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छत्तीसगढ़

व्हीएचपी नेता रमेश मोदी का निधन

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82 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस, बुधवार को रायपुर में होगा अंतिम संस्कार

रायपुर (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ विश्व हिंदू परिषद के नेता रमेश मोदी का मुंबई में निधन हो गया है। रायपुर में व्हीएचपी के पंडरी स्थित कार्यालय की स्थापना में उनकी अहम भूमिका थी। मंगलवार को 82 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई की अस्पताल में अंतिम सांस ली। रमेश मोदी जी का पार्थिव देह मुंबई से रायपुर लाया जाएगा। 15 नवंबर को उनका अंतिम संस्कार देवेंद्र नगर मुक्तिधाम में हो सकता है। बड़े कपड़ा कारोबारी रमेश मोदी लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। मुंबई के अस्पताल में जब वे भर्ती थे तब रमेश बैस ने उनसे मुलाकात भी की थी। उनके निधन से राजनीतिक जगत के साथ ही व्यावसायिक जगत में भी शोक की लहर है।

राजनीति के साथ व्यापार जगत में बड़ा नाम

उन्होंने ना सिर्फ विश्व हिन्दू परिषद के रायपुर पंडरी स्थित कार्यालय की स्थापना में अहम भूमिका निभाई बल्कि व्हीएचपी को छत्तीसगढ़ में अहम मुकाम तक पहुंचाने में बड़ा किरदार निभाया था। उन्होंने लंबे समय तक व्हीएचपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली थी। जानकारी के अनुसार, रमेश मोदी को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दानवीर भामाशाह सम्मान से सम्मानित किया था। इसके अलावा वे चेंबर ऑफ कॉमर्स के भी के लंबे समय तक संरक्षक रहे थे। साथ ही थोक कपड़ा व्यापारी संघ पंडरी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके थे।

रायपुर को कपड़ा हब बनाने में बड़ा रोल

छत्तीसढ़ में रायपुर कपड़ा व्यापार का बड़ा हब है। इसके पीछे मोदी का अहम रोल माना जाता है। यही वजह है कि लंबे वक्त तक वो पंडरी कपड़ा व्यापारी संघ के प्रमुख रहे। मोदी को लेकर कहा जाता है कि व्यापार में जितना वक्त देते, उतना ही वक्त वो समाज सेवा को समय दिया करते थे। संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े वैचारिक कार्यक्रमों में उनका खास सहयोग होता था।

जब मोदी ने नहीं लिया भाजपा का टिकट

साल 2017 में रमेश मोदी की 75वीं सालगिरह पर रायपुर में बड़ा आयोजन किया गया था। व्यापारी भाजपा के नेता सभी इस कार्यक्रम में पहुंचे थे। तब मंच से डॉ रमन सिंह ने रमेश मोदी को लेकर किस्सा सुनाते हुए कहा था- बीजेपी की ओर से महापौर पद के लिए रमेश मोदी को टिकट की पेशकश किए जाने के बावजूद उन्होंने टिकट नहीं लिया और कलकत्ता चले गए। फिर नामांकन के आखिरी दिन ही किसी का फोन उठाया।

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े

रमेश मोदी छत्तीसगढ़ के इकलौते ऐसे शख्स हैं जो विश्व हिंदू परिषद की राष्ट्रीय टीम में शुरुआती दिनों में ही जगह बना पाए। रमेश मोदी ने बाबरी मस्जिद कांड, राम मंदिर आंदोलन के समय विश्व हिंदू परिषद जॉइन की थी। वो राम मंदिर आंदोलन को भरपूर सहयोग कर रहे थे। उनकी सक्रियता देख परिषद के नेताओं ने उन्हें अहम पदों पर जिम्मा दिया। मोदी जीवन के आखिर समय तक आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे। सभी कार्यक्रमों और अभियान में सक्रिय भी रहे। वनवासी कल्याण आश्रम में रहने वाली बच्चियों की मदद किया करते थे। साहित्य में उनकी रुचि रही, वो कहा करते थे साहित्य वो है जो सबका हित करे।

