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सोते हुए देश को जगाने की कीमत चुकानी पड़ रही’, इमरजेंसी की रिलीज टलने पर भड़की कंगना रनौत

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नई दिल्ली, एजेंसी।बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा कंगना रनौत की फिल्म ‘इमरजेंसी’ को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के बाद एक्ट्रेस ने नाराजगी जाहिर की है। कंगना का कहना है कि वह “हर किसी की पसंदीदा निशाना” बन गई हैं और देश को जागरूक करने के लिए उन्हें यह कीमत चुकानी पड़ रही है।

‘सोते हुए देश को जगाने की कीमत चुकानी पड़ रही’
एक्स पर एक पोस्ट में, कंगना ने बुधवार को कहा, “आज मैं हर किसी की पसंदीदा टारगेट बन गई हूं, इस सोते हुए देश को जगाने के लिए आपको यही कीमत चुकानी होगी, वे नहीं जानते कि मैं किस बारे में बात कर रही हूं, उन्हें कोई अंदाजा नहीं है कि मैं इतनी चिंतित क्यों हूं, क्योंकि वे शांति चाहते हैं, वे पक्ष नहीं लेना चाहते। वे शांत हैं, आप जानते हैं कि ठंडे हैं!! हा हा काश सीमा पर उस गरीब सैनिक को भी शांत रहने का वही विशेषाधिकार मिलता, काश उसे पक्ष लेने की जरूरत न होती, और पाकिस्तानियों/चीनियों को अपना दुश्मन मानता। वह आपकी रक्षा कर रहा है जबकि आप आतंकवादियों या देशद्रोहियों पर वासना कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा,  “काश वह युवती जिसका अपराध केवल इतना था कि वह सड़क पर अकेली थी और उसके साथ बलात्कार किया गया, वह शायद एक सज्जन और दयालु व्यक्ति थी जो मानवता से प्यार करती थी, लेकिन क्या उसकी मानवता का बदला चुकाया गया? काश सभी लुटेरों और अपराधियों को भी इस शांत और सोई हुई पीढ़ी की तरह ही प्यार और स्नेह मिलता, लेकिन जीवन की सच्चाई कुछ और ही है। चिंता मत करो वे तुम्हारे लिए आ रहे हैं अगर हममें से कुछ लोग भी तुम्हारी तरह शांत हो गए तो वे तुम्हें पकड़ लेंगे और तब तुम्हें अनकूल लोगों का महत्व पता चलेगा।” 

19 सितंबर को होगी अगली सुनवाई 
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश देने में असमर्थ है, क्योंकि यह मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश का खंडन करेगा।  न्यायालय ने सीबीएफसी को 18 सितंबर तक निर्णय लेने को भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर को निर्धारित की गई है।

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बॉम्बे हाईकोर्ट का खटखटाया था दरवाजा 
‘इमरजेंसी’ की सह-निर्माता कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्म की रिलीज और सेंसर सर्टिफिकेट की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई, जिसमें दावा किया गया कि सेंसर बोर्ड ने मनमाने ढंग से और अवैध रूप से फिल्म का सेंसर प्रमाणपत्र रोक रखा है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सीबीएफसी को सिख समूहों द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिन्होंने उसके समक्ष याचिका दायर की थी।

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वक्फ बिल का विरोध, 6 मुस्लिम नेताओं ने JDU छोड़ी:बोले- मुख्यमंत्री ने भरोसा तोड़ा; पप्पू यादव ने कहा- वोटिंग तक ही नीतीश BJP की जरूरत

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पटना,एजेंसी। JDU ने वक्फ संशोधन बिल पर मोदी सरकार का समर्थन किया है। इसके बाद से CM नीतीश कुमार की पार्टी में घमासान मचा हुआ है। बगावत शुरू हो गई है। एक के बाद मुस्लिम नेताओं का इस्तीफा जारी है। अब तक बिल को समर्थन देने से नाराज 6 मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है।

इनमें पूर्व प्रदेश सचिव एम. राजू नैयर, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहनवाज मलिक, बेतिया जिला के उपाध्यक्ष नदींम अख्तर, प्रदेश महासचिव सिए मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग, भोजपुर से पार्टी सदस्य मो. दिलशान राईन , और खुद को मोतिहारी के ढाका विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी बताने वाले मोहम्मद कासिम अंसारी शामिल हैं।

