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छत्तीसगढ़

किर्गिस्तान में छत्तीसगढ़ के 100 स्टूडेंट फंसे:हॉस्टल से बाहर निकलना मना, शाम को बंद करनी पड़ती है लाइट्स; पैरेंट्स बोले-बच्चों को वापस लाएं

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जांजगीर-चांपा/ बिलासपुर, एजेंसी। किर्गिस्तान में छत्तीसगढ़ के करीब 100 से ज्यादा मेडिकल स्टूडेंट्स फंसे हुए हैं। राजधानी बिश्केक से शुरू हुई हिंसा कई अन्य राज्यों में भी फैली है। ऐसे में स्टूडेंट्स को उनके हॉस्टल से निकलने पर रोक लगा दी गई है। छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। वहां की सरकार ने हॉस्टल के बाहर पुलिस के जवान तैनात कर दिए हैं, और स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन क्लासेज चल रही है।

दूसरी ओर स्टूडेंट्स के साथ मारपीट का वीडियो वायरल होने और वहां फैली हिंसा के चलते छत्तीसगढ़ में पैरेंट्स चिंता बढ़ गई है। वह अपने बच्चों को वापस लाने के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार उनके बच्चों की सुरक्षित वापसी का इंतजाम करें।

पहले जानिए वहां फंसे स्टूडेंट्स क्या कह रहे…

जांजगीर-चांपा की रहने वाली शिवानी तांबोली बिश्बेक की IHMS यूनिवर्सिटी में MBBS की स्टूडेंट हैं। उन्होंने फोन पर बताया कि, 13 मई को हुए विवाद के बाद लोकल छात्रों ने बाहरी छात्रों के हॉस्टल में हमला कर दिया। इससे कॉलेज जाना बंद हो गया है। चारों तरफ दहशत का माहौल है। फिलहाल मैं ऑनलाइन शिक्षा ले रही हूं।

शिवानी ने बताया कि, इस घटना के बाद हमें हॉस्टल से बाहर जाने से मना कर दिया गया। लोकल मैनेजमेंट हेल्प कर रहा है। वह भोजन हॉस्टल में ही भिजवा रहे हैं। अभी माहौल कुछ ठीक है, पर छात्रों को अब भी बाहर निकलने नहीं दे रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से सभी को घर भेजने का इंतजाम किया जा रहा है।

वहीं बिलासपुर के मस्तूरी निवासी विजय मंडल किर्गिस्तान के ओश में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। बिश्बेक में फैली हिंसा की आंच वहां तक भी पहुंची हैं। विजय ने बताया कि 18 मई की शाम हॉस्टल के बाहर छात्रों की भीड़ जुट गई। वो प्रदर्शन और हंगामा कर रहे थे। इसके चलते हम लोग घबरा गए। हालांकि बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। तब से हॉस्टल के बाहर पुलिस तैनात है।

पैरेंट्स बोले- हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे लौट आएं

शिवानी की मां सुषमा तंबोली रोते हुए कहती हैं कि सरकार और प्रशासन से हमारी गुजारिश है कि बच्चों को वापस लाएं। हालात यह है कि वहां बच्चे हॉस्टल का पर्दा नहीं हटा सकते हैं। पर्दे के बाहर झांक नहीं सकते हैं। शाम होते ही कमरों की लाइट बंद करनी पड़ती है। बेटी कॉल कर ढांढस बंधाती है कि सब ठीक है, लेकिन हम डरे हुए हैं।

विजय मंडल के पिता सुशांत मंडल का कहना है कि दूर देश में जाकर पढ़ने वाले इन छात्रों को परेशानी नहीं होना चाहिए। भारत सरकार के दूतावास और छत्तीसगढ़ सरकार को इन छात्रों की खबर लेनी चाहिए और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास करना चाहिए। विवाद और तनाव के बाद कॉलेज बंद है और ऑनलाइन कक्षाएं चल रही है।

पैरेंट्स कह रहे हैं कि हॉस्टल के बाहर पुलिस की तैनाती से फिलहाल स्थिति काबू में है, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने ऑनलाइन क्लास शुरू करने के साथ-साथ स्टूडेंट्स को वापस भेजना शुरू कर दिया है। इसका पूरा खर्चा भी हमें ही उठाना पड़ रहा है। फ्लाइट टिकट के लिए उन्हें 30 हजार रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे आर्थिक परेशानियां आ रही हैं।

