छत्तीसगढ़
बिलासपुर में अवैध रूप से संचालित 12 क्रशर सील
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2 years agoon
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Divya Akash4 कोल डिपो को थमाया नोटिस, प्रशासनिक टीम ने 34 वाहनों पर की कार्रवाई

बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर जिले में क्रशर में ब्लास्टिंग से लोग दहशत में हैं। ऐसे में कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर प्रशासन ने अवैध रूप से संचालित और 8 क्रशर को सील कर दिया है। वहीं, 4 कोल डिपो को नोटिस भेजा गया है। इससे पहले भी 4 क्रशर सील किए गए थे। इसके साथ ही खुले में खनिज परिवहन करते 17 वाहन पकड़े गए हैं। दरअसल, शनिवार को मस्तूरी तहसील में ग्राम मस्तूरी, मोहतरा और जयरामनगर में 7 निम्न श्रेणी चूनापत्थर खदान में स्थापित क्रशरों के संचालक दौलत राम विधानी, कौशल सिंह, संजय अग्रवाल, अरूण जायसवाल, सुरईया बानो, सांई स्टोन क्रशर प्रो. कपिल खनुजा और जय नहरिया बाबा क्रशर प्रो. दीपक अग्रवाल की क्रशर सील किया गया है। इसके अलावा बिल्हा तहसील के ग्राम हिरी स्थित डोलोमाइट के अस्थाई भण्डारण में स्थापित क्रशर संचालक बिलासपुर माईनिंग इंडिया प्रो. नरेश कुमार अग्रवाल का भी क्रशर सील किया गया है। ये सभी आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
पर्यावरण शर्तों का पालन नहीं करने पर 5 को नोटिस
बिल्हा तहसील के ग्राम धौराभांटा और हिरी में स्वीकृत 4 कोयला अस्थायी भण्डारण अनुज्ञप्तिधारी खालसा कोल ट्रेडिंग कंपनी, राधास्वामी कोल कंपनी, जेआरआर मिनरल्स प्रा. लिमि., मेसर्स रायल एनर्जी और 1 डोलोमाइट अस्थायी भण्डारण अनुज्ञप्तिधारी गुप्ता स्टोन माईन्स ने पर्यावरण शर्तों का पालन नहीं किया। वहीं, भू-राजस्व जमा नहीं करने के कारण पर्यावरण और राजस्व विभाग ने नोटिस थमाया है।
बिना तारपोलिंग ढके परिवहन करने वाले 17 वाहनों पर कार्रवाई
कच्चे माल, उत्पाद, कोल, गिट्टी, फ्लाईएश और स्लैग का परिवहन बिना तारपोलिंग से ढक़े परिवहन करने पर पर्यावरण विभाग, राजस्व, खनिज, परिवहन, पुलिस विभागों के कर्मचारियों ने पेन्ड्रीडीह बाईपास से कोनी और मस्तूरी बाईपास पर 70 ट्रकों की जांच की। इस दौरान 17 ट्रकों ने बिना तारपोलिंग और ग्रीननेट के परिवहन करते पाए। जिससे 7 ट्रकों को परिवहन विभाग, 8 ट्रकों को कोनी थाना और 2 ट्रकों को चकरभाटा थाने में जब्ती बनाकर अग्रिम कार्रवाई के लिए सौंप दिया गया है।
बिना रायल्टी परिवहन पर 17 मामले दर्ज
केन्द्रीय खनिज उडऩदस्ता दल ने मस्तूरी, लाल खदान, मंगला, कोनी, सेंदरी, लोफन्दी, कछार और रतनपुर क्षेत्रों का निरीक्षण किया। जिसमें निम्नश्रेणी चूनापत्थर के 6 हाईवा, खनिज रेत के 7 हाईवा, ईट परिवहन करते 3 माजदा और 1 ट्रेक्टर जब्त किया है। बिना विधि सम्मत अभिवहन पास के खनिज परिवहन करने पर अवैध खनिज परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया है।
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छत्तीसगढ़
भारतमाला मुआवजा घोटाला…फरार तहसीलदार-नायब तहसीलदार अरेस्ट:भूमाफिया-पटवारी और अधिकारियों के साथ मिलकर तैयार किए फर्जी डॉक्यूमेंट, किया 43 करोड़ का स्कैम
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3 minutes agoon
February 11, 2026By
Divya Akashरायपुर,एजेंसी। रायपुर जिले के अभनपुर में हुए भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा घोटाले में फरार चल रहे 2 आरोपियों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में शशिकांत कुर्रे (तत्कालीन तहसीलदार, अभनपुर) और लखेश्वर प्रसाद किरण (तत्कालीन नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा) शामिल हैं। इन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच के अनुसार, रायपुर-विशाखापट्नम और दुर्ग-बायपास भारतमाला सड़क निर्माण परियोजना के दौरान पद का दुरुपयोग करते हुए आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि, उन्होंने अपने अधीनस्थ पटवारी, राजस्व निरीक्षक, भूमाफिया और अन्य लोगों के साथ मिलकर कूटरचित राजस्व अभिलेख तैयार कराए।
इन दस्तावेजों के आधार पर प्रभावित भू-स्वामियों को वास्तविक मुआवजा राशि से कई गुना ज्यादा भुगतान कराया गया। जिससे शासन को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज
जानकारी के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे निरस्त कर दिया गया था। इससे पहले स्पेशल कोर्ट से इनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट और उद्घोषणा जारी की थी। विशेष न्यायालय रायपुर में आरोपियों की संपत्ति कुर्की की कार्रवाई के लिए भी प्रकरण विचाराधीन है।
कैसे हुआ घोटाला ?
भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।
इस केस में कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था।
शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है।
जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए
राजस्व विभाग के मुताबिक, मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया।
मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया है।
12 बंडलों में 8000 पन्नों का चालान पेश
इस मामले में EOW ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में 12 बंडलों में 8000 पन्नों का चालान पेश किया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 43 करोड़ के भूमि अधिग्रहण घोटाले में 10 लोगों को आरोपी बनाया है। इन लोगों ने कथित तौर पर जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया।

