छत्तीसगढ़
उद्योगपतियों को 253 एकड़ जमीन 5 लाख लीज पर दी:विधानसभा में नारेबाजी, हंगामा, शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बालोद में हुए जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा उठाया। उन्होंने स्कूल शिक्षामंत्री से सवाल पूछा कि आयोजन के लिए टेंडर से पहले काम कैसे शुरू हुआ और 4 दिन के अंदर काम कैसे पूरा हो गया।
जवाब में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शायरी पढ़ी और कहा कि नेशनल का काम अलग है और हमारा काम अलग है। वहीं, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण पर सरकार से जवाब मांगा गया। अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर विपक्ष ने वॉकआउट किया।
इसके साथ ही उद्योगों को कम दर पर जमीन आवंटन के मुद्दे पर सदन में विपक्ष ने हंगामा किया। खल्लारी विधायक द्वारकाधीश यादव ने उद्योग मंत्री से सवाल किया कि उद्योगपतियों को 253 एकड़ जमीन महज 4 लाख 82 हजार 302 प्रति हेक्टेयर की दर पर 99 साल के लिए दिया गया है। यह किस नियम के तहत आवंटित किए गए हैं।
लखनलाल देवांगन ने जवाब दिया कि राज्य सरकार ने नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सौर विद्युत परियोजना लगाई जा सकती है। इस जवाब पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।

शिक्षा विभागों से जुड़े सवाल का मंत्री गजेन्द्र यादव ने जवाब दिया।

वहीं, 140 आत्मसमर्पित नक्सली भी आज विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे हैं। इनमें 54 महिला, 86 पुरुष पूर्व नक्सली शामिल है।

1. जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा
- विधायक राघवेन्द्र सिंह ने बालोद में हुए जंबूरी में अनियमितता की शिकायतों पर कार्रवाई का मुद्दा उठाया
- राघवेन्द्र सिंह – स्कूल शिक्षामंत्री भारत स्काउट गाइड के पदेन अध्यक्ष हैं, इसके लिए नियमों में क्या संशोधन किया गया और कब किया गया।
- गजेन्द्र यादव – स्काउट गाइड को लेकर यह सवाल दूसरी बार आया है। जवाब देने से पहले शायरी कही
वफा जानते जब तुम, तो मेरी वफा समझा पाता प्रेम में कितना समर्पण था मेरे, यह तुझे मैं बता पाता बार-बार बेगुनाही की अपनी, कितना भरोसा दिलाऊं ऐ हमदम रूठकर बैठ जाते हो हर बार, कैसे मनाऊं ऐ हमदम जानते हो तुम बेदाग हैं हम, तुम्हारी इस महफिल में फिर भी इतने सवालात, ज़हन में क्यों आते हैं हमदम
- गजेन्द्र यादव – छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद पहले शिक्षामंत्री सत्यनारायण शर्मा थे। मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया कि स्काउट गाइड एक स्वतंत्र संस्था है और इसका चुनाव होना चाहिए।
- सत्यनारायण शर्मा के अनुमोदन के बाद पहली बार चुनाव हुआ और वे निर्वाचित अध्यक्ष बने। आयुक्त के रूप में तरुण चटर्जी नियुक्त हुए। इसके बाद डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी यह प्रक्रिया जारी रही।
- बाद में जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने, तब प्रस्ताव पारित किया गया कि चुनाव के बजाय स्कूल शिक्षामंत्री पदेन अध्यक्ष होंगे और मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त व्यक्ति राज्य मुख्य आयुक्त बनाया जाएगा। इसमें भारत स्काउट गाइड ने अलग से कंडिका जोड़ी।
- राघवेन्द्र सिंह – 13 दिसंबर 2025 को आपको मनोनीत किया गया। 10 दिसंबर को पहला टेंडर निकला था। उससे पहले वह कौन सी समिति थी और उसके अध्यक्ष कौन थे, जिसके अनुसार जंबूरी आयोजन तय किया गया।
- गजेन्द्र यादव – छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन की बैठक हुई थी। इसमें राष्ट्रीय मुख्यालय के कार्यकारी अध्यक्ष नया रायपुर और बालोद के दोनों स्थलों का निरीक्षण करने आए थे। उन्होंने बालोद का चयन किया। मेरे अध्यक्ष बनने से पहले ही यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। टेंडर मेरे कहने पर नहीं हुआ, बल्कि राज्य कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया गया।
- राघवेन्द्र सिंह – 10 दिसंबर को निकला पहला टेंडर निरस्त कर नया टेंडर किया गया, जिसे 4 जनवरी 2026 को खोला जाना था। लेकिन टेंडर खुलने से पहले ही काम शुरू हो गया और टेंडर खुलने के चार दिन के भीतर ही सारे काम पूरे हो गए। यह कैसे संभव है।
- MLA सुशांत शुक्ला – वैसे ही संभव है, जैसे बोरे-बासी दिवस पर भेंट-मुलाकात में होता है।
- राघवेन्द्र सिंह – आप मुद्दे को डायवर्ट मत कीजिए। यह बोरे-बासी का सवाल नहीं है। मेरा सीधा सवाल है कि टेंडर खुलने से पहले काम शुरू हुआ। क्या इस पर विधानसभा की समिति से जांच कराई जाएगी।
- गजेन्द्र यादव – नेशनल का काम अलग था और हमारा काम अलग। उनका काम पहले पूरा हो गया था। हमारा काम 10 तारीख के बाद का था। जांच वहीं होती है, जहां कोई घोटाला हुआ हो।
- चरणदास महंत – पहले भी जब यह सवाल आया था, तब भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला था। आज भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है। मंत्री गुमराह कर रहे हैं, इसलिए हम बहिर्गमन करते हैं।

