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प्रीमियर एनर्जीज में 5.3% हिस्सेदारी खुले बाजार में 2,291 करोड़ रुपए में बिकी

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नई दिल्ली, एजेंसी। नोमुरा एसेट मैनेजमेंट और कैपिटल ग्रुप जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी प्रीमियर एनर्जीज लिमिटेड में प्रवर्तकों से 5.3 प्रतिशत हिस्सेदारी 2,291 करोड़ रुपए में खुले बाजार लेनदेन के माध्यम से खरीद ली है। इस सौदे में कनाडा स्थित पब्लिक सेक्टर पेंशन इन्वेस्टमेंट बोर्ड, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और अल मेहवार कमर्शियल इन्वेस्टमेंट्स एलएलसी सहित कई विदेशी निवेशकों ने भाग लिया। 

घरेलू संस्थागत निवेशकों में क्वांट म्यूचुअल फंड, बजाज फिनसर्व म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड, केनरा रोबेको म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड और कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड ने भी इस लेनदेन में भाग लिया। इसके अलावा एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस जैसी बीमा कंपनियों ने भी हिस्सेदारी खरीदी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर थोक सौदों के बारे में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस सौदे के तहत कुल 2,39,85,197 शेयरों की खरीद-बिक्री हुई, जो प्रीमियर एनर्जीज में कुल 5.29 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। ये शेयर औसतन 955 रुपए प्रति शेयर की दर से खरीदे गए, जिससे सौदे का कुल मूल्य 2,290.59 करोड़ रुपए रहा।

हैदराबाद स्थित कंपनी के चार प्रवर्तकों—सुरेंद्रपाल सिंह सलूजा, मनजीत कौर सलूजा, चरणदीप सिंह सलूजा और जसवीन कौर सलूजा ने इतनी ही हिस्सेदारी बेची। इस लेनदेन के बाद कंपनी में प्रवर्तक हिस्सेदारी घटकर 63.94 प्रतिशत से 58.65 प्रतिशत रह गई। कंपनी ने पिछले महीने कहा था कि जनवरी-मार्च तिमाही में उसे 1,600 मेगावाट क्षमता के सौर सेल एवं सौर मॉड्यूल की आपूर्ति के लिए 2,577 करोड़ रुपए के ऑर्डर मिले हैं, जिनकी आपूर्ति वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में की जाएगी।

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बंगाल चुनाव हार के बाद TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, वरिष्ठ सांसद के पोस्ट से तेज हुई सियासी हलचल

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कोलकाता, एजेंसी। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार के बाद पार्टी में चल रही उथल-पुथल के संकेत मंगलवार को और अधिक स्पष्ट हो गए, जब राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य सुखेन्दु शेखर रॉय ने पार्टी की दशा और दिशा को लेकर असहमति जताते हुए असहज सवाल उठाए। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार द्वारा सार्वजनिक रूप से अपना असंतोष व्यक्त करने के कुछ दिनों बाद, पार्टी के सबसे अनुभवी सांसदों में से एक रॉय ने ‘एक्स’ पर ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए पोस्ट किए, जिससे तीव्र राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई और चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बेचैनी के संकेत और बढ़ गए।

“लोकतंत्र जनता की इच्छा पर आधारित है
रॉय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “44 ईसा पूर्व में, रोमन सम्राट जूलियस सीजर की सीनेट में मार्च के मध्य में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। रोमन पंचांग के अनुसार, मध्य का अर्थ आमतौर पर मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर की 15 तारीख होता था। लेकिन मई के मध्य से पहले ही, पश्चिम बंगाल के लोगों ने असहनीय अराजकता की स्थिति का अंत कर दिया।” साम्राज्यों के पतन और “असहनीय अराजक स्थिति के अंत” का जिक्र करने वाली इस पोस्ट ने राजनीतिक हलकों और टीएमसी के भीतर तुरंत अटकलों को जन्म दिया, खासकर इसलिए क्योंकि यह चुनाव के बाद के आत्मनिरीक्षण और पार्टी में स्पष्ट दरारों के बीच आया था। एक सप्ताह पहले, 19 मई को, रॉय ने लिखा था: “लोकतंत्र जनता की इच्छा पर आधारित है। गणतंत्र तब पतन की ओर जाते हैं जब भ्रष्ट लोग फलते-फूलते हैं और बुद्धिमानों को परिषद से बाहर कर दिया जाता है। 