भारतमाला परियोजना घोटाला मामले के आरोपी।

EOW के वकील के अनुसार जमीन दलाल हरमीत सिंह के अकाउंट में करोड़ों रुपए ट्रांसफर हुए हैं।
EOW ने हरमीत सिंह खनूजा, उमा तिवारी, केदार तिवारी, विजय जैन, कुंदन बघेल, भोजराज साहू, खेमराज कोसले, पुन्नूराम देशलहरे, गोपाल वर्मा, नरेंद्र नायक के खिलाफ पेश चालान किया है। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।
EOW ने तकनीकी दस्तावेज, मोबाइल चैट्स, बैंक ट्रांजेक्शन और कई गवाहों के बयान को चालान का हिस्सा बनाया है। EOW अब अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच संदिग्ध लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर घोटाले के प्रमाण मिले हैं।
EOW के वकील सौरभ पांडे के मुताबिक 3 तरीके से पूरा फर्जीवाड़ा किया गया। वहीं जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा को 23 करोड़ मिले। जिन्हें ज्यादा मुआवजा मिला उनके अकाउंट से हरमीत को पैसे ट्रांसफर हुए हैं।
क्या है भारत माला परियोजना ?
भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है, जिसके तहत करीब 26 हजार किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। यह कॉरिडोर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ेंगे। देश के अधिकांश फ्रेट ट्रैफिक को इन्हीं मार्गों से ले जाने की योजना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी परियोजना का अहम हिस्सा है।

कोरबा
SECL’s ‘DigiCOAL’ Showcased as a Model for Transparent Governance at Central Vigilance Commission’s National Workshop
Published
30 minutes agoon
February 11, 2026By
Divya AkashBilaspur/Korba. At the National Workshop on “Digital Initiatives for Increasing Transparency in Governance” organised by the Central Vigilance Commission on 11 February 2026 at the SCOPE Convention Centre, New Delhi, South Eastern Coalfields Limited (SECL) presented its digital transformation initiative, DigiCOAL, as a model digital practice enhancing transparency, efficiency, and accountability in public sector operations.

