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जंग के बीच रुपए पर दबाव: फिर भी RBI की रणनीति से बची 14,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा

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मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। रुपए की कीमत में गिरावट आई है और डॉलर के मुकाबले यह 95 के पार पहुंच गया। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के हस्तक्षेप से स्थिति और बिगड़ने से बच गई। 

आर.बी.आई. की 2022 में शुरू की गई एक दीर्घकालिक रणनीति अब असर दिखाने लगी है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपए के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। इसी का नतीजा है कि फरवरी 2026 में भारत ने 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के आयात का भुगतान रुपए में किया।

फरवरी में 1.5 अरब डॉलर की बचत

रुपए में व्यापार से फरवरी महीने में ही करीब 1.5 अरब डॉलर (करीब 14,057 करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बची। ऐसे समय में जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, यह राहत बेहद अहम मानी जा रही है। 

आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के पहले 11 महीनों में 1.39 लाख करोड़ रुपए के आयात रुपए में किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, कुल आयात में इसकी हिस्सेदारी अभी भी सिर्फ 2.35 प्रतिशत ही है, यानी इस दिशा में अभी काफी काम बाकी है।

30 देशों से जुड़ा भारत का नैटवर्क

दिलचस्प बात यह है कि निर्यात का भुगतान भी तेजी से रुपए में हो रहा है। पहले जहां आयात और निर्यात के बीच बड़ा अंतर था, अब यह अंतर काफी कम हो गया है, जिससे रुपए की स्थिति मजबूत हो रही है। भारत ने जर्मनी, रूस, यू.के., सिंगापुर समेत 30 देशों के बैंकों को भारतीय बैंकों में खाते खोलने की अनुमति दी है। इसके अलावा यू.ए.ई., इंडोनेशिया और मालदीव के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार के लिए समझौते भी किए गए हैं।

ट्रेड डैफिसिट पर पड़ेगा असर

भारत एक बड़ा आयातक देश है और 2025-26 में उसका व्यापार घाटा 119 अरब डॉलर रहा। ऐसे में अगर आयात रुपए में होता है तो डॉलर की मांग घटेगी और इससे चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

दुनिया के कई देश अब डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे ‘डी-डॉलराइजेशन’ कहा जा रहा है। चीन इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि भारत का फोकस सिर्फ जोखिम कम करने पर है, न कि रुपए को वैश्विक रिजर्व करंसी बनाने पर।

क्या है आगे की राह

विशेषज्ञों के मुताबिक रुपए में व्यापार भारत के लिए एक मजबूत रणनीति साबित हो सकता है लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए और देशों को इस सिस्टम से जोड़ना होगा। रुपए में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभी शुरूआती दौर में है लेकिन इससे मिलने वाले फायदे साफ दिखने लगे हैं। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह रणनीति भारत को आर्थिक स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, चुनाव आयोग ने MLC की 16 सीटों के लिए चुनाव की तारीख का किया ऐलान

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मुंबई, एजेंसी। भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र विधान परिषद की 16 सीट के लिए चुनाव 18 जून को कराने की सोमवार को घोषणा की। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि एक जून है और उम्मीदवार चार जून तक नामांकन पत्र वापस ले सकते हैं। वहीं आयोग ने महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए स्थानीय निकायों से 16 सीटों के लिए द्वैवार्षिक चुनाव 18 जून को करने की घोषणा की है। इनके साथ ही नागपुर स्थानीय निकाय की परिषद की रिक्त पड़ी एक सीट के लिए उप-चुनाव भी कराया जाएगा।
 

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मतों की गिनती 22 जून को
चुनाव आयोग द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इन चुनावों के लिए अधिसूचना 25 मई को जारी की जाएगी और उसी दिन से नामांकन पत्र भरने का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा। नामांकन पत्र 01 जून तक नामांकन पत्र भरे जा सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 02 जून को कराई जाएगी और नाम 04 जून तक वापस लिए जा सकेंगे। मतदान की तिथि 18 जून है और उसी दिन प्रात: 8:00 बजे से शाम चार बजे तक मतदान कराए जाएंगे। मतों की गिनती 22 जून को कराई जाएगी और चुनाव प्रक्रिया 25 जून तक संपन्न हो जाएगी।