विपक्ष ने आज सदन में कई मुद्दे उठाए।
2. MLA सुनील सोनी ने उठाया युक्तियुक्तकरण का मुद्दा
- सुनील सोनी – स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद जो भवन खाली हुए हैं, उनका आवश्यकतानुसार उपयोग किए जाने की बात उत्तर में कही गई है। जहां-जहां स्कूल खाली हुए हैं, उनका क्या उपयोग किया गया है।
- शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव – इसी वर्ष युक्तियुक्तकरण किया गया है। कुल 10538 शालाओं का युक्तियुक्तकरण हुआ है, जिसमें 10372 स्कूलों को एक ही परिसर में मर्ज किया गया है। केवल 166 स्कूल ऐसे हैं जिनकी बिल्डिंग का उपयोग अभी नहीं हो पाया है। नए सत्र से इसके लिए योजना बनाई जाएगी।
- सुनील सोनी – विभाग की ओर से उत्तर में कहा गया था कि रिक्त भवनों में कम्प्यूटर कक्ष और लैब बनाए जाएंगे। जो स्कूल मर्ज हुए हैं, वहां क्या बनाया जाएगा।
- गजेन्द्र यादव – टीम जाकर मूल्यांकन करेगी। जो स्कूल मर्ज किए गए हैं, वहां स्मार्ट क्लास और ई-क्लास बनाए जाएंगे।
- सुनील सोनी – मेरे पास जानकारी और फोटो हैं। मठपुरैना का स्कूल, गणपत सिंधी स्कूल और आरडी तिवारी स्कूल की हालत काफी जर्जर है। शिक्षा के क्षेत्र में भवनों की स्थिति ही खराब है। क्या इनके मरम्मत के लिए राशि दी जाएगी।
- गजेन्द्र यादव – जहां-जहां जरूरत होगी, प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी की जाएगी।
- सुनील सोनी – अब तक कितनी राशि जारी की गई है। क्या अनुदान बढ़ाया जाएगा।
- गजेन्द्र यादव – अनुदान निर्धारित है। संख्या के अनुसार ही अनुदान दिया जाएगा।
- राजेश मूणत – रायपुर नगर निगम के माध्यम से 3 करोड़ रुपए की एक बिल्डिंग बनाई गई, लेकिन वहां मिडिल स्कूल शिफ्ट कर दिया गया और बैठने के लिए दरी तक नहीं है। मैंने डीईओ और डायरेक्टर को पत्र लिखा और खुद दरी खरीदकर दी। युक्तियुक्तकरण के तहत यदि स्कूलों की यह स्थिति है, तो फर्नीचर, लैब और शिक्षकों की जरूरत को भी पूरा किया जाना चाहिए।
- गजेन्द्र यादव – 30 मार्च से पहले जहां-जहां जरूरत होगी, वहां व्यवस्थाएं की जाएंगी।
- 3. विधायक विक्रम मंडावी ने उठाया अतिथि शिक्षकों का मुद्दा
- विक्रम मंडावी – अतिथि शिक्षकों को सरकार प्रतिमाह कितना वेतन दे रही है।
- गजेन्द्र यादव – 20 हजार रुपए प्रतिमाह निर्धारित है, जो उनकी उपस्थिति के आधार पर दिया जाता है।
- विक्रम मंडावी – क्या अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए कोई योजना बनाई जा रही है।
- गजेन्द्र यादव – ऐसी कोई योजना नहीं है। हम नियमित शिक्षकों की भर्ती कर रहे हैं, अतिथि शिक्षक अलग श्रेणी में आते हैं।
- विक्रम मंडावी – आपने कहा था कि सरकार बनने के बाद नियमितीकरण किया जाएगा।
- गजेन्द्र यादव – ऐसा कहीं नहीं कहा गया था।
