छत्तीसगढ़
अंधेरे में 48 गांव,PM को खून से लिखे 500 लेटर:ग्रामीण बोले- सुशासन शिविर में भी सुनवाई नहीं, अफसर बोले-अभ्यारण्य इलाका, इसलिए अटका प्रोजेक्ट
गरियाबंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में 48 गांवों के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पत्र लिखकर बिजली की मांग की है। उनका आरोप है कि समाधान शिविर में उनकी सुनवाई नहीं हुई और न जिला प्रशासन ने बिजली मुहैया करवाई। इससे नाराज ग्रामीणों ने यह कदम उठाया है।
मामला मैनपुर ब्लॉक के राजापड़ाव क्षेत्र का है, जो उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है। बुधवार को 8 पंचायतों के 48 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने ब्लड से 500 से ज्यादा लेटर लिखे, जिसे स्पीड पोस्ट के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) को भेजा जाएगा।

वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, शुद्ध पेयजल, सामुदायिक वन संसाधन और वन अधिकार पट्टा जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाई है। जब भी बिजली की मांग की जाती है, तब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और NTCA से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की जरूरत बताकर मामला टाल दिया जाता है।
उनका कहना है कि अधिकारियों का जवाब रहता है कि इस समस्या का समाधान केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री स्तर पर ही संभव है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र अभयारण्य के अंतर्गत आता है, इसलिए केंद्र सरकार की मंजूरी और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के बिना बिजली व्यवस्था स्थापित करना संभव नहीं है।

ग्रामीणों ने खून से पत्र लिखकर बिजली की मांग की है।

हर व्यक्ति के लिए नई और सिंगल-यूज सीरिंज का इस्तेमाल किया गया।

ग्रामीणों ने समस्या के समाधान के लिए पैसे भी जुटाए।
क्या है मामला ?
10 जून सुबह ग्राम पंचायत कोकड़ी, गरहाडीह, गौरगांव, भूतबेड़ा, कुचेंगा के आश्रित गांवों और पाराटोलों के करीब 500 ग्रामीण अड़गड़ी गौठान में इकट्ठे हुए। जय अंबेडकरवादी युवा संगठन और किसान संघर्ष समिति राजापड़ाव क्षेत्र के बैनर तले ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नाम पत्र लिखे।
ग्रामीणों ने अपने पत्र में क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं का जिक्र करते हुए बिजली सुविधा मुहैया कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही छोटे व्यवसायों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने ब्लड से 500 से ज्यादा लेटर लिखे।
एक दशक से कर रहे बिजली की मांग
कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि आज के समय में भी लोगों का बिजली जैसी जरूरी सुविधा से वंचित रहना दुखद है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण पिछले 10 साल से बिजली की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा हाल ही में आयोजित समाधान शिविर में भी उठाया गया था।
प्रशासन ने दिया था 6 महीने का आश्वासन
ग्रामीणों के अनुसार जनवरी 2026 में जिला प्रशासन ने लिखित रूप से भरोसा दिलाया था कि 6 महीने के अंदर गांवों में विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि 500 से ज्यादा पत्र स्पीड पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री और NTCA को भेजे जाएंगे।

करीब 500 ग्रामीण अड़गड़ी गौठान में इकट्ठे हुए।
खून से लिखे पोस्टकार्ड में बयां किया दर्द
सरपंच चिमन नेताम, रामदेव मरकाम, साधुराम नेताम और पतंग मरकाम ने बताया कि कार्यक्रम की सूचना प्रशासन को दी गई थी और खून निकालने के लिए चिकित्सकीय सहायता भी मांगी गई थी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए हर व्यक्ति के लिए नई और सिंगल-यूज सीरिंज का इस्तेमाल किया गया। ग्रामीणों ने थोड़ी मात्रा में खून निकालकर उससे स्याही तैयार की और उसी से पोस्टकार्ड पर अपनी भावनाएं लिखीं।
तीन पंचायतों तक पहुंची बिजली, 5 अब भी अंधेरे में
ग्रामीणों ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद केवल 3 ग्राम पंचायतों के मुख्य गांवों तक बिजली पहुंच सकी है। हालांकि, इन पंचायतों के कई पारा और टोले अब भी बिजली से वंचित हैं। वहीं 5 ग्राम पंचायतों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है।
बोले- हम विरोध नहीं, अपनी मांग रख रहे
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य विरोध करना नहीं, बल्कि अपनी समस्या सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि साल 2006 से अब तक वे सामान्य स्याही से हजारों पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
धरना-प्रदर्शन का भी असर नहीं हुआ, इसलिए इस बार उन्होंने भावनात्मक तरीके से प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी मांग रखने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को वैवाहिक वर्षगांठ पर दी बधाई
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह को उनकी 47वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी । मुख्यमंत्री श्री साय ने डॉ. रमन सिंह एवं श्रीमती वीणा सिंह के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखमय दाम्पत्य जीवन की मंगलकामना की है।

