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छत्तीसगढ़

जगदलपुर पहुंचे अमित शाह..बस्तर ओलिंपिक में शामिल:रायपुर में कहा-31 मार्च 2026 से पहले करेंगे नक्सलवाद का खात्मा, शस्त्र छोड़कर विकास के रास्ते पर आइए

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रायपुर ,एजेंसी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जगदलपुर पहुंच गए हैं। यहां वे बस्तर ओलिंपिक के समापन में शामिल हुए। इससे पहले रायपुर में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड कार्यक्रम में कहा कि हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करेंगे। जैसे ही छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त होता है, देशभर में नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा।

शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने बहादुरी के साथ 1 साल में खत्म करने का संकल्प लिया है। शाह ने नक्सलियों से अपील की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने बहुत अच्छी सरेंडर पॉलिसी बनाई है। मुख्यधारा में आप शामिल हो जाइए। हथियार छोड़ दीजिए। विकास के रास्ते पर आ जाइए।

जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के खिलाड़ियों ने अमित शाह का स्वागत किया।

जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के खिलाड़ियों ने अमित शाह का स्वागत किया।

2900 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा

बस्तर में संभाग स्तरीय बस्तर ओलिंपिक प्रतियोगिता का आयोजन शुक्रवार 13 दिसंबर से शुरू हुआ था। जगदलपुर के इंदिरा प्रियदर्शनी स्टेडियम में बैडमिंटन, कबड्डी, वॉलीबॉल समेत अन्य गेम्स हुए। आज 15 दिसंबर को समापन है, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे।

इस बस्तर ओलिंपिक में बस्तर संभाग के सातों जिले के अलग-अलग खेलों के करीब 2900 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे। इसका सारा बंदोबस्त जिला प्रशासन की तरफ से किया गया है। प्रशासन की माने तो इस आयोजन में सरेंडर किए हुए करीब 300 नक्सली भी शामिल हुए। इसके साथ ही नक्सल घटनाओं में दिव्यांग हुए कुल 18 खिलाड़ियों, नक्सल हिंसा पीड़ितों ने भी अलग-अलग गेम्स में हिस्सा लिया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में शामिल हुए

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में शामिल हुए

रायपुर में अमित शाह की बड़ी बातें

  • नक्सलवाद के खिलाफ ताबूत में अंतिम कील ठोकने की तैयारी

शाह ने कहा कि सरकार बदलने के बाद से टॉप 14 नक्सली न्यूट्रलाइज हुए हैं। 4 दशकों में पहली बार नागरिकों और सुरक्षाबलों के मृत्यु के आंकड़े में कमी आई है। 10 साल में नक्सलवाद पर नकेल कसी गई। पुलिस ने 1 साल में छत्तीसगढ़ समेत सभी राज्यों से नक्सलवाद के खिलाफ ताबूत में अंतिम कील ठोकने की तैयारी की है।

  • राष्ट्रपति कलर्स सिर्फ एक अलंकरण नहीं, बलिदान का प्रतीक

शाह ने पुलिस से कहा कि राष्ट्रपति कलर्स सिर्फ एक अलंकरण नहीं है, यह बलिदान का प्रतीक है। यह उन चुनौतियों की याद दिलाता है, जिनके साथ आपको दो-दो हाथ करना है। एक अलंकरण के साथ-साथ एक दायित्व भी है। मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ पुलिस का हर जवान इस दायित्व को निभाएगा। अपने फर्ज में कभी भी पीछे नहीं हटेगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में शामिल हुए।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में शामिल हुए।

यह सामान छत्तीसगढ़ पुलिस की वर्दी पर सजेगा-सीएम

CM विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 24 वर्षों में ही यह सम्मान पुलिस को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिया गया है। यह सामान न सिर्फ छत्तीसगढ़ पुलिस की वर्दी पर सजेगा, बल्कि हमारे जवानों की कर्तव्य, निष्ठा, साहस और समर्पण का प्रतीक भी बनेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार व्यक्त करता हूं।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने एंटी नक्सल ऑपरेशन में साहस और दृढ़ता के साथ पिछले 1 साल में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में लौटने का निर्णय लिया है। जवानों को बड़ी उपलब्धि मिली है।

राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में पुलिस प्लाटून की सलामी ली। इस दौरान शाह ने राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा। जहां धर्म गुरुओं ने मंत्रों के साथ ध्वज का स्वागत किया।

कार्यक्रम में शाह और CM विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति के निशान को सलामी दी। राष्ट्रपति पुलिस कलर ध्वज में बस्तर की संस्कृति को भी दर्शाया गया है, जिसमें गौर, माड़िया सिंह और धान के खेत शामिल हैं। ध्वज के ऊपर और नीचे 36 किले दर्शाए गए हैं।

अमित शाह ने ली पुलिस प्लाटून की सलामी।

अमित शाह ने ली पुलिस प्लाटून की सलामी।

छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है यह फ्लैग

छत्तीसगढ़ राष्ट्रपति के इस फ्लैग को हासिल करने वाला देश का सबसे युवा राज्य है। छत्तीसगढ़ 2025 में अपने सिल्वर जुबली ईयर में प्रवेश कर रहा है। इससे ठीक पहले राष्ट्रपति की तरफ से पुलिस सेवा को मिलने वाला यह सम्मान छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।

स्टेट पुलिस के सर्विस रिकॉर्ड को लंबे समय तक ऑब्जरवेशन पर रखे जाने के बाद राष्ट्रपति की ओर से यह सम्मान दिया जाता है।

त​​​​​​स्वीरों में देखिए राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड कार्यक्रम

राष्ट्रपति के निशान को अमित शाह ने सलामी दी। साथ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद।

राष्ट्रपति के निशान को अमित शाह ने सलामी दी। साथ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद।

परेड कमांडर जीतेंद्र शुक्ला 8 प्लाटून के साथ कर रहे मार्च।

परेड कमांडर जीतेंद्र शुक्ला 8 प्लाटून के साथ कर रहे मार्च।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा।

धर्म गुरुओं ने मंत्रों के साथ ध्वज का स्वागत किया।

धर्म गुरुओं ने मंत्रों के साथ ध्वज का स्वागत किया।

पुलिस के घुड़सवार दस्ते के साथ अमित शाह की परेड ग्राउंड में हुई एंट्री।

पुलिस के घुड़सवार दस्ते के साथ अमित शाह की परेड ग्राउंड में हुई एंट्री।

छत्तीसगढ़ पुलिस को यह सम्मान क्यों दिया गया?

भारत के सशस्त्र बलों और पुलिस संगठनों को उनकी स्पेशल सर्विस और कर्तव्य के प्रति बेहतरीन समर्पण के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान ‘राष्ट्रपति का प्रतीक चिन्ह’ है। हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस को यह सम्मान दिया गया है। यह सम्मान नक्सलवाद और अन्य चुनौतियों से निपटने में राज्य पुलिस के अद्वितीय प्रयासों और उपलब्धियों को मान्यता देता है।

1. नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष: छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। पुलिस ने दुर्गम क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का डटकर सामना किया है और सफलतापूर्वक शांति बहाल की है। उनके अभियानों में साहस, समर्पण और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा मेल देखने को मिला।

2. सामुदायिक पुलिसिंग: छत्तीसगढ़ पुलिस ने सामुदायिक पुलिसिंग के तहत आदिवासी युवाओं को रोजगार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए विशेष योजनाएं चलाईं। इसके जरिए पुलिस ने आम जनता और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास कायम किया।

3. आधुनिक तकनीक और विशेष बल: छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। विशेष बल, जैसे डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप (DRG), ने माओवादियों के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।