डॉक्टर बनना चाहते थे मोदी

रमेश मोदी मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे। छोटी उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया था। वो अक्सर एक किस्सा सुनाया करते कि पिता के निधन के बाद परिवार में आर्थिक समस्याएं भी आईं। हमारी प्रॉपर्टी बिकने वाली थी, अपने जमाने में मेरे पिता कई लोगों के फायनेंसर थे, मगर जब हमें जरूरत पड़ी तो किसी ने मदद नहीं की। मोदी बताते थे कि इसी वजह से मैंने मेडिकल की पढ़ाई के सपने को छोड़ा और व्यापार में जुट गया। अच्छा है कि उस जमाने में लोगों ने मेरी मदद नहीं की वर्ना आज जहां हूं न होता। मोदी को किताबें पढऩे का बेहद शौक था। वो कहते थे कि दिल्ली के एक लेखक गुरुदत्त की किताबों से उन्हें सकारात्मक ऊर्जा मिलती थी।

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कोरबा

चलो बचपन की ओर: 12 अप्रैल को महिलाओं के लिए खास कार्यक्रम- बचपन की टिकिट

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जीवन की आपाधापी में महिलाओं के पास स्वयं के लिए फूर्सत के पल नहीं, इसलिए महिलाओं के लिए खुशी के चार-पांच घंटे खास कार्यक्रम-सरोज पाण्डेय
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डेय के नेतृत्व में सखी-सहेली महिला समूह द्वारा 12 अप्रैल को अशोक वाटिका के सुरम्य वादियों में महिलाओं के लिए खास कार्यक्रम होने जा रहा है। अपराह्न 4.00 बजे से अशोक वाटिका में जिले की महिलाओं के लिए बचपन की टिकिट-एक अनोखा कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। यह पूर्ण रूप से गैर राजनीतिक और पूर्णत: सामाजिक कार्यक्रम है और मुख्य रूप से बचपन में खेले जाने वाले खेल होगा और 18 से 25 एवं 25 से ऊपर उम्र की महिलाओं के लिए ऐसी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जो हम बचपन में खेलते थे।

प्रेस से खास संवाद कार्यक्रम में सुश्री सरोज पाण्डेय ने बताया कि जीवन की आपाधापी में महिलाओं के पास स्वयं के लिए समय नहीं बचता और इस कार्यक्रम के जरिए हम महिलाओं को बचपन की यादों में ले जाने के लिए यह खास कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे हैं, ताकि मोबाईल से दूर कुछ घंटे सामूहिक रूप से महिलाएं अपने लिए जी सकें। यह विशुद्ध रूप से रचनात्मक और सामाजिक सरोकार से जुड़ा कार्यक्रम है और सभी महिलाएं इसमें सादर आमंत्रित हैं। प्रतियोगिता में ऐसे खेलों का आयोजन किया जा रहा है, जिसे हम बचपन में खेलते थे।
सुश्री सरोज पाण्डेय ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं या टीम को सरप्राईज गिफ्ट दिया जाएगा और हमें आशा है कि यह महिलाओं को पसंद भी आएगा। 5 सांत्वना पुरूस्कार भी रखे गए हैं। महिलाओं का पंजीयन कल से प्रारंभ हो जाएगा।

शहर की महिलाओं को उनकी भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ पल निकालकर अपने बचपन को फिर से जीने का अवसर देने के उद्देश्य से एक अनोखे कार्यक्रम “बचपन की टिकट” का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में होटल गणेश इन में आयोजित प्रेस वार्ता में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय, जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी, महापौर संजू देवी राजपूत, पार्षद नरेंद्र देवांगन, वरिष्ठ भाजपा नेता विकास अग्रवाल, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, जिला मीडिया प्रभारी अर्जुन गुप्ता तथा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रीति स्वर्णकार उपस्थित रहीं।

भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाओं को मिलेगा बचपन जीने का मौका – सरोज पांडेय

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय ने कहा कि सखी सहेली महिला समूह द्वारा आयोजित होने वाला यह विशेष कार्यक्रम 12 अप्रैल को शाम 4:00 बजे से 8:00 बजे तक अशोक वाटिका, कोरबा में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन खास तौर पर उन महिलाओं के लिए है, जो अपनी व्यस्त दिनचर्या में खुद को और अपने बचपन की खुशियों को कहीं पीछे छोड़ चुकी हैं। आज के तनावपूर्ण जीवन में महिलाएं अपने लिए समय नहीं निकाल पातीं और अधिकांश समय मोबाइल व जिम्मेदारियों में व्यतीत हो जाता है। ऐसे में “बचपन का टिकट” एक ऐसा मंच बनेगा, जहां महिलाएं अपने बचपन के खेल, मस्ती और यादों को फिर से जी सकेंगी।

