विदेश
US पायलट की चेतावनी: ईरान पर जमीनी हमला ‘खतरनाक प्लान’, ट्रंप को दी स्मार्ट स्ट्राइक की सलाह
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा बयान सामने आया है। रायन बोडेनहाइमर (Ryan Bodenheimer) जो पूर्व अमेरिकी फाइटर पायलट रह चुके हैं, ने ईरान पर जमीनी हमले (ground invasion) को “अच्छा प्लान नहीं” बताया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान जैसे पिछले युद्धों से साफ हो चुका है कि किसी देश पर कब्जा करने की कोशिश लंबे समय तक चलने वाला और भारी नुकसान देने वाला कदम होता है। उनके मुताबिक, ईरान जैसे बड़े और ताकतवर देश पर हमला करना और भी मुश्किल होगा।

बोडेनहाइमर ने बताया कि ईरान में करीब 2 लाख Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के सैनिक हैं, और अगर अमेरिका हमला करता है तो उसे 10 से 20 लाख तक सैनिक तैनात करने पड़ सकते हैं, जो व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को बड़े स्तर पर सेना भेजने के बजाय “हाई-टेक” रणनीति अपनानी चाहिए। इसमें स्पेशल फोर्स, सीमित हमले (surgical strikes) और तकनीकी ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि Strait of Hormuz को नियंत्रित करना ज्यादा प्रभावी रणनीति हो सकती है, क्योंकि यह दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है।बोडेनहाइमर ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के अंदर मौजूद विरोधी ताकतों को समर्थन देकर बदलाव ला सकता है, बजाय सीधे युद्ध में उतरने के। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि “युद्ध हमेशा बुरा होता है” और इसे जितना हो सके टालना चाहिए। उनके अनुसार, अगर संघर्ष हो भी, तो उसे कम से कम नुकसान के साथ और समझदारी से लड़ा जाना चाहिए।

विदेश
इजराइल का तेहरान पर बड़ा हमला: इजराइल ने उड़ाए ईरान के सैन्य ठिकाने, मिसाइल स्टोर और रिसर्च सेंटर बने निशाना !
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। इज़राइल रक्षा बल (Israel Defense Forces (IDF) ने दावा किया है कि उसने तेहरान (Tehran) में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। इन हमलों में खासतौर पर Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल स्टोरेज साइट्स को निशाना बनाया गया। इजराइली सेना के मुताबिक, इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य ताकत और उसके हथियार बनाने की क्षमता को कमजोर करना है। हमले उन ठिकानों पर भी किए गए जहां हथियारों की रिसर्च और डेवलपमेंट का काम चल रहा था।

इस बीच, Iran के दक्षिण-पश्चिमी Khuzestan प्रांत में स्थित कई पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर भी हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 5 लोग घायल हुए हैं और नुकसान काफी ज्यादा हो सकता है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि Mahshahr Special Petrochemical Zone को खाली करा लिया गया है, क्योंकि आगे और हमलों का खतरा बना हुआ है।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका के दो फाइटर जेट भी ईरानी हमले में गिराए जाने की खबर आई। इनमें से एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अभी भी लापता है। यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी से जारी है, जब Israel और United States ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद गंभीर होते जा रहे हैं और बड़े युद्ध का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

विदेश
अमेरिका NATO से अलग हो सकता है:ट्रम्प बोले- इसने जरूरत के वक्त मदद नहीं की, ये कागजी शेर, पुतिन भी यही मानते हैं
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे NATO से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने NATO को कागजी शेर बताया।
एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि वे पहले से ही NATO से ज्यादा प्रभावित नहीं थे और उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी यही मानते हैं।
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने साथियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई भी अमेरिका के साथ नहीं आया। उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अमेरिका ने मदद की थी, लेकिन अब वही समर्थन अमेरिका को नहीं मिल रहा।
यह बयान तब आया है जब NATO देशों ने ईरान जंग में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया। अमेरिका चाहता था कि NATO देश होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए अपने वॉरशिप भेजें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

जंग से मिडिल ईस्ट को 18 लाख करोड़ का नुकसान
यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है।
- रीजन की GDP 3.7% से 6% तक घट सकती है
- करीब 18 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है
- होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई
- तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई है
- 16 लाख से लेकर 36 लाख नौकरियों पर संकट
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

