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छत्तीसगढ़

कौन हैं काशीनाथ…जिनके घर भोजन करेंगे भागवत:कांग्रेस की प्रताड़ना से पिता ने छोड़ी सरकारी नौकरी, 3 पीढ़ियों से गोरे परिवार RSS के लिए समर्पित

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बिलासपुर,एजेंसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से दशकों से जुड़े बिलासपुर का गोरे परिवार संगठन के लिए निष्ठा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस परिवार ने नौकरी छोड़ने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद संघ का साथ नहीं छोड़ा। छत्तीसगढ़ में संघ को मजबूत नींव दी।संघ प्रमुख मोहन भागवत परिवार के घर पहुंचकर भोजन करेंगे।

काशीनाथ गोरे के पिता यशवंत नरहर गोरे, बड़े पिता और चाचा तीनों संघ से जुड़े थे। सक्रिय भूमिका निभाते रहे। पिता रेलवे की नौकरी में थे, लेकिन जब कांग्रेस सरकार के दबाव और प्रताड़ना के चलते नौकरी खतरे में आई, तो उन्होंने रेलवे की स्थायी नौकरी छोड़ दी। परिवार का गुजारा किराना दुकान से हुआ, लेकिन संघ का काम जारी रहा।

कैमरे पर बात करने से परिवार करता रहा परहेज

दैनिक भास्कर की टीम काशीनाथ गोरे के परिवार से मिलने उनके घर पहुंची। इस दौरान संघ के लिए परिवार के सदस्यों के संघर्षों को जाना। हालांकि काशीनाथ गोरे का परिवा कैमरे के सामने बात करने परहेज करता रहा। उनका कहना था कि संघ के सदस्य अपने काम का बखान और प्रचार नहीं करते।

काशीनाथ गोरे बचपन से ही RSS के सक्रिय सदस्य रहे। अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य बनने तक, बिलासपुर संभाग संघ की दृष्टि से हमेशा महत्वपूर्ण रहा। बिलासपुर नगर और विभाग संगठनात्मक रूप से संघ के टॉप स्थान पर रहा।

ये काशीनाथ गोरे के बेटा और बेटी हैं। इनका कहना है कि संघ के कामों का प्रचार-प्रसार नहीं करते।

ये काशीनाथ गोरे के बेटा और बेटी हैं। इनका कहना है कि संघ के कामों का प्रचार-प्रसार नहीं करते।

काशीनाथ गोरे की चाची लीला बाई, जो बाल भारती स्कूल चलाती थीं।

काशीनाथ गोरे की चाची लीला बाई, जो बाल भारती स्कूल चलाती थीं।

यह फोटो काशीनाथ गोरे की है, जो घर की दीवार पर टंगी हुई है।

यह फोटो काशीनाथ गोरे की है, जो घर की दीवार पर टंगी हुई है।

सरकारी बंदिशों के बावजूद संघ सक्रिय रहा

लीला बाई गोरे बताती हैं कि आपातकाल के दौरान सरकारी बंदिशों के बावजूद संघ सक्रिय रहा। पदाधिकारी और स्वयंसेवक लगातार संगठन से जुड़े कार्य करते रहे। संघ परिवार से जुड़े परिवारों की हर संभव मदद की गई। इसमें काशीनाथ गोरे की अहम भूमिका रही।

लीला बाई गोरे बताती हैं कि छत्तीसगढ़ में संघ को मजबूत करने में उनका बड़ा योगदान रहा। पिता और परिवार से प्रेरणा लेकर उन्होंने आजीवन संघ परिवार के लिए कार्य किया। संघ परिवार से जुड़े सदस्यों और परिवार के सदस्यों की लगातार मदद भी की।

भाजपा नेताओं के लिए वे आदर्श थे

परिवार ने दैनिक भास्कर से बताया कि काशीनाथ गोरे बिलासपुर के टिकरापारा निवासी थे। छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं के आदर्श थे। स्वभाव से मृदुभाषी और सबको साथ लेकर चलने वाले थे। संघ के अनुशासन और जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाना उनकी खासियत रही।

परिवार ने बताया कि सेवा प्रमुख, प्रांत व्यवस्था प्रमुख, विभाग संचालक समेत कई दायित्व निभाए। समाज के हर वर्ग के प्रति समान भाव रखते थे। लगातार संगठन और समाज को साथ लेकर आगे बढ़े। भाजपा नेताओं के लिए वे आदर्श थे। उनकी कोई भी बात नहीं टाली जाती थी।

काशीनाथ गोरे की कुछ पुरानी तस्वीरें हैं, जिनमें वह RSS को मजबूत करने के लिए कई प्रोग्राम कर रहे हैं।

काशीनाथ गोरे की कुछ पुरानी तस्वीरें हैं, जिनमें वह RSS को मजबूत करने के लिए कई प्रोग्राम कर रहे हैं।

काशीनाथ के पिता को क्यों छोड़ना पड़ी नौकरी ?

