देश
3300 CISF जवान कल से संसद की सुरक्षा संभालेंगे:परिसर से CRPF के 1400 जवान हटाए; 13 दिसंबर को सुरक्षा में चूक के चलते फैसला
नई दिल्ली, एजेंसी। अब नई और पुरानी पार्लियामेंट बिल्डिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) को सौंपी गई है। 20 मई से CISF के 3317 जवान संसद की सुरक्षा में तैनात रहेंगे। पिछले साल 13 दिसंबर को नए संसद भवन की सुरक्षा में चूक मामले के बाद ये फैसला लिया गया है।
वहीं, संसद में तैनात रहे CRPF के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) ने 17 मई को अपने 1400 जवानों को वापस बुला लिया है। साथ ही अपने सारे वाहन, हथियार और कमांडो भी हटा लिए हैं। CRPF के कमांडर DIG रैंक के अधिकारी ने संसद सुरक्षा से जुड़ी सारी जानकारी CISF को सौंप दी है।
सीनियर CISF ऑफिसर ने कहा कि CRPF पीडीजी, दिल्ली पुलिस के करीब 150 कर्मी और संसद सुरक्षा कर्मचारी (PSS) जो संयुक्त रूप से अब तक संसद की सुरक्षा करते थे। उन्हें भी वापस लिया गया है।
CISF के जवानों को NSG ने भी ट्रेनिंग दी न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, CISF के 3317 जवान संसद की आतंकियों और किसी भी तरह के हमलावरों वालों से रक्षा करेंगे। पिछले 10 दिन से CISF के जवान ट्रेनिंग ले रहे थे। इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स (NSG) के ब्लैक कमांडों के साथ भी ट्रेनिंग दिलवाई गई है।
CISF जवानों को एंट्री गेट पर लोगों की चैकिंग, सामान की चैकिंग, बम का पता लगाना और डिफ्यूज करना, आतंकी हमले पर क्विक एक्शन, स्नाइपर टास्क और पब्लिक इंट्रेक्शन (लोगों के साथ पेश आना) की ट्रेनिंग दी गई है।
13 दिसंबर 2023 को नए संसद भवन की सुरक्षा में चूक के बाद पार्लियामेंट कैंपस की सिक्योरिटी के लिए CRPF के डीजी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी। इसके बाद CISF की तैनाती का फैसला लिया गया।
CRPF जवानों को संसद छोड़ने का दुख, जाने से पहले सेल्फी लीं

CRPF के एक अधिकारी ने बताया कि 17 मई को संसद परिसर छोड़ते वक्त PDG जवान दुखी थे। अपना सर्वश्रेष्ठ देने के बावजूद उन्हें यह ड्यूडी छोड़नी पड़ा। जवानों ने यहां से जाने से पहले देश के लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन की जिम्मेदारी से रक्षा करने की याद में फोटोज और सेल्फी लीं।
उन्होंने कहा कि साल 2001 के आतंकवादी हमले के दौरान CRPF कर्मियों ने अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर बहादुरी से आतंकियों का मुकाबला किया था। इस घटना में CRPF जवान शहीद हुए थे। कुछ को गैलेंट्री अवार्ड दिए गए थे।
संसद की इन जगहों पर रहेगी CISF की तैनाती
CISF के जवानों की तैनाती संसद भवन के सभी एंट्री और एग्जिट गेट, वॉच टावर पर रहेगी। इसके साथ ही डॉग स्क्वाड, फायर ब्रिगेड को तैनात किया गया है। जवानों को पास सेक्शन के साथ-साथ CCTV मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम और कम्युनिकेशन सेंटर में तैनात किया गया है।
CISF के पुरुष और महिला जवान जो रिसेप्शन पर तैनात रहेंगे, उनकी ड्रेस अलग रहेगी। वे सफारी सूट के अलावा हल्के नीले रंग की शर्ट और ब्राउन पैंट पहने दिखेंगे।
PDG-PSS को सौंपा जा सकता है अलग जिम्मा
PDG को CRPF की वीआईपी सुरक्षा विंग की 6वीं बटालियन के साथ मर्ज किए जाने की उम्मीद है। वहीं, PSS को केंद्र सरकार के अन्य भवनों की सुरक्षा में तैनात किया जा सकता है। कुछ PSS कर्मचारियों को मार्शल ड्यूटी के लिए सदन की लॉबी का मैनेजमेंट करने के लिए रखा जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है।
13 दिसंबर 2023 को नए संसद भवन की सुरक्षा में चूक हुई थी
13 दिसंबर 2023 को संसद पर आतंकी हमले की 22वीं बरसी पर नए संसद भवन की विजिटर्स गैलरी से बैठे 2 युवकों ने अपने जूतों से छिपा पीला स्प्रे भवन में फैला दिया था। पूरे सदन में भगदड़ मच गई थी। ये लोग 5 लेयर की सुरक्षा तोड़कर लोकसभा में घुसे थे और हंगामा किया था।
वहीं, इनके दो अन्य साथियों को संसद के बाहर प्रदर्शन करते हुए सिक्योरिटी ने पकड़ा था।
देश
‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले
नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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