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छत्तीसगढ़

DVS मेंबर समेत 4 नक्सली ने किया सरेंडर:16 लाख कैश और हथियार बरामद, 2013 से थे एक्टिव, चारों 19 लाख के इनामी

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गरियाबंद,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में रविवार को 4 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें DVS मेंबर दीपक मंडावी भी शामिल हैं। समर्पण करने वालों में दो महिला और दो पुरुष नक्सली हैं। सभी 19 लाख के इनामी नक्सली थे।

जानकारी के मुताबिक, सरेंडर नक्सलियों की निशानदेही पर सुरक्षा बलों ने 16 लाख रुपए कैश बरामद किया हैं। साथ ही 31 जिंदा कारतूस, दो खाली मैगजीन, डेटोनेटर, 8 बीजीएल और 12 बोर राउंड जब्त किए गए हैं। इसके अलावा नक्सली साहित्य भी बरामद हुआ है।

डीवीएस मेंबर दीपक मंडावी हथियार के साथ सरेंडर किया है।

डीवीएस मेंबर दीपक मंडावी हथियार के साथ सरेंडर किया है।

सभी पर 19 लाख का इनाम था, जो कि 2013 से सक्रिय थे।

सभी पर 19 लाख का इनाम था, जो कि 2013 से सक्रिय थे।

ये है सरेंडर नक्सलियों के नाम

सरेंडर करने वालों में डीवीएस मेंबर दीपक उर्फ भीमा मंडावी, प्रोटेक्शन टीम के कैलाश उर्फ भीमा भोगाम, एरिया कमेटी सदस्य रानिता उर्फ पायकी और एरिया कमेटी सदस्य सुजीता उर्फ उरें कारम शामिल हैं। ये सभी धमतरी-गरियाबंद नुआपड़ा डिवीजन कमेटी में साल 2013 से सक्रिय थे।

सुरक्षा बल ने कैश, लैपटॉप, जिंदा कारतूस बरामद किया है।

सुरक्षा बल ने कैश, लैपटॉप, जिंदा कारतूस बरामद किया है।

2 ने हथियार के साथ किया आत्मसमर्पण

दीपक मंडावी का 8 लाख रुपए, कैलाश और रानिता का 5-5 लाख रुपए और सुजीता का 1 लाख रुपए इनामी है। रायपुर रेंज के आईजी अमरेंद्र मिश्रा ने बताया कि दीपक मंडावी ने SLR राइफल के साथ सरेंडर किया है। जबकि रानिता ने सिंगल शॉर्ट राइफल के साथ आत्मसमर्पण किया है।

इससे पहले भी 4 नक्सलियों ने किया सरेंडर

बता दें कि जनवरी में चलपति सहित 16 नक्सलियों के खात्मे के बाद से गरियाबंद में नक्सली विरोधी अभियान को लगातार सफलता मिल रही है। इससे पहले भी चार से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति  लेकर आए।

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कोरबा

राज्यपाल रमेन डेका 1 अप्रैल को रहेंगे कोरबा जिले प्रवास पर

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सामूहिक विवाह हनुमंत कथा में होंगे शामिल

कोरबा। राज्यपाल रमेन डेका कल 1 अप्रैल को कोरबा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री डेका रायपुर लोकभवन से सवेरे 7.30 बजे सड़क मार्ग द्वारा मुंगेली जिले के चंदखुरी विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे। ततपश्चात राज्यपाल सुबह 9 बजे कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढपढप बांकीमोंगरा के लिए रवाना होंगे। यहां वे प्रातः 11 बजे आयोजित “दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह” कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के पश्चात राज्यपाल श्री डेका दोपहर 12:30 बजे रतनपुर (बिलासपुर) स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया नमन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

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