- विक्रम मंडावी – मोदी की गारंटी में नियमितीकरण का वादा किया गया था।
- गजेन्द्र यादव – सदन में ऐसा कुछ भी नहीं कहा गया है।
- उमेश पटेल – आपने 20 हजार रुपए प्रतिमाह और उपस्थिति के आधार पर भुगतान की बात कही है। यदि एक दिन अनुपस्थित रहते हैं तो कितना वेतन काटा जाता है। अतिथि शिक्षकों को एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती।
- गजेन्द्र यादव – नियमितीकरण उन लोगों का किया जाता है जो डेली वेजेस पर कार्य करते हैं।
- उमेश पटेल – ये भी डेली वेजेस की तरह ही है, क्योंकि भुगतान प्रतिदिन के हिसाब से किया जा रहा है। नियमित कर्मचारियों को छुट्टी मिलती है और उनका वेतन नहीं कटता। मोदी की गारंटी को पूरा करेंगे या नहीं।
- गजेन्द्र यादव – मोदी जी की सभी गारंटी पूरी की जा रही हैं और आगे भी की जाएगी।
- उमेश पटेल – कब तक पूरी करेंगे, इसकी समय सीमा बताएं।
- विपक्ष का हंगामा, सदन में नारेबाजी के बीच मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने वॉकआउट किया।
4. कम दर पर जमीन आवंटन का मुद्दा
- कांग्रेस विधायक चातुरी नंद – उद्योग मंत्री ने सीएसआईडीसी से मिली जानकारी के मुताबिक बताया है कि महासमुंद जिले के ग्राम जंगलबेड़ा मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड को 1.93 हेक्टेयर शासकीय जमीन को महज 4 लाख 82 हजार 300 रू. में 99 साल के लिए लीज पर दे दी गई। 253 एकड़ जमीन कारखाना की क्षमता से बहुत ज्यादा है। सोलर प्लांट के लिए इतनी ज्यादा जमीन का निर्धारण किस स्तर से किया गया।
- उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन – जैसे-जैसे उद्योग की स्थापना की जरूरत होती है, उसके अनुसार जमीन आवंटिंत की जाती है। पूरी जमीन उनको नियमानुसार आवंटित की गई है।
- चातुरी नंद – क्या जमीन का आवंटन नियम कानून को ताक में रखकर किया गया है।
- लखनलाल देवांगन – जमीन का आबंटन पूरी नियम प्रक्रिया के तहत हुआ है। अगर सदस्य जानना चाहेंगे तो मैं डिटेल में बता देता हूं कि किस तारीख को कलेक्टर की अनुमति हुई। कैसे सीएसआईडी में आया, कैसे उद्योग में आया और उद्योग में आया तारीखवार बता देता है।
- चातुरी नंद – मंत्री जी कह रहे हैं कि नियम के तहत कलेक्टर के आदेश के तहत ये आवंटन हुआ है। जो की सरासर झूठ है और सदन को गुमराह करने की बात है। कलेक्टर महासमुंद उद्योग विभाग को औद्योगिक क्षेत्र के स्थापना के लिए जमीन दी थी। ना कि किसी विशेष औद्योगिक प्रयोजन के तहत दिया गया था। नए उद्योग की जगह किसी ईकाई विशेष को जमीन आवंटित करने के लिए क्या शासन से अनुमति ली गई।
