नई दिल्ली,एजेंसी। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर आज यानी, 7 अगस्त से 25% टैरिफ लागू हो गया है। वहीं 25% एक्स्ट्रा टैरिफ 27 अगस्त से लागू होगा। अभी भारतीय सामानों पर करीब 10% टैरिफ लगता था। नए टैरिफ लगने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी, GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने कहा- टैरिफ के कारण अमेरिका को होने वाले निर्यात में 40-50% की कमी आ सकती है।
हालांकि भारत के एक्सपोर्टर्स ने कहा- माल बेचने के किए उनके पास अमेरिका के अलावा दुनिया भर के बाजार हैं। ज्वेलरी जैसे कई सेक्टर्स में भारत का अमेरिका को निर्यात टैरिफ कम होने की वजह ज्यादा है। अब एक्सपोर्टर्स दुनिया के बाकी बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।
1. इंजीनियरिंग गुड्स: सबसे ज्यादा निर्यात
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में 19.16 बिलियन डॉलर (करीब 1.68 लाख करोड़ रुपए) के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए। इसमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, और अन्य औद्योगिक उपकरण शामिल हैं।
मौजूदा टैरिफ: 5% +10% = 15%, कई इंजीनियरिंग उत्पादों को सेक्शन 232 के तहत छूट भी। अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ ऐलान से पहले इस कैटेगरी पर टैरिफ करीब 5% था।
उदाहरण: 100 डॉलर का पार्ट अमेरिका में 115 डॉलर में बिकता है।
टैरिफ के बाद:
नया टैरिफ: 5%+25%= 30%
नई लागत: 100 डॉलर का सामान अब 130 डॉलर में पड़ेगा।
असर: कीमत बढ़ने से निर्यात में 10-15% की कमी संभव।
प्रभावित कंपनियां: भारत फोर्ज, टाटा स्टील, और L&T आदि।
चुनौती: लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। छोटे और मध्यम उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो इंजीनियरिंग गुड्स के 40% निर्यात में योगदान देते हैं।
क्या कर सकता है भारत?
यूरोप (जर्मनी, UK) और ASEAN देशों (सिंगापुर, मलेशिया) में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है। भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
इंजीनियरिंग गुड्स के लिए PLI स्कीम का विस्तार करके उत्पादन लागत को कम करना, ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।
टैरिफ के कारण शिपमेंट में कमी आने की संभावना
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट एंड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा- अगर अमेरिका अपनी योजना के साथ आगे बढ़ता है और स्टील, एल्यूमीनियम और उनके डेरिवेटिव्स पर 50% टैरिफ लगाता है तो इन प्रमुख वस्तुओं का निर्यात महंगा हो जाएगा।
इससे शिपमेंट में कमी आने की संभावना है। हमें लगभग तीन महीने तक इंतजार करना होगा यह देखने के लिए कि चीजें कैसे आगे बढ़ती हैं। इसके बाद हम कोई रणनीति बना सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में ऊंचे टैरिफ की आशंका के चलते ऑर्डर पहले से ही ज्यादा ले लिए गए थे।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन पर ज्यादा असर
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में अमेरिका को 14 बिलियन डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया था। इसमें स्मार्टफोन, खासतौर पर आईफोन का बड़ा हिस्सा था। भारत अमेरिका का आईफोन का सबसे बड़ा सप्लायर है।
अप्रैल में जब डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार टैरिफ का ऐलान किया था उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स पर एवरेज 0.41% का टैरिफ लगता था।
उदाहरण: 100 डॉलर का स्मार्टफोन अमेरिका में 100.41 डॉलर में बिकता था।
अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।
टैरिफ के बाद: अभी इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट है। जब तक सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा नहीं होती तब तक अमेरिका को एपल, सैमसंग जैसे स्मार्टफोन्स के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सेक्शन 232 अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है। यदि आयात देश की सुरक्षा के लिए खतरा है, तो वाणिज्य विभाग जांच करता है और टैरिफ की सिफारिश करता है।
सेक्शन 232 की समीक्षा के बाद टैरिफ पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा के बाद अगर 25% का नया टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारत से एक्सपोर्ट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे और निर्यात पर इसका असर पड़ेगा।
नया टैरिफ: 25%
नई लागत: 100 डॉलर का स्मार्टफोन करीब 125 डॉलर में पड़ेगा।
असर: कीमत में 25% की बढ़ोतरी, जिससे मांग में 20-25% की कमी संभव।
प्रभावित कंपनियां: एपल और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां।
चुनौती: वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों से कड़ा मुकाबला।
क्या कर सकता है भारत?