लीला बाई गोरे बताती हैं कि काशीनाथ गोरे का परिवार भी संघ से जुड़ा रहा। पिता यशवंत नरहर गोरे बचपन से ही संघ कार्यकर्ता थे। रेलवे में कार्यरत थे, पर संघ कार्य में बाधा आने लगी। कांग्रेस नेताओं की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। आखिरकार रेलवे की नौकरी छोड़ दी।

परिवार का भरण-पोषण किराना दुकान से किया. लेकिन संघ सेवा कभी नहीं छोड़ी। कठिनाइयों के बावजूद परिवार ने कभी संगठन से दूरी नहीं बनाई। इस संघर्ष और त्याग ने ही गोरे परिवार को संघ के लिए ‘आदर्श परिवार’ का दर्जा दिलाया।

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छत्तीसगढ़

बिलासपुर जिला कोर्ट को फिर बम से उड़ाने की धमकी:डॉग स्क्वॉड-बम निरोधक दस्ते ने ली तलाशी, 3 महीने में तीसरी बार आया ई-मेल

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बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर में जिला कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ई-मेल के जरिए भेजी गई इस धमकी के बाद पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई। डॉग स्क्वॉयड और बम निरोधक दस्ते के साथ टीम ने कोर्ट परिसर की तलाशी ली। लेकिन, कहीं कुछ नहीं मिला। पिछले 3 महीने के भीतर यह तीसरा बार कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

दरअसल, शुक्रवार को जिला कोर्ट की कार्रवाई चल रही थी। कोर्ट रूम में जज, वकीलों के साथ ही पक्षकार भी मौजूद थे। तभी पता चला कि ई-मेल के जरिए एक बार फिर कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इसकी जानकारी पुलिस अफसरों को दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस का अमला अलर्ट मोड पर आ गया। आनन-फानन में कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई। जिसके बाद कोर्ट रूम समेत आसपास के इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

बिलासपुर जिला कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

बिलासपुर जिला कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है।

धमकी की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया।

धमकी की जानकारी मिलते ही कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया।

कोर्ट रूम समेत आसपास के इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

कोर्ट रूम समेत आसपास के इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

3 महीने में तीसरी बार मिली धमकी

यह कोई पहली घटना नहीं है, जब कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इससे पहले हाईकोर्ट और जिला कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है। पिछले तीन महीने के भीतर यह तीसरा मौका है, जब इस तरह का धमकी भरा मेल मिला है।

हालांकि, हर बार जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन बार-बार ऐसी घटनाएं प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी, बढ़ाई गई सुरक्षा

धमकी की सूचना मिलते ही न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट के अंदर और बाहर सभी कमरों, गलियारों और परिसर के कोने-कोने की बारीकी से तलाशी ली गई। पुलिस ने एहतियातन प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ा दी है। आने-जाने वाले लोगों और संदिग्ध वस्तुओं की सख्ती से जांच की जा रही है।

रोजाना हजारों लोगों की रहती है मौजूदगी

न्यायालय परिसर की संवेदनशीलता को देखते हुए यह मामला और गंभीर हो जाता है। यहां हर दिन कई न्यायाधीश, करीब एक हजार वकील और हजारों की संख्या में पक्षकार पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की धमकियां न केवल न्यायिक कार्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम लोगों और कर्मचारियों के मन में असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती हैं।

अब तक नहीं पकड़ में आए आरोपी

इस तरह लगातार धमकी भरे मेल सामने आने के बावजूद पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और ईमेल की जांच कर रही है। लेकिन, अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है। जिला न्यायालय को यह तीसरी बार धमकी मिली है। इससे पहले दो बार हाईकोर्ट को भी इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं।