छत्तीसगढ़
रायपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति प्रकट किया आभार
नक्सल उन्मूलन, अधोसंरचना, किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण में केंद्र की भूमिका को सराहा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए गए अभूतपूर्व सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी, निर्णायक और जनकल्याणकारी नेतृत्व में संचालित योजनाओं ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई गति प्रदान की है तथा प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में उल्लेख किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की केंद्र सरकार की नीति के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को विशेष केंद्रीय सहायता (SCA) योजना के तहत रू.2,080.29 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही विशेष अधोसंरचना योजना (SIS), सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE), आधुनिक हथियारों की उपलब्धता, जंगल वारफेयर प्रशिक्षण और एयर सपोर्ट जैसी पहलों ने सुरक्षा बलों को मजबूत बनाया है तथा राज्य को नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक बढ़त दिलाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रू.2,377 करोड़ की लागत से 3,222 किलोमीटर लंबी 391 सड़कों तथा 88 वृहद पुलों की स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं ने बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकास और सुरक्षा दोनों को मजबूती प्रदान की है।
पत्र में मुख्यमंत्री ने वित्तीय सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में राज्य को केंद्रीय करों में रू.3,46,806 करोड़ तथा विभिन्न योजनाओं में रू.1,43,328 करोड़ की सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता योजना के तहत रू.22,021 करोड़ तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में रू.22,600 करोड़ की अतिरिक्त सहायता भी मिली है।
मुख्यमंत्री ने सड़क अधोसंरचना विकास को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना कोष (CRIF) के तहत रू.4,468 करोड़ तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए रू.35,766 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे रायपुर-विशाखापट्टनम, बिलासपुर-धनबाद, रायपुर-दुर्ग बायपास तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति मिली है और राज्य की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत राज्य के 24.50 लाख पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से लगभग 19.70 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं। मनरेगा के तहत पिछले 12 वर्षों में रू.39,123 करोड़ व्यय कर 152 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत रू.2,398 करोड़ की सहायता से 36.44 लाख परिवारों को शौचालय सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत 13,040 किलोमीटर सड़कों एवं 347 पुलों के निर्माण के लिए रू.7,951 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। वहीं पीएम जनमन के अंतर्गत 2,902 किलोमीटर सड़कों हेतु रू.2,007 करोड़ तथा पीएमजीएसवाई-4 के तहत 2,427 किलोमीटर सड़कों के लिए रू.2,246 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के 25.51 लाख किसानों को अब तक रू.10,784 करोड़ की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रू.5,064 करोड़ की प्रीमियम सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को व्यापक सहयोग प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के 56 लाख राशन कार्डधारी परिवारों के 1.99 करोड़ सदस्यों को प्रति माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग रू.5,600 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।
खनिज क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 62 से अधिक खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी हुई है, जिनसे भविष्य में रू.4.34 लाख करोड़ से अधिक का संभावित राजस्व प्राप्त होगा। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) एवं पीएमकेकेकेवाई के माध्यम से रू.17,887 करोड़ से अधिक की राशि संकलित कर 81,553 विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा वन अधिकारों की मान्यता को ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 56,569 पीवीटीजी परिवारों को लाभान्वित किया जा रहा है तथा 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं।
महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनबाड़ी के रूप में उन्नत किया गया है तथा 2,264 नए केंद्र स्वीकृत हुए हैं। राज्य के सभी जिलों में संचालित 42 सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को सहायता और संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राज्य में 5,499 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 91 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 28 जिला सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं तथा 23 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
कौशल विकास और रोजगार के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 18,330 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 82,952 हितग्राहियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि स्ट्राइव परियोजना के माध्यम से 17 आईटीआई संस्थानों का उन्नयन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से 31.37 लाख ग्रामीण परिवारों को 2.88 लाख स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। समूहों को रू.1,661 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। ‘लखपति दीदी’ पहल के अंतर्गत 10.42 लाख महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर नई पहचान बना रही हैं।
डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि डिजिटल भारत निधि (DBN) के माध्यम से राज्य के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1,247 मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं तथा 577 नए टावरों को स्वीकृति दी गई है, जिससे हजारों गांव डिजिटल सेवाओं से जुड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण विद्युतीकरण और विद्युत अधोसंरचना विकास के लिए लगभग रू.2,808 करोड़ की सहायता प्रदान की गई है। पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत राज्य में 64 हजार से अधिक घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा 46,649 परिवारों को रू.362 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खेल, उद्योग, ग्रामोद्योग, भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण तथा डिजिटल प्रशासन के क्षेत्रों में भी केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने छत्तीसगढ़ को विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में पर्यटन, संस्कृति और खेल अधोसंरचना के क्षेत्र में केंद्र सरकार के सहयोग का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत रू.94.23 करोड़ की लागत से जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर सहित जनजातीय अंचलों में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया गया है। प्रसाद योजना के तहत रू.48.43 करोड़ की लागत से डोंगरगढ़ स्थित माँ बम्लेश्वरी मंदिर क्षेत्र का विकास किया गया है। वहीं नवा रायपुर में रू.147.66 करोड़ की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश को सांस्कृतिक और पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा। खेलो इंडिया योजना के तहत राज्य के आठ जिलों में खेल अधोसंरचना विकास के लिए रू.48 करोड़ तथा बहतराई स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए रू.5 करोड़ की सहायता दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी और इसके लिए मिली रू.17 करोड़ की सहायता छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प, रेशम और पारंपरिक कला के संरक्षण में केंद्र सरकार के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रायपुर में रू.200 करोड़ की लागत से प्रस्तावित पीएम एकता मॉल राज्य के हस्तशिल्प, हथकरघा और ओडीओपी उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजार उपलब्ध कराएगा। राष्ट्रीय हाथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत 4,694 बुनकरों को लाभान्वित किया गया है, जबकि हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के अंतर्गत 2,400 शिल्पियों के सशक्तिकरण हेतु विशेष परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रेशम विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों कृषकों और महिला हितग्राहियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है।
पत्र में भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण, डिजिटल प्रशासन और सुशासन के क्षेत्र में हुए नवाचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम, स्वामित्व योजना, एग्रीस्टैक और फार्मर रजिस्ट्री जैसी पहलों ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और नागरिकोन्मुख बनाया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में राज्य को रू.598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू किया है। पिछले एक वर्ष में दो लाख से अधिक प्रकरणों का स्वतः नामांतरण किया गया है तथा 32 लाख से अधिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सामाजिक न्याय, उद्यानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, परिवहन सुरक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में प्राप्त केंद्रीय सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति पुनः आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान, अटल वयो अभ्युदय योजना, सुगम्य भारत अभियान, बायोटेक इंक्यूबेशन सेंटर, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च तथा महिला सुरक्षा हेतु स्थापित निर्भया कमांड सेंटर जैसी पहलों ने प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है।
मुख्यमंत्री ने पत्र के अंत मे उल्लेखित किया कि छत्तीसगढ़ की साढ़े तीन करोड़ जनता की ओर से वे प्रधानमंत्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और विश्वास जताते हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में केंद्र सरकार का मार्गदर्शन और सहयोग भविष्य में भी इसी प्रकार प्राप्त होता रहेगा।
छत्तीसगढ़
IAS रमेश कुमार शर्मा बने सहकारिता आयुक्त:पहले गृह विभाग के सचिव थे, सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया आदेश
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रमेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने उनका तबादला करते हुए आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पद पर पदस्थ किया है।

वर्तमान में रमेश कुमार शर्मा गृह विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। राज्य सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें सहकारिता विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए नई पदस्थापना की है।

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