अफसर बोले- पैरेंट्स से बात की, कहा- स्थिति ठीक

वहीं दूसरी ओर अफसरों का कहना है कि किर्गिस्तान में हालात ठीक है। जांजगीर-चांपा के एडीएम सीपी वैद्य बताते हैं कि तीन-चार दिन पहले किर्गिस्तान में विवाद और मारपीट की सूचना मिली थी। पालकों ने मुलाकात कर बच्चों को लाने की अपील की थी। इसके बाद मेरी पैरेंट्स से बातचीत हुई। तब उन्होंने बताया कि वहां स्थिति शांत है। बच्चे कह रहे हैं कि एग्जाम के बाद वापस आएंगे। अभी वहां ऐसी कंडीशन नहीं है कि वहां किसी तरह का खतरा हो।

5 दिन से लॉकडाउन में हैं भारतीय स्टूडेंट्स

हिंसा के बीच यूनिवर्सिटी और कॉलेज प्रबंधन ऑनलाइन क्लासेज ले रहा है, लेकिन इससे भी स्टूडेंट्स को राहत नहीं मिली है। 18 मई से सभी भारतीय स्टूडेंट्स अपने हॉस्टल या फ्लैट में कैद हैं। उन्हें कमरे से भी बाहर निकलने की इजाजत नहीं है। स्टूडेंट्स खुद भी खौफ की वजह से बाहर नहीं जा रहे हैं।

अब जानिए किर्गिस्तान में क्या हुआ…

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 17 मई की रात भारतीय और पाकिस्तानी छात्रों से मारपीट की गई। स्थानीय छात्रों उन हॉस्टल्स में घुस गए जहां भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी स्टूडेंट्स रह रहे थे। किर्गिस्तान की मीडिया के मुताबिक हिंसा में 29 छात्र घायल हुए। इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने छात्रों से हॉस्टल से बाहर निकलने को मना कर दिया। साथ ही छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूतावास ने 24×7 इमरजेंसी नंबर 0555710041 जारी किया है।

मीडिया रिपोर्टे्स के मुताबिक, बिश्केक में 13 मई को मिस्र और किर्गिज छात्रों के बीच झगड़ा हुआ था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद स्थानीय किर्गिज छात्रों ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेशी छात्रों को निशाने पर ले लिया। दरअसल, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में छात्र किर्गिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं।

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कोरबा

15 जून को छोटे खातेदारों को रोजगार ,पुनर्वास एवं भू विस्थापितों की समस्याओं को लेकर जन आक्रोश रैली के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी किसान सभा,

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भू विस्थापितों की रैली में शामिल होंगे लोकसभा सांसद अमराराम

आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर के साथ गांव-गांव माइक प्रचार ,बैठक के साथ घर-घर पर्चे वितरण कर भू विस्थापितों को किया जा रहा एकजुट

आंदोलन में कोरबा के चारों परियोजना के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी भू विस्थापित होंगे शामिल

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण,पूर्व में अधिग्रहित जमीन की वापसी,पट्टा,आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाने,पेयजल की व्यवस्था करने,बसावट एवं खनन प्रभावित गांवों की अन्य समस्याओं को लेकर 15 जून को जन आक्रोश रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की है किसान सभा द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भू विस्थापितों का जन सैलाब बनकर कोरबा की सड़कों पर दिखने वाला है कई भू विस्थापित संगठन इस घेराव में शामिल हो रहे है। जिला प्रशासन से भी कई बार हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की गई लेकिन प्रशासन ने समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया इस लिए विस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव गांव में बैठक कर पर्चे वितरण के साथ भू विस्थापितों को एकजुट भी किया जा रहा है और किसान सभा ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर,पर्चे के साथ गांव गांव माइक प्रचार कर भू विस्थापितों को संगठित करने का काम कर रही है। कलेक्ट्रेट घेराव और जन आक्रोश रैली को लेकर भू विस्थापित संगठनों के साथ आम जनता का व्यापक जन समर्थन मिल रहा है।