इतना ही नहीं, बिलासपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के कई जिलों और कई राज्यों के न्यायालयों को भी ऐसी धमकियां लगातार मिल रही हैं। लेकिन, अब तक आरोपियों को नहीं पकड़ा जा सका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

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छत्तीसगढ़

31 मार्च तक टैक्स नहीं चुकाया तो सील होगी संपत्ति:छुट्टी के दिन भी खुलेंगे जोन ऑफिस, 17% पेनल्टी से बचने की अपील

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रायपुर,एजेंसी। रायपुर नगर निगम बकाया टैक्स वसूली के लिए बड़े बकायादारों से सीधे संपर्क कर रही है। मोबाइल कॉल और मैसेज के जरिए उन्हें बकाया राशि तुरंत जमा करने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही साफ चेतावनी दी जा रही है कि भुगतान नहीं करने पर कुर्की और सीलबंदी की कार्रवाई की जाएगी।

निगम के सभी जोन कार्यालयों के राजस्व काउंटर 28 मार्च (शनिवार), 29 मार्च (रविवार) और 31 मार्च (महावीर जयंती) को भी खुले रहेंगे। इन दिनों आम दिनों की तरह ही टैक्स जमा किया जा सकेगा।

‘मोर रायपुर’ ऐप से भी ऑनलाइन भुगतान

इसके अलावा ‘मोर रायपुर’ ऐप और निगम की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी लगातार उपलब्ध है। निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे घर बैठे ऑनलाइन भुगतान कर इस सुविधा का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं और कार्रवाई से बचें, निगम का फोकस ऐसे बकायादारों पर है, जो लंबे समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं।

निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि, 31 मार्च 2026 तक टैक्स जमा नहीं करने पर 17 प्रतिशत अधिभार के साथ वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इससे बचने के लिए सभी संपत्तिकरदाताओं से समय पर भुगतान करने की अपील की गई है।

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छत्तीसगढ़

रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी लापता, खोजबीन पर मिली बाइक:8 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, बेटे से संपत्ति विवाद, परिवार ने दी आंदोलन की चेतावनी

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मुंगेली,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी दामोदर सिंह राजपूत पिछले 8 दिनों से लापता हैं। पुलिस को अब तक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी का कोई सुराग नहीं मिला है। परिवार वाले किसी अनहोनी की आशंका से चिंतित हैं और अब सामाजिक स्तर पर उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। यह मामला लोरमी थाना क्षेत्र का है।

झाफल निवासी 62 वर्षीय दामोदर सिंह राजपूत 21 मार्च की सुबह अचानक लापता हो गए थे। वे शिक्षा विभाग में वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद से कुछ महीने पहले ही रिटायर हुए थे और अपनी पत्नी के साथ मुंगेली में रहते थे।

नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान, दामोदर सिंह 21 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे अपने गांव झाफल जाने के लिए मोटरसाइकिल से निकले थे। उन्होंने सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर अपने बड़े भाई बलबीर सिंह से बात की और जल्द ही गांव पहुंचने की जानकारी दी थी।

मनोहरपुर के पास लावारिस मिली बाइक

हालांकि, जब देर शाम तक दामोदर घर नहीं पहुंचे, तो परिवार वालों ने उनके फोन पर कॉल किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद बताने लगा। देर रात तक उनका कहीं कोई पता नहीं चला। अगले दिन उनकी खोजबीन करने पर उनकी बाइक मनोहरपुर के पास लावारिस हालत में पड़ी मिली।

मोटरसाइकिल में एक बैग भी लटका हुआ था, जिसे दामोदर सिंह अपने साथ लेकर घर से निकले थे। पुलिस ने मोटरसाइकिल जब्त कर थाने ले आई।

बेटे से संपत्ति को लेकर चल रहा था विवाद

परिवार वालों ने मामले की रिपोर्ट लालपुर थाना में दर्ज कराई है। दामोदर के भाइयों के अनुसार, लापता दामोदर सिंह का अपने इकलौते बेटे संजय सिंह से संपत्ति को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इस विवाद को लेकर पहले भी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

21 मार्च से लापता हुए दामोदर का 8 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस की साइबर टीम दामोदर के मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल्स खंगाल रही है। परिवार वाले अब इस मामले पर उग्र आंदोलन करने की बात कह रहे हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच करने का भरोसा दिला रही है।

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