स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर्स को टैरिफ से छूट बनाए रखने के लिए बातचीत करना।
घरेलू बाजार को मजबूत करने और नए ब्रांड्स विकसित करने पर जोर देना।
3. फार्मा: 250% टैरिफ लगाने की धमकी
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में अमेरिका को 10.52 बिलियन डॉलर यानी, करीब 92 हजार करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात किया था। ये अमेरिकी प्रिस्क्रिप्शन का करीब 40% हिस्सा है। अगर ये लागू होता है तो अमेरिका और भारत दोनों पर असर पड़ेगा।
मौजूदा टैरिफ: 0% (फार्मा को अभी तक छूट थी)।
उदाहरण: 100 डॉलर की दवा की कीमत 100 डॉलर ही है, क्योंकि कोई टैरिफ नहीं है।
टैरिफ के बाद: अभी फार्मा को छूट है, लेकिन ट्रम्प ने 18 महीने में 150% और बाद में 250% टैरिफ की धमकी दी है।
अगर 25% टैरिफ लागू हुआ: 100 डॉलर की दवा की कीमत 125 डॉलर हो जाएगी।
प्रभावित कंपनियां: सन फार्मा, डॉ. रेड्डी, सिप्ला, ल्यूपिन।
चुनौती: अगर टैरिफ लागू हुआ, तो वियतनाम जैसे देशों से मुकाबला करना पड़ेगा।
क्या कर सकता है भारत?
जेनेरिक दवाओं की कीमतों को कम रखने के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर जोर देना।
यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक बाजारों में निर्यात बढ़ाना।
4. जेम्स एंड ज्वेलरी: टैरिफ से पहले एक्सपोर्ट डबल
पहले की स्थिति: भारत ने 2024 में अमेरिका को 9.94 बिलियन डॉलर (करीब 87 हजार करोड़) के रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट किए थे। ये अमेरिकी हीरा आयात का 44.5% है।
मौजूदा टैरिफ: ज्वेलरी (6%+10%=16%), डायमंड (0%+10%=10%)। अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ ऐलान से पहले ज्वेलरी पर 6% और डायमंड पर 0% टैक्स लगता था।
उदाहरण: 100 डॉलर की ज्वेलरी अमेरिका में 116 डॉलर में बिकती है।
अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।
टैरिफ के बाद:
नया टैरिफ: ज्वेलरी (6%+25%=31%), डायमंड (0%+25%=25%)।
नई लागत: 100 डॉलर की ज्वेलरी अब 131 डॉलर में पड़ेगी।
असर: कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी संभव।
प्रभावित कंपनियां: राजेश एक्सपोर्ट्स, टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स।
चुनौती: अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं, जिससे लाखों कारीगरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
क्या कर सकता है भारत?
भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करना।
यूरोपीय बाजारों में डायमंड निर्यात बढ़ाना।
एक्सपोर्टर बोले- हमसे ज्यादा असर अमेरिका पर
जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल में सूरत रीजन के प्रेसिडेंट जयंती सावलिया ने कहा- दुनियाभर के ज्वेलरी मार्केट में हमारी हिस्सेदारी 6% ही है। हमारे पास अभी 94% मार्केट के लिए जगह है। यूएस मार्केट में अभी तक एक्सपोर्ट हम इसलिए कर रहे थे क्योंकि टैरिफ कम था।
अब सीधा 25% टैरिफ लगेगा, लेकिन ये धीरे-धीरे स्टेबल भी हो जाएगा। हमसे ज्यादा असर तो अमेरिका पर ही होगा। उन्होंने ये भी कहा कि टैरिफ बढ़ाए जाने की खबर से एक्सपोर्ट डबल-ट्रिपल हो गया है। 7 अगस्त से पहले लोग माल बेचकर टैरिफ से बचना चाहते हैं। इससे अगले 3-4 महीने तक माल की रिक्वायरमेंट नहीं रहेगी।
हालांकि अभी आगे क्या सिचुएशन होगी, इसके बारे में कोई नहीं बता सकता।
5. टेक्सटाइल: कपड़ों की मांग पर ब्रेक
पहले की स्थिति : भारत ने 2024 में अमेरिका को 10 बिलियन डॉलर, यानी करीब 87 हजार करोड़ के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट किए थे। इसमें रेडीमेड गार्मेंट से लेकर कॉटन यार्न और कारपेट शामिल है।
मौजूदा टैरिफ: 10%+10%= 20%, अप्रैल 2025 में 10% टैरिफ ऐलान से पहले टेक्सटाइल पर 10-15% टैक्स लगता था।
उदाहरण: 100 का कपड़ा अमेरिका में 120 डॉलर में बिकता था।
अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।
टैरिफ के बाद:
नया टैरिफ: 10%+25%=35%
नई लागत: 100 डॉलर का कपड़ा अब 135 डॉलर में पड़ेगा।
असर: कीमत में 25% की बढ़ोतरी, जिससे मांग में 20-25% की कमी संभव।
प्रभावित कंपनियां: केपीआर मिल, अरविंद, वर्धमान टेक्सटाइल्स।
चुनौती: बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा।
क्या कर सकता है भारत?
भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करना।
घरेलू ब्रांड्स और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर ध्यान देना।
बिजनेसमैन बोले- टैरिफ से पूरा ट्रेड डिस्टर्ब हो गया
गुजरात बेस्ड टेक्सटाइल बिजनेसमैन आशीष गुजराती ने कहा- ओवरऑल इंडस्ट्री पर इसका असर तो होने ही वाला है। होम टेक्सटाइल्स का सबसे बड़ा बायर US ही है। इस सेगमेंट में भारत के टोटल एक्सपोर्ट का 35% हम US एक्सपोर्ट करते हैं।
मुझे लगता है 2 -3 महीने में इसका सॉल्यूशन भी आ जाना चाहिए। अभी कोई क्लैरिटी नहीं है। 7 तारिख से टैरिफ लग रहा है तो सब पैनिक में ही हैं। क्या होगा-कैसे होगा- आगे डेट एक्सटेंड होगी कि नहीं। इससे तो पूरा ट्रेड डिस्टर्ब हो गया है।
6. ऑटोमोबाइल: ऑटो पार्ट्स एक्सपोर्ट पर असर
पहले की स्थिति : 2024 में भारत ने अमेरिका को केवल 8.9 मिलियन डॉलर की पैसेंजर कार्स एक्सपोर्ट कीं, जो देश के कुल 6.98 बिलियन डॉलर के निर्यात का सिर्फ 0.13% है।
वहीं अमेरिका को सिर्फ 12.5 मिलियन डॉलर के ट्रक निर्यात किए गए, जो भारत के वैश्विक ट्रक निर्यात का 0.89% है। ये आंकड़े इस सेक्टर की सीमित जोखिम को दर्शाते हैं।
सबसे ज्यादा ध्यान देने वाला सेगमेंट है ऑटो पार्ट्स। 2024 में भारत ने अमेरिका को 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 19 हजार करोड़ रुपए) के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए, जो इसके वैश्विक ऑटो पार्ट्स निर्यात का 29.1% है।
अमेरिका ने पिछले साल वैश्विक स्तर पर 89 बिलियन डॉलर के ऑटो पार्ट्स आयात किए, जिसमें मेक्सिको का हिस्सा 36 बिलियन डॉलर, चीन का 10.1 बिलियन डॉलर, और भारत का सिर्फ 2.2 बिलियन डॉलर था।
मौजूदा टैरिफ: 25%, ट्रंप प्रशासन ने मई 2025 से भारत से आयात होने वाले पैसेंजर वाहनों और कुछ चुनिंदा ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% टैरिफ लगाया है।
टैरिफ के बाद :
नया टैरिफ: 25%
प्रभावित कंपनियां: टाटा मोटर्स, भारत फोर्ज, समवर्धन मदरसन।
चुनौती: वियतनाम और मेक्सिको जैसे देशों से कड़ा मुकाबला, जो सस्ते विकल्प दे सकते हैं।
क्या कर सकता है भारत?