29 लोकसभा सीटें जीती फिर TMC विधानसभा में क्यों बुरी तहर हारी?
स्वतंत्र विचार और उसका अभ्यास लोकतांत्रिक व्यवस्था में आवश्यक है। कोई भी इसका खंडन नहीं कर सकता, अन्यथा व्यवस्था का पतन निश्चित है।” रॉय ने हालांकि सार्वजनिक रूप से दोनों पोस्ट पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनके करीबी लोगों ने बताया कि अनुभवी राजनेता ने निजी तौर पर टीएमसी के महज दो साल पहले की अपनी प्रभुत्वशाली स्थिति से नाटकीय रूप से नीचे गिरने के कारणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके करीबी लोगों के अनुसार, रॉय ने बार-बार यह सवाल उठाया है कि पश्चिम बंगाल में 2024 में 29 लोकसभा सीटें जीतने और एक मजबूत स्थिति बनाए रखने वाली पार्टी को अपेक्षाकृत कम समय में इतनी बड़ी हार का सामना कैसे करना पड़ सकता है।

जनभावना को समझने में फेल हुई टीएमसी 
सूत्रों के अनुसार, उनका आकलन चुनावी गणित से परे है। ऐसा माना जाता है कि रॉय ने आरजी कर आंदोलन के दौरान पार्टी की कथित तौर पर जनभावना को समझने में असमर्थता की ओर इशारा किया था जिसमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बाद बड़े पैमाने पर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके विचारों से परिचित लोगों के अनुसार, रॉय का मानना ​​है कि उस समय सड़कों पर अभूतपूर्व भीड़ ने ऐसे राजनीतिक संकेत दिए थे जिन्हें पार्टी पर्याप्त रूप से समझने में विफल रही। 

पार्टी ढांचे के भीतर “भ्रष्टाचार 
उन्होंने निजी बातचीत में पार्टी ढांचे के भीतर “भ्रष्टाचार के संस्थागत रूप” पर भी चिंता व्यक्त की है। ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रॉय पार्टी के भीतर कोई हाशिए पर रहने वाली आवाज नहीं हैं। कांग्रेस की परंपरा से जुड़े एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और कभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के करीबी माने जाने वाले रॉय बाद में टीएमसी में शामिल हुए और संसद में उसके प्रमुख चेहरों में से एक बन गए। संवैधानिक मामलों, संसदीय प्रक्रियाओं और संघीय मुद्दों पर अपनी पकड़ के लिए जाने जाने वाले रॉय, वर्तमान में राज्यसभा में टीएमसी के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और उन्होंने छह दशकों में पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में कई बदलाव देखे हैं।

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भारत-नेपाल के बीच अब चाय बनी दरार, सख्ती के बाद शुरू हो गया नया विवाद

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नई दिल्ली/काठमांडू, एजेंसी। भारत-नेपाल   के बीच इन दिनों चाय को लेकर नया विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। नेपाल का आरोप है कि भारत लगातार नेपाली चाय के आयात पर सख्ती बढ़ा रहा है, जबकि भारत का कहना है कि दार्जिलिंग चाय के नाम और गुणवत्ता की सुरक्षा जरूरी है। अब इस पूरे विवाद को दोनों देशों के बीच “चाय की जंग” कहा जाने लगा है।