यह कार्यक्रम पूरी तरह सामाजिक और निशुल्क रहेगा, जिसमें किसी भी प्रकार की राजनीतिक भागीदारी नहीं होगी। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि मंच केवल पुरस्कार वितरण के लिए रहेगा और सभी खेलों को खेल भावना से खेलने का आग्रह किया गया है। कार्यक्रम में आकर्षक पुरस्कारों के साथ-साथ पांच प्रकार के सांत्वना पुरस्कार भी रखे गए हैं।
बताया गया कि इस तरह का आयोजन इससे पहले दुर्ग में किया जा चुका है, जहां करीब 5000 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। इसी सफलता को देखते हुए अब कोरबा की महिलाओं को भी इस अनोखे अनुभव से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य शहर की अधिक से अधिक महिलाओं तक यह संदेश पहुंचाना और उन्हें इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित करना रहा। “बचपन का टिकट” — सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि खुद से फिर से जुड़ने का अवसर हैं।

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कोरबा

अंचल के लब्धख्याति मातनहेलिया परिवार द्वारा हनुमान प्रकाट्य दिवस के उपलक्ष्य में विशाल भंडारा 02 अप्रैल को

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कोरबा। मातनहेलिया परिवार के द्वारा हनुमान प्रकाट्य दिवस के उपलक्ष्य में विशाल भंडारा का आयोजन 02 अप्रैल गुरुवार दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक हनुमान मंदिर प्रांगण, स्व. छोटेलाल जी अग्रवाल बताती बगीचा ग्राम बताती कोरकोमा कोरबा (छ.ग.) में किया गया हैं।

जिसमे राजबीर प्रसाद अग्रवाल (आर.बी ट्रेडर्स), राजकुमार अग्रवाल (सर्वमंगला कस्ट्रक्शन कंपनी) और भगवानदास अग्रवाल (छत्तीसगढ़ सेल्स कॉर्पोरेशन) के द्वारा अंचलवासियो सहित आसपास के ग्रामो से आयोजित विशाल भंडारे में आकर प्रसाद ग्रहण करने आमंत्रित किया गया हैं।
कोरबा जिले का लब्धख्याति मातनहेलिया परिवार हमेशा सामाजिक, धार्मिक, मानवता की सेवा कार्यो में सदा अग्रणी पंक्ति में खड़ा रहता हैं। कोई भी जरूरतमंद आदमी कभी निराश नहीं हुआ। उनके द्वारा अनवरत कोई न कोई सामाजिक कल्याण हेतु कार्य किये जाते रहे हैं। स्व. श्री छोटेलाल अग्रवाल के सुपुत्र राजबीर अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, भगवानदास अग्रवाल किसी भी सामाजिक, धार्मिक, मानवीय कार्यो में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

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कोरबा

वित्तीय वर्ष 25-26 : उत्पादन, प्रेषण और ओबीआर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाली सीआईएल की एकमात्र अनुषंगी कंपनी बनी एसईसीएल

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176.2 मिलियन टन उत्पादन, 178.6 मिलियन टन प्रेषण एवं 364.3 एमसीयूएम ओवरबर्डन निष्कासन के साथ तीनों प्रमुख मानकों में कंपनी ने दर्ज की वृद्धि

बिलासपुर/कोरबा। एसईसीएल ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की एकमात्र ऐसी सहायक कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जिसने कोयला उत्पादन, प्रेषण (आफटेक) तथा ओवरबर्डन निष्कासन (ओबीआर)—तीनों प्रमुख मानकों में एक साथ सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है।

उत्पादन, प्रेषण एवं ओबीआर में मजबूत प्रदर्शन

वित्तीय वर्ष 2025–26 में एसईसीएल का कोयला उत्पादन 176.2 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.26 प्रतिशत (8.8 मिलियन टन) अधिक है।
कोयला प्रेषण 178.6 मिलियन टन रहा, जिसमें 4.6 प्रतिशत (7.9 मिलियन टन) की वृद्धि दर्ज की गई।
रेल माध्यम से प्रेषण में 16 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि एफएमसी के माध्यम से प्रेषण में 28 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
364.3 मिलियन क्यूबिक मीटर ओवरबर्डन निष्कासन के साथ एसईसीएल ने अब तक का सर्वाधिक ओबीआर दर्ज किया।
भूमि अधिग्रहण में ऐतिहासिक प्रगति करते हुए 358 हेक्टेयर भूमि अर्जित की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 867 प्रतिशत वृद्धि है।