इन 2 जगहों पर जाने की चर्चा, जानिए क्यों

  • पूवर्ती गांव..हिड़मा यहीं का रहने वाला

बस्तर में जब भी नक्सल का जिक्र होता है तो नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा का नाम भी आता है। पुलिस की वांटेड लिस्ट में भी सबसे पहले हिड़मा का ही नाम है। हिड़मा सुकमा जिले के अति संवेदनशील पूवर्ती गांव का रहने वाला है। वर्तमान में ये नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी का मेंबर है। इस पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है।

कुछ महीने पहले ही हिड़मा के गांव पूवर्ती में उसके घर के नजदीक ही सुरक्षाबलों का कैंप स्थापित किया गया है। पूवर्ती, टेकलगुडेम समेत आस-पास के इलाके को जवानों ने कैप्चर कर लिया है। हर दिन यहां सैकड़ों जवान सर्च ऑपरेशन पर निकलते हैं। ऐसे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हिड़मा के गांव जाकर उसके इलाके के लोगों से मुलाकात कर सकते हैं।

  • अबूझमाड़…यहां आर्मी कैंप भी स्थापित होना है

अमित शाह नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ भी जा सकते हैं। अबूझमाड़ के गांव में इसलिए क्योंकि इस इलाके को नक्सलियों की राजधानी के नाम से जाना जाता है। यहां कई बड़े कैडर्स के नक्सली हैं। बड़ी बात है कि अबूझमाड़ के इलाके में ही आर्मी का बेस कैंप भी स्थापित किया जाना है।

इस लिहाज से इलाके को करीब से देखने और इंडियन आर्मी के बेस कैंप खोलने को लेकर वे इस इलाके में भी जा सकते हैं। माड़ की जमीनी स्थिति, इलाके के लोगों से मुलाकात कर उनसे चर्चा कर सकते हैं।

हिड़मा की फाइल फोटो।

हिड़मा की फाइल फोटो।

सालभर में खोले गए 25 से ज्यादा कैंप

बस्तर को नक्सलियों से मुक्त करने और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद सालभर में बस्तर में 25 से ज्यादा सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित किए गए हैं। इनमें दंतेवाड़ा के नेरली घाटी, कांकेर के पानीडोबरी, बीजापुर के गुंडम, पुतकेल, छुटवही, नारायणपुर के कस्तूरमेटा, इरकभट्टी, मसपुर, मोहंदी, सुकमा के मुलेर, परिया, सलातोंग, टेकलगुडेम, पूवर्ती, लखापाल पुलनपाड़ में कैंप खुले हैं।

बस्तर ओलिंपिक में अलग-अलग खेल में कुल 2900 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है।

बस्तर ओलिंपिक में अलग-अलग खेल में कुल 2900 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है।

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खेल

नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026…अलग-अलग राज्यों से 500 खिलाड़ी रायपुर पहुंचे:अरुण साव बोले-3 हजार से ज्यादा प्लेयर लेंगे हिस्सा, भोजन समेत सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में आयोजित होने जा रहे नेशनल ट्राइबल गेम्स की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। देशभर से खिलाड़ियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं के लिए मैदान पूरी तरह तैयार कर लिए गए हैं और सभी आवश्यक खेल उपकरण भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।

अब तक 500 से अधिक खिलाड़ी पहुंच चुके हैं। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा अवसर है कि उसे इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेजबानी मिली है। इसके लिए खेल मंत्री अरुण साव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया का आभार व्यक्त किया है।

उन्होंने बताया कि देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3 हजार से अधिक खिलाड़ी और खेल अधिकारी इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले हैं। खिलाड़ियों और अधिकारियों के ठहरने, आवास, भोजन सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। खिलाड़ियों का आगमन लगातार जारी है।

इस खेल महाकुंभ का शुभारंभ कल शाम किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के साथ राज्य के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतियोगिता 3 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें कुल सात खेलों का आयोजन किया जाएगा।

मध्य प्रदेश से आए मेहमानों का पुष्प भेंट कर और नृत्य के माध्यम से स्वागत किया गया।