मुस्लिम नेताओं ने वक्फ बिल पर समर्थन पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि पार्टी ने लाखों मुसलमानों का भरोसा तोड़ा है। हालांकि, पार्टी ने दावों को खारिज किया है।

इधर, बिल पर जदयू के समर्थन को लेकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि- ‘नीतीश कुमार सेक्युलर थे, हैं और रहेंगे.. लेकिन पार्टी के नेता नहीं है। वो आरक्षण विरोधी हैं। उनका पार्टी पर कोई कंट्रोल नहीं है।’

मुस्लिम नेताओं में नाराजगी, बोले- नीतीश ने भरोसा तोड़ा

मोहम्मद कासिम अंसारी ने CM को लिखे पत्र में कहा, ‘वक्फ बिल पर समर्थन देकर JDU ने अपनी सेक्युलर छवि वाला भरोसा तोड़ा है। लाखों मुसलमानों का यकीन टूटा है। साथ ही लोकसभा में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के दिए भाषण से भी लोग आहत हुए हैं।’

वहीं, मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने कहा, ‘JDU के समर्थन से लाखों-करोड़ों मुस्लिमों को धक्का लगा है। ललन सिंह के बयान काफी दुख हुआ है। मैं कई साल तक इस पार्टी में रहा। लेकिन अब इस्तीफा दे रहा हूं।’

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राहुल गांधी को लखनऊ हाईकोर्ट से झटका:200 रुपए जुर्माना-समन रद्द करने की मांग खारिज, सावरकर को अंग्रेजों से पेंशन लेने वाला कहा था

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लखनऊ,एजेंसी। राहुल गांधी की याचिका लखनऊ हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। उन्होंने वीर सावरकर मानहानि मामले में लखनऊ की सेशन कोर्ट के समन आदेश और 200 रुपए जुर्माने को लेकर हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें अल्टरनेट रेमेडी (वैकल्पिक उपाय) अपनाने का सुझाव देते हुए लखनऊ सेशन कोर्ट जाने को कहा है।

दरअसल, 3 मार्च को लखनऊ की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) कोर्ट ने लगातार पेशी से गायब रहने पर राहुल गांधी पर 200 रुपए जुर्माना लगाया था। चेतावनी दी थी कि 14 अप्रैल 2025 को अदालत में हाजिर हों, अगर वे इस तारीख को भी पेश नहीं होते हैं तो कठोर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। गैर-जमानती वारंट भी जारी किया जा सकता है।

राहुल गांधी के वकील प्रांशु अग्रवाल ने बताया – 12 दिसंबर, 2024 को धारा 153A और 505 IPC के तहत लखनऊ की सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। 3 मार्च को ACJM ने भी 200 रुपए का जुर्माना लगाया था। इसके खिलाफ हम हाईकोर्ट गए थे, लेकिन कोर्ट ने हमारी मांग खारिज कर दी। अब हम एक और याचिका दाखिल करेंगे।

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अमेरिका में ईमेल भेज सैकड़ों विदेशी छात्रों का वीजा रद्द:AI से कैंपस एक्टिविस्ट्स की पहचान कर रही सरकार, देश छोड़ने के आदेश

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वॉशिंगटन डीसी ,एजेंसी। अमेरिका में पढ़ने वाले सैकड़ों विदेशी छात्रों को उनका एफ-1 वीजा यानी स्टूडेंट वीजा रद्द होने का अचानक ईमेल मिला है। यह मेल अमेरिकी विदेश मंत्रालय (DoS) की ओर से मार्च के आखिरी हफ्ते में भेजा गया है।

यह ई-मेल उन छात्रों को भेजा गया है, जो कैंपस एक्टिविज्म यानी कैंपस में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन छात्रों को भी ऐसे मेल भेजे गए हैं, जो भले ही कैंपस एक्टिविज्म में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘इजराइल विरोधी’ पोस्ट को शेयर, लाइक या फिर कमेंट किया।

मेल में कहा गया है कि छात्रों के एफ-1 वीजा रद्द कर दिए गए हैं। छात्रों से खुद को डिपोर्ट करने यानी अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी भी दी गई है।

अमेरिकी सरकार ‘कैच एंड रिवोक’ ऐप की मदद से ऐसे छात्रों की पहचान कर रही है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक 26 मार्च तक 300 से ज्यादा ‘हमास समर्थक’ छात्रों का F-1 वीजा रद्द किया जा चुका है। इसमें कई भारतीय छात्र भी शामिल हैं।

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