अमेरिका ने सोमवार को ईरान के इस्फहान में हवाई हमले किए।

लेबनान की राजधानी बेरुत में मंगलवार को इजराइली एयरस्ट्राइक में एक इमारत पूरी तरह तबाह हो गई।

बेरुत के दक्षिणी इलाके में मंगलवार को इजराइल के हवाई हमले के बाद उठता धुआं।
होर्मुज संकट पर ब्रिटेन की मेजबानी में 35 देशों की इमरजेंसी बैठक
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि इस सप्ताह उनका देश 35 देशों की एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक का मकसद होर्मुज को फिर से खोलने पर चर्चा करना है।
इस बैठक में दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और इसका मकसद इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते की सुरक्षा और भविष्य को लेकर समाधान निकालना है।
कतर जैसे देश ने भी इस मुद्दे पर चर्चा में दिलचस्पी दिखाई है। भारत की इस बैठक में भागीदारी अभी तय नहीं हुई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि भारत इसमें शामिल हो सकता है।
इसकी वजह यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते हैं।
इजराइल बोला- यह आखिरी युद्ध नहीं, देश को सर्तक रहना होगा
इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा है कि यह जरूरी नहीं है कि यह इजराइल का आखिरी युद्ध हो।
उन्होंने कहा कि दुश्मन अभी भी हमला कर सकते हैं, इसलिए भविष्य में भी खतरा बना रहेगा और देश को सतर्क रहना होगा।
इजराइल का दावा- हिजबुल्लाह का बड़ा कमांडर मारा गया
इजराइल की सेना ने दावा किया है कि उसने उग्रवादी संगठन के एक बड़े कमांडर यूसुफ इस्माइल हाशेम को मार दिया है।
यह हमला बेरूत में हुआ था, हालांकि हिजबुल्लाह की तरफ से अभी तक इस पर कोई बयान नहीं आया है।
ईरान की चेतावनी- होर्मुज खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं। अब 47 साल की मेहमाननवाजी खत्म हो चुकी है।
अजीजी ने कहा कि यह रास्ता सिर्फ उन देशों के लिए खुला रहेगा, जो ईरान के बनाए नए नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प ने “रेजीम चेंज” का सपना पूरा कर लिया है, लेकिन यह जमीन पर नहीं बल्कि समुद्र के नियमों में हुआ है।
ईरान ने 65 लोगों को किया गिरफ्तार, जासूसी का आरोप
ईरान की सुरक्षा एजेंसी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने 65 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे दुश्मन देशों के लिए काम कर रहे थे या आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे।
ईरान का कहना है कि हाल के महीनों में उसने कई लोगों को पकड़ा है, जो अमेरिका-इजराइल को जानकारी दे रहे थे और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रहे थे।
ट्रम्प बोले- ईरान से डील की जरूरत नहीं, उनका एटमी प्रोग्राम डैमेज
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है।
उन्होंने कहा- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरान से बाहर निकल जाएगा और इसके बाद तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं। इस युद्ध की वजह से थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन इससे अमेरिका ज्यादा सुरक्षित हुआ है क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। जो देश इस रास्ते से तेल ले जाते हैं, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के कई बड़े नेताओं को खत्म कर दिया है और वहां की स्थिति बदल दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद सरकार बदलना नहीं था, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

बिज़नस
अमेरिका में पेट्रोल की कीमत चार डॉलर प्रति गैलन के पार, 2022 के बाद सबसे अधिक
न्यूयॉर्क,एजेंसी। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 2022 के बाद पहली बार औसतन चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई है। वाहन कंपनियों के संघ ‘एएए’ के अनुसार, नियमित पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.02 डॉलर प्रति गैलन हो गई है जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में एक डॉलर से अधिक है।

इससे पहले रूस के यूक्रेन पर हमला करने के दौरान करीब चार वर्ष पहले अमेरिका में पेट्रोल इतना महंगा हुआ था। यह कीमत राष्ट्रीय औसत है जिसका अर्थ है कि कुछ राज्यों में लोग काफी समय से चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक का भुगतान कर रहे हैं। राज्यों के बीच कीमतें कर दरों में अंतर के कारण अलग-अलग होती है।
अमेरिका और इजराइन के 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी हुई है। इस संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुए हैं और पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन में कटौती भी की है जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। एएए के अनुसार, डीजल अब औसतन 5.45 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन पर बिक रहा है, जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 3.76 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन था। डीजल का इस्तेमाल कई मालढुलाई और डिलिवरी ट्रक में ईंधन के रूप में किया जाता है।

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