जन आक्रोश रैली और कलेक्ट्रेट घेराव से पहले घंटाघर में सभा आयोजित होगी जिसे प्रमुख रूप से माकपा के लोकसभा सांसद और किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड अमराराम,किसान सभा के राष्ट्रीय नेता अवधेश कुमार, आदिवासी एकता महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और सचिव सुरेंद्र लाल सिंह एवं बाल सिंह सहित किसान सभा के प्रदेश के नेता और भू विस्थापित संगठनों के नेता संबोधित करेंगे।

जनआक्रोश रैली और कोरबा कलेक्टर घेराव लोकसभा के सांसद अमराराम के नेतृत्व में होगा

कलेक्ट्रेट घेराव को सफल बनाने के लिए गांव गांव में नुक्कड़ सभा,घर घर पर्चे वितरण एवं भू विस्थापितों को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है आंदोलन में कोरबा जिले के कोरबा,दीपका,गेवरा,कुसमुंडा के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी प्रभावित शामिल होंगे।

किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा,गेवरा,दीपका,कोरबा सभी क्षेत्रों में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भू विस्थापितों के लंबित रोजगार,जमीन वापसी,पट्टा,बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभुत समस्याओं के निराकार के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है जिससे भू विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है। 15 जून को कोरबा की सड़को पर भू विस्थापितों। का आक्रोश जन सैलाब के रूप में दिखने वाला है। प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था अब सभी क्षेत्रों के भू विस्थापित अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे है। किसानों की जमीन का अधिग्रहण जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है और उद्योगों को जमीन नियमों के पालन के तहत सौंपा जाता है लेकिन उद्योग जमीन तो ले लेती है लेकिन विस्थापित जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार और पुनर्वास के लिए भटकते हैं जिला प्रशासन को जमीन अधिग्रण के साथ विस्थापित किसानों के अधिकार को दिलाने के लिए भी सामने आना होगा।

किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक,पवन यादव यादव,अमरजीत कंवर आदि ने भू-विस्थापितों की समस्याओं के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 1685 दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है और समस्याओं की ओर कई बार प्रशासन और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू-विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष रेशम यादव, सचिव दामोदर श्याम ने कहा कि जिनकी जमीन एसईसीएल ने ली है, उन्हें बिना किसी शर्त के रोजगार दिया जाये क्योंकि जमीन ही उनके जीने का एकमात्र सहारा थी जबरन नए नए नियम बनाना बंद किया जाए । छोटे बड़े खातेदार के नाम पर किसानों को बांटने का काम बंद किया जाए। 15 जून को चारों क्षेत्र से पूरे परिवार सहित हजारों भू-विस्थापित कलेक्ट्रेट घेराव में शामिल होंगे।
कलेक्ट्रेट घेराव में कई भू विस्थापित संगठन शामिल होंगे।


प्रमुख मांगे´

1) छोटे खातेदार के नाम पर भू विस्थापितों के रोके गए रोजगार में तत्काल रोजगार दो ।एसईसीएल में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और की जा रही है हर खाते में स्थायी रोजगार प्रदान किया जाये।

2) बांगों बांध के जलाशय के ठेका प्रणाली समाप्त किया जाए।और विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुवारा समितियों को मछली पकड़ने का अधिकार दिया जाए।

3) वन टाइम सेटलमेंट कर रोजगार के पुराने लंबित मामलो का जल्द से जल्द निराकरण किया जाये | अर्जन के बाद जन्म वाले प्रकरण और एक खाता एक रोजगार नियम के विरुद्ध अलग अलग खाता का सयोंजन के कारण रोजगार से वंचितों को रोजगार प्रदान किया जाये |

4) बसावट के नाम पर 3 लाख और 15 लाख रुपए के नाम से भेदभाव बंद किया जाए और सभी क्षेत्रों के भू विस्थापितों को एक समान बसावट की 15 लाख राशि दी जाए।

5) शासन की योजनाओं से प्राप्त पट्टों एवं शासकीय और वन भूमि पर बने मकानों का मुआवजा एवं सौ प्रतिशत सोलिशियम और बसाहट की पात्रता का लाभ दिया जाये ।

6) पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस करायी जाये | अधिग्रहण के बाद जिन जमीनों पर 40 सालों में भी कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और जिन जमीनों पर किसान ही पीढ़ियों से काबिज हैं उन्हें किसानों के नाम वापस किया जाए।