नए बाजार जैसे यूरोप और ASEAN देशों में निर्यात बढ़ाना।
लागत कम करने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का विस्तार।
नई दिल्ली, एजेंसी। BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। इससे दो दिन पहले रूस ने भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि की थी।
जिनपिंग का यह 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत का पहला दौरा होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद है।
15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात मानी थी।
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS समिट आयोजित होगा। इसमें चीन और रूस समेत 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे।
जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मोदी से मुलाकात की थी।
गलवान हिंसा के बाद बिगड़े थे भारत-चीन के रिश्ते
भारत और चीन के रिश्ते 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह बिगड़ गए थे। इस झड़प में दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव काफी बढ़ गया।
हालांकि, इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की कई मौकों पर मुलाकात हुई है। दोनों नेता दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान आमने-सामने आए हैं। पिछले साल चीन में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
इस बार नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है।
भारत और चीन के अधिकारी पिछले कई महीनों से दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल 24 अगस्त को चीन गए थे।
NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
सीमा विवाद समेत कई मुद्दे भारत के एजेंडे में
भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत
इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं।
भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है।
नोएडा, एजेंसी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई। बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। ऐसे में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’
दरअसल, 4 सितंबर को नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आर के सिसोदिया ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ नोटिस जारी किया था। इसमें 5 लाख रुपए का बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। इसके बाद छात्र ने मंगलवार को वीडियो जारी कर कहा था- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मुझे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से CJI की अध्यक्षता वाली बेंच को यह बात बताई। उन्होंने बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने एक छात्र को नोटिस जारी कर पूछा कि शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया।
यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट बोला- जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगेंगे
वकील भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग किया जा रहा है। इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। पहले अवमानना की गई और फिर उसे वापस लिया गया। इस अवमानना को इस तरह सुधारा नहीं जा सकता।
यह कोर्ट की गरिमा की अवमानना है। नोएडा और यूपी के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने भरोसा दिलाते हुए कहा- हम जिला मजिस्ट्रेट से इस पर जवाब मांगेंगे।
तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है
4 सितंबर को नोटिस दिया, अगले दिन रद्द कर दिया
छात्र अक्षत त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं। वह गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) से BA-LLB कर रहे हैं। अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। 4 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया।
कोर्ट ने नोटिस में कहा गया था- यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। वह छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे। ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। इसके लिए उनसे 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा जाए। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
ACP रवि शंकर ने बताया-
जांच के दौरान अक्षत त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पता चला था कि वह जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने गया था। पुलिस ने वॉट्सऐप के जरिए छात्र को नोटिस भेजा था। 5 सितंबर को नोटिस कैंसिल कर दिया गया। छानबीन में पता चला कि छात्र उस दौरान वहां मौजूद नहीं था।
ACP ने बताया कि इससे पहले नवंबर में छात्र ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए वीडियो बनाया था, जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद वह गायब हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे तलाशा था।
छात्र ने वीडियो जारी करके कहा- क्या सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना जुर्म
छात्र ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है। क्या लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना या पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? इसी मामले में ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट की तरफ से मुझे नोटिस मिला है। इसमें 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड देने को कहा गया है। मैं छात्र हूं और मेरी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है?
नोटिस में आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल होकर मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया। सवाल है कि सरकार की नीति की आलोचना करना, सरकार से सवाल पूछना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना भड़काना कैसे हो गया? मुझ पर लगाए गए आरोपों का आधार और प्रमाण क्या है?