पर्यावरण एवं सतत विकास
एसईसीएल ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। वर्ष के दौरान 13.96 लाख पौधरोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया तथा मियावाकी पद्धति के माध्यम से सघन वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया गया।
43.78 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित कर लगभग 41,200 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई गई।
इसके अतिरिक्त 408 लाख किलोलीटर खदान जल का उपयोग कर 3800 से अधिक हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुनिश्चित की गई।

क्षमता विस्तार एवं नई परियोजनाएं
पर्यावरण स्वीकृतियों के माध्यम से 2.16 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त क्षमता सुनिश्चित की गई, जबकि भावी विस्तार हेतु स्वीकृत संदर्भ शर्तों से 39.02 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वृद्धि का मार्ग प्रशस्त हुआ।
नई परियोजनाओं में दुर्गापुर खुली खदान (10 मिलियन टन प्रति वर्ष) तथा अमृतधारा भूमिगत परियोजना को स्वीकृति प्राप्त हुई।

कोयला गुणवत्ता एवं पारदर्शिता
कोयला गुणवत्ता (ग्रेड पुष्टिकरण) में सुधार करते हुए इसे 68 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया।
डिजिटल प्रणाली ‘डिजीकोल’ के माध्यम से रियल टाइम निगरानी एवं पारदर्शिता को सुदृढ़ किया गया जिसे सीवीसी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

रोजगार एवं सामाजिक समावेशन
एसईसीएल द्वारा 511 आश्रितों को रोजगार प्रदान किया गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है तथा पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त 754 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों को भी रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा 42 माइनिंग सरदारों की नियुक्ति की गई।

पारदर्शी क्रय एवं प्रशासनिक उत्कृष्टता
सरकारी ई-बाजार (जेम) पोर्टल के माध्यम से रेकॉर्ड 25,799 करोड़ रुपये की खरीद की गई।
एसईसीएल ने विशेष अभियान 5.0 में लगातार तीसरी बार शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

तकनीकी नवाचार एवं आधारभूत संरचना
एसईसीएल देश की पहली कोयला सार्वजनिक उपक्रम बनी जिसने पेस्ट फिल तकनीक लागू की।
औसतन 53.2 रेक प्रतिदिन कोयला प्रेषण के साथ परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया।
रेल कॉरिडोर परियोजनाओं के माध्यम से कोयला निकासी तंत्र को मजबूत किया गया।

विविधीकरण की दिशा में प्रगति
कंपनी ने कोयला गैसीकरण, उच्च दक्षता तापीय विद्युत, कोयला धुलाई, महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, दुर्लभ तत्वों के निष्कर्षण तथा जल आधारित ऊर्जा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में प्रगति की है, जो भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप रणनीतिक पहल को दर्शाता है।

कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व
वित्तीय वर्ष 2025–26 में 365.39 करोड़ रुपये के सामाजिक दायित्व कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण एवं आजीविका के क्षेत्र में व्यापक प्रभाव डाल रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण
एसईसीएल ने कोयला उद्योग में पहली बार पूर्णतः महिला संचालित औषधालय एवं महिला संचालित केंद्रीय भंडार इकाई स्थापित कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

“वित्तीय वर्ष 2025–26 में साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की यह उपलब्धि हमारे प्रत्येक कर्मचारी के समर्पण, कठोर परिश्रम और टीम भावना का परिणाम है। अनेक परिचालन एवं भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद, हमारे कर्मियों ने निरंतर प्रयास करते हुए उत्पादन, प्रेषण एवं ओवरबर्डन निष्कासन तीनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की है।
यह सफलता केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। मैं एसईसीएल परिवार के सभी सदस्यों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए हार्दिक बधाई देता हूं और विश्वास व्यक्त करता हूं कि हम इसी टीम भावना और समर्पण के साथ भविष्य में भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।”

— हरीश दुहन, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, एसईसीएल

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