- लखनलाल देवांगन – गोदावरी इस्पात 4 दिसंबर 2024 को अनुबंध किया गया। 30 दिसंबर 2024 को समान्य सभा द्वारा कलेक्टर महासमुंद द्वारा एनओसी दी गई। 102 हेक्टेयर शासकीय भूमि 25 फरवरी 2025 को उद्योग विभाग को दी गई। 6 मार्च 2025 को उद्योग विभाग ने सीआईडीसी को दी गई। 22 मई 2025 को सीआईडीसी ने गोदावरी पावर एंड इस्पात को दी गई। इस तरह पूरी प्रक्रिया के अनुसार दिया गया है।
- चातुरी नंद – कलेक्टर का आदेश तो मंत्री जी के पास होगा। उसमें पहली कंडीका में लिखा है। कि जमीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए दिया जा रहा है। अगर इससे अलग कोई दूसरा प्रयोजन यहां होता है। तो लीज स्वतः निरस्त हो जाएगा लेकिन सीएसआईडी के अधिकारी किस नियम के तहत निजी संयंत्र को शासकीय भूमि में लीज पर दी गई है।
- लखनलाल देवांगन – औद्योगिक नीति के तहत दिया गया है।
- MLA द्वारकाधीश यादव – 253 एकड़ जमीन को महज 5-6 लाख में आप किस नियम के तहत आवंटित किए हैं।
- लखनलाल देवांगन – 102 हेक्टेयर जमीन को 4 लाख 82 हजार 302 प्रति हेक्टेयर की दर पर 99 साल के लिए दिया गया है। जिसके साल का 4 करोड़ 77 लाख रू. होता है।प्रति वर्ष निर्धारित समय पर 28 लाख 644 रू. वार्षिक लीज रेंट भी भुगतान करना होगा।
- द्वारकाधीश यादव – इतनी कम दर पर किस प्रक्रिया के तहत भूमि का आवंटन किया गया है।
- लखनलाल देवांगन – राज्य सरकार द्वारा नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सौर विद्युत परियोजना लगाई जा सकती है। औद्योगिक नीति के तहत छूट भी मिलेगा।
- चातुरी नंद – पेड़ काट दिए गए, तालाब पाट दिए। क्या नियम खिलाफ शासकीय जमीन को लीज पर देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे।
- लखनलाल देवांगन – वहां से जो 3 शिकायतें मिली थी। उस पर कार्रवाई भी हुई है। कलेक्टर ने एक उच्च स्तरीय समिति का भी गठन किया गया है। इस पर सदन में हंगामा हुआ।
5. अवैध पेड़ कटाई मामला, दोषी पर होगी कार्रवाई
पूर्व वन मंत्री और विधायक विक्रम मंडावी ने ध्यानाकर्षण के जरिये वन मंडल भानुप्रतापपुर के तहत अवैध पेड़ कटाई का मामला उठाया।
जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा- केंद्र सरकार ने खनन का परमिशन मेसर्स गोदावरी को दिया गया है। 33 हजार 40 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, कटाई वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में कराई गई।
इस तरह अवैध कटाई नहीं हुई है। 2890 पेड़ों की कटाई के बावजूद उसके काष्ठ नहीं पाए गए। 11 कर्मचारी-अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
विक्रम मंडावी ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी ने ही रिपोर्ट भेजा था कि करीब 5 हजार पेड़ कटे हैं। मामला साल 2021 का है, अब तक कार्रवाई हो जाना चाहिए था।
वन मंत्री ने कहा- जो भी दोषी होगा विधि सम्मत उस पर कार्रवाई होगी।