मैं 3 महीने से विश्वविद्यालय गया ही नहीं हूं। 20 जुलाई के प्रदर्शन से करीब डेढ़ महीने पहले ही अपने घर इलाहाबाद आ चुका था। ऐसे में मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को भड़काया कैसे? मैं इस कार्रवाई की निंदा करता हूं और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।
9 दिन पहले SC जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की थीं
सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन पर केस चलता रहेगा। ये FIR 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद दर्ज की गई थीं।
रायबरेली, एजेंसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रायबरेली में बुधवार को बैठक में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को अपने मोबाइल पर टूटी सड़कें दिखाईं। राहुल ने डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटिंग कमेटी (दिशा) की मीटिंग में जर्जर सड़कों और गड्ढों की तस्वीरें दिखाकर PWD अधिकारियों और डीएम से पूछा कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है?
राहुल ने कहा कि जब सरकार फंड दे रही है तो काम क्यों नहीं हो रहा है? आप लोग क्या कर रहे हैं? इस मीटिंग में ऊंचाहार से BJP विधायक मनोज पांडेय, एमएलसी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
कलेक्ट्रेट में करीब ढाई घंटे बैठक से पहले राहुल ने सुबह जनता दरबार लगाया, जहां महिला कांग्रेस नेता ने उन्हें राखी बांधी। राहुल ने यहां सपा नेताओं ने भी मुलाकात की।
कार्यक्रमों के बाद राहुल लखनऊ रवाना हो गए, जहां से वे दिल्ली जाएंगे। 2024 में सांसद बनने के बाद राहुल का यह 8वां रायबरेली दौरा था। इससे पहले वे 19-20 मई को दो दिवसीय दौरे पर आए थे।
राहुल मंगलवार दोपहर दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे थे। पहली बार में विमान लैंड नहीं कर पाया था। 25 मिनट हवा में चक्कर लगाने के बाद दूसरे प्रयास में विमान ने लैंडिंग की थी।
रायबरेली में सर्राफा कारोबारी के घर बैठक के दौरान राहुल ने बच्ची से हाथ मिलाया। महिलाओं ने उन्हें बुके दिया।
रायबरेली में राहुल गांधी के जनता दरबार के दौरान भुएमऊ गेस्ट हाउस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
रायबरेली में राहुल गांधी ने 3 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें बारात घर, ट्रांसफॉर्मर और सड़कें शामिल हैं।
सपा विधायकों ने प्रदर्शन किया, पोस्टर लहराए
रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी, श्याम सुंदर भारती ने दिशा की मीटिंग के दौरान हॉल के बाहर प्रदर्शन किया। हालांकि, राहुल के पहुंचने से पहले पुलिस ने उनसे पोस्टर और बैनर छीन लिए।
पोस्टर पर लिखा था- स्कूल बंद, फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे, जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। जिले में आम लोगों की समस्याएं जस की तस हैं, तो ऐसे में दिशा की बैठक का क्या औचित्य है?
रायबरेली में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी और बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लेकर दिशा बैठक हॉल के बाहर प्रदर्शन किया।
सांसद-जनप्रतिनिधि अफसरों से सरकारी योजनाओं को लेकर सवाल करते हैं। जनता को योजनाओं का फायदा मिल रहा है या नहीं, काम में देरी को लेकर जवाब मांगते हैं।
‘दिशा’ (DISHA) बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के सांसद करते हैं। इसमें जिले के सभी विधायक, डीएम, एसपी और सभी सरकारी विभागों के बड़े अफसर एक साथ बैठते हैं।
राहुल ने मंत्री के सामने दिखाए खराब सड़कों के वीडियो
दिशा बैठक के दौरान अपने मोबाइल में राहुल गांधी ने रायबरेली की सड़कों के गड्ढे दिखाए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे भी वीडियो देखते रहे। राहुल गांधी ने PWD विभाग के अधिकारियों और डीएम से इन सड़कों की बदहाली को लेकर सवाल पूछा। राहुल ने पूछा कि जिले की सड़कें इतनी खराब क्यों हैं? जब सरकार फंड दे रही है तो सड़कों पर काम क्यों नहीं हो रहा है। पूरे जिले के मुख्स मार्ग और ग्रामीण लिंक रोड बहुत खराब हैं। इसे लेकर क्या कर रहे हैं?