 इन 16 निकायों में होगा चुनाव 
जिन 16 निकायों से विधान परिषद के लिए द्वैवार्षिक चुनाव कराए जा रहे हैं उनमें सोलापुर, अहमदनगर ठाणे, जलगांव, सांगली – सतारा,नांदेड़, यवतमाल, पुणे भंडारा- गोंदिया, रायगढ़- रत्नागिरि- सिंधुदुर्ग, नासिक, वर्धा-चंद्रपुर- गढ़चिरौली, अमरावती, उस्मानाबाद- लातूर- बीड, परभणी- हिंगोली तथा औरंगाबाद- जालना स्थानीय निकाय क्षेत्र की सीटें शामिल है। नागपुर स्थानीय निकाय से विधान परिषद के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि चंद्रशेखर कृष्ण रावजी बावनकुले के विधान सभा के लिए निर्वाचित होने के बाद यह सीट 23 नवंबर 2024 से रिक्त पड़ी है। श्री बावनकुले का विधान परिषद का कार्यकाल एक जनवरी 2028 तक था।

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सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों के खर्च पर सरकार की सख्ती, खर्चों में कटौती के निर्देश

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को खर्चों में कटौती करने के निर्देश दिए हैं। वित्त मंत्रालय ने दैनिक कामकाज में मितव्ययिता अपनाने, यात्रा खर्च घटाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।

इन संस्थाओं पर पड़ सकता है असर

सरकार के इस फैसले का असर भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी बड़ी सरकारी संस्थाओं पर पड़ेगा, जहां लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि अब अधिकांश मीटिंग, रिव्यू और कंसलटेशन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किए जाएं। केवल जरूरी परिस्थितियों में ही अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी।

निर्देशों में विदेश यात्राओं पर भी सख्ती दिखाई गई है। मंत्रालय ने कहा है कि चेयरमैन, एमडी और सीईओ स्तर के अधिकारियों की विदेशी यात्राएं तय सीमा के भीतर रहें और जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय बैठकों में वर्चुअल माध्यम अपनाया जाए।

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का निर्देश 

इसके अलावा मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल वाहनों के उपयोग को कम करने और चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का निर्देश दिया है। संस्थानों से कहा गया है कि वे अपने मुख्यालय और शाखाओं में किराए पर ली गई पारंपरिक गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल बढ़ाएं।

क्यों लिया फैसला

माना जा रहा है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने सरकारी संस्थानों और कर्मचारियों से संयम और कम खर्च की नीति अपनाने को कहा था। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगे कच्चे तेल और बढ़ती महंगाई के बीच सरकार खर्च नियंत्रण पर फोकस कर रही है। 

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एक हफ्ते का इंतजार खत्म! UP में 8 नए मंत्रियों के विभागों की घोषणा, भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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लखनऊ, एजेंसी। एक हफ्ते के लंबे इंतजार के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार देर शाम 8 नए मंत्रियों को उनके विभाग सौंप दिए। इन मंत्रियों ने पिछले रविवार को शपथ ली थी। सोमवार को होने वाली पहली कैबिनेट बैठक से ठीक पहले ये विभाग बांटे गए हैं।

भूपेंद्र चौधरी को MSME और बागी SP विधायक मनोज पांडे को मिला खाद्य विभाग
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नए कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी (SP) के बागी विधायक मनोज पांडे को खाद्य, रसद और नागरिक आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के राज्यमंत्री की जिम्मेदारी स्वतंत्र प्रभार के साथ दी गई है।

सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार, कृष्ण पासवान और सुरेश दिलेर भी बने राज्यमंत्री
इसके अलावा सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी विभागों का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। कृष्ण पासवान को पशुधन और दुग्ध विकास विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया है। उप मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के राज्यमंत्री का विभाग दिया गया है। सुरेश दिलेर को राजस्व विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया है। हंसराज विश्वकर्मा को सूक्ष्म ,लघु एवं मध्यम विभाग के राज्यमंत्री का प्रभार सौंपा गया है।

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