7)अर्जित गाँव से विस्थापन से पूर्व उनके पुनर्वास स्थल की सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था किया जाये |

8) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।

9) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।

10) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।

11) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।

12) पूर्व में विस्थापित ग्रामों के भू विस्थापित जिन्हें बसावट नहीं दिया गया है उन्हें बसावट प्रदान किया जाए।

13) डंपिंग की मिट्टी को वापस खोदे गए खदान में भरा जाए इस डंपिंग के मिट्टी का प्रयोग दूसरे कार्यों में ना किया जाए।

14) एसईसीएल कुसमुंडा द्वारा गेवरा का अधिग्रहण 2018 में हो चुका है लेकिन अभी तक वहां पर किसानों को मुआवजा,रोजगार आदि की सुविधा नहीं दी गई है उन्हें तत्काल रोजगार मुआवजा दिया जाए नहीं तो पूर्व में जारी अधिग्रहण रद्द किया जाए।

15) खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था किया जाए।
16) आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए।

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कोरबा

जिला पंचायत कोरबा की सामान्य सभा का हुआ आयोजन:जनप्रतिनिधियों ने जनहित के मुद्दे उठाए

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बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा

कोरबा। जिला पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में शुक्रवार को जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ.पवन कुमार सिंह ने की। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग सहित जिला पंचायत सदस्यगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सामान्य सभा की बैठक में शिक्षा, सहकारिता, उद्योग विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से संबंधित कार्यों एवं प्रगति की समीक्षा की गई। जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न विकास कार्यों तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के सुझाव दिए।

बैठक के दौरान जिला पंचायत सदस्यों ने कृषि क्षेत्र से जुड़े विषयों पर विशेष चर्चा करते हुए लघु एवं सीमांत किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने तथा आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए जिले में खाद, उर्वरकों के पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

जिला स्तरीय अधिकारियों ने बैठक में अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं, उनकी प्रगति तथा हितग्राहियों को मिल रहे लाभों की जानकारी प्रस्तुत की। अध्यक्ष डॉ.पवन कुमार सिंह ने विभागीय अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता मुकेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया, श्रीमती शांति मरावी, श्रीमती अनंत सुष्मिता कमलेश, श्रीमती सावित्री अजय कंवर, श्रीमती सुषमा रवि रजक, विनोद कुमार यादव (अधिवक्ता), श्रीमती माया रूपेश कंवर, कौशल नेटी, विद्वान सिंह मरकाम, उपसंचालक पंचायत मिथलेश किसान, जिला पंचायत के लेखाधिकारी राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती अमिता साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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कोरबा

12 साल का कार्यकाल पूरा, भाजपा महिला मोर्चा ने सरकार की उपलब्धियां बताई

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कोरबा। भाजपा महिला मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 4399 दिनों के कार्यकाल व केन्द्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर उपलब्धियों को साझा किया। भाषण, पेटिंग व रंगोली प्रतियोगिताएं भी हुईं। जिसमें प्रतिभागियों ने कला व विचारों के जरिए पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं व उपलब्धियां लोगों तक पहुंचाई।

राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का संकल्प दोहराया। भाजपा जिला कार्यालय पंडित दीनदयाल कुंज टीपी नगर कोरबा में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य वक्ता महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री संतोषी दीवान और अध्यक्षता महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष प्रीति स्वर्णकार ने की। वक्ताओं ने कहा पिछले 12 वर्षों में विकास, सुशासन, महिला सशक्तिकरण, गरीब कल्याण, वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नए आयाम बने हैं। योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा है। देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रतिभागियों को महापौर संजू देवी राजपूत ने पुरस्कृत किया।

इस मौके पर भाजपा जिला महामंत्री संजय शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजय पांडेय, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मीना शर्मा, ज्योति वर्मा, रुक्मणी नायर, अर्जुन गुप्ता, नीरज ठाकुर, संजय राठौर, वैशाली रत्नपारखी, महिला मोर्चा जिला महामंत्री अनुसुईया राठौर, स्वाति कश्यप मौजूद रहीं। समापन विकसित भारत के संकल्प को साकार करने और जनसेवा के लिए समर्पित भाव से काम करने के आह्वान के साथ हुआ।

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