Representing SECL, Chief Vigilance Officer Shri Himanshu Jain delivered a comprehensive presentation highlighting how DigiCOAL has strengthened digital surveillance and data-driven management systems across critical mining operations. He emphasized that the initiative has significantly enhanced operational transparency and institutional accountability through integrated digital interventions.
Strengthening Operations Through Digital Monitoring
The presentation detailed several key technological initiatives under DigiCOAL:
- HEMM Fleet Monitoring System: Real-time tracking of heavy earth moving machinery such as shovels, dumpers, and dozers through sensor-based systems. The system monitors equipment location, operating hours, and fuel consumption, enabling automatic detection of abnormal fuel drops, excessive idle time, and route deviations.
- Video Analytics & Connected Worker System: These tools have reinforced safety management, operational control, and emergency response mechanisms, ensuring quicker and more effective interventions.
- Drone-Based Surveys: Drones are being deployed for identifying encroachments, monitoring haul roads and mine slopes, and assessing drainage systems during the monsoon, thereby improving accuracy and preventive oversight.
- Data-Driven Mine Planning & Optimised Drilling-Blasting: Scientific and data-backed planning has improved precision and efficiency in the production process.
- Integrated Digital Ecosystem: Initiatives such as digital land records, online training platforms, spare parts management systems, and a digital war room have created a unified, tamper-proof digital ecosystem across operations.
Live Webcast at SECL Headquarters
The workshop proceedings were collectively viewed through a live webcast at SECL Headquarters in Bilaspur. CMD SECL Shri Harish Duhan participated in the session via video conferencing. He was joined by Director (Technical–Operations) Shri N. Franklin Jayakumar, Director (Personnel) Shri Biranchi Das, Director (Finance) Shri D. Sunil Kumar, Director (Technical–Projects & Planning) Shri Ramesh Chandra Mohapatra, along with General Managers, Departmental Heads, officers, and employees from Headquarters and all operational areas.
National Recognition for SECL’s Digital Transformation
The presentation of DigiCOAL at a national forum marks significant recognition of SECL’s digital transformation journey. This achievement not only underscores SECL’s leadership in the coal sector but also demonstrates how technology-driven transparency can responsibly and efficiently support the nation’s growing energy needs.

कोरबा
केन्द्रीय सतर्कता आयोग के राष्ट्रीय कार्यशाला में SECL की ‘डिजीकोल’ पहल बनी पारदर्शी सुशासन का मॉडल
Published
35 minutes agoon
February 11, 2026By
Divya Akashबिलासपुर/कोरबा। केन्द्रीय सतर्कता आयोग द्वारा 11 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में “डिजिटल इनिशिएटिव्स फॉर इंक्रीजिंग ट्रांसपेरेंसी इन गवर्नेंस” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पहल ‘डिजीकोल (DigiCOAL)’ को सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने वाली एक आदर्श डिजिटल पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यशाला में SECL की ओर से मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) हिमांशु जैन ने विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि डिजीकोल पहल के माध्यम से खनन कार्यों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डिजिटल निगरानी और डेटा आधारित प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ रूप से लागू किया गया है, जिससे संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

डिजिटल निगरानी से मजबूत हुआ संचालन तंत्र
प्रस्तुति के दौरान विभिन्न तकनीकी पहलों की जानकारी दी गई—
• HEMM फ्लीट मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से शॉवेल, डंपर एवं डोजर जैसे भारी खनन उपकरणों की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा रही है। सेंसर आधारित प्रणाली से उपकरणों की लोकेशन, ऑपरेटिंग ऑवर्स और ईंधन खपत की निगरानी होती है। ईंधन में असामान्य गिरावट, अनावश्यक निष्क्रिय समय (Idle Time) तथा निर्धारित मार्ग से विचलन की स्वतः पहचान संभव हो पाई है।
• वीडियो एनालिटिक्स एवं कनेक्टेड वर्कर सिस्टम के जरिए सुरक्षा प्रबंधन, परिचालन नियंत्रण तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
• ड्रोन आधारित सर्वेक्षण से अतिक्रमण की पहचान, हॉल रोड एवं ढलानों की निगरानी तथा मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था के आकलन में सटीकता आई है।
• डेटा-ड्रिवन माइन प्लानिंग एवं अनुकूलित ड्रिलिंग-ब्लास्टिंग प्रणाली ने उत्पादन प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक एवं सटीक बनाया है।
• इसके साथ ही डिजिटल भूमि अभिलेख, ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म, स्पेयर प्रबंधन प्रणाली एवं डिजिटल वॉर रूम जैसी पहलों ने एक एकीकृत एवं छेड़छाड़-रोधी (टैम्पर-प्रूफ) डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया है।
मुख्यालय में हुआ लाइव वेबकास्ट
इस अवसर पर SECL मुख्यालय, बिलासपुर में कार्यशाला के वेबकास्ट का सामूहिक अवलोकन किया गया। CMD SECL हरीश दुहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुति में सहभागिता की। उनके साथ निदेशक (तकनीकी-संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (कार्मिक) बिरांची दास, निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार, निदेशक (तकनीकी-परियोजना एवं योजना) रमेश चंद्र मोहापात्रा सहित मुख्यालय एवं सभी क्षेत्रों के महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
राष्ट्रीय मंच पर डिजीकोल की प्रस्तुति SECL की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को मिली महत्वपूर्ण मान्यता है। यह उपलब्धि न केवल कोयला क्षेत्र में SECL की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता को सुदृढ़ करते हुए राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति किस प्रकार जिम्मेदारी और दक्षता के साथ की जा सकती है।


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