मध्य प्रदेश से आए मेहमानों का पुष्प भेंट कर और नृत्य के माध्यम से स्वागत किया गया।

तमिलनाडु से आए खिलाड़ियों का पुष्प भेंट कर स्वागत।

तमिलनाडु से आए खिलाड़ियों का पुष्प भेंट कर स्वागत।

स्वागत के बाद खिलाड़ी थिरके।

स्वागत के बाद खिलाड़ी थिरके।

प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल तय

अरुण साव ने बताया कि प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल भी तय कर दिए गए हैं। कुश्ती प्रतियोगिता अंबिकापुर में आयोजित होगी। एथलेटिक्स का आयोजन जगदलपुर में किया जाएगा। अंबिकापुर में ही मलखंब प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।

खेल मंत्री साव ने बताया कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3 हजार से अधिक खिलाड़ी और खेल अधिकारी इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले हैं।

खेल मंत्री साव ने बताया कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3 हजार से अधिक खिलाड़ी और खेल अधिकारी इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले हैं।

500 से अधिक खिलाड़ी रायपुर पहुंचे

अब तक 500 से अधिक खिलाड़ी रायपुर पहुंच चुके हैं। आज शाम तक अधिकांश खिलाड़ियों और खेल अधिकारियों के पहुंचने की संभावना है। तैयारियों की निगरानी के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के 20 से अधिक अधिकारी पिछले पांच दिनों से रायपुर में मौजूद हैं। उनके मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है।

छत्तीसगढ़ के लिए सीख और अनुभव का अवसर

यह आयोजन छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा अनुभव लेकर आएगा। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन किस प्रकार किया जाता है और उसकी तैयारियां कैसे होती हैं, इसका प्रत्यक्ष अनुभव राज्य को प्राप्त होगा। इससे पहले छत्तीसगढ़ में सरगुजा ओलंपिक और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन छोटे स्तर पर सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।

अब नेशनल ट्राइबल गेम्स की मेजबानी से राज्य को बड़े स्तर के आयोजन का अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य में और भी बड़े खेल आयोजनों का मार्ग प्रशस्त होगा।

छत्तीसगढ़ के 180 खिलाड़ी लेंगे भाग

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के लगभग 180 खिलाड़ी भी हिस्सा लेने जा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने और उनके खेल को करीब से देखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके प्रदर्शन और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

कुल मिलाकर यह आयोजन छत्तीसगढ़ के खेल और खिलाड़ियों दोनों के लिए नई ऊर्जा और नई दिशा देने वाला साबित होगा। इसे राज्य के लिए एक सौभाग्यपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले- आदिवासी बच्चों को मिलेगा बड़ा फायदा

केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन का हिस्सा है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मांडविया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार का फोकस है कि प्रतिभाओं की जल्दी पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले और राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए।

23 दिसंबर को लोगो हुआ और मैस्कॉट हुआ लॉन्च

बतादें कि 23 दिसंबर को बिलासपुर के दिवंगत बी.आर. यादव स्पोर्ट्स स्टेडियम में इन खेलों का लोगो, थीम सॉन्ग और मैस्कॉट ‘मोरवीर’ लॉन्च किया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी मौजूद रहे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर के मेकाहारा अस्पताल से कैदी फरार:इलाज के लिए भर्ती था, हत्या के मामले में उम्रकैद की काट रहा था सजा, 2 प्रहरी निलंबित

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रायपुर,एजेंसी। रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) से मंगलवार को एक उम्रकैद का कैदी फरार हो गया। कैदी की पहचान साहेब कुमार ताती (26) के रूप में हुई है, जो हत्या के मामले में सजा काट रहा था। वहीं, लापरवाही बरतने पर प्रहरी गोपी किशन कौशिक और प्रमोद कुमार सोनी को निलंबित कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, साहेब कुमार ताती मूल रूप से बिहार के जमुई जिले का रहने वाला है। उसे रायपुर की विशेष अदालत ने धारा 103(1) और 109 बीएनएस के तहत आजीवन कारावास और 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वह 19 मार्च 2025 से लगातार जेल में निरुद्ध था।

डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में कैदी को लाया गया था।

डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में कैदी को लाया गया था।

इलाज के लिए मेकाहारा में भर्ती कराया गया था

बताया जा रहा है कि, पिछले कुछ दिनों से उसकी तबीयत खराब चल रही थी। बेहतर इलाज के लिए जेल प्रबंधन ने मेकाहारा में भर्ती कराया था। अस्पताल में कैदी की निगरानी के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था।

चकमा देकर भागा कैदी

24 मार्च को कैदी ने किसी बहाने से प्रहरियों का ध्यान भटकाया और मौका मिलते ही वार्ड से भाग निकला। घटना के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल, पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाल रही है।

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छत्तीसगढ़

12वीं बोर्ड का हिंदी पेपर निरस्त,स्टूडेंट बोले-हम तनाव में:कुछ लोगों की गलती का खामियाजा पूरे छात्र भुगत रहे, NSUI ने अधिकारियों से मांगा इस्तीफा

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने पेपर लीक के दावे के बीच 12वीं बोर्ड की हिंदी की परीक्षा रद्द कर दी है। अब हिंदी की परीक्षा 10 अप्रैल को दोबारा आयोजित की जाएगी। जिससे छात्र तनाव में है।उनकी परेशानी और बढ़ गई है। छात्रों का कहना है कि कुछ लोगों की गलती का खामियाजा पूरे प्रदेश के स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ रहा है।

मंडल की अध्यक्ष रेणु पिल्ले ने मंगलवार को अधिकारियों की बैठक लेकर दोबारा परीक्षा की तैयारियों, नए प्रश्न पत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जरूरी निर्देश दिए। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान अध्यक्ष ने पेपर लीक जैसी गंभीर लापरवाही को लेकर अधिकारियों पर नाराजगी भी जताई।

‘पेपर लीक छात्रों के साथ अत्याचार’

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि, हर बार पेपर लीक के पीछे अंदरूनी सिस्टम की कमजोरी सामने आती है। सरकार को अगर इस तरह की घटनाएं रोकनी हैं, तो परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी होगी और स्थायी व्यवस्था बनानी होगी। पेपर लीक होना सीधे-सीधे छात्रों के साथ अन्याय और मानसिक अत्याचार है।

NSUI ने उठाई इस्तीफे की मांग

इस मामले में NSUI छात्र नेता पुनेश्वर लहरे ने मंडल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के विरोध में पहले ही माध्यमिक शिक्षा मंडल कार्यालय का घेराव किया गया था, इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि मंडल के अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

पुलिस की जांच जारी, टीम गठित

रायपुर के एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल (सेंट्रल जोन) ने बताया कि, मंडल की रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाने में FIR दर्ज की गई है। मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। कुछ संदिग्ध लोगों से पूछताछ की गई है। महत्वपूर्ण सुराग भी मिले हैं। पुलिस के पास कुछ सबूत मौजूद हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

सिस्टम पर उठे सवाल, जवाब का इंतजार

छात्रों के परिजनों के कहा कि, परीक्षा की तैयारी के बाद अचानक दोबारा परीक्षा की घोषणा ने बच्चों की मानसिक स्थिति पर भी असर डाला है। कई परिजनों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि दोषियों पर कार्रवाई के बजाय छात्रों को ही सजा मिल रही है।

वहीं, सचिव पुष्पा साहू समेत बाकी अधिकारियों ने कुछ भी अधिकारिक बयान देने से इनकार कर दिया।

बताया जा रहा है कि, छत्तीसगढ़ में 12वीं बोर्ड स्तर पर इस तरह पेपर लीक का यह पहला बड़ा मामला है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन अब तक मुख्य आरोपियों तक पहुंच नहीं हो सकी है।

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