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छत्तीसगढ़

एसईसीएल में हर्षोल्लास से मनाया गया 78वां स्वतंत्रता दिवस

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बिलासपुर। एसईसीएल में 78वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वसंत विहार खेल मैदान एसईसीएल बिलासपुर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डा. प्रेम सागर मिश्रा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर, परेड की सलामी ली।

इस अवसर पर अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक ने परेड कमांडर व्ही. दक्षिणामूर्ति एवम डी.पी दिवाकर के नेतृत्व में आयोजित मुख्य परेड का निरीक्षण किया, परेड निरीक्षण के समय मुख्य अतिथि के साथ अशोक कुमार सुरक्षा प्रमुख उपस्थित रहे।

परेड में एसईसीएल सुरक्षा विभाग के दो प्लाटून का नेतृत्व विजय गुप्ता एवम प्रकाश द्विवेदी ने किया। प्लाटून क्रमांक 3 का नेतृत्व भाव्या रमेश, डीएवी स्कूल, प्लाटून क्रमांक 4 कुमारी कविता कश्यप, प्लाटून क्रमांक 5 का नेतृत्व सविता जांगड़े एवं प्लाटून क्रमांक 6 का नेतृत्व मास्टर अभय ने किया। परेड में बैंड प्लाटून भी था ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डा. प्रेम सागर मिश्रा ने समस्त उपस्थितों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें देते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकसित भारत विजऩ 2047 के सपने को साकार करने में एक अहम भूमिका निभानी है। पिछले वर्ष आप सभी के कठिन परिश्रम से कंपनी ने अपने इतिहास का सर्वाधिक उत्पादन, परेशान एवं लाभांश दर्ज किया। हाल ही में जारी worldatlas.com की टॉप 10 खदानों की सूची में एसईसीएल की गेवरा एवं कुसमुंडा खदानों पूरे विश्व में दूसरा और चौथा स्थान मिला है जिसने पूरे भारत देश, छत्तीसगढ़ राज्य एवम एसईसीएल को दुनिया में एक नयी पहचान दिलाई है। अंडरग्राउंड माइनिंग नैसर्गिक रूप से पर्यावरण हितैषी होती है और कंपनी ने आने वाले समय में भूमिगत उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है जिसके लिए कंटीन्यूअस माइनर तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। हम अभी 16 कंटीन्यूअस माइनर लगा चुकी है और ऐसी कुल 58 मशीन लगाने का हमारा लक्ष्य है। पर्यावरण के क्षेत्र में वृक्षारोपण, ग्रीन क्रेडिट एवं प्रतिपूरक वनरोपण की सहायता से एसईसीएल एक हरित कोयलांचल के सपने को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है।
एसईसीएल के सुश्रुत योजना के तहत कंपनी द्वारा कोयलांचल के 40 बच्चों को कंपनी द्वारा नीट मेडिकल की निशुल्क आवासीय कोचिंग प्रदान की गई थी और आज ये अत्यंत ही हर्ष का विषय है कि उन 40 में से 39 बच्चों ने यह परीक्षा पास कर ली है और ये बच्चे आगे चलकर अपना डॉक्टर बनने का सपना पूरा करेंगे और स्वस्थ भारत के सपने को साकार करेंगे। अमृत फार्मेसी के माध्यम से एसईसीएल कोयलांचल में जन-जन तक किफ़ायती दामों पर गंभीर बीमारियों की दवा पहुंचाने का काम कर रही है। मिशन नचिकेता के तहत एसईसीएल अपने सभी कर्मियों में लिखने-पढऩे, स्किल डवलपमेंट और नॉलेज शेरिंग की कार्यसंस्कृति को भी बढ़ावा दे रही है।

इसके पूर्व एसईसीएल प्रशासनिक भवन प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में एसईसीएल संचालन समिति के हरिद्वार सिंह (एटक), विभिन्न विभागाध्यक्ष, श्रम संघ प्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति में निदेशक (कार्मिक) बिरंची दास ने मुख्यालय प्रशासनिक भवन स्थित शहीद स्मारक व बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर प्रतिमा व खनिक प्रतिमा पर माल्यार्पण किए उपरांत ध्वजारोहण किए एवं सुरक्षा प्रहरियों की टुकड़ी, जिसका नेतृत्व रविशंकर आदिले ने किया, द्वारा आयोजित परेड की सलामी ली। इस अवसर राष्ट्रीय गान एवं कोलइण्डिया कारपोरेट गीत बजाया गया। उन्होंने वीर शहीदों व श्रमवीरों को स्मरण करते हुए कहा कि एसईसीएल की उपलब्धियाँ हमारे कुशल श्रमिकों की मेहनत और लगन का हीं प्रतिफल है। उन्होंने सभी से नियम एवं विधान का पालन करते हुए कंपनी हित व देशहित में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया।

वसंत विहार खेल मैदान के मुख्य समारोह में मुख्य रूप से निदेशक तकनीकी (संचालन) एसएन कापरी, निदेशक तकनीकी (योजना/परियोजना) फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (कार्मिक) बिरंची दास, एवं निदेशक (वित्त) डी सुनील कुमार, एसईसीएल संचालन समिति से हरिद्वार सिंह (एटक), सीएमओएआई से एके पांडे, कौंसिल अध्यक्ष ओपी नवरंग, श्रद्धा महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमती पूनम मिश्रा, उपाध्यक्षा श्रीमती संगीता कापरी, श्रीमती अनीता फ्रैंकलिन, श्रीमती इप्सिता दास, श्रीमती हसीना कुमार, विभिन्न विभागाध्यक्ष, श्रमसंध प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, एवं स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

समारोह में अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डा. प्रेम सागर मिश्रा ने अपने निदेशक मण्डल व श्रद्धा महिला मण्डल की पदाधिकारियों के साथ सामूहिक रूप से कबूतर एवं गुब्बारे आकाश में छोडक़र शांति का संदेश दिया।

समारोह में डीएव्ही पब्लिक स्कूल, लोयला स्कूल, होली नर्सरी स्कूल, ड्रीमलैंड एवं कृष्णा पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा विविध देशभक्ति गीत-नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के करकमलों से उत्कृष्ठ कवायद दल, सर्वोत्कृष्ठ कवायद दल एवं उत्तम पोशाक के लिए परेड में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।

समारोह में उद्घोषणा का दायित्व श्री शेख जाकिर हुसैन मुख्य प्रबंधक (पर्यावरण) एवं सुरक्षा निरीक्षक श्री एम.पी. जांगड़े ने निभाया।

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कोरबा

12 साल का कार्यकाल पूरा, भाजपा महिला मोर्चा ने सरकार की उपलब्धियां बताई

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कोरबा। भाजपा महिला मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 4399 दिनों के कार्यकाल व केन्द्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर उपलब्धियों को साझा किया। भाषण, पेटिंग व रंगोली प्रतियोगिताएं भी हुईं। जिसमें प्रतिभागियों ने कला व विचारों के जरिए पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं व उपलब्धियां लोगों तक पहुंचाई।

राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का संकल्प दोहराया। भाजपा जिला कार्यालय पंडित दीनदयाल कुंज टीपी नगर कोरबा में आयोजित कार्यक्रम की मुख्य वक्ता महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री संतोषी दीवान और अध्यक्षता महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष प्रीति स्वर्णकार ने की। वक्ताओं ने कहा पिछले 12 वर्षों में विकास, सुशासन, महिला सशक्तिकरण, गरीब कल्याण, वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नए आयाम बने हैं। योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा है। देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रतिभागियों को महापौर संजू देवी राजपूत ने पुरस्कृत किया।

इस मौके पर भाजपा जिला महामंत्री संजय शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष अजय पांडेय, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मीना शर्मा, ज्योति वर्मा, रुक्मणी नायर, अर्जुन गुप्ता, नीरज ठाकुर, संजय राठौर, वैशाली रत्नपारखी, महिला मोर्चा जिला महामंत्री अनुसुईया राठौर, स्वाति कश्यप मौजूद रहीं। समापन विकसित भारत के संकल्प को साकार करने और जनसेवा के लिए समर्पित भाव से काम करने के आह्वान के साथ हुआ।

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कोरबा

कोरबा में चूहे के बिल से निकले सांप ने डसा:परिवार ने समझा कीड़े का काटना, 11 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान मौत

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कोरबा। कोरबा जिले के दर्री प्रगति नगर क्षेत्र में सांप के डसने से 11 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। शनिवार तड़के हुई इस घटना में परिजनों ने शुरुआत में इसे किसी कीड़े के काटने की सामान्य घटना समझा, लेकिन कुछ ही देर में बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी।

अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका की पहचान वैष्णवी उर्फ सन्नू (11) के रूप में हुई है, जो कक्षा तीसरी की छात्रा थी।

सुबह 4 बजे कान में दर्द की शिकायत

मृतका के पिता राकेश महतो ने बताया कि शुक्रवार रात पूरा परिवार एक ही कमरे में सो रहा था। शनिवार सुबह करीब 4 बजे वैष्णवी अचानक उठी और कान के पास किसी चीज के काटने की शिकायत करने लगी। उसने कमरे में मौजूद चूहे के बिल की ओर इशारा किया, जहां कुछ हलचल दिखाई दे रही थी।

परिजनों ने इसे चींटी या किसी अन्य कीड़े का काटना समझकर ज्यादा गंभीरता नहीं दिखाई।

तबीयत बिगड़ने पर बढ़ी चिंता

कुछ देर बाद वैष्णवी की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। कान के पास सूजन बढ़ गई और उसे बेचैनी महसूस होने लगी। लक्षण गंभीर होते देख पिता को सांप के डसने की आशंका हुई। इसके बाद परिवार बच्ची को तत्काल दर्री के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा।

मेडिकल कॉलेज ले जाते समय हालत हुई गंभीर

निजी अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद डॉक्टरों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी हालत और खराब हो गई।

मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद वैष्णवी को बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, इलाज के दौरान वैष्णवी ने दम तोड़ दिया।

मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, इलाज के दौरान वैष्णवी ने दम तोड़ दिया।

मौसम बदलने से बढ़ रही हैं सांप निकलने की घटनाएं

स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी ने बताया कि मौसम में बदलाव और बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भरने लगता है, जिससे वे रिहायशी इलाकों की ओर निकल आते हैं। ऐसे समय में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

सांप के डसने पर समय बर्बाद न करें

जितेंद्र सारथी ने कहा कि सांप के डसने को अक्सर लोग कीड़े या चींटी के काटने की घटना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि सांप के डसने की आशंका होने पर मरीज को 30 मिनट के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो।

उन्होंने झाड़-फूंक और घरेलू उपचार में समय बर्बाद नहीं करने की अपील की। साथ ही घर के आसपास साफ-सफाई रखने, चूहों के बिल बंद करने, रात में मच्छरदानी का उपयोग करने और जमीन पर सोने से बचने की सलाह दी है।

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कोरबा

कोरबा-कटघोरा मार्ग पर नियमों की अनदेखी:खुले ट्रकों से उड़ रही फ्लाई ऐश, बढ़ा प्रदूषण और हादसों का खतरा, प्रशासन, प्रदूषण बोर्ड पर निष्क्रियता का आरोप

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कोरबा। कोरबा-कटघोरा मार्ग पर पावर प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राखड़) का परिवहन खुलेआम नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है। बिना ढके ट्रकों में राखड़ ढोए जाने से सड़क पर प्रदूषण फैल रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

ट्रकों से उड़ने वाली राखड़ राहगीरों की आंखों और श्वसन तंत्र में जाती है

ट्रकों से उड़ने वाली राखड़ राहगीरों की आंखों और श्वसन तंत्र में जाती है

नियमों को ताक पर रखकर हो रहा परिवहन

नियमानुसार फ्लाई ऐश का परिवहन करने वाले वाहनों को पूरी तरह तिरपाल से ढकना अनिवार्य है, ताकि राखड़ हवा में न उड़े। लेकिन कोरबा-कटघोरा मार्ग पर चल रहे अधिकांश ट्रकों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। कई वाहन केवल औपचारिकता के तौर पर तिरपाल लगाते हैं, जो रास्ते में हवा से हट जाता है।

उड़ती राखड़ से बढ़ रहे हादसे

स्थानीय लोगों के अनुसार तेज रफ्तार ट्रकों से उड़ने वाली राखड़ सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। राखड़ आंखों में जाने से बाइक सवारों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं।

गांवों में बढ़ रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

सड़क किनारे बसे गांवों के लोग लगातार उड़ती धूल और राखड़ के बीच रहने को मजबूर हैं। फ्लाई ऐश के महीन कण हवा में घुलकर लोगों के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इसके कारण दमा, सांस की एलर्जी, खांसी और संक्रमण जैसी बीमारियों के मामलों में वृद्धि हो रही है।

अधिकांश ट्रक केवल नाममात्र का तिरपाल इस्तेमाल करते हैं, जो हवा से उड़ जाता है।

अधिकांश ट्रक केवल नाममात्र का तिरपाल इस्तेमाल करते हैं, जो हवा से उड़ जाता है।

आंधी के बाद राख की परत से ढक जाता है इलाका

ग्रामीणों का कहना है कि आंधी-तूफान के बाद हालात और खराब हो जाते हैं। उड़ती राखड़ पूरे क्षेत्र में फैल जाती है और घरों, दुकानों, स्कूलों तथा अन्य भवनों पर राख की परत जम जाती है। इससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

शिकायतों के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

स्थानीय निवासियों ने उड़ती राखड़ और सड़क किनारे जमा ढेरों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा जिला प्रशासन से कई बार शिकायतें की हैं। हालांकि, हर बार केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है।

ओवरलोड ट्रकों और बिना ढके परिवहन पर कोई कार्रवाई या चालान नहीं किया जा रहा है, जिससे पावर प्लांट संचालक और ट्रांसपोर्टर मनमानी कर रहे हैं।

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