में शिफ्ट करना।

फॉरेंसिक सर्च: खोजी कुत्तों और मलबे को हटाने वाली भारी मशीनों से शवों और मलबे को साफ करना।

मेडिकल सुविधा: घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।

जयशंकर ने नेपाल से लौटे तीर्थयात्रियों से मुलाकात की

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल में बाढ़ से सुरक्षित बचाए गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की आपबीती सुनकर वे भावुक हो गए।

जयशंकर ने रेस्क्यू अभियान के लिए नेपाली सेना और नेपाल सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने भारतीय दूतावास की भी सराहना की, जिसने तीर्थयात्रियों की सुरक्षित भारत वापसी में मदद की।

नेपाल बाढ़ में 320 भारतीय लापता

बाढ़ के बाद 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है या वे लापता हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे, लेकिन किसी दूसरे देश के नागरिक हैं।

जायसवाल के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से रेस्क्यू किए गए 21 भारतीय शुक्रवार को काठमांडू से दिल्ली पहुंच गए।

इससे पहले त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया था। वहीं, चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।

नेपाल बाढ़ में 537 विदेशी नागरिक अब भी लापता

नेपाल सरकार ने बाढ़ के बाद लापता 537 विदेशी नागरिकों की सूची जारी की है। लापता लोगों में 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 33 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।

नेपाल के 8 जिलों से 538 शव बरामद

नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद 8 जिलों से अब तक 538 शव बरामद किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चितवन में 221 शव मिले हैं। जिलेवार आंकड़े;

  • चितवन – 221 शव
  • नवलपरासी पूर्व – 134 शव
  • गोरखा – 46 शव (मानव अंगों समेत)
  • नुवाकोट – 37 शव
  • धादिंग – 33 शव
  • तनहूं – 28 शव
  • नवलपरासी पश्चिम – 27 शव
  • रसुवा – 12 शव

बाढ़ के बाद 121 विदेशियों का रेस्क्यू, इनमें भारत के 85 नागरिक

नेपाल पर्यटन बोर्ड के ताजा अपडेट के मुताबिक, भोटेकोशी बाढ़ के बाद अब तक 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।

इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, 9 दक्षिण कोरियाई, 2 अमेरिकी और 2 रूसी नागरिक शामिल हैं।

चीन बोला – नेपाल में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़

चीन ने शुक्रवार को कहा कि नेपाल में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने से बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई हो सकती है। इस बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के बड़े इलाके में तबाही मचाई।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों और सरकारी संस्थानों ने शुरुआती जांच की है। उनके मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटना इस आपदा की संभावित वजह हो सकती है।

बाढ़ की चेतावनी के बाद सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ रहे लोग

पानी का स्तर बढ़ने पर अधिकारियों ने फिर से बाढ़ की चेतावनी जारी की। इसके बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर जाते हुए।

पानी का स्तर बढ़ने पर अधिकारियों ने फिर से बाढ़ की चेतावनी जारी की। इसके बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर जाते हुए।

बाढ़ की चेतावनी जारी होने के बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर जाते हुए।

बाढ़ की चेतावनी जारी होने के बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर जाते हुए।

एक महिला जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह की ओर जाती हुई।

एक महिला जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह की ओर जाती हुई।

बाढ़ की चेतावनी के बाद धादिंग जिले में एक महिला जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह जाती हुई।

बाढ़ की चेतावनी के बाद धादिंग जिले में एक महिला जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह जाती हुई।

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