लखनऊ,एजेंसी। यूपी विधानमंडल के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। प्रश्न काल के दौरान सीएम योगी ने कफ सिरप मामले में सपा के आरोपों पर कहा- प्रश्न क्या है, मुद्दे क्या उठाए जा रहे हैं। पूरा अध्ययन करके आना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कोडीन के मुद्दे को उठाया है, लेकिन मैं आपकी इस मजबूरी को समझता हूं। एक कहावत है- चोर की दाढ़ी में तिनका। उन्होंने नाम लिए बिना कहा-
देश के अंदर दो नमूने हैं, एक दिल्ली में और एक लखनऊ में बैठते हैं। जब देश में कोई चर्चा होती है तो वो देश छोड़कर चले जाते हैं। मुझे लगता है कि यही आपके बउआ के साथ भी होता है। वह फिर इंग्लैंड सैर सपाटे पर चले जाएंगे और आप यहां चिल्लाते रहेंगे।
योगी के बयान के 40 मिनट बाद ही अखिलेश ने पलटवार किया। X पर लिखा-
आत्म-स्वीकृति… किसी को उम्मीद नहीं थी कि दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई यहां तक पहुंच जाएगी। संवैधानिक पदों पर बैठे लोग मर्यादा की सीमा न लांघें। भाजपाई अपनी पार्टी के अंदर की खींचातानी को चौराहे पर न लाएं।
इससे पहले योगी ने कहा- प्रदेश में कोडीन कफ सिरप से कोई मौत नहीं हुई है। 2016 में इसके सबसे बड़े होल सेलर को सपा ने ही लाइसेंस दिया था। पढ़ाई-लिखाई से आपका कोई वास्ता है नहीं, इस कारण आप इस तरह की बात करते हैं। अखिलेश के सिरप माफियाओं पर बुलडोजर चलाने के चैलेंज पर कहा कि चिंता मत कीजिए। समय आने पर बुलडोजर एक्शन भी होगा। उस समय चिल्लाना नहीं।
कोडिन कफ सिरप मामले पर योगी ने कहा- विभोर राणा को लाइसेंस समाजवादी पार्टी ने दिया था। आलोक सिपाही (इस मामले में एक आरोपी) की अखिलेश के साथ कुछ गिफ्ट देते हुए तस्वीरें वायरल हुई थीं। हमने NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की है। हमारी कार्रवाई अभी भी जारी है। हमने अब तक 77 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
योगी ने विपक्ष से कहा
मैं आपका दर्द समझता हूं। क्योंकि जब सरकार की कार्रवाई अपने आखिरी स्टेज पर पहुंचेगी, तो आप में से कई लोग ‘फातिहा’ पढ़ने जाएंगे। हम आपको ऐसी हालत में भी नहीं छोड़ेंगे कि आप ‘फातिहा’ पढ़ सकें। हम ऐसी ही कार्रवाई करेंगे।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय खड़े हुए। उन्होंने कहा-
सीएम सदन के सम्मानित नेता हैं, लेकिन उनकी वाणी देखिए। आपने कहा कि दो नमूने हैं- एक अखिलेश और दूसरा राहुल गांधी।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि सीएम ने किसी का नाम नहीं लिया है, आप क्यों खुद पर ले रहे हैं। यह सुनते ही सपा विधायक हंगामा करने लगे। समझाने पर भी नहीं माने तो सतीश महाना ने कहा कि एक आदमी नारा लगा रहा था। आप गलत बयानी कर रहे हैं। आप कह रहे हैं कि सैकड़ों मौतें हुई तो नाम बताइए। इसके बाद सपा ने वॉकआउट कर लिया।
विधानसभा में कफ सिरप कांड पर चर्चा की मांग को लेकर सपा विधायक वेल में आ गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने हंगामा कर रहे सपा विधायकों को अपनी सीट पर जाने को कहा। नहीं माने तो कार्रवाई की चेतावनी दी।
समाजवादी पार्टी के विधायकों ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की सीढ़ियों पर कफ सिरप मामले समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
सपा विधायक कार के कटआउट लेकर विधानसभा पहुंचे। कोडीन सिरप मामले में माफियाओं की सरकार से साठगांठ का आरोप लगाया।
कफ सिरप पर चर्चा की मांग पर वेल में आए सपा विधायक
इससे पहले विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सपा विधायकों ने कोडीन सिरप कांड पर चर्चा की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया। मंजूरी नहीं मिली तो विधायक भड़क गए और वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा- कोडीन सिरप से यूपी में एक भी मौत नहीं हुई है। विपक्ष माहौल खराब कर रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा- सरकार के पक्ष से यदि मैं संतुष्ट नहीं होता हूं तो जरूर चर्चा कराऊंगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा- अगर आप लोग अपनी सीट पर वापस नहीं गए तो मुझे कार्रवाई करनी पड़ेगी। उन्होंने सपा के विधायकों से वेल से अपनी सीट पर जाने का आग्रह किया। इसके बाद विधायक अपनी-अपनी सीट पर लौट गए।
विधानसभा में रू.24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश
इसके अलावा महिला एवं बाल विकास के लिए रू.535 करोड़, यूपीनेडा (सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा) के लिए रू.500 करोड़, मेडिकल एजुकेशन के लिए रू.423.80 करोड़, गन्ना एवं चीनी मिल क्षेत्र के लिए रू.400 करोड़ की बजटीय व्यवस्था की गई है।
योगी सरकार ने शीतकालीन सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रू.24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट पेश करते हुए कहा कि यह अनुपूरक बजट प्रदेश में विकास के लिए लाया गया है।
इसमें औद्योगिक विकास के लिए रू.4,874 करोड़, पावर सेक्टर के लिए रू.4,521 करोड़, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए रू.3,500 करोड़, नगर विकास के लिए रू.1,758.56 करोड़, तकनीकी शिक्षा के लिए रू.639.96 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है।
लखनऊ, एजेंसी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) जयप्रकाश चतुर्वेदी का देर रात निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन भाजपा के वरिष्ट नेता कलराज मिश्र ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कहा कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, कुशल संगठनकर्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक, पूर्व संगठन मंत्री एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य आदरणीय जयप्रकाश चतुर्वेदी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका निधन मेरे लिए एक अपूरणीय व्यक्तिगत क्षति है।