क्या है पूरा मामला?
नेपाल बड़ी मात्रा में ऑर्थोडॉक्स चाय भारत को निर्यात करता है। नेपाल की बड़ी चाय मंडियां झापा और इलाम क्षेत्रों में हैं। नेपाल का दावा है कि उसकी करीब 80 प्रतिशत चाय भारतीय बाजार में बिकती है। हर साल लगभग 10 मिलियन किलोग्राम चाय भारत भेजी जाती है।  लेकिन भारत ने हाल के वर्षों में नेपाली चाय पर कई नियम और टेस्टिंग सख्त कर दिए हैं। अप्रैल 2024 में भारतीय अधिकारियों ने नेपाली चाय की 100 प्रतिशत सैंपल टेस्टिंग अनिवार्य कर दी। यानि हर खेप की जांच के बाद ही उसे भारतीय बाजार में प्रवेश मिल सकता है। इसके बाद मई 2026 से कुछ नए प्रतिबंध भी लागू किए गए। ममता बैनर्जी Mamata Banerjee ने भी कहा था कि नेपाल से बिना शुल्क आने वाली चाय दार्जिलिंग ब्रांड को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से नेपाली चाय को दी गई कर छूट वापस लेने की मांग की थी।

दार्जिलिंग चाय क्यों बनी विवाद ?
Darjeeling tea दुनिया की सबसे प्रसिद्ध चायों में गिनी जाती है। इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और ब्रांड वैल्यू बहुत बड़ी है। भारतीय पक्ष का आरोप है कि कुछ व्यापारी नेपाली चाय को दार्जिलिंग चाय के नाम से बेचते हैं, जिससे असली दार्जिलिंग ब्रांड की पहचान कमजोर होती है। इसी वजह से भारत गुणवत्ता और ब्रांड सुरक्षा के नाम पर सख्ती कर रहा है। नेपाल के चाय कारोबारी और अधिकारी भारत के कदमों को “व्यापारिक दबाव” बता रहे हैं। उनका कहना है कि भारत जानबूझकर देरी करता है। बार-बार टेस्टिंग से व्यापार प्रभावित होता है और यह नेपाल-भारत व्यापार संधि की भावना के खिलाफ है। नेपाल के कारोबारी उदय चपागाईं का कहना है कि अगर भारत को वास्तव में गुणवत्ता की चिंता होती, तो वह सीमा पर आधुनिक लैब बना सकता था। उनके अनुसार भारत का असली मकसद नेपाली चाय की प्रतिस्पर्धा को रोकना है।

असली विवाद बाजार हिस्सेदारी
नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के नेताओं का मानना है कि असली विवाद बाजार हिस्सेदारी का है। विशेषज्ञों के अनुसार दार्जिलिंग चाय का उत्पादन सीमित है और वैश्विक मांग बहुत ज्यादा है। नेपाली ऑर्थोडॉक्स चाय सस्ती और ज्यादा उपलब्ध है। ऐसे में नेपाली चाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से जगह बना रही है।नेपाल का मानना है कि भारत को डर है कि नेपाली चाय की अलग पहचान बनने से दार्जिलिंग चाय का बाजार कमजोर पड़ सकता है।

नेपाल की भारत पर बड़ी निर्भरता
नेपाल की चाय इंडस्ट्री काफी हद तक भारत पर निर्भर है। नेपाल के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार नेपाल हर साल 27.5 मिलियन किलोग्राम चाय पैदा करता है जिससे करीब 60,000 लोगों को रोजगार मिलता है। 20,000 हेक्टेयर जमीन पर चाय की खेती होती है। नेपाल के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए भारतीय प्रतिबंध वहां के किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं।

बढ़ सकता तनाव 
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ता है तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। नेपाली किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है। दार्जिलिंग और नेपाली चाय के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा और गहरे आर्थिक संबंधों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। 

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छत्तीसगढ़

रायपुर : ’‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय’

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’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक’
’मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा – जनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं’

’‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय’
’‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय’

रायपुर/नई दिल्ली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ श्री चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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