कोरबा
कोरबा के जटगा रेंज में हाथियों का उत्पात,तीन घर तोड़े:फसल और सब्जियों को पहुंचाया नुकसान, 40 हाथियों का दल सक्रिय, वन विभाग अलर्ट
कोरबा। कोरबा के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत जटगा रेंज में हाथियों का उत्पात जारी है। शुक्रवार की आधी रात पटेल पारा और धोबघट गांवों में चार हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने तीन ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और धान की बोरियों को भी नुकसान पहुंचाया। शनिवार सुबह तक हाथी इन गांवों में डेरा डाले हुए थे, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
वन विभाग के अनुसार, यह घटना शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे हुई। चार हाथियों का एक दल पहले पटेल पारा गांव में घुसा।

उन्होंने किसान रामलाल के घर की दीवार तोड़ दी और घर में रखी धान की 15 बोरियों को कुचलकर नष्ट कर दिया। इसके बाद हाथियों का दल धोबघट गांव पहुंचा, जहां दो अन्य ग्रामीणों के मकानों को भी क्षतिग्रस्त किया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया।



हाथियों ने फलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाया
ग्रामीण निर्मला यादव ने बताया कि हाथियों ने उनके बाड़ी में लगे पपीता, गन्ना, केला और सब्जियों को भी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने किसी तरह अपनी जान बचाई।
जटगा रेंज में पिछले कई महीनों से लगभग 40 हाथियों का एक बड़ा दल डेरा डाले हुए है। ये हाथी दिन के समय जंगल में रहते हैं, लेकिन रात होते ही भोजन की तलाश में आसपास के गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथी लगातार खेतों में लगी फसलों और घरों में रखे अनाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उन्हें रातभर जागकर रखवाली करनी पड़ रही है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

डीएफओ ने ग्रामीणों को दी सतर्क रहने की सलाह
कटघोरा डीएफओ ने जानकारी दी कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। विभाग द्वारा मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

कोरबा
कटघोरा में अधिवक्ता के घर चोरी के मामले में चार और गिरफ्तार
02 पहले पकड़ाए थे, 04 और गिरफ्तार, अब तक 06 आरोपी गिरफ्तार, जिसमें जेवर खरीदने वाला चाम्पा का कारोबारी शामिल
कोरबा/कटघोरा। कटघोरा पुलिस ने एक साल पुरानी चोरी की बड़ी वारदात का खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सोने-चांदी के जेवर, सोने का बिस्किट और नगदी सहित करीब 8 लाख रुपए का माल बरामद किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

यह चोरी पुरानी बस्ती कटघोरा निवासी अधिवक्ता राकेश पांडेय के घर में हुई थी। आरोपियों ने ताला तोड़कर करीब 10 तोला सोने के जेवर, जिसमें रानी हार सेट, झुमके, सोने की चेन, चांदी की पायल और नगदी पार कर ली थी।

आरोपियों से बरामद गहने
एसपी के निर्देश पर बनी टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर विशेष जांच टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना के आधार पर जांच शुरू की।
दो आरोपियों से खुला पूरा राज
सबसे पहले पुलिस ने अमित खांडे और गौतम कुमार जांगड़े को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर चोरी करना कबूल किया।
ज्वेलरी खरीदने वाला व्यापारी भी गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस ने सुशील शुक्ला, गणेश दास, अनिल नामदेव और चांपा निवासी व्यापारी हिमेश सोनी को भी गिरफ्तार किया। आरोपियों ने चोरी के जेवर हिमेश सोनी को बेच दिए थे।

पुलिस ने आरोपियों के 2 साथियों को पकड़ लिया था उनसे मिले इनपुट से अन्य 4 आरोपियों को भी पकड़ लिया गया है
चांपा से पकड़े गए आरोपी
पुलिस टीम ने सभी आरोपियों को जांजगीर-चांपा जिले के चांपा क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
सोने का बिस्किट और जेवर बरामद
- 10 ग्राम सोने का मंगलसूत्र लॉकेट
- 2 जोड़ी चांदी की पायल
- करीब 3 तोला सोने का बिस्किट
- नगदी
- रानी हार सेट, झुमका और सोने की चेन
सहित कुल करीब 8 लाख रुपए का चोरी का माल जब्त किया।
पुलिस की अपील
थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी ने लोगों से घर से बाहर जाते समय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने, सीसीटीवी चालू रखने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।कोरबा पुलिस “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के तहत अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।

छत्तीसगढ़
ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 90 टन LPG चुराई:कलेक्टर ने प्लांट में रखने दिए थे, 1.5 करोड़ की गैस निकालकर बेची, अब फरार
महासमुंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 1.5 करोड़ की एलपीजी गैस चोरी की है। दिसंबर 2025 में पुलिस ने 6 गैस कैप्सूल गाड़ी पकड़ी थी, जिसमें 90 मीट्रिक टन LPG लोड था। लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होने के कारण सभी गाड़ियां थाने में खड़ी कर दी गई।