चतुर्वेदी का संगठन के प्रति समर्पण, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और राष्ट्रसेवा का उनका संपूर्ण जीवन सदैव स्मरणीय एवं प्रेरणादायी रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य शुभचिंतकों को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इसी कड़ी उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त कर विनम्र श्रद्धांजलि दी।
आप को बता दें कि जयप्रकाश चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कोन क्षेत्र के ग्राम चांची, पोस्ट चाची कलां के निवासी थे। वे राजवंशी देवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक भी थे। लंबे समय तक उन्होंने सामाजिक, शैक्षिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर भाजपा नेताओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। जयप्रकाश चतुर्वेदी के निधन को क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है।
कीव, एजेंसी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर क्षेत्र एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। यूक्रेन के प्रमुख ओडेसा बंदरगाह पर एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिक भी सवार थे। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि दो भारतीय सुरक्षित हैं, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए है। एमवी एजीएन रैग्नर (MV AGN Ragnar) ओडेसा बंदरगाह पर हमले की चपेट में आ गया। ओडेसा काला सागर क्षेत्र में यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह कई बार हमलों का निशाना बन चुका है।
यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अनुसार, घटना के समय जहाज पर चार भारतीय नागरिक मौजूद थे। अब तक मिली जानकारी के अनुसार दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। दो अन्य भारतीयों के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। उनकी तलाश के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय दूतावास ने जारी बयान में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। दूतावास संबंधित यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि लापता भारतीयों का जल्द पता लगाया जा सके और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। जहाज पर कुल कितने चालक दल के सदस्य थे, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों ने अभी तक चारों भारतीयों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। साथ ही जहाज पर उनकी जिम्मेदारियों और पदों के बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगातार जोखिम भरी बनी हुई है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाज मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
चंडीगढ़, एजेंसी। रू. 657 करोड़ के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार हरियाणा के पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल ने सीबीआई की विशेष अदालत में दायर अपनी नियमित जमानत याचिका में सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में न कभी किसी से रिश्वत मांगी और न ही कोई रिश्वत स्वीकार की। उनकी भूमिका केवल अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति देने तक सीमित थी।
पंकज अग्रवाल को सीबीआई ने 22 जून को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ दर्ज रू. 657 करोड़ के बैंक घोटाले के मामले में नियमित जमानत याचिका पर पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत 30 जुलाई को सुनवाई करेगी।
जमानत याचिका में अग्रवाल ने कहा है कि जांच एजेंसी अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है, जिससे यह साबित हो कि उनका कथित बैंक धोखाधड़ी या किसी आपराधिक षड्यंत्र से कोई संबंध था। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद का आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने संबंधी प्रस्ताव विभागीय अधिकारियों की संस्तुति पर स्वीकृत किया गया था और संबंधित खाता खोलने के प्रपत्रों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
सीबीआई ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि पंकज अग्रवाल ने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बैंक खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाने में सहायता की तथा उन्हें लगभग रू. 60.54 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी थी।
हालांकि, अग्रवाल ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बैंक खाते खोलने के समय उन्हें किसी प्रकार की अनियमितता या बाद में खातों से कथित धोखाधड़ी के जरिए धन निकासी की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक स्तर पर तय की गई रू. 50 करोड़ की सीमा बाद में हटा दी गई थी, जिससे यह आरोप भी कमजोर पड़ जाता है कि प्रशासनिक निर्णय स्वयं अवैध था।
जमानत अर्जी में यह भी तर्क दिया गया है कि सीबीआई ने एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय को आपराधिक षड्यंत्र का रूप देने का प्रयास किया है। याचिका में कहा गया है कि केवल इस आधार पर किसी अधिकारी को आपराधिक साजिश का आरोपी नहीं ठहराया जा सकता कि उसके प्रशासनिक निर्णय का बाद में किसी तीसरे पक्ष ने कथित रूप से अनुचित लाभ उठा लिया।
अब इस मामले में सभी की निगाहें 30 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी।