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4 राज्यों के 49 जिले मिलाकर भीलप्रदेश बनाने की मांग:MP-राजस्थान समेत 4 राज्यों के आदिवासी बांसवाड़ा पहुंचे, कहा-कोई माई का लाल नहीं रोक सकता

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बांसवाड़ा, एजेंसी। देश के 4 राज्यों के 49 जिले मिलाकर भील प्रदेश बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस मांग को लेकर गुरुवार को बासंवाड़ा के मानगढ़ धाम में आयोजित महारैली में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित मानगढ़ धाम पहुंचे। इस रैली में कई सांसद-विधायक भी शामिल हुए। मानगढ़ धाम आदिवासियों का तीर्थ स्थल है। राजस्थान सरकार भील प्रदेश की मांग पहले ही खारिज कर चुकी है।

बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत ने कहा- भील प्रदेश की मांग नई नहीं है। बीएपी पुरजोर तरीके से यह मांग उठा रही है। महारैली के बाद एक डेलीगेशन राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से प्रस्ताव के साथ मुलाकात करेगा।

भील प्रदेश की मांग में राजस्थान के 12, मप्र के 13 जिले शामिल
आदिवासी समाज ने राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के 49 जिलों को मिलाकर नया राज्य भील प्रदेश बनाने की मांग की है। इसमें राजस्थान के पुराने 33 जिलों में से 12 जिलों को शामिल करने की मांग है।

मेनका डामोर बोलीं- हम हिंदू नहीं
भील समाज की सबसे बड़ी संस्था आदिवासी परिवार सहित 35 संगठनों ने यह महारैली बुलाई थी। आदिवासी परिवार संस्था की संस्थापक सदस्य मेनका डामोर ने मंच से कहा- आदिवासी महिलाएं पंडितों के बताए अनुसार न चलें। आदिवासी परिवार में सिंदूर नहीं लगाते, मंगलसूत्र नहीं पहनते। आदिवासी समाज की महिलाएं-बालिकाएं शिक्षा पर फोकस करें। अब से सब व्रत-उपवास बंद कर दें। हम हिंदू नहीं हैं। आदिवासी परिवार संस्था चारों राज्यों में फैली हुई है।

‘कोई माई का लाल हमें नहीं रोक सकता’
महारैली के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में आदिवासी परिवार के संस्थापक भंवरलाल परमार ने कहा कि इसी मानगढ़ में सौ-सवा सौ साल पहले हमारे पुरखों ने आंदोलन शुरू कर दिया था, तब 1500 लोगों को मार दिया गया। उनका क्या कसूर था? अब हमने फिर आंदोलन शुरू किया है। कोई माई का लाल हमें नहीं रोक सकता। भील प्रदेश की मांग तो समय पर पूरी होगी ही। इसकी एक प्रक्रिया होती है।

गुजराती के नाम पर गुजरात तो भीलों के नाम पर भील प्रदेश क्यों नहीं? : बीएपी विधायक
राजस्थान विधानसभा में भी गुरुवार को अलग भील प्रदेश बनाने की मांग उठी है। धरियावद से बीएपी विधायक थावरचंद मीणा ने कहा कि आज जब मैं सदन में बोल रहा हूं, उस समय मानगढ़ धाम में 4 राज्यों के 10 लाख आदिवासी महासम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम आदिवासियों को गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान में बांट दिया गया हैं। हमारी बोली, संस्कृति, रीति-रिवाज एक है तो हम सब मिलकर भील प्रदेश क्यों नहीं बना सकते हैं?

गहलोत ने कहा कि मैं भी प्रदेश की मांग जाति के आधार पर नहीं कर रहा हूं। जब गुजराती के नाम पर गुजरात, मराठी के नाम पर महाराष्ट्र, पंजाबी के नाम पर पंजाब राज्य बन सकता है तो भीली बोली के आधार पर भील प्रदेश क्यों नहीं बन सकता है। मैं मांग करता हूं कि इसका प्रस्ताव पास करके सरकार को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि भील प्रदेश हमारा अधिकार। हम इसे हम लेकर रहेंगे।

धरियावद विधायक थावरचंद मीणा भील प्रदेश के समर्थन वाली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे।

धरियावद विधायक थावरचंद मीणा भील प्रदेश के समर्थन वाली टी-शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे थे।

मंत्री बोले- जाति के आधार पर प्रदेश नहीं बन सकता
राजस्थान में राजनीतिक ताकत मिलते ही बीएपी ने अन्य जिलों और राज्यों के आदिवासियों को साथ लेकर अलग राज्य और संगठन मजबूत बनाने की मुहिम तेज कर दी है। बीएपी के पास राजस्थान के आदिवासी जिले बांसवाड़ा से 2 विधायक और एक सांसद है, लेकिन भील प्रदेश की मांग को लेकर सरकार ने अपना मत स्पष्ट कर दिया है।

जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा- जाति के आधार पर स्टेट नहीं बन सकता। ऐसा हुआ तो अन्य लोग भी मांग करेंगे। हम केंद्र को प्रस्ताव नहीं भेजेंगे। खराड़ी ने यह भी कहा कि जिसने धर्म बदला उनको आदिवासी आरक्षण का लाभ न मिले। खराड़ी ने डूंगरपुर दौरे के दौरान यह बयान दिया।

भारत आदिवासी पार्टी से आसपुर से विधायक उमेश मीणा और धरियावद सीट से विधायक थावरचंद भील प्रदेश लिखी टीशर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे। यह तस्वीर बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने सोशल मीडिया पर शेयर की।

भारत आदिवासी पार्टी से आसपुर से विधायक उमेश मीणा और धरियावद सीट से विधायक थावरचंद भील प्रदेश लिखी टीशर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे। यह तस्वीर बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत ने सोशल मीडिया पर शेयर की।

जो आदिवासी खुद को हिंदू नहीं मानते, उन्हें आरक्षण का हक नहीं : भाजपा विधायक
आदिवासियों के भील प्रदेश के आंदोलन पर भाजपा के आदिवासी विधायक समाराम गरासिया ने कहा कि जो आदिवासी खुद को हिंदू नहीं मानते, उन्हें आरक्षण का हक नहीं है। आदिवासी धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन जाते हैं। अगर वे हिंदू नहीं हैं तो आरक्षण का फायदा क्यों ले रहे हैं? ऐसे लोग आदिवासी क्षेत्र के लिए चलाई जाने वाली योजना का फायदा लेने के अधिकारी नहीं हैं।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, इलाके में इंटरनेट बंद
बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम पर हो रही सभा के लिए प्रदेश के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से भी आदिवासी समाज के लोग जुटे हैं। सभा को लेकर प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। सुरक्षा के मद्देनजर महारैली वाले इलाके में इंटरनेट बंद किया गया।

4 राज्यों के आदिवासी समाज के लोग सुबह से ही कार्यक्रम स्थल मानगढ़ धाम पहुंचने लगे थे। आदिवासियों के वाहनों को मानगढ़ धाम से 5 किमी पहले ही रोक दिया गया।

मानगढ़ धाम पर लोग बाइक, जीप और अन्य वाहनों में सवार होकर सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए थे।

मानगढ़ धाम पर लोग बाइक, जीप और अन्य वाहनों में सवार होकर सुबह से ही पहुंचना शुरू हो गए थे।

राजकुमार रोत ने शपथ के दौरान संसद में लगाया था भील प्रदेश का नारा
बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने पिछले दिनों लोकसभा में सांसद की शपथ लेने के दौरान भी भील प्रदेश के समर्थन में नारे लगाए थे। वे भील प्रदेश बनाने की मांग करते हुए ऊंट पर बैठकर संसद पहुंचे थे।

रोत 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए ऊंट पर बैठकर संसद गए थे।

रोत 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के लिए ऊंट पर बैठकर संसद गए थे।

मानगढ़ में 1500 आदिवासियों का नरसंहार हुआ था
बांसवाड़ा जिले के जिस मानगढ़ धाम पर यह रैली हो रही है, वह आदिवासियों के लिए तीर्थ स्थल की तरह है और चारों प्रदेश के आदिवासियों से इसका भावनात्मक जुड़ाव है। मानगढ़ की पहाड़ी का एक हिस्सा गुजरात में और एक हिस्सा राजस्थान में शामिल है।

इस पहाड़ी क्षेत्र में गोविंद गुरू नामक आदिवासी नेता ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ स्वतंत्रता का आंदोलन चला रहे थे। तब 19 नवंबर-1913 को इसी धाम पर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें व उनके आदिवासी साथियों को घेर लिया था। यहां अंग्रेजों ने 1500 आदिवासियों का सामूहिक नरसंहार किया था। उन्हीं की याद में मानगढ़ धाम बना हुआ है। गोविंद गुरू को जीवित पकड़ कर बंदी बना लिया गया था।

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विनेश फोगाट एशियन गेम्स ट्रायल में हारीं:बोलीं- पूरे सिस्टम से लड़ी, वापसी करूंगी, बैन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की मंजूरी दी थी

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पानीपत, एजेंसी। ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट शनिवार को एशियन गेम्स ट्रायल का सेमीफाइनल मैच हार गईं। 53 किलो कैटेगरी में लगातार दो बाउट जीतने के बाद उन्हें जींद की मीनाक्षी गोयत ने हराया। विनेश अब एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।

हार के बाद विनेश ने कहा- मैं पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ रही थी। एक तरफ मैं थी और दूसरी तरफ सभी लोग थे। मैं फिर वापसी करूंगी।

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर बैन लगा दिया था।

विनेश ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, डिवीजन बेंच ने विनेश के पक्ष में फैसला सुनाया था। WFI ने फोगाट का ट्रायल रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- विनेश शानदार रेसलर हैं, उन्होंने देश को गर्व महसूस कराया। विनेश को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।

विनेश के मैच की PHOTOS…

मिनाक्षी से मैच हारने के बाद मैट छोड़ने से पहले विनेश बोलीं- मैं इस मैट पर वापस आऊंगी। हालांकि, बाद में वो दुखीं भी दिखीं।

मिनाक्षी से मैच हारने के बाद मैट छोड़ने से पहले विनेश बोलीं- मैं इस मैट पर वापस आऊंगी। हालांकि, बाद में वो दुखीं भी दिखीं।

विनेश फोगाट को पटखनी देतीं नीशू। हालांकि, विनेश ने वापसी करते हुए मुकाबला 7-6 से जीत लिया।

विनेश फोगाट को पटखनी देतीं नीशू। हालांकि, विनेश ने वापसी करते हुए मुकाबला 7-6 से जीत लिया।

ज्योति सिहाग से हुए पहले मुकाबले की शुरुआत से ही विनेश आक्रामक नजर आईं।

ज्योति सिहाग से हुए पहले मुकाबले की शुरुआत से ही विनेश आक्रामक नजर आईं।

53 किलो वेट कैटेगरी में विनेश फोगाट को विनर घोषित करते रेफरी।

53 किलो वेट कैटेगरी में विनेश फोगाट को विनर घोषित करते रेफरी।

विनेश बोलीं- मै फेल नहीं हुई

विनेश हार के बाद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा- हार को अपनी असफलता नहीं मानती। मैं फेल नहीं हुई हूं। मैं फिर वापसी करूंगी। मेरा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और भविष्य में फिर से खुद को साबित करने के लिए मैट पर लौटूंगी।

विनेश फोगाट को पहले केवल 50 किलोग्राम वर्ग में खेलने को कहा गया, जिस पर उन्होंने विरोध जताया। विवाद के बाद WFI अध्यक्ष संजय सिंह के हस्तक्षेप से उन्हें 53 किलोग्राम वर्ग के ट्रायल में भी उतरने की अनुमति मिली। ट्रायल से पहले विनेश फोगाट ने कहा कि वजन-माप के लिए उन्हें करीब एक घंटे इंतजार कराया गया। उन्होंने कहा कि यहां किसी पर अब भरोसा नहीं है।

विनेश का मैच 2 बार रुका

मीनाक्षी से पहले विनेश का मुकाबला नीशू से हुआ। शुरूआत में नीशू ने विनेश को पटखनी देकर पांच पॉइंट हासिल किए। इसके बाद विनेश ने चार पॉइंट बटोरे। इस दौरान रेफरी से विनेश और उनके पति सोमबीर राठी की कहासुनी हो गई। आपत्ति के बाद मैच थोड़ी देर के लिए रोका गया। WFI के अध्यक्ष संजय सिंह भी मैट पर पहुंच गए। रेफरी ने विनेश को 7-6 से विजेता घोषित किया। नीशू ने विनेश से हाथ तक नहीं मिलाया।

वार्मअप करतीं विनेश फोगाट।

वार्मअप करतीं विनेश फोगाट।

विनेश के ट्रायल का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल में शामिल करने को लेकर विवाद हुआ था। कुश्ती से दूरी बनाए रखने के कारण WFI ने अपनी चयन नीति का हवाला देते हुए विनेश को ट्रायल में खेलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विनेश ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने कहा कि मां बनने के कारण किसी खिलाड़ी को अवसर देने से इनकार नहीं किया जा सकता और उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी। WFI इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद, विनेश को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई।

पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे

विनेश ने अगस्त 2024 में पेरिस ओलिंपिक में डिस्क्वालिफाई होने के बाद कुश्ती से संन्यास की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने 16 महीने बाद दिसंबर 2025 में संन्यास वापसी की घोषणा की।

18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

आरोपों पर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण ने कहा था- किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने कहा था कि अब ये खिलाड़ी नेशनल लेवल पर भी खेलने योग्य नहीं रहे।

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देश

डीके शिवकुमार कर्नाटक के 24वें CM होंगे:सिद्धारमैया ने नाम बढ़ाया, उनका बेटा भी मंत्री बनेगा, राज्य को 4 डिप्टी सीएम भी मिलेंगे

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बेंगलुरु, एजेंसी। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार अब राज्य के 24वें मुख्यमंत्री बनेंगे। बेंगलुरु में शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया। 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले सिद्धारमैया ने उनके नाम प्रस्ताव रखा। इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।

कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि 3 जून की शाम डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बैठक में बाद शिवुकमार ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की।

सूत्रों के मुताबिक CM के साथ-साथ कैबिनेट भी बदलेगी। मौजूदा कैबिनेट से 10 मंत्री हटाए जा सकते हैं। नई कैबिनेट में सिद्धारमैया और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे भी शामिल होंगे। 4 डिप्टी CM भी बनाए जा सकते हैं।

शिवकुमार ‘सीएम रोटेशनल फॉर्मूला’ के तहत मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। सिद्धारमैया 20 मई 2023 से 28 मई 2026 तक मुख्यमंत्री रहे हैं। आज की बैठक में कर्नाटक कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे। दोनों को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

बैठक में शिवकुमार के प्रस्ताव का समर्थन परमेश्वर ने किया

  • सभी विधायकों ने मिलकर प्रस्ताव पास किया, इसमें यह तय किया गया कि नए नेता का फैसला कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप करेगी।
  • इसके बाद सिद्धारमैया ने खुद डीके शिवकुमार का नाम नए CLP नेता के तौर पर पेश किया। गृह मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने प्रस्ताव का समर्थन किया, सभी विधायकों ने एकमत से इसका समर्थन किया।
  • शिवकुमार ने एक प्रस्ताव रखकर सिद्धारमैया का शुक्रिया अदा किया।
  • बैठक के दौरान सिद्धारमैया, वेणुगोपाल और सुरजेवाला अलग कमरे में चले गए और आपस में बात की। इसके बाद बैठक फिर शुरू हुई और शिवकुमार को नेता चुना गया।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद बाहर आते सुरजेवाला, सिद्धारमैया, वेणगोपाल और डीके शिवकुमार।

कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद बाहर आते सुरजेवाला, सिद्धारमैया, वेणगोपाल और डीके शिवकुमार।

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में हैं। उनके पास ₹1413 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। वह रियल एस्टेट, खनन, होटल कारोबारी भी हैं। दिलचस्प ये है कि इतनी संपत्ति के बावजूद उनके चुनावी हलफनामे में एक टोयोटा क्वालिस कार दर्ज है। 263 करोड़ का कर्ज भी है।

1962 में बेंगलुरु के पास कनकपुरा में जन्मे डीके वोक्कालिगा समुदाय से हैं। वह कनकपुरा से ही विधायक हैं। कांग्रेस में उनकी पहचान ऐसे नेता की है जो पार्टी विधायकों को टूटने से बचाते हैं। किसी भी बड़े ऑपरेशन, चुनाव मैनेजमेंट, प्रचार या गुप्त रणनीतियों के लिए जिस वित्तीय और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की जरूरत होती है, उसे वे बखूबी मैनेज कर लेते हैं।

डीके पर 19 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। ईडी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो केस में जांच कर रही है। 2017 में आयकर विभाग के छापे में इनके घर 8.5 करोड़ रु. मिले थे। इसी केस में वह 2019 में गिरफ्तार हुए। उन्हें 50 दिन तिहाड़ में बिताने पड़े थे। सीबीआई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जांच कर रही है।

ज्योतिषी का दावा- शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे

डिप्टी सीएम शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने भविष्यवाणी की है कि शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे।

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा- मैंने शिवकुमार को शपथ के लिए 31 मई, 5 जून और 6 जून की तारीखें दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिवकुमार 2028 के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में वापसी करेंगे।

ज्योतिषी ने कहा, वह कोई एक दिन के मुख्यमंत्री या एक बार के CM नहीं हैं। वह एक लंबे समय तक इस पद पर बने रहेंगे। उनकी कुंडली बहुत अच्छी है। वह कर्नाटक के लिए लंबे समय तक काम करेंगे।

नई दिल्ली में शुक्रवार को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर सिद्धारमैया ने अपने बेटे यतींद्र और डीके शिवकुमार के साथ लंच किया।

नई दिल्ली में शुक्रवार को मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर सिद्धारमैया ने अपने बेटे यतींद्र और डीके शिवकुमार के साथ लंच किया।

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मानसून अब 7 दिन बाद केरलम पहुंचेगा:तूफानी हवाओं ने श्रीलंका में रोका, 10% कम बारिश का अनुमान, जून-जुलाई में भी हीटवेव चलेगी

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में मानसून की एंट्री लेट हो गई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि श्रीलंका के ऊपर कम दबाव वाली तूफानी हवाओं के चलते मानसून केरलम तट से 30-35 किमी दूर 5 दिन से अटका है और अगले 2-3 दिन इसके आगे बढ़ने के आसार नहीं हैं।

केरलम के तट पर मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। इससे पहले मौसम विभाग ने 26 मई तक ही मानसून आने का अनुमान जताया था। ताजा अनुमान के मुताबिक अब यह 7 दिन बाद केरल तट पर पहुंचेगा। यानी, पिछले अनुमान से मानसून करीब 10 दिन बाद देश में एंट्री करेगा।

IMD के मुताबिक जून-जुलाई में भी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव चलने की संभावना है। आमतौर पर उस वक्त तापमान 30-35 डिग्री तक रहता है। इस बार 3 डिग्री ज्यादा टेंपरेचर रहेगा।

इस साल बारिश भी 10% तक कम होगी

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान है। जो सामान्य से करीब 10% कम है। 13 अप्रैल को 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान लगाया गया था। 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।

जून में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में कम बारिश

मौसम विभाग ने बताया कि जून में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में सामान्य से भी कम बारिश होगी। वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश का अनुमान है।

देश के कोर जोन में कम बारिश से खेती पर सीधा असर

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल मानसून के कोर जोन में कम बारिश होगी। इस इलाके में खेती सबसे ज्यादा मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यानी बारिश का सीधा असर फसलों और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है।

मानसून कोर जोन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, कुछ हिस्से उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके आते हैं। यहां खेती पर असर पड़ने से किसानों को सीधा नुकसान होगा।

कमजोर मानसून, कम बारिश का आम आदमी पर असर…

देश में कुल बारिश का करीब 75% हिस्सा मानसून के दौरान होता है, जो सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है।

करीब 64% आबादी कृषि पर निर्भर है। सिर्फ 55% खेती योग्य जमीन ही सिंचाई से कवर है।

कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुवाई, फसल उत्पादन और कुल कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा, जिससे किसानों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।

बारिश कम होने से उत्पादन घट सकता है, जिसका असर सप्लाई पर पड़ेगा और इससे सब्जियों, दालों सहित खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

खेती कमजोर रहने पर गांवों में आय कम हो सकती है, जिससे ग्रामीण बाजार में खर्च और मांग दोनों प्रभावित होंगे।

ग्रामीण मांग में कमी आने पर ट्रैक्टर और टू-व्हीलर जैसे वाहनों की बिक्री पर भी असर पड़ने की संभावना है।

अगर बारिश कम रहती है तो डैम और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे आगे चलकर पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

कम बारिश और ज्यादा गर्मी की स्थिति में बिजली की खपत बढ़ेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तापमान ज्यादा रहता है।

पिछले साल 8 दिन पहले आया था मानसून

पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरलम पहुंच गया था। मानसून केरलम से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।

इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है।

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरलम पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरलम पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरलम पहुंचा था।

मौसम विभाग ने कहा कि कमजोर मानसून के पीछे की वजह अल-नीनो है। जून में अल नीनो का असर दिख सकता है। जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बने रहने की संभावना है।

अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है।

सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा।

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