बाद में थाने में सुरक्षा नहीं होने के कारण ये गाड़ियां ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी को सौंप दी थी। इस दौरान कंपनी के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने प्लानिंग कर गैस को घरेलू-कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बेच दिया और जिला प्रशासन से शिकायत की कि LPG गैस लीक हो गई।
जांच में चोरी पकड़े जाने के बाद पुलिस ने 3 के खिलाफ मामला दर्ज किया है, मालिक और डायरेक्टर फरार है, कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने पकड़ा है। मामला सिंघोड़ा थाना क्षेत्र का है।

पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 90 मीट्रिक टन LPG गैस चुराए।
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। थाने में किसी भी हादसे के खतरा देखते हुए, इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा।
इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए। इसी आदेश के तहत 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा।
खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष यादव की मौजूदगी में संतोष ठाकुर को ये 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए।
संतोष अपने स्टाफ की मदद से सभी गाड़ियां सिंघोड़ा थाना से रायपुर के अभनपुर के ग्राम उरला स्थित अपने प्लांट ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ले गया।

कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, मालिक फरार है।
कंपनी के मालिक गैस बेचने की प्लानिंग की
हैंडओवर के समय या उसके तुरंत बाद कैप्सूल ट्रकों का वजन नहीं कराया गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर मालिक संतोष ठाकुर (56), डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने गैस को अवैध रूप से बेचने की प्लानिंग की।
सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे (वजन करने की जगह) होने के बावजूद कहीं भी वजन नहीं कराया गया। सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को प्लांट से करीब 200 मीटर दूर पार्किंग में खड़ा कर दिया गया। इसके बाद 5 गाड़ियों का वजन 6 अप्रैल को और 1 गाड़ी का वजन 8 अप्रैल को कराया गया।
8 दिनों में प्लांट के बुलेट टैंकों में खाली किया गैस
इन 8 दिनों में एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के अंदर मौजूद बुलेट टैंकों में खाली किया गया। जब वे टैंक भी भर गए तो गैस को कंपनी के मालिकाना और वहां चल रहे दो निजी टैंकरों में भर दिया गया।
इसके बावजूद चोरी की गई गैस बची रह गई, जो तय क्षमता से ज्यादा थी। इसके बाद रायपुर की अलग-अलग एजेंसियों और प्लांटों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।
वजन में देरी का मुख्य कारण यह रहा कि कैप्सूल ट्रकों को समय पर खाली नहीं किया गया और प्लांट में एक साथ 6 कैप्सूल खाली करने की कैपेसिटी भी नहीं थी।
इसके बाद कंपनी मालिक ने प्रशासन को बताया कि सभी एलपीजी कैप्सूल ट्रक खाली हैं। इसके बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा घोटाला सामने आया।
इतनी बड़ी मात्रा में लीकेज असंभव
इस पूरे मामले में जब राष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट की मदद से जांच की गई तो पाया गया कि कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित था और इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं था। इससे साफ हुआ कि गैस जानबूझकर किसी ने निकाली है।
एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि बिना किसी बड़ी दुर्घटना के 3 महीने में एक कैप्सूल से 20 टन गैस का निकल जाना संभव ही नहीं है।
दस्तावेज में जितनी गैस खरीदी उससे 3 गुना बेचा
जब्त दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री दिखाई गई है। 3 दिन की जांच और दस्तावेजों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई।
रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी, लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई।
यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।

एजेंसियों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।
कंपनी का स्टाफ गिरफ्तार, मालिक डायरेक्टर फरार
पुलिस ने अभी तक कंपनी के स्टाफ निखिल वैष्णव (41) को गिरफ्तार किया है, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर (मालिक) और अन्य डायरेक्टर के साथ प्लांब मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
इसके अलावा पुलिस ने 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और कई दस्तावेज जब्त किए हैं।
सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश
जांच में यह भी पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के ऑफिस में आरोपियों ने सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश की। प्लांट के गेट पर जो वाहनों की एंट्री-एग्जिट और खरीद-बिक्री का रजिस्टर रखा जाता था, उससे अवैध लेन-देन करने वाली गाड़ियों और एजेंसियों की पहचान हो सकती थी।
इसी तरह ऑफिस में बिना बिल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड भी रखा जाता था। लेकिन जांच में सामने आया कि अप्रैल महीने का बिना बिल वाला रजिस्टर ही गायब कर दिया गया। जब जांच के दौरान आरोपियों को बुलाया गया, तो उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